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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Tuesday, March 6, 2012

जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर आया जनादेश

http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/1-2009-08-27-03-35-27/13567-2012-03-07-04-04-35


जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर आया जनादेश

Wednesday, 07 March 2012 09:33

अंबरीश कुमार 
लखनऊ, 7 मार्च। उत्तर प्रदेश का यह जनादेश जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठ कर आया है। वह जनादेश जिसकी आंधी में सब बह गए। इस आंधी में न हाथ टिक पाया और न मायावती का हाथी। बसपा को करीब सवा सौ सीट का नुकसान हुआ। विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर तो हारे ही ज्यादातर मंत्री भी हार गए। आंबेडकर नगर जहां से खुद मायावती जीती थीं, वहां पार्टी का सफाया हो जाना सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी को दर्शाता है। समाजवादी पार्टी ने दो दशक का रेकार्ड तोड़ते हुए समर्थन लेने देने का सवाल ही खत्म कर दिया। 
राहुल गांधी के आक्रामक प्रचार और प्रियंका की मोहक मुस्कान भी रायबरेली और अमेठी का गढ़ नहीं बचा पाई। बाकी इलाके तो छोड़ ही दे। फिरोजाबाद में मुलायम सिंह यादव ने बहू डिम्पल यादव का हिसाब भी बराबर कर लिया। दूसरी तरफ भाजपा अयोध्या में हारी, तो अटल विहारी वाजपेयी के गढ़ में भी हारी और प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही से लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी समेत कई दिग्गज हारे भी हारे। अयोध्या में लल्लू सिंह की हार ने मंदिर एजंडा पर पार्टी को बड़ा सबक दिया है। बचा रहा तो पार्टी का अगड़ा चेहरा यानी कलराज मिश्र और पिछड़ा चेहरा उमा भारती का चुनाव, जो जीत गए।
इन चुनाव के नतीजों और हर क्षेत्र से समाजवादी पार्टी को जिस तरह की जीत मिली, उससे साफ है कि जाति धर्म की परंपरागत राजनीति से ऊपर उठ कर यह जनादेश मिला है। खुद इस चुनाव के नायक अखिलेश यादव ने कहा-हमें हर धर्म और हर बिरादरी का समर्थन मिला है। यह सोशल इंजीनियरिंग के इंजीनियरों के लिए भी बड़ा संदेश है। इस चुनाव में कुछ बाहुबली जीते पर कई हारे भी। जीते वही जिनका बड़ा जनाधार था। छोटे दलों कौमी एकता दल, पीस पार्टी और अपना दल ने भी खाता खोल लिया है।
वंशवाद का जो झटका इस चुनाव ने दिया है, वह पार्टियों के लिए सबक है। कल्याण सिंह के पुत्र, पुत्रवधू, लालजी टंडन के बेटे गोपाल टंडन, स्वामी प्रसाद मौर्य के पुत्र, जगदंबिका पाल के पुत्र, बेनी बाबू के पुत्र और सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद भी चुनाव हार गई हैं।
इस जनादेश को भी समझना होगा, जिसके कारण यह चमत्कार हुआ। समाजवादी पार्टी ने अपना चोला, चेहरा और एजंडा भी बदल दिया। समाजवादी पार्टी ने कल्याण सिंह से लेकर अमर सिंह का साथ छोड़ा। कारपोरेट समाजवाद का रास्ता छोड़ा, तो मुंबई की फिल्मी दुनिया का मोह भी छोड़ा। इस चुनाव में अखिलेश का चेहरा सामने था, तो समाजवाद का नया एजंडा भी था। कंप्यूटर और लैपटाप के साथ बेरोजगारों के लिए भत्ते का वादा भी था। इसी कारण जाति और धर्म से ऊपर उठ कर लोगों ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया। यह सब आज यहां दिखा भी। चुनाव नतीजे आने के साथ ही दोपहर तक समाजवादी पार्टी के विक्रमादित्य मार्ग स्थित मुख्यालय पर होली पर दिवाली जैसा जश्न शुरू हो गया। पार्टी मुख्यालय पर मेले जैसा माहौल था। अबीर गुलाल के साथ पटाखों के शोर में समूचा माहौल बदला हुआ था। 

चुनाव और आज आए नतीजों के बाद जो माहौल यहां दिखा उससे अखिलेश यादव समाजवादियों के नए नायक बन कर उभरते नजर आए। नौजवानों की भीड़ जो अखिलेश यादव की झलक पाने के लिए बेकरार थी उनके आते ही समाजवादी पार्टी का झंडा लेकर नारे लगती हुई दौड़ती नजर आई। अखिलेश यादव जिंदाबाद के लगातार नारे लग रहे थे। इस बीच चौराहों पर जहां मायावती के बड़े बड़े होर्डिंग्स लगे थे, वहां पुलिस की मौजूदगी में उनके ऊपर अखिलेश यादव के बड़े फोटो वाले नए बैनर टांगे जा रहे थे। इस बैनर में मुख्य फोटो अखिलेश यादव की थी तो छोटी फोटो मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव की। यह भावी राजनीति की और इशारा भी कर रही थी। 
समाजवादी पार्टी की जीत का आभार जताने मंगलवार को मुलायम सिंह यादव नहीं बल्कि अखिलेश यादव अपनी नौजवान टीम के साथ आए थे। दूसरी तरफ मायावती के आवास से लेकर बसपा मुख्यालय पर सन्नाटा पसरा हुआ था।  
इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका मायावती को लगा तो भाजपा भी घट गई। नए और नौजवान मतदाताओं को लेकर जो भी दावे किए गए, वे गलत साबित हुए। नौजवानों का वोट बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी को गया। दूसरे मायावती का परंपरागत जनाधार भी दरक गया है जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हुआ। यहां यह बात साफ हो जानी चाहिए कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी लड़ाई समाजवादी पार्टी ने लड़ी, किसी टीम अण्णा ने नहीं। सपा के सभी नेता हजारे पर लगातार हमला करते हुए कहते थे कि उनकी लड़ाई नकली है क्योंकि वे मायावती के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए कभी नहीं आते।
हालांकि अण्णा आंदोलन से जुड़े गांधीवादी नेता राम धीरज ने कहा-मुलायम सिंह और अखिलेश यादव को जैसा जनादेश मिला है वह अभूतपूर्व है। अब उन्हें आगे भी यह चाहिए कि वे डीपी यादव की तरह किसी भी अपराधी और दागी को पार्टी का टिकट न देकर नई परंपरा को आगे बढाएं। 
इस चुनाव में मुलायम सिंह को खुला समर्थन देने वाले किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा-पूरे प्रदेश में गोरखपुर से गाजियाबाद तक किसानों ने मुलायम सिंह का समर्थन किया है और उनकी अपेक्षा है कि किसानों की समस्याओं को दूर किया जाए। जबकि भाजपा से लेकर कांग्रेस तक इस झटके से हैरान है। कांग्रेस ने जो दावे किए वे हवा हवाई रहे। बेनी बाबू से लेकर   ज्यादातर दिग्गजों के इलाके में पार्टी बुरी तरह हारी है। रायबरेली और अमेठी इसमें शामिल है। रानी अमिता सिंह भी हार गर्इं। 
कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रभारी सिराज मेहंदी ने कहा-पार्टी उम्मीदवारों की हार की बहुत कड़ाई से समीक्षा होनी चाहिए। यह बात अलग है कि पार्टी की हार का कोई असर कांग्रेस मुख्यालय पर नहीं दिखा, जहां रीता बहुगुणा जोशी की जीत के जश्न में होली खेली जा रही थी। दूसरी तरफ भाजपा भी सदमे में थी। पार्टी के एक कार्यकर्त्ता ने कहा कि जिस तरह पार्टी ने वंशवाद को इस चुनाव में बढ़ावा दिया, उससे यही होना था।

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