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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Monday, February 20, 2012

अजित सिंह किंग फिशर को संकट से उबारने को तैयार नहीं। बुरे फंसे मुसाफिर।34 पायलटों ने कंपनी छोड़ दी!किंगफिशर की फ्लाइट्स कैंसल होने से किराए बढ़े!


अजित सिंह किंग फिशर को संकट से उबारने को तैयार नहीं। बुरे फंसे मुसाफिर।34 पायलटों ने कंपनी छोड़ दी!किंगफिशर की फ्लाइट्स कैंसल होने से किराए बढ़े!


एयर इंडिया को मदद से अमेरिकी एयरलाइंस खफा

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

आसमान विदेशी कंपनियों के लिए खुल्ला ठोड़ने का नतीजा सामने आ रहा है। खुले बाजार में विदेशी पूंजी के मुकाबले एअर इंडिया के पंख तो पहले ही टूट चुके हैं, अब किंग फिशर और जेट एअरवेज के पायलट कर्मचारी भी दाने दाने को मोहताज है। इसपर तुर्रा यह कि विदेशी पूंजी संप्रभू भारत सरकार को आंखें दिखाने से बाज नहीं आ रही। ताजा वाकया हालात बयान करता है। यह नियति एविएशन सेक्टर तक सीमाबद्ध है, ऐसा कहना भी मुश्किल है। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने चेतावनी दी वित्तीय संकट झेल रहे रेलवे को भरपूर धन नहीं दिया गया तो उसका हाल भी एयर इंडिया जैसा हो सकता है। न केवल एयर इंडिया एवं किंगफिशर अपने सबसे नाजुक समय से गुजर रही हैं बल्कि पूरा सेक्टर ही कमोबेश तंगहाली की स्थिति से गुजर रहा है। सरकारी हस्तक्षेप ने इस क्षेत्र की जो दशा कर दी है वह दिखाई न पड़े ऐसा होना असंभव है। किंगफिशर और एयर इंडिया की मिलकर 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। अगर ये दोनों कंपनियां बंद हो गईं तो बाजार में भीड़ कम होगी। भारत में विमान औसतन 75 फीसदी ही भरते हैं मतलब उनकी 25 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल ही नहीं हो पाता। एयर इंडिया सरकार से उन सभी 27 ड्रीमलाइनर विमानों की आपूर्ति लेने की अनुमति की मांग कर रही है, जिनके लिए उसने पहले ही बोइंग को ऑर्डर दे चुकी है।


सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया घाटे में आकंठ डूबकर दिवालिया होने की कगार पर आ लगी है और निजी क्षेत्र की एक-दो कंपनियों को छोड़कर सभी एयरलाइंस घाटे से दो-चार हैं। जहां वर्ष 2002 में लाखों की तादाद में मुसाफिर थे, वहीं 2010 आते-आते करोड़ों में हो गए। जैसे-जैसे देश का सकल घरेलू उत्पाद आठ से नौ फीसदी हुआ, इस क्षेत्र ने भी कुलांचे भरनी शुरू कर दीं। जबकि बाकी दुनिया में ट्रैफिक ग्रोथ न के बराबर है। हाल तक हमारी विमानन सेवा में लगभग 16 फीसदी की वृद्धि दर थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसे मंदी ने घेर लिया है। पहले एअर इंडिया मुश्किल दौर में फंसा। अब किंगफिशर की हालत खस्ता है।  पिछले दस महीने को देखें, तो लगता है कि अब स्थिति काफी भयावह है। साल 2008 में तो इस क्षेत्र में नए जहाज आ रहे थे, क्षमता बढ़ रही थी और  सब कुछ सामान्य था।  लेकिन पिछले एक साल में इनपुट कॉस्ट बढ़ी हैं। इसकी एक वजह है ईंधन की कीमतों में काफी इजाफा होना। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। इससे कलपुर्जों पर खर्च 15 से 20 फीसदी बढ़ा है। 13 बार तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है। यानी विमान उड़ाने का खर्चा तो बढ़ा, लेकिन आमदनी नहीं बढ़ी। वैसे खराब आर्थिक माहौल में एक कंपनी अपने प्रबंधन व नीतियों के बल पर संकट से उबर आती है। एअर इंडिया ने पिछले तीन महीनों में यही कोशिश की। इसलिए कोई कंपनी अगर बेल-आउट पैकेज की मांग कर रही है, तो सरकार को उसकी क्षमताओं को टटोलना होगा। जब सरकार पेट्रोल के दाम बढ़ाकर यह कहती है कि मुक्त अर्थव्यवस्था के साथ हमें चलना ही होगा, तो फिर प्राइवेट कंपनी को बेल-आउट पैकेज देने का क्या मतलब?


विजय माल्या का कहना है कि मौजूदा दौर कारोबार के लिहाज से सबसे बुरा दौर माना जा सकता है। मौजूदा समय में सभी एयरलाइन कंपनियों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। माल्या ने एविएशन सेक्टर में विदेशी निवेश की वकालत की है। एविएशन सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस के घरेलू एयरलाइन में हिस्सेदारी खरीदने को सही बताया है।


एयर इंडिया के लिए एक और खराब खबर है। एक्जिम बैंक यानी एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक के एयर इंडिया को बैंक गारंटी देने पर अमेरिकी एयरलाइंस ने आपत्ति जताई है। अमेरिकी एयरलाइन इंडस्ट्री ने इसके लिए एक्जिम बैंक पर मुकदमा कर दिया है।सरकारी क्षेत्र की इस विमानन कंपनी में लगातार पूंजी डाली गई है और अब वह जल्द से जल्द बोइंग से 27 'ड्रीमलाइनर' विमानों की खरीद के सौदे को पूरा करना चाहती है। इस स्थिति ने क्षेत्र के अन्य कारोबारियों को दिवालिया होने के कगार पर पहुंचा दिया है। इसके बावजूद इनमें से कुछ हाथ खड़े करने को तैयार नहीं हैं। किंगफिशर की उड़ानें आए दिन रद्द हो रही हैं और उसके पायलट एक के बाद एक कंपनी का साथ छोड़ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद कंपनी एक और हिस्सेदार खोजने तक (शायद सरकारी मदद से) 'अंतरिम सहायता राशि' जुटाने में कामयाब रही है।


एक्जिम बैंक ने एयर इंडिया को 30 बोइंग विमान खरीदने के लिए 340 करोड़ डॉलर की बैंक गारंटी दी है। इंडस्ट्री की दलील है कि एयर इंडिया को कर्ज देने से अमेरिकी एयरलाइंस पर बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि एयर इंडिया ये बोइंग विमान भारत अमेरिकी रूट पर ऑपरेट करेगी और अमेरिकी एयरलाइंस का कारोबार प्रभावित होगी।अदालत में पेश हलफनामे में कहा गया 'इस गारंटी से एयर इंडिया को अमेरिका-भारत के बाजार में अपनी अतिरिक्त क्षमता पेश करने का मौका मिला और डेल्टा जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को दौड़ से बाहर करने का मौका मिला। एयर इंडिया को मिली रिण गारंटी के कारण ही डेल्टा को अक्तूबर 2008 में न्यूयार्क से मुंबई की उड़ान बंद करनी पड़ी।'


किंगफिशर अपनी 64 में से सिर्फ 16 विमानों का ही संचालन कर रही है और शनिवार से अब तक 100 से अधिक उड़ानें रद्द कर चुकी है। कोलकाता स्टेशन लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है। इसके साथ काठमांडू, ढाका, कोलम्बो, बैंकॉक की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। कम्पनी ने कहा कि खाते जब्त किए जाने से कम्पनी संचालन के लिए भुगतान कर पाने में असफल हो गई। कम्पनी ने कहा कि खातों को खुलवाने के लिए वह विभाग से बात कर रही है।

संकटग्रस्त किंगफिशर एयरलाइन्स के प्रवर्तक विजय माल्या ने सोमवार को कहा कि वह कंपनी बंद नहीं करेंगे। निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी द्वारा बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करने और फिर पायलटों के इस्तीफे के बाद पैदा हुए संकट के बीच अपनी प्रथम सार्वजनिक प्रतिक्रिया में माल्या ने कहा कि इसे बंद करना विकल्प नहीं है। ऐसा नहीं होगा। सरकार नहीं चाहती कि ऐसा हो। यह राष्ट्र हित में नहीं है।उन्होंने साफ किया कि किंगफिशर एयरलाइन्स ने सरकार से कभी भी संकट से उबारने के पैकेज की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि जितने लंबे समय तक हमें मदद मिलती है, हम इसे क्यों छोड़ें। मदद बेलआउट नहीं है। हमने बैंकों को और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा है।विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रवर्तक विजय माल्या को भले ही विदेशी धन के दम पर अपनी एयरलाइन को संकट से उबारने का भरोसा हुआ हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस एयरलाइस से अपनी पूंजी निकाल रहे हैं। एयरलाइन में एफआईआई हिस्सेदारी सितंबर में समाप्त हुई दूसरी तिमाही में 2.11 फीसदी थी जो दिसंबर तिमाही में घट कर 0.50 फीसदी रह गए जबकि समान अवधि में जेट एयरवेज में एफआईआई हिस्सेदारी में इजाफा हुआ।

बजट से पहले सरकार इस मामले को तरजीह नहीं दे रही है और एअर इंडिया, जेट एअरवेज, किंग फिशर जैसी घरेलू कंपनियों के पायलट​ ​ कर्मचारी  भूखों मरने के करीब है। किसान आत्महत्या करते हैं, तो शायद कृषि संकट से ज्यादा किसानों की बदकिस्मती को कोसा जाता है। पर सबसे ज्यादा ग्लेमरस नौकरियों में लगे आसमान के परिंदों के पंख कने के इस अफसाने में खलनायक कौन है?मंदी की मार से जूझ रही जेट और किंगफिशर एयरलाइंस के स्टॉफ को दो माह से वेतन के लाले पड़े हुए हैं। खबर है कि मंदी से हलकान हो चुकी ये दोनों एयरलाइंस अपने 18000 कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन का भुगतान नहीं कर रही है।देश में जहां लोग किंगफिशर की तड़ातड़ रद्द हो रही उड़ानों से परेशान हैं। वहीं, उड्डयन मंत्री अजीत सिंह आईबीएन7 संवाददाता के सवाल पर तिलमिला उठे। आईबीएन संवाददाता ने अजीत सिंह से सवाल किया कि यात्रियों को तुरंत फायदा देने के लिए मंत्रालय की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा? इस सवाल का जवाब देने से ही इनकार कर दिया। उल्टा सवाल को ही बकवास कह दिया।मंत्री जी ने संवाददाता से ही पूछा कि उनके आधिकारिक घर के सामने कल को बस की हड़ताल हो जाए तो क्या ऐसे में संवाददाता की कार लोगों की मदद के लिए वो भेज देंगे? नाराज मंत्री जी ने पत्रकार को वहां से चले जाने को कहा।


किंगफिशर की हालत खराब है और स्वाभाविक रूप से बैंक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उसके गैर निष्पादित परिसंपत्ति बन जाने पर वह उसकी प्रोविजनिंग कैसे करेंगे। एयर इंडिया के मामले में भी बैंक कर्ज को शेयरों में बदलने के इच्छुक नहीं थे। यह राहत पैकेज विमानन क्षेत्र तथा बैंकिंग क्षेत्र को जो क्षति पहुंचाएगा वह कोई मजाक नहीं है। घाटे में चल रही दोनों विमानन कंपनियों के पास बदलाव की कोई ठोस योजना नहीं है। वित्तीय सहायता एयर इंडिया को कम किराए वाली उस अदूरदर्शी योजना पर टिके रहने का अवसर देगी जिसकी बदौलत वह अपनी बाजार हिस्सेदारी को बचाए रखना चाहती है। समयबद्घ सेवाएं मुहैया न करा पाना, कर्मचारियों का रूखा व्यवहार और विमानों के साफ-सुथरा न होने की स्थिति में इस सरकारी विमानन कंपनी ने यात्रियों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए किराए में भारी कमी की है। इन हालात में समूचा विमानन उद्योग घाटे की स्थिति में पहुंच गया है।


केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजीत सिंह ने विमानन कम्पनी के प्रबंधन को भी दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने कई महीनों से अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिए। कर्मचारी कोलकाता में हड़ताल पर चले गए। जिससे उड़ानें प्रभावित हो गईं।



एविएशन मंत्री अजीत सिंह का कहना है कि किंगफिशर को किसी तरह की माली मदद नहीं दी जा सकती है.हालांकि कंपनी का कहना है कि जल्द ही सारी उड़ाने सामान्य हो जाएंगी साथ ही कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैंकों से समझौता होने की भी बात कही है कि बैंक और कर्ज देने के लिए राजी हो गए हैंलेकिन कर्ज और लगातार घाटे में सर से पैर तक डूब चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए अपने पैरों पर फिर से खड़ा पाना किसी चमत्कार से कम नहीं है, वहीं मंगलवार को डीजीसीए ने कंपनी के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों को सम्मन भेजकर बुलाया है और बेहिसाब उड़ानों के रद्द किए जाने के बारे में सफाई मांगी हैकंपनी को किसी तरह की वित्तीय सहायता की संभावना से इनकार करते हुए नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा कि सरकार ने हाल ही में उनके बैंक खातों पर रोक लगाई थी। उन्होंने कहा कि हमारी पहली चिंता यह है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए और फिर हम देखेंगे कि वे क्या जवाब देते हैं। डीजीसीए मामले की जांच कर रहा है। आज निरस्त हुई उड़ानों में मुंबई से 14, कोलकाता से 7 और दिल्ली से 6 उड़ानें शामिल हैं।आर्थिक संकट के कारण निजी एयरलाइंस किंगफिशर की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।


मदद लेने के संदर्भ में माल्या ने विमानन कंपनियों को विमान ईंधन का सीधा आयात करने के सरकार के निर्णय और घरेलू विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कंपनियों को हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देने की ओर इशारा किया।


माल्या ने दावा किया कि बेलआउट (संकट से बाहर निकालने) का संपूर्ण मुद्दा मीडिया द्वारा रचा गया मुद्दा है। किंगफिशर की उड़ानें रद्द होने के बारे में पूछे जाने पर यूबी समूह के प्रमुख ने कहा कि बकाया कर की अदायगी नहीं किए जाने को लेकर आयकर अधिकारियों द्वारा कंपनी के बैंक खातों पर यकायक रोक लगा दी गई। मैं इस बात से इनकार नहीं करता कि हमारे ऊपर कर बकाया है हमने इसकी अदायगी के लिए समय मांगा है।


किंगफिशर पर आयकर विभाग का वित्त वर्ष 2010-11 के लिए 53.82 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2011-12 के लिए 100 करोड़ रुपये बकाया है। कुल 153.82 करोड़ रुपये की बकाया रकम में से विभाग दिसंबर 2011 तक 21.04 करोड़ रुपये की वसूली कर चुका है। किंगफिशर ने प्रतिबद्घता पत्र दायर कर कहा है कि वह चालू वित्त वर्ष के अंत तक बकाया 130 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी।


दिसंबर 2011 में सेवा कर विभाग ने कंपनी के बैंक खातों पर रोक लगा दी थी लेकिन किंगफिशर द्वार बकाये का आंशिक भुगतान किए जाने के बाद खाते मुक्त कर दिए गए थे। ऋण के बोझ तले दबी विमानन कंपनी ने जनवरी के अंत तक 27 करोड़ रुपये का कर चुकाया है जबकि उस पर सेवा कर विभाग का 70 करोड़ रुपये बकाया है।


कंपनी ने कहा कि खाते मुक्त होने के बाद उसके लिए कर्मियों को वेतन भुगतान और खड़े विमानों का परिचालन तुरंत बहाल किया जाएगा। पिछले साल नवंबर के बाद यह दूसरा मौका है, जब कंपनी ने नियामक को बिना बताए कई उड़ानें रद्द की हैं।


माल्या ने कहा कि किंगफिशर की वित्तीय तंगी विमानन उद्योग की मौजूदा स्थिति की झलक है। हमें प्रतिदिन भुगतान करना होता है। ये भुगतान कल पुर्जों, सीमा शुल्क, ईंधन बकाए, हवाईअड्डा शुल्क बकाए के लिए किए जाते हैं, इसलिए बैंक खाता चालू रखना महत्वपूर्ण है।


उन्होंने कहा कि हमारे खातों पर से रोक हटाई जानी चाहिए ताकि हम सामान्य ढंग से परिचालन जारी रख सकें। हमारे खातों में पैसा है और यह पैसा आ रहा है।


किंगफिशर की उड़ानें रद्द होने का फायदा उठाते हुए प्रमुख विमानन कंपनियों ने पिछले कुछ दिनों में कई व्यस्त रूटों पर अपने किराए 45 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं।


सबसे व्यस्त दिल्ली-मुंबई रूट पर एक तरफ का किराया औसतन करीब 4,500 रुपये से 5,000 रुपये रहता है, लेकिन विमानन कंपनियां इस रूट पर 6,555 रुपये से 7,305 रुपये के दायरे में किराया वसूल रही हैं।


इसी तरह दिल्ली-बेंगलूर रूट पर एक तरफ का किराया औसतन 6,000-7,500 रुपये से बढ़ाकर 12,000 से 14,000 रुपये तक कर दिया गया है। वहीं दिल्ली-कोलकाता रूट पर किराया 5,000 रुपये से बढ़ाकर 6,500 रुपये कर दिया गया है।


ट्रैवल एजेंट्स ने भी इस बात की तस्दीक की। उन्होंने कहा कि कुछ व्यस्ततम रूटों पर किंगफिशर द्वारा बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द किए जाने की वजह से ऐसा हुआ है। बेंगलुरु-दिल्ली रूट पर किराया करीब दोगुना कर दिया गया है। दिल्ली स्थित एक ट्रैवल एजेंट ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि किंगफिशर के विमान में टिकट बुक करने वाले यात्रियों को प्रत्येक टिकट पर 2,000 से 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें आखिरी क्षण अपनी टिकटें दोबारा बुक करानी पड़ रही हैं।


इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सोमवार को आठ महीने के उच्चतम स्तर 121 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया। ईरान के फ्रांस, ब्रिटेन को आपूर्ति रोकने और यूनान के बेल आउट पैकेज पर जल्द फैसला आने की उम्मीद से तेल में तेजी आई। चीन में ब्याज दरों में नरमी का असर भी क्रूड की कीमतों पर देखा गया।उड्डयन मंत्रालय ने यह जानते हुए भी कोई ठोस कदम उठाने से इंकार किया कि तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ करों की अतिरिक्त मार के कारण विमानन उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। भारतीय विमानन उद्योग को 2011 में विरोधाभासी स्थितियों का सामना करना पड़ा। एक ओर जहां घरेलू हवाई यातायात बढ़ा वहीं यह उद्योग ईंधन की उंची लागत और कड़ी प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करते हुए सरकारी मदद के लिये गुहार लगाता रहा।


सूत्रों के मुताबिक, विमानन कंपनी ने कंसोर्टियम से 200-300 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी के तौर पर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है और अगले कुछ दिनों में व्यक्तिगत तौर पर बैंकों द्वारा इस पर निर्णय किए जाने की संभावना है।भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाला बैंकों का समूह नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स को रोजमर्रा के कारोबार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के अनुरोध पर जल्द निर्णय करेगा।किंगफिशर एयरलाइन्स ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा था कि बैंकों के कंसोर्टियम के साथ हमारी एक अच्छी बैठक हुई और उन्होंने हमारे अनुरोध को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। एसबीआई कैपिटल मार्केटस और स्वतंत्र सलाहकारों द्वारा तैयार संभाव्य अध्ययन के आधार पर कंपनी ने कंसोर्टियम से यह अनुरोध किया था।

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किंगफिशर एयरलाइंस की सोमवार को 30 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं। इसमें बैंकॉक, सिंगापुर, काठमांडू और ढाका के लिए उड़ानें शामिल हैं। इससे देशभर में विभिन्न हवाई अड्डों पर सैकड़ों यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कंपनी ने रविवार को अपनी एक तिहाई उड़ानें रद्द की थीं।


डीजीसीए के चीफ भारत भूषण ने कहा है कि उन्हें बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करने की रिपोर्ट मिली है। उन्होंने कहा कि किंगफिशर को अपनी फ्लाइट्स की कटौती के बारे में पूर्व सूचना देनी चाहिए थी पर ऐसा नहीं किया गया जो कि नियमों का उल्लंघन है।


एविएशन मिनिस्टर अजित सिंह ने कहा, 'नहीं, सरकार किसी तरह का पैकेज नहीं देने जा रही। सरकार बैंकों के पास जाकर उधार देने को नहीं कह सकती।' उन्होंने कहा, 'जहां तक किंगफिशर या किसी अन्य निजी एयरलाइन का संबंध है, उन्हें बैंकों के पास अपनी कारोबारी योजना पेश करनी होगी और अगर वे (बैंक) उससे संतुष्ट होते हैं और अगर यह रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के दायरे में है तब वे उधार देंगे।'



उल्लेखनीय है कि किंगफिशर के सीईओ संजय अग्रवाल और कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को डीजीसीए ने समन जारी कर उन्हें कल उपस्थित होने और उड़ानें रद्द करने की वजह बताने को कहा है।



नकदी के संकट से जूझ रही विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के बाद उसके 34 पायलटों ने कंपनी छोड़ दी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नोटिस थमाया गया है। वहीं सरकार ने कंपनी को किसी तरह का पैकेज देने से इनकार किया। उद्योग सूत्रों ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर से अब तक इस्तीफा देने वाले पायलटों की कुल संख्या करीब 80 पर पहुंच गई है। कंगाली के कगार पर पहुंच चुके किंगफिशर की हालत फिलहाल सुधरती नहीं दिख रही है सोमवार को भी 20 से ज्यादा उड़ाने रद्द हो गई जिससे किंगफिशर में यात्रा करने वाले मुसाफिरों में अफरातफरी मची रही

संकटग्रस्त विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स ने व्यापक स्तर पर उड़ान सेवाएं बाधित होने का ठीकरा एक तरह से आयकर विभाग के सिर फोड़ते हुए कहा कि उनके द्वारा कंपनी के बैंक खातों पर रोक लगाए जाने से भुगतान बुरी तरह प्रभावित हुआ जिससे उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

कंपनी के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि हमारी नियमित उड़ानों में कटौती की मुख्य वजह आयकर विभाग द्वारा अचानक हमारे बैंक खातों पर रोक लगाया जाना है। इससे परिचालन भुगतान की हमारी क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि एक बार बैंक खातों पर से रोक हटते ही कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जा सकता है और हवाईअड्डों पर खड़े विमानों को सेवाओं में लगाया जा सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि भुगतान योजना पर सहमत होने और बैंक खातों पर रोक जल्द से जल्द हटाई जाए, इसके लिए कंपनी आयकर अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। हम उनसे अपील कर रहे हैं कि यात्रा कर रहे लोगों को असुविधा किसी के हित में नहीं है।

फिलहाल देश के तमाम एयरपोर्ट पर किंगफिशर में टिकट बुक कर चुके मुसाफिर भारी मुसीबत और परेशानी से गुज़र रहे हैं


ग़ौरतलब है कि मौजूद वित्त वर्ष के तीसरी तिमाही में किंगफिशर का घाटा 75 फीसदी बढ़कर 444 करोड़ रूपए पहुंच गया है


पिछले वर्ष भी इसी तिमाही में कंपनी को कुल 254 करोड़ रूपए का घाटा उठाना पड़ा था.


इसी दौरान कंपनी की आय में काफी कमी देखी गई जो 5 फीसदी घटकर 1547 करोड़ तक सिमट गई



विजय माल्या की एयरलाइंस किंगफिशर भारी मुसीबत में है लगातार तीसरे दिन भी अलग अलग शहरों से दर्जनों उड़ाने रद्द हो चुकी है कर्ज और घाटे ने किंगफिशर की विमानों को ज़मीन पर ला खड़ा किया हैवेतन नहीं दिए जाने के कारण जहां कोलकाता की तमाम उड़ानें लगातार रद्द हो रही है बैंगलोर और मुंबई में एयरपोर्ट चार्जेज न चुका पाने के चलते एयरपोर्ट अथॉरिटी ने नकेल कस दिया है वहीं किंगफिशर को हवाई ईधन सप्लाई करने वाली कंपनी एचपीसीएल और बीपीसीएल ने उधार एटीएफ देने से मना करने के साथ साथ अपना बकाया वसूलने के लिए कानूनी रास्ता अख्यितार कर चुकी है

मंगलवार को डीजीसीए ने यात्रियों के प्रति लापरवाही के चलते कंपनी के सीईओ को तलब किया है ताज़ा खबर है कि मंगलवार को 30 से ज्यादा उड़ानें रद्द की गई हैं

लागत को कम करने के लिए कंपनी ने पिछली तिमाही में अपनी उड़ानों में कटौती की लेकिन इसके बावजूद भी कंपनी के खर्च में 7 फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ 2125 करोड़ पहुंच गईसाथ ही दूसरे मदों में कुल 80 करोड़ रूपए खर्च करने पड़े


इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट कैंसल या डिले होने पर डीजीसीए सभी सेंटरों से सूचनाएं जुटा रहा है। इनके आधार पर तय होगा कि एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई की जाए या नहीं। भारत भूषण ने कहा कि किंगफिशर ने फ्लाइट कैंसल करने से पहले हमें नहीं बताया। इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित होने की सूचनाएं सही हैं तो यह नियमों के खिलाफ है। किंगफिशर की फ्लाइटें कैंसल होने से प्रभावित पैसेंजरों को एडजस्ट करने के लिए हमने दूसरी एयरलाइंस को मेसेज भेज दिए हैं।


किंगफिशर के प्रवक्ता ने कल फ्लाइट्स कैंसल होने के बारे में कहा था कि फ्लाइट शेड्यूल छोटा किया गया है लेकिन किसी स्टेशन को बंद नहीं किया गया है। यह स्थिति अगले चार दिन तक रहेगी। उन्होंने फ्लाइट कैंसल करने की वजहों में पक्षियों के कारण विमान खराब होना भी बताया। सूत्रों के मुताबिक, दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में फ्लाइटें मार्च के आखिर तक प्रभावित रहेंगी।


फिलहाल किंगफिशर एयरलाइंस पर करीब 7 हज़ार करोड़ रूपए का कर्ज है जानकारों का कहना है कि किंगफिशर के पास इससे उबरने को कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि बैंक भी अब और कर्ज देने में आनाकानी कर रहे हैं


एविएशन एक्पर्ट हर्षवर्धन भी यह मानते हैं कि किंगफिशर की राह मुश्किल है


किंगफिशर का घाटा कच्चे तेलों के बढ़ते दामों और डालर के मुकाबले रूपए में आई कमज़ोरी की वजह से भी काफी बढ़ गया है इस बाबत उसने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर सीधे विदेशों से हवाई ईंधन आयात करने की अनुमति भी मांगी थी, लेकिन सरकार ने किंगफिशर को फिलहाल कोई भी राहत देने से साफ मना कर दिया है


बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के आंकड़ों के अनुसार किंगफिशर एयरलाइंस और स्पाइसजेट ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान पूर्ववर्ती तिमाही (जुलाई-सितंबर) की तुलना में एफआईआई हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की। हालांकि यात्रियों की संख्या के संदर्भ में देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी जेट एयरवेज में एफआईआई हिस्सेदारी सितंबर तिमाही के 4.67 फीसदी से बढ़ कर दिसंबर तिमाही में 5.42 फीसदी पर पहुंच गई।


सन समूह द्वारा प्रवर्तित स्पाइसजेट के मामले में, इस निवेश हिस्सेदारी में गिरावट कंपनी में प्रवर्तक हिस्सेदारी में वृद्घि की वजह से आई है। कंपनी में एफआईआई हिस्सेदारी दूसरी तिमाही के 6.17 फीसदी से घट कर दिसंबर तिमाही में 3.81 फीसदी रह गई। समान अवधि के दौरान कंपनी में प्रवर्तक हिस्सेदारी 38.60 फीसदी से बढ़ कर दिसंबर तिमाही में 43.59 फीसदी हो गई।


भारत में विमान यात्रियों की संख्या में वृद्घि दुनिया में सर्वाधिक होने के बावजूद इस क्षेत्र को पिछले साल नुकसान और कर्ज से जूझना पड़ा। तीन सूचीबद्घ भारतीय विमानन कंपनियों जेट एयरवेज, किंगफिशर एयरलाइंस और स्पाइसजेट को वित्त वर्ष 2011 की पहली छमाही में सामूहिक नुकसान 1,878 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।


चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जेट ने 101 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया। अन्य दो सूचीबद्घ कंपनियों ने अभी तक तीसरी तिमाही के परिणाम की घोषणा नहीं की है। कच्चे तेल की ऊंची लागत और रुपये में कमजोरी की वजह से बढ़ती लागत इन कंपनियों के नुकसान की प्रमुख वजह है। जेट ईंधन की लागत विमान ईंधन तेल (एटीएफ) पर अधिक करों और अधिक हवाई अड्डा शुल्क की वजह से बढ़ी है। भारत में विमान ईंधन पर औसतन कर 24 फीसदी है जो दुनिया में बांग्लादेश (27 फीसदी) के बाद दूसरा सबसे अधिक है और इससे परिचालन लागत में 50 फीसदी भागीदारी ईंधन की है। विमानन तेल की कीमतें पिछले साल 40 फीसदी तक बढ़ीं।


इन तीनों सूचीबद्घ विमानन कंपनियों में किंगफिशर का वित्तीय प्रदर्शन काफी खराब रहा है और यह एयरलाइन मुनाफे के स्वाद से वंचित रही है। विश्लेषकों का कहना है कि किंगफिशर एयरलाइंस की समस्याएं स्पष्ट हैं और निवेशक इससे दूरी बना रहे हैं।

'प्रफुल्ल पटेल ने रिश्तेदारों के लगाया था बड़ा प्लेन'

एयर इंडिया की फाइलों में दर्ज टिप्पणी के मुताबिक कंपनी ने अप्रैल 2010 में तत्कालीन एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल के परिवार के सदस्यों को संभवत: सीटें मुहैया कराने के लिए बेंगलुरु-मालदीव उड़ान के दौरान बड़ा प्लेन लगाया था।

इसके पहले दावा किया गया था कि बेंगलुरू-माले उड़ान आईसी 965 में बिजनेस क्लास की सात सीटें पहले ही बुक हो गई थीं। एयर इंडिया ने पटेल की बेटी अवनी के ससुराल के सात लोगों को सीटें मुहैया कराने के लिए बड़ा विमान ए320 विमान लगाया, जिसमें बिजनेस क्लास की 20 सीटें होती हैं।

केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देश पर किए गए खुलासे के अनुसार 25 अपैल 2010 की बेंगलुरु-माले फ्लाइट संख्या आईसी 965 और 28 अप्रैल की माले-बेंगलुरु फ्लाइट संख्या आईसी 966 की यात्रियों की सूची में देशपांडे परिवार के सदस्यों का नाम शामिल है।

सूची के अनुसार यात्रियों में कांग्रेस नेता आर.वी. देशपांडे, राधा देशपांडे, प्रसाद देशपांडे, मेघना देशपांडे और मास्टर ध्रुव के अलावा अवनी तथा उनके पति प्रशांत देशपांडे शामिल थे।

सार्वजनिक की गई सूचना के अनुसार टिप्पणी में कहा गया है कि 25 अपैल 2010 की बेंगलुरु-माले फ्लाइट और 28 अप्रैल की माले-बेंगलुरु फ्लाइट के दौरान छोटे विमान एयरबस ए319 के स्थान पर बड़े विमान ए320 लगाने के बारे में मुंबई मुख्यालय से ईमेल के जरिए निर्देश दिया गया था।
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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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