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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Wednesday, March 21, 2012

गरीबी की नयी परिभाषा को लेकर लोकसभा में हंगामा

गरीबी की नयी परिभाषा को लेकर लोकसभा में हंगामा

Wednesday, 21 March 2012 15:25

नयी दिल्ली, 21 मार्च (एजेंसी) शहर में 28.65 और गांवों में 22.42 रूपए से अधिक रोज कमाने वालों को गरीबी रेखा से उच्च्पर मानने के योजना आयोग के नए मानदंड की आज विपक्षी के साथ सरकार के सहयोगी दलों ने कड़ी आलोचना की और सदन में इस बाबत वक्तव्य देने की मांग की। गरीबी के बारे में योजना आयोग के नये आंकड़ों पर जद यू, भाजपा सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी थी।
12 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर गरीबी की नयी परिभाषा पर चर्चा की शुरूआत करते हुए जदयू के शरद यादव ने योजना आयोग के नए मानदंडों को देश की गरीबी का 'क्रूर मजाक' बताते हुए कहा कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष :मोंटेक सिंह अहलूवालिया: जब भी बोलते हैं तो देश में हाहाकार मच जाता है और महंगाई बढ़ जाती है। योजना आयोग में ऐसे व्यक्ति को बैठाया जाए जो गरीबों की जमीनी हकीकत को समझे।
उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, ''मेरी सरकार से विनती है कि योजना आयोग को इस व्यक्ति :मोंटेक सिंह: से छुटकारा दिलाएं या योजना आयोग को बंद कर दीजिए।''
गौरतलब है कि योजना आयोग की ओर से जारी किये गए परिवार उपभोक्ता खर्च के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण :2009..10: पर आधारित गरीबी आंकड़े के मुताबिक, 2009...10 में गरीबी का अनुपात 29.8 प्रतिशत बताया गया है जो 2004..05 के 37.2 प्रतिशत से काफी नीचे है। ये आंकड़े शहरों में 28.65 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 22.42 रुपये प्रति व्यक्ति दैनिक खपत को आधार मानकर तैयार किये गए हैं।
यादव ने कहा कि एनएसएसओ के आंकड़े, तेंदुलकर समिति, सक्सेना समिति की रिपोर्ट से देश नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा, ''ये आंकड़े वापस होने चाहिए। प्रधानमंत्री या सरकार के जिम्मेदार मंत्री को बयान देना चाहिए कि योजना आयोग का यह बयान गलत है।''
यादव ने यहां तक कहा, ''अगर गरीबों को गरीब नहीं समझते तो उन्हें खड़ा करके गोली मार दो, जहर दे दो लेकिन ऐसा क्रूर मजाक मत करो।''
इस बयान के बाद कुछ देर तक सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा भी किया।
जदयू अध्यक्ष ने कहा कि सदन में सभी सदस्य इस आंकड़े से सहमत नहीं हैं लेकिन 'यहां उनकी जुबान बंद है।'
भाजपा की सुषमा स्वराज ने कहा कि योजना आयोग के पिछले हलफनामे में भी गरीबों का मजाक उड़ाया गया था और हमने सोचा था कि सरकार गंभीरता के साथ आंकड़ों में सुधार करेगी लेकिन यह तो आग में घी डालने का काम किया है।
उन्होंने इसके लिए सीधे प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ''योजना आयोग को क्या दोष देना, दोषी तो सरकार है जो रिपोर्ट स्वीकार करती है। योजना आयोग के अध्यक्ष तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। इसलिए असली दोषी यह सरकार है।''
इस दौरान सदन में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उपस्थित थीं।

सोनिया की ओर मुखातिब होते हुए सुषमा ने कहा, ''संप्रग अध्यक्ष सदन में मौजूद हैं। उनका अपना रुतबा है। वह निर्देश देंगी तो योजना आयोग को अपना बयान खारिज करना पड़ेगा। हम आग्रह करते हैं कि वह :सोनिया: भी सदन के सुर में सुर मिलाकर सरकार को इस आंकड़े को रद्द करने का निर्देश दें।''
सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि यह आंकड़े किस आधार पर जारी किये गये हैं पता नहीं। उन्होंने आंकड़ों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि लिखा...पढ़ी से वास्तविक आकलन नहीं होगा, इसके लिए दूर..दराज गांवों में जाकर हकीकत देखनी होगी।
उन्होंने कहा, ''योजना आयोग में बैठे लोगों को नहीं पता कि जमीनी हकीकत क्या है। उन्होंने गांवों की हकीकत दिखाई जाए। वे एसी में बैठकर आंकड़े तैयार कर लेते हैं। लोगों को बिजली, शुद्ध पानी नहीं मिल रहा।''
मुलायम सिंह ने कहा कि योजना आयोग में बैठे लोग देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। अभी देश में बीपीएल को लेकर सर्वेक्षण पूरा भी नहीं हुआ तो यह रिपोर्ट किस आधार पर आई है।
उन्होंने कहा, ''योजना आयोग में बैठे लोगों को निकालकर बाहर करिये।''
सपा अध्यक्ष ने कहा कि हम सरकार के खिलाफ नहीं लेकिन सरकार के गलत कार्यों के विरुद्ध हैं।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि आपको हस्तक्षेप करना चाहिए और देश को, सरकार को धोखा देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
चर्चा के बीच में कांग्रेस की ओर से वी. अरुण कुमार ने योजना आयोग के आंकड़ों का बचाव करने का प्रयास किया लेकिन विपक्षी दलों के हंगामे के बीच वह अपनी बात ठीक से नहीं रख सके। 
कुमार ने कहा कि आंकड़े बदलना जरूरी है तो बदले जाएंगे और चर्चा पर ऐतराज नहीं लेकिन ऐसी धारणा मत बनाइए कि हम गरीबों के खिलाफ हैं।
बसपा के डॉ बलिराम ने कहा कि योजना आयोग के उक्त मानक को सहीं मान लें तो देश में गरीब ही नहीं मिलेंगे। उन्होंने योजना आयोग की हाल ही में जारी रिपोर्ट को तत्काल वापस करने के साथ ही सदन में गरीबी के आंकड़ों पर चर्चा कराने की मांग की।
माकपा नेता वासुदेव आचार्य ने योजना आयोग की रिपोर्ट की निंदा करते हुए कहा कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष अपने आंकड़ों को जायज ठहरा रहे हैं, जिस पर सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मोंटेक सिंह को हटाने की मांग की।
बीजद के भर्तृहरि महताब ने योजना आयोग पर पूरे देश को दिग्भ्रमित करने का   आरोप लगाते हुए सरकार से इस बाबत जल्दी से जल्दी स्पष्टीकरण की मांग की।
भाकपा सदस्य प्रबोध पांडा ने कहा कि पूरा देश योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बयान से नाराज हैं और ऐसा लगता है कि वह खुद को संसद से उच्च्पर मानते हैं।

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