Total Pageviews

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Saturday, June 28, 2014

क्या अपनी चिता रचने को तैयार हैं हम? जल जंगल जमीन आजीविका के लिए।

क्या अपनी चिता रचने को तैयार हैं हम? जल जंगल जमीन आजीविका के लिए।


इस दुनिया को सँवारना - भवानीप्रसाद मिश्र

इस दुनिया को सँवारना अपनी चिता रचने जैसा है

और बचना इस दुनिया से अपनी चिता से बचने जैसा है

संभव नहीं है बचना चिता से इसलिए इसे रचो

और जब मरो तो इस संतोष से

कि सँवार चुके हैं हम अपनी चिता !

युद्ध घोषणा पहले ही हो चुकी है आम जनता के खिलाफ।जनसंहारी नीतियां आर्थिक सुधारों के मुलम्मे में भारतीय जनगण पर अविराम बमवर्षा कर रही है पिछले तेईस साल से।लेकिन अब तक किसी प्रतिरोध की शुरुआत हुई नहीं है और जनांदोलन सिर से खत्म है।


जल जंगल जमीन बचाने के लिए जनता को खुद सड़क पर उतारना होगा।लेकिन नवउदारवादी जमाने में राजनीति अब धर्मोन्मादी है तो अस्मिताओं में खंड खंड बांट दी गयी है जनता जाति व्यवस्था और नस्ली बिखराव के मध्य। जल, जंगल और ज़मीन ऐसे प्राकृतिक संसाधन हैं, जो इस देश के करोड़ों लोगों के जीवन का मूलभूत आधार हैं। सदियों से नदी के किनारे और जंगल में बसे लोगों का इन संसाधनों पर नैसर्गिक अधिकार रहा है।नवउदारवादी स्थाई बंदोबस्त के तहत बनियातंत्र के कारपोरेट फासीवादी राज ने यह नैसर्गिक अधिकार छीन लिया है।हिंदुत्व की ही भाषा में बात करें तो ईश्वर की सृष्टि के सर्वनाश का चाकचौबंद इतजाम में लगी है शैतानी बाजारु ताकतें।


इसी संदर्भ में भवानी प्रसाद मिश्र की ये पंक्तियां बेहद प्रासंगिक है।सारे लोग मुक्त बाजार में मलाई बटोरने में लगे हैं लेकिन निरंकुश सत्ता ,निरंकुश बनिया तंत्र के खिलाफ फिर स्वतंत्रता संग्राम की अनिवार्यता साज वास्तव है ज्वलंत।


क्या अपनी चिता रचने को तैयार हैं हम? जल जंगल जमीन आजीविका के लिए।

जनसंगठनों ने भूमि अधिग्रहण कानून कारपोरेट हित में बदल दिये जाने के खिलाफ चेतावनी जारी की है। ससदीय समन्वय राजनीति और नीतियों की निरंतरता के पिछले तेईस साल के रिकार्ड से साफ जाहिर है कि ऐसी चेतावनी से कुछ बदलने वाला नहीं है।

नमोसुनामी ने जिस जनादेश की रचना कर दी है,उस पर दांव लगे हैं बाजार के बहुत ज्यादा।निवेशकों की आस्था और अबाध पूंजी प्रवाह,कालाधन के मध्य दिशाएं गायब हैं।

कठिन फैसले खूब हो रहे हैं राष्ट्रहित के नाम।

राष्ट्रहित के नाम जनता के खिलाफ युद्ध जारी है।

आप अपनी चिता सजाने को तैयार हो या नहीं, चिता लेकिन आपकी सज चुकी है।

नया भूमि अधिग्रहण कानून पास होने से पहले पेश विधेयक का कारपोरेट तरफे विरोध इसी दलील पर किया जा रहा था कि निर्माण उद्योग चरमरा जाएगा। परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पाएंगी। पीपीपी परियोजनाएं प्रभावित होंगी। खनन उद्योग बाधित होगा। उद्योगों की ढाँचागत लागत 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। भवन निर्माण परियोजनाओं में लागत वृद्धि 25 प्रतिशत तक होगी। विरोध यह कहकर भी किया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण की सुझाई प्रक्रिया सामाजिक आकलन आदि के लिए गठित की जाने वाली कई समितियों से होकर गुजरेगी। जिनके ज्यादातर सदस्य अधिकारी और सामाजिक-पर्यावरणीय कार्यकर्ता होंगे। अतः पूरी प्रक्रिया ही अधिकारियों और सिविल सोसाइटी की बंधक होकर रह जाएगी।

अब नयी सरकार की प्राथमिकताएं देखें तो कारपोरेट आपत्तियों को खारिज करने के लिए अंधाधुध जमीन अधिग्रहण मार्फत जमीन से बेदखली का सिलसिला जारी रखने के लिए 1984 के कानून को करीब सवा सौ साल तक बहाल रखा गया,लेकिन नया कानून तुरत फुरत बदलने की तैयारी है। नया कानून बनाते  समय लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और अरुण जेटली होते थे, उन दोनों की सहमति से बिल पास हुआ था। विपक्ष के साथ सहमति बनाने के लिए सरकार ने कई प्रावधान बदले थे। कांग्रेस का कहना है कि बिल पास हुए छह महीने हुए हैं और इतने में ऐसा क्या हो गया, जिसकी वजह से इसे बदलने की जरूरत आ गई?


केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के साथ विचार विमर्श के बाद भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव का संकेत दिया है। इससे 60,000 करोड़ रुपये की अटकी राजमार्ग परियोजनाओं को नया जीवन मिल सकेगा।जाहिर है कि अब खुल्लमखुल्ला जमीन अधि‍ग्रहण कानून में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्‍य सरकारों ने भी कानून में बदलाव की मांग की है।सरकार नए जमीन अधि‍ग्रहण कानून के जरि‍ए इंडस्‍ट्री और इंवेस्‍टर्स को सस्‍ती मुहैया करा सकती है। सड़क परि‍वहन एवं राजमार्ग मंत्री नीति‍न गडकरी ने कहा है कि‍ सरकार के पास जमीन मालि‍कों को सहूलि‍यतें देने के लि‍ए कई वि‍कल्‍प मौजूद हैं। यह बात इशारा करती है‍ कि‍ नए कानून में इंडस्‍ट्रीज को जमीन खरीदने से जुड़े नि‍यमों में बदलाव आ सकते हैं, ताकि‍ रूके प्रोजेक्‍ट्स को शुरू कि‍या जा सके। इसके अलावा, प्रोजेक्‍ट्स की लागत को भी कम कि‍या जा सके। सरकार भूमि‍ अधि‍ग्रहण कानून को संसद में भी पेश कि‍या जा सकता है।  

सरकारी दावा है कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी और सरकार पुनर्वास और मुआवजे के प्रावधानों में कोई समझौता नहीं करेगी।

सरकार का इरादा जमीन अधिग्रहण कानून को आसान बनाने का है ताकि अफोर्डेबल हाउसिंग और लटके पड़े इन्फ्रा और हाइवे प्रोजेक्ट में तेजी लाई जा सके। मौजूदा कानून के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच करीब आधा दर्जन कमेटियों से जमीन अधिग्रहण की मंजूरी लेनी होती है।


सरकार मंजूरी की समय सीमा और कमेटियों में बदलाव कर सकती है। इसके अलावा राज्यों के काम की मॉनिटरिंग के लिए सरकार बदलाव के जरिए कानून में नए इंतजाम कर सकती है। मौजूदा कानून में प्राइवेट प्रोजेक्ट और पीपीपी प्रोजेक्ट के लिए सत्तर और अस्सी परसेंट जमीन मालिकों की सहमति जरूरी है। सरकार समय पर प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए कंसेंट क्लॉज में कुछ बदलाव ला सकती है।


फिलहाल दस दिन के अंदर ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्यों के सुझाव के आधार पर प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। और प्रधानमंत्री के निर्देश के मुताबिक मंत्रालय कैबिनेट या संसद से कानून में बदलाव की सिफारिश करेगा।


इंडस्ट्री हो या सरकार दोनों की चिंता प्रोजेक्ट की बढ़ती लागत को लेकर है। लेकिन अब जब सरकार ने साफ कर दिया है कि मुआवजे को लेकर कोई समझौता नहीं होगा तो हाउसिंग हो या फिर हाइवे प्रोजेक्ट सभी के लिए जमीन की कीमत दो से चार गुना तक बढ़ना अब तय है।


भाजपा शासित कई राज्यों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की आज आलोचना करते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों के चलते इसे जल्दबाजी मेें बनाया गया था और इसके कई प्रावधान छोटी परियोजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। केन्द्र द्वारा बुलाई गई राज्यों के राजस्व मंत्रियों की बैठक में भाजपा सरकारों की ओर से इस कानून के बारे में कड़े विचार रखे गए।

संप्रग सरकार द्वारा बनाए गए इस कानून के कुछ प्रावधानों को नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हल्का किए जाने की खबरें हैं। ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राजग सरकार किसानों के हितों का ध्यान रखेगी। गडकरी ने कहा, 'जहां तक किसानों के हितों के सवाल है, खासकर मुआवज़े, पुनर्वास और पुनस्र्थापना का, हमारी पार्टी और सरकार ने पहले ही निर्णय किया है कि हम लाभार्थियों, खासकर किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

सूत्रों ने बताया कि भाजपा शासित गोवा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश ने इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों की तीखी आलोचना करते हुए उनमें 'कुछ छूट' की मांग की है। गडकरी ने कहा, हमने कुछ राज्यों की आपत्तियों पर गौर किया है और हम 10 दिन के भीतर एक रिपोर्ट तैयार करके उसे प्रधानमंत्री को सौंपेगे।


निर्माण उद्योग पूरी तरह रियल्टी कारोबार में तब्दील है और इन्फास्ट्रक्चर भी कहा जाने लगा है प्रमोटर बिल्डर राज को।तो दूसरी ओर,लंबित परियोजनाओं को तो नई सरकार ने पर्यावरण की अनदेखी करके हरीझंडी दे ही है।सामाजिक योजना मनरेगा को भी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर प्रोमोटर बिल्डर हित को  बाकायदा राष्ट्रहित में तब्दील कर दिया गया है।रियल्टी अब सरकारी तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर है।


कें द्र सरकार ने अभी सिर्फ संकेत दिया है कि वह भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव पर विचार कर रही है और उसी पर विपक्ष की ओर से विरोध शुरू हो गया है। गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय संभाल रहे नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार इसमें बदलाव कर सकती है। इस पर कांग्रेस, लेफ्ट और कई क्षेत्रीय पार्टियों ने विरोध शुरू कर दिया ।अब गडकरी खुलकर इस कानून को बदल देने की पैरवी कर रहे हैं और मिलीभगत की राजनीति तमाशा देख रही है।


देश में नया भूमि अधिग्रहण कानून पहली जनवरी से लागू हो गया।और नई सरकार के आते न आते उसमें संशोधन।पूरी एक सदी और दो दशक लग गए देश के सबसे महत्त्वपूर्ण और जनाधिकार से जुड़े कानून को बदलने में।हालांकि इस कानून में भी खामिया हैं।


मसलन इस कानून में एक बड़ी खामी आदिवासियों के उचित चिह्नीकरण की है। पांचवें शेड्यूल से बाहर भी देश में आदिवासी समुदाय हैं, जिनकी संख्या जानकारों के मुताबिक कुल आदिवासी आबादी की कोई 50 फीसदी से ज्यादा बैठती है, उनकी जमीनों का क्या होगा,इसका कोई जवाब इस कानून से नहीं मिलता।


फिर पांचवी और छठी अनुसूचियों को जहां लागू ही नहीं किया गया,वहां इस कानून का मतलब क्या है,इसका जवाब भी नहीं है।


फिर आधे से ज्यादा आदिवासी गांव पंजीकृत गांव भी नहीं है,सलवा जुड़ुम जैसे अभियानं से जिन्हें जड़ों से मिटाने का अलग तंत्र है।इस तंत्र के खिलाफ भी नये कानून में प्रावधान नहीं हैं।


इस शंका का भी निराकरण अभी हुआ नहीं है कि देश का 90 फीसदी कोयला आदिवासी इलाकों में हैं. 50 प्रतिशत के करीब प्रमुख खनिजों के स्रोत वहीं हैं और ऊर्जा संभावनाएं भी वहीं बिखरी हुई हैं, तो निशाने पर सबसे ज्यादा यही समुदाय है जो पूरे देश में बिखरा हुआ है। तो क्या यह कानून आर्थिक उदारवाद के अगले चरण की आंधी में इन इलाकों को बचाएगा या उन्हें खोदने के लिए इस कानून की ढाल लेकर जाएगा।मुआवजे और भागीदारी का लालीपाप बांटकर,जो उन तक कभी पहुंचता ही नहीं है।पुरानी तमाम विकास परियोजनाओं में जिन लोगों को जल जमीन जंगल और आजीविका से विस्थापित किया गया है,उन्हें अभी तक न मुआवजा मिला है और न पुनर्वास।


ये सवाल भी अनुत्तरित है कि नये कानून के तहत पांच साल पुराने अधिग्रहण इसके दायरे में होंगे और मुआवजा भारी भरकम होगा और पुनर्वास के नियम नए सिरे से ही तय होंगे। लेकिन वे मामले जो और पहले के हैं, वे लोग जो अपनी अपनी जमीनों से विस्थापित होकर अन्य असहाय ठिकानों को कूच कर गए हैं. उनका क्या होगा। मिसाल के लिए टिहरी बांध या नर्मदा के बांधों के विस्थापितों को देखिए।सिंगुर, जैतापुर और कुडनाकुलम तो हाल के ही अधिग्रहण हैं, और यूपी के एक्सप्रेस हाइवे और फॉर्मूला वन रेस सर्किट के विस्थापित भी नये हैं।


भूमि अधिग्रहण विधेयक में यह प्रावधान भी होना चाहिए कि पिछले सौ वर्षों में जिन्हें अपनी मूल भूमि से विस्थापित कर दिया गया है, उनके वर्तमान पीढ़ी को पुनर्वास एवं पुन:स्थापन किया जाए।लेकिन ऐसा है नहीं। पिछले सौ-डेढ़ सौ वर्षों में जिस बड़े पैमाने पर लगातार वंचितों को जमीन से बेदखल किया जाता रहा है,उसके लिए भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने के साथ ही भूमि सुधार लागू करने की अनिवार्यता है और जाहिर है कि समूचा सत्ता वर्ग इसके खिलाफ है।


लेकिन इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि नया कानून हक के रास्ते पर एक बड़ी राहत की तरह आया है। इसमें विकास के उपनिवेशी मॉडल का मुखरता से विरोध करते आ रहे जनसंघर्षों और उनके पक्ष में खड़ी आवाजों का भी योगदान है।तत्कलीन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के उस बयान को ही ले लीजिए जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि भूमि अधिग्रहण कानून सही ढंग से लागू हो जाए, तो आदिवासी इलाक़ों में माओवाद का ख़ात्मा हो जाएगा।जयराम रमेश ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण कानून के पीछे पश्चिम बंगाल का सिंगूर जैसे आंदोलन है। इस कानून के बन जाने से किसानों गरीब, दलित और जनजातीय वर्ग को अपना हक मिलेगा।


गौरतलब है कि  बिल में 26 सब्स्टैन्शल यानी पक्के संशोधन किए गए हैं. नये कानून के लागू होने के बाद लाजिमी हो गया है कि 13 और कानूनों में भी संशोधन किए जाएं जिनका संबंध किसी न किसी रूप में भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं से है। इनमें सबसे प्रमुख तो कोयला क्षेत्र अधिग्रहण और विकास कानून 1957, भूमि अधिग्रहण (खदान) कानून 1885, और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 हैं.


यह सारी उपलब्धि अब ठंडे बस्ते में है।


बहरहाल आधे अधूरे इस जनाधिकार कानून को बदलने में सत्ता वर्ग की नई सरकार साल भर भी नहीं लगाने वाली है।इसके तहत जो भी हक हकूक मिलने के आसार थे,उनके दरनाजे और खिड़कियां अब बंद हैं।आजाद भारत में 66 साल से अंग्रेजों का बनाया 1894 का भूमि अधिग्रहण कानून चला आ रहा था तो नये कानून को अभीतक उन तमाम नाइंसाफियों का जवाब बताया जा रहा है जो ब्रिटिश हुकूमत से अब तक तक चली आ रही थी।2वीं पंचवर्षीय योजना के मुताबिक आजादी के बाद से देश के करीब छह करोड़ लोग विकास प्रोजेक्टों के नाम पर बेदखल किए गए हैं. इनमें से 40 फीसदी आदिवासी है।


गौरतलब है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और दोबारा स्थापन अधिनियम, 2013 का मूल स्वर टिका है मुआवजे के अधिकार और पारदर्शिता पर। इसी स्वर के आसपास भूमिधरी समुदाय के हक हकूक के मसलों को कानून में तब्दील किया गया है। न्यायसंगत, दीर्घकालीन और मुकम्मल पुनर्वास इस कानून का मूल आधार है।प्रावधान है कि  बिना उसके कोई भी जमीन किसी भी किसान से देश के किसी भी हिस्से में किसी भी कीमत पर नहीं ली जा सकेगी। सरकारी और पब्लिक प्राइवेट भागीदारी के जिन भी उपक्रमों के लिए जमीन चाहिए होगी उसका अधिग्रहण वहां के 70 फीसदी लोगों की रजामंदी के बाद हो जाएगा और विशुद्ध निजी उपक्रमों के लिए जन सहमति का ये प्रतिशत 80 होगा।आदिवासी और अनुसूचित इलाकों में जमीन अधिग्रहण अव्वल तो किया ही नहीं जा सकेगा और अगर होगा भी तो इसके लिए वहां जो भी स्थानीय जन प्रतिनिधित्व ढांचा सक्रिय होगा, मिसाल के लिए ग्राम सभा, तो उसके अनुमोदन के बाद ही जमीन ली जा सकेगी अन्यथा नहीं। ओडीशा नियमागिरी में वेदांता के खनन प्रोजेक्ट को वहां के आदिवासियों ने अपनी ग्राम सभाओं के जरिए ही पीछे धकेला था।


अब हिंदुत्व की सरकार का फरमान है कि यह देश में विकास दर को बाधित करने वाला कानून है इसलिए इसका बदला जाना जरुरी है।इसके लिए गारंटी दी जा रही है कि मुआवजे की रकम बदली नहीं जायेगी।लेकिन मौजूदा कानून के मुआवजे की रकम को छोड़कर सारे सरक्षक प्रावधान बदल दिये जायें तो वह मुआवजा किस कीमत पर मिलेगा समझने वाली बात है।  


जाहिर है कि बनियातंत्र को अबाध मुनाफे में अड़चनें जिस भी कानून से आ रही हैं,उन सबको उलट पलट दिया जाना है।भूमि अधिग्रहण कानून के साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून,खनन अधिनियम,पर्यावरण कानून,आदि भी निशाने पर हैं।श्रम कानून भी बदल दिये जाने हैं।


जाहिर है टुकड़ा टुकड़ा टल्लीदार विरोध से बात बनने वाली नहीं है।बनियातंत्र से आजादी की एक मुकम्मल लड़ाई की तैयारी इस थोक जनसंहार के विरुद्ध सबसे जरुरी है।धर्मोन्मादी तिलिस्म,जाति और नस्ल की तमाम दीवारे ढहाये बिना जो सिरे से असंभव है। अब खास बात तो यह है कि आजादी की इस लड़ाई में आपको जितना त्याग करना है,उससे कहीं ज्यादा बलिदान तो तिलिस्म और दीवारों को ढहाने के लिए करना होगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार यूपीए सरकार की ओर लाए गए भूमि अधिग्रहणअधिनियम में पुन: संशोधन करने की तैयारी कर रही है। सरकार को मकसद किसानों को मुआवजा और समयबद्ध पुनर्वास को सुनिश्चित करना है। भूमि अधिग्रहण कानून के लागू होने से नक्सली समस्या में कमी आएगी. झारखंड, ओडि़शा, छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में एक साल में नतीजा दिखने लगेगा. नये कानून के तहत आदिवासी इलाकों में ग्रामसभा की अनुमति जरूरी ...


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कड़े फैसलों में भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव भी शामिल हो सकता है। राज्यों के राजस्व मंत्रियों के साथ बैठक के बाद ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखने का भरोसा दिया है।सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बजट सत्र से पहले इस बदलाव को हरी झंडी मिल जाएगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि किसानों के पुनर्वास और मुआवजे में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।


जिस जमीन अधिग्रहण कानून को यूपीए सरकार अपनी एक बड़ी उपलब्धि बता रही थी, मोदी सरकार उसे बदलने जा रही है। राज्यों के साथ बैठक से इसकी शुरूआत हो गई है।



मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार को लेकर मंथन में जुटी है। इस सिलसिले में केंद्रीय ग्रामीण विकास और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के राजस्व मंत्रियों के साथ दिल्ली में बैठक की। इस बैठक में गडकरी के सामने भूमि अधिग्रहण कानून की खामियां गिनाने के साथ ही राज्य के राजस्व मंत्रियों ने उसमें सुधार की सख्त जरूरत पर जोर दिया, जिस पर केंद्र की तरफ से गौर करने का भरोसा दिलाया गया है।

दरअसल, मौजूदा भूमि अधिग्रहण कानून में 70 फीसदी जमीन मालिकों से उनकी जमीन खरीदने की इजाजत का प्रावधान निजी क्षेत्र के प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा है। ये सरकार के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानि पीपीपी कॉन्सेप्ट के लिए सबसे बड़ी रुकावट है। सड़क, खनिज, कोयला खदान जैसे क्षेत्रों के लिए इस कानून के तहत जमीन लेना बेहद मुश्किल है। लिहाजा 10 दिनों में इससे जुड़े प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के सामने रखा जाएगा और फिर आगे कदम बढ़ाया जाएगा।


मोदी सरकार के कड़े फैसलों की कड़ी में ये अगला कदम होगा। जाहिर है इसके चलते सरकार को विपक्ष के हमले तो झेलने ही होंगे। साथ ही उस पर किसान विरोधी होने के साथ ही उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगेगा। इससे निपटना भी उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।


गौरतलब है कि भाजपा शासित कई राज्यों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की आज आलोचना करते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों के चलते इसे जल्दबाजी मेें बनाया गया था और इसके कई प्रावधान छोटी परियोजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। केन्द्र द्वारा बुलाई गई राज्यों के राजस्व मंत्रियों की बैठक में भाजपा सरकारों की ओर से इस कानून के बारे में कड़े विचार रखे गए।


संप्रग सरकार द्वारा बनाए गए इस कानून के कुछ प्रावधानों को नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हल्का किए जाने की खबरें हैं। ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राजग सरकार किसानों के हितों का ध्यान रखेगी। गडकरी ने कहा, 'जहां तक किसानों के हितों के सवाल है, खासकर मुआवज़े, पुनर्वास और पुनस्र्थापना का, हमारी पार्टी और सरकार ने पहले ही निर्णय किया है कि हम लाभार्थियों, खासकर किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।'


सूत्रों ने बताया कि भाजपा शासित गोवा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश ने इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों की तीखी आलोचना करते हुए उनमें 'कुछ छूट' की मांग की है। गडकरी ने कहा, हमने कुछ राज्यों की आपत्तियों पर गौर किया है और हम 10 दिन के भीतर एक रिपोर्ट तैयार करके उसे प्रधानमंत्री को सौंपेगे।


प्रोजेक्‍ट्स की लागत बढ़ेगी

हाइवे मंत्रालय ने कहा है कि‍ कानून की वजह से परि‍योजनाओं की लागत में बेतहाशा इजाफा हुआ है। एनएचएआई ने कहा है कि‍ दि‍ल्‍ली जयपुर एक्‍सप्रेसवे की जमीन लागत तीन गुना बढ़कर 18,000 करोड़ रुपए पहुंच गई है। वहीं रि‍यल एस्‍टेट डेवलपर्स ने कहा है कि‍ नए भूमि‍ अधि‍ग्रहण कानून की वजह से प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा होगा क्‍योंकि‍ प्रोजेक्‍ट्स की लागत 30 फीसदी तक बढ़ जाएगी।

अलटे हुए प्रोजेक्‍ट्स

सड़क नेटवर्क के साथ समस्या यह है कि 60,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अटकी हुई हैं। उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय सभी जगह मामले हैं। इसके अलावा कई अन्य समस्याएं भी हैं। वहीं, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से जुड़ी 7 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्‍ट्स पूरे नहीं हो पा रहे हैं। गडकरी ने कहा है कि‍ कई राजमार्ग परियोजनाओं के पीछे रहने की वजह भूमि अधिग्रहण में विलंब है।

सरकार का रुख

  • राज्‍यों ने जमीन अधि‍ग्रहण अधि‍नि‍यम में बदलाव की मांग की।

  • अगर जरूरत पड़ी तो जमीन अधि‍ग्रहण अधि‍नि‍यम को संसद में पेश कि‍या जाएगा।  

  • 10 दि‍नों में प्रधानमंत्री को रि‍पोर्ट भेजी जाएगी।

  • सरकार के पास भुगतान के कई वि‍कल्‍प।

  • जमीन रि‍कॉर्ड सि‍स्‍टम को अपग्रेड कि‍या जाएगा।

  • कि‍सानों के हि‍तों का ध्‍यान रखा जाएगा।

  • सभी राज्‍यों के राजस्‍व मंत्रि‍यों से बैठक हुई।

  • भूमि अधिग्रहण कानूनू में उचित मुआवजा, जमीन अधिग्रहण में पारदर्शिता, विस्थापन और पुनर्वास जैसे बिन्दुओं को शामिल किया गया है।

  • गडकरी ने कहा कि एक महीने में मेरा लक्ष्य संतुलन पाने का है। हम ठेकेदारों को खत्म नहीं करना चाहते। सड़कों का निर्माण जल्द से जल्द होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने पहले ही 20,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समस्याओं को हल कर लिया है।

हाइवे प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिलनी शुरू

इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 40,000 करोड़ रुपये के हाइवे प्रोजेक्‍टों को मंजूरी दी है। ये प्रोजेक्‍ट अगले 2 से 3 सालों में तैयार होंगे। ये प्रोजेक्‍ट जम्‍मू कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड और उत्‍तर पूर्वी क्षेत्रों में प्रस्‍तावित हैं।





NATIONAL ALLIANCE OF PEOPLE'S MOVEMENTS

National Office : 6/6 Jangpura B, New Delhi – 110 014 . Phone : 011 2437 4535 | 9818905316

E-mail: napmindia@gmail.com | Web : www.napm-india.org

Any Changes in the new Land Acquisition Act is UNACCEPTABLE to People's Movements and will Face Stiff RESISTANCE

Consent and SIA Provisions are the Most Important Features of the Act

NDA Government Should Ensure Strict Implementation of the New Act

Ministry of Environment must Back Off from making amendments to the FC and EC Processes

Environment and Development are Matters of Livelihood and Basic Survival

New Delhi, June 28, 2014 : The news that two of the key provisions, 'consent' and 'Social Impact Assessment' of the Right to Fair Compensation, Transparency in Land Acquisition, resettlement and Rehabilitation Act, 2013 is to be amended by the NDA government is completely unacceptable to the people's movements and will face tough opposition across the country. It may well be reminded that the new Act was framed in the wake of protests across the nation at places like Nandigram, Singur, Kalinganagar, Kakrapalli, Bhatta Parsaul, where many people died and years of struggle by Narmada Bachao Andolan, Niyamgiri Suraksha Parishad and Anti SEZ protests in Raigarh, Jhajhar for repeal of the colonial act and enactment of a new development planning act marking people's participation and provisions for livelihood based  R&R.

The consent and SIA provision was introduced to do away with the anomalies in the colonial act, since farmers and those dependent on the land were never consulted or made a participant in the process of development planning. Huge tracts of fertile land were acquired at throw away prices and given to private and public corporations in the name of public purpose and industrialization.  The stiff opposition to the land grab has led in past to cancellation of numerous SEZs and other projects and any discussion on the question of land for industrialization has to take in account.

Ministry of Rural Development should work on implementing the Act by drafting the rules for its implementation and get States to do the same. It is shocking that most of these states demanding an amendment have not even bothered to frame the rules for the new Act. As of now, Karnataka and Maharashtra are the only two states who have framed draft rules for the same, how can they demand an amendment?

It will be a retrograde step if we were to go to back to the colonial process of forced land acquisition and no regard for impact of land acquisition on the people, environment and democratic institutions which need to be consulted and their consent taken in the process of SIA. If any amendment has to be made to the act then it needs to be made more stringent in following terms :

1. Consent for the public purpose projects to be mandatory for the government projects too.

2. Limited definition of the 'Public Purpose'. Infrastructure doesn't equal development. We have seen how Reliance has been creating infrastructure for nation, they work for profit alone and in the process loot the citizens and arm-twist the government, prime example being Delhi and Mumbai Metro and KG Basin Gas projects  ?

3. Mandatory SIA provisions for the irrigation projects as well, given the huge displacement, in case of Sardar Sarovar dam the sword of displacement is hanging on 2.5 lakh people even after three decades.

4. Urgently establish a National resettlement and Rehabilitation Commission to deal with the grievances of 10 crores of people who have sacrificed their land and livelihood in the process of development.

Since, the time NDA government has come to power a slew of changes have been proposed to the existing provisions of environment and forest clearances, as if Ministry of Environment and Forests sole job was to clear projects and allow destruction of forests, wildlife, rivers and so on in the name of development. The government seems to be in a hurry but this mandate from people need not be confused as a license to trample upon the rights of the people and tinker with the existing laws which are to protect life, livelihood and environment.

NAPM calls upon progressive forces, people's movements and political parties to join this fight against corporate loot of the natural resources at the cost of livelihood of the millions. The corporate designs of loot of the natural resources will not be allowed to succeed by the people's movements and every move will be resisted by the farmers, workers, fisherfolks, forest dwellers, adivasis, urban poor of this country. The NDA government will do itself good to remember that the power of people have forced radical changes and overthrown parties from power in past, the good days will not last forever!

Medha Patkar - Narmada Bachao Andolan - National Alliance of People's Movements (NAPM); Prafulla Samantara - Lok Shakti Abhiyan, Lingraj Azad – Niyamgiri Suraksha Parishad, NAPM, Odisha; Dr. Sunilam, Aradhna Bhargava - Kisan Sangharsh Samiti, NAPM, MP; Gautam Bandopadhyay – Nadi Ghati Morcha, NAPM, Chhattisgarh; Suniti SR, Suhas Kolhekar, Prasad Bagwe - NAPM, Maharashtra; Gabriel Dietrich, Geetha Ramakrishnan – Unorganised Sector Workers Federation, NAPM, TN; C R Neelakandan – NAPM Kerala; Saraswati Kavula, P Chennaiah – NAPM Andhra Pradesh,  B S Rawat– Jan Sangharsh Vahini, Rajendra Ravi, Sunita Rani, Madhuresh Kumar, Seela M – NAPM, Delhi; Arundhati Dhuru, Richa Singh, Nandlal Master - NAPM, UP; Sister Celia - Domestic Workers Union, Maj. Gen (Retd) Sudhir Vombatkere - NAPM, Karnataka; Sumit Wanjale – Ghar Bachao, Ghar Banao Andolan, NAPM, Mumbai; Manish Gupta - Jan Kalyan Upbhokta Samiti, NAPM, UP; Vimal Bhai - Matu Jan sangathan, NAPM, Uttarakhand; Vilas Bhongade - Gosikhurd Prakalpgrast Sangharsh Samiti, NAPM, Maharashtra; Ramashray Singh - Ghatwar Adivasi Mahasabha, Jharkhand; Anand Mazhgaonkar, Krishnakant - Paryavaran Suraksh Samiti, NAPM Gujarat; Kamayani Swami, Ashish Ranjan – Jan Jagran Shakti Sangathan, NAPM Bihar; Mahendra Yadav – Kosi Navnirman Manch, NAPM Bihar

For details contact : 9818905316 | email : napmindia@gmail.com


भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

भूमि अधिग्रहण को सरकार की एक ऐसी गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसके द्वारा यह भूमि के स्‍वामियों से भूमि का अधिग्रहण करती है, ताकि किसी सार्वजनिक प्रयोजन या किसी कंपनी के लिए इसका उपयोग किया जा सके। यह अधिग्रहण स्‍वामियों को मुआवज़े के भुगतान या भूमि में रुचि रखने वाले व्‍यक्तियों के भुगतान के अधीन होता है। आम तौर पर सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण अनिवार्य प्रकार का नहीं होता है, ना ही भूमि के बंटवारे के अनिच्‍छुक स्‍वामी पर ध्‍यान दिए बिना ऐसा किया जाता है।

संपत्ति की मांग और अधिग्रहण समवर्ती सूची में आता है, जिसका अर्थ है केन्‍द्र और राज्‍य सरकारें इस मामले में कानून बना सकती हैं। ऐसे अनेक स्‍थानीय और विशिष्‍ट कानून है जो अपने अधीन भूमि के अधिग्रहण प्रदान करते हैं किन्‍तु भूमि के अधिग्रहण से संबंधित मुख्‍य कानून भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 है।

यह अधिनियम सरकार को सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए भूमि के अधिग्रहण का प्राधिकरण प्रदान करता है जैसे कि योजनाबद्ध विकास, शहर या ग्रामीण योजना के लिए प्रावधान, गरीबों या भूमि हीनों के लिए आवासीय प्रयोजन हेतु प्रावधान या किसी शिक्षा, आवास या स्‍वास्‍थ्‍य योजना के लिए सरकार को भूमि की आवश्‍यकता। इससे उपयुक्‍त मूल्‍य पर भूमि के अधिग्रहण में रूकावट आती है, जिससे लागत में विपरीत प्रभाव पड़ता है।

इसे सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए शहरी भूमि के पर्याप्‍त भण्‍डार के निर्माण हेतु लागू किया गया था, जैसे कि कम आय वाले आवास, सड़कों को चौड़ा बनाना, उद्यानों तथा अन्‍य सुविधाओं का विकास। इस भूमि को प्रारूपिक तौर पर सरकार द्वारा बाजार मूल्‍य के अनुसार भूमि के स्‍वामियों को मुआवज़े के भुगतान के माध्‍यम से अधिग्रहण किया जाता है।

इस अधिनियम का उद्देश्‍य सार्वजनिक प्रयोजनों तथा उन कंपनियों के लिए भूमि के अधिग्रहण से संबंधित कानूनों को संशोधित करना है साथ ही उस मुआवज़े का निर्धारण करना भी है, जो भूमि अधिग्रहण के मामलों में करने की आवश्‍यकता होती है। इसे लागू करने से बताया जाता है कि अभिव्‍यक्‍त भूमि में वे लाभ शामिल हैं जो भूमि से उत्‍पन्‍न होते हैं और वे वस्‍तुएं जो मिट्टी के साथ जुड़ी हुई हैं या भूमि पर मजबूती से स्‍थायी रूप से जुड़ी हुई हैं।

इसके अलावा यदि लिए गए मुआवज़े को किसी विरोध के तहत दिया गया है, बजाए इसके कि इसे प्राप्‍त करने वाले को इसके प्रभावी होने के अनुसार पाने की पात्रता है, तो मामले को मुआवज़े की अपेक्षित राशि के निर्धारण हेतु न्‍यायालय में भेजा जाता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 को प्रशासित करने वाली नोडल संघ सरकार होने के नाते समय समय पर कथित अधिनियम के विभिन्‍न प्रावधानों के संशोधन हेतु प्रस्‍तावों का प्रसंसाधन करता है।

पुन: इस अधिनियम में सार्वजनिक प्रस्‍तावों को भी विनिर्दिष्‍ट किया जाता है जो राज्‍य की ओर से भूमि के इस अधिग्रहण के लिए प्राधिकृत हैं। इसमेंकलेक्‍टर, उपायुक्‍त तथा अन्‍य कोई अधिकारी शामिल हैं, जिन्‍हें कानून के प्राधिकार के तहत उपयुक्‍त सरकार द्वारा विशेष रूप से नियुक्‍त किया जाता है। कलेक्‍टर द्वारा घोषणा तैयार की जाती है और इसकी प्रतियां प्रशासनिक विभागों तथा अन्‍य सभी संबंधित पक्षकारों को भेजी जाती है। तब इस घोषणा की आवश्‍यकता इसी रूप में जारी अधिसूचना के मामले में प्रकाशित की जाती है। कलेक्‍टर द्वारा अधिनिर्णय जारी किए जाते हैं, जिसमें कोई आपत्ति दर्ज कराने के लिए कम से कम 15 दिन का समय दिया जाता है।

सभी राज्‍य विधायी प्रस्‍तावों में संपत्ति के अधिग्रहण या मांग के विषय पर कोई अधिनियम या अन्‍य कोई राज्‍य विधान, जिसका प्रभाव भूमि के अधिग्रहण और मांग पर है, में शामिल हैं, इनकी जांच राष्‍ट्रपति की स्‍वीकृति पाने के प्रयोजन हेतु धारा 200 (विधयेक के मामले में) या संविधान की धारा 213 (1) के प्रावधान के तहत भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जाती है। इस प्रभाग द्वारा समवर्ती होने के प्रयोजन हेतु भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 में संशोधन के लिए राज्‍य सरकारों के सभी प्रस्‍तावों की जांच भी की जाती है, जैसा कि संविधान की धारा 254 की उपधारा (2) के अधीन आवश्‍यक है।


কমানো হবে না ক্ষতিপূরণ

শিল্পের স্বার্থে জমি আইন বদলের চিন্তা

নিজস্ব সংবাদদাতা

নয়াদিল্লি, ২৮ জুন, ২০১৪, ০৩:২১:৩১


যেমন কথা তেমন কাজ!

কেন্দ্রে সরকার গড়েছেন সবে এক মাস হয়েছে। এর মধ্যেই শিল্পের জন্য জমি অধিগ্রহণ প্রক্রিয়া সহজ করতে ইউপিএ জমানায় তৈরি জমি আইন বদলে দিতে সক্রিয় হলেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী। শিল্পমহলের দাবি মেনে বেসরকারি শিল্পের জন্য জমি অধিগ্রহণে সরকারের এক্তিয়ার আরও বাড়াতে চাইছে কেন্দ্র। সেই সঙ্গে জমি আইন থেকে সামাজিক সুরক্ষার নামে জনমোহিনী মেদও ছেঁটে ফেলার কথা ভাবা হচ্ছে।

আজ কেন্দ্রীয় গ্রামোন্নয়ন মন্ত্রী নিতিন গডকড়ীর সঙ্গে বিভিন্ন রাজ্যের রাজস্বমন্ত্রীদের বৈঠক হয়। সেখানেই সুনির্দিষ্ট ভাবে প্রস্তাবগুলি উঠে আসে। তবে পশ্চিমবঙ্গের কোনও মন্ত্রী এই বৈঠকে ছিলেন না। ছিলেন রাজস্ব দফতরের কমিশনার অমরেন্দ্রকুমার সিংহ। তিনি জানান, পশ্চিমবঙ্গ তার নিজস্ব জমি নীতি তৈরি করেছে। সরকারি প্রকল্প হোক বা বেসরকারি প্রকল্প, জোর করে এক ছটাক জমিও অধিগ্রহণ করবে না তারা।

জমি আন্দোলন করে ক্ষমতায় আসা মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় প্রথম থেকেই জানিয়ে দিয়েছিলেন, জোর করে জমি নেওয়ার বিরোধী তাঁর সরকার। গত তিন বছরে তিনি যত বার শিল্পমহলের সঙ্গে আলোচনা করেছেন, তত বারই এই প্রসঙ্গ উঠেছে। রাজ্য বলে এসেছে, জমি কোনও সমস্যা হবে না। কিন্তু শুধু কাটোয়া তাপবিদ্যুৎ কেন্দ্রে মধ্যস্থতা করা ছাড়া এখনও জমি-জট মেটানোর কোনও দৃষ্টান্ত সরকার রাখতে পারেনি। রাজ্যে শিল্প না আসার পিছনে এটাকেই বড় কারণ বলে মনে করে শিল্পমহলের বড় অংশ।

জমি প্রশ্নে শিল্পমহলের এই মনোভাব মাথায় রেখেই নতুন জমি আইনটি বদলাতে উদ্যোগী হয়েছেন মোদী। এই পরিবর্তনে যেমন শিল্পের জন্য জমি অধিগ্রহণে সরকারের এক্তিয়ারের কথা ভাবা হচ্ছে, তেমনই সামাজিক সুরক্ষার দিকটিও ছেঁটে কেটে বাস্তবমুখী করতে চাইছে কেন্দ্র।

কী রকম? সরকারি সূত্রে খবর, অধিগ্রহণের আগে যে 'সামাজিক প্রভাব' সমীক্ষা করার কথা ইউপিএ-র তৈরি আইনে বলা হয়েছে, তার ধারাগুলি শিথিল করা হবে। রেট্রোস্পেকটিভ ধারা বিলোপ করা হবে। রেট্রোস্পেকটিভ বা পূর্বাপর ধারা অনুযায়ী, নতুন আইন চালু হওয়ার আগে যে সব জমি অধিগ্রহণের নোটিসই শুধু জারি হয়েছিল, কিন্তু প্যাকেজ ঘোষণা হয়নি, তারা নতুন আইন মোতাবেকই প্যাকেজ পাবে। এই ধারাটি নিয়ে শিল্পমহল এবং রাজ্যগুলির আপত্তি হল, এর ফলে যে খরচ হবে ধরে নিয়ে প্রকল্প ছকা হয়েছে, সে সরকারিই হোক বা বেসরকারি, সব ক্ষেত্রেই খরচ তার থেকে অনেকটাই বেড়ে যাবে। অনেক ক্ষেত্রে প্রকল্পটাই আর্থিক দিক থেকে অলাভজনক হয়ে পড়বে। (পশ্চিমবঙ্গ সরকারের একটি সূত্র বলছে, এই ধারা বলবৎ থাকলে বিভিন্ন সরকারি প্রকল্পের জন্য রাজ্যের খরচ বাড়বে প্রায় ১০ হাজার কোটি টাকা।) সেই কারণে ওই ধারাটি বাতিল করতে চায় কেন্দ্র। বর্তমান জমি আইনটি ভেঙে দিয়ে অধিগ্রহণ ও পুনর্বাসনের জন্য দু'টি আলাদা আইন প্রণয়নের কথাও ভাবা হচ্ছে।

তবে এটাও ঠিক যে, শিল্পমহলের দাবি সত্ত্বেও বর্তমান বিলে পুনর্বাসন ও ক্ষতিপূরণের যে শর্ত রয়েছে, তা কিন্তু এক ধাক্কায় অনেকটা লঘু করার ঝুঁকি নিতে চাইছে না বিজেপি। সেটা হলে তার রাজনৈতিক অভিঘাত কী হতে পারে, তা আঁচ করে ডাকাবুকো প্রধানমন্ত্রীও মেপে পা ফেলতে চাইছেন। তাই আইনে সংশোধনের প্রস্তাব দিলেও ক্ষতিপূরণ প্যাকেজে যে কোনও বদল হবে না, তা আজ স্পষ্ট করে দিয়েছেন গডকড়ী।

মজার বিষয় হল, এক বছর আগেও ইউপিএ জমানায় জমি আইন কতটা কৃষক-বন্ধু করে তোলা যায়, তারই প্রতিযোগিতা চলছিল। তখন বিজেপি-ও সেই স্রোতে গা ভাসিয়েছিল। প্রেক্ষাপটে ছিল সিঙ্গুর-নন্দীগ্রাম-ভট্টা পারসোলে জমি অধিগ্রহণকে কেন্দ্র করে উপর্যুপরি কৃষক অসন্তোষের ঘটনা।

এখন পরিস্থিতি বদলাল কীসে?

নির্বাচনের আগে থেকেই জমি আইন সংশোধনের জন্য শিল্পমহলের চাপ ছিল মোদীর উপরে। নতুন জমি আইন দিয়ে যে আখেরে শিল্প হবে না, সেটা এখন হাড়ে হাড়ে বুঝছে রাজ্যগুলিও। কংগ্রেস-শাসিত রাজ্যগুলিও এর ভুক্তভোগী। মোদী আজ সেই সুযোগটাই নিয়েছেন।

অবশ্য সুনির্দিষ্ট ভাবে সংশোধনের প্রস্তাব দিতে বিজেপি-শাসিত রাজ্যের মন্ত্রীদেরই ব্যবহার করেন মোদী-গডকড়ী। গুজরাত, মধ্যপ্রদেশ, রাজস্থান, ছত্তীসগঢ়, গোয়ার মতো রাজ্য দাবি করে, বর্তমান জমি আইনটি একেবারেই বাতিল করে দেওয়া হোক। সমন্বয়ের মাধ্যমে যুক্তরাষ্ট্রীয় ব্যবস্থার আড়ালেই কৌশলে তৎপর হয়েছেন জমি আইন সংশোধনে।

বস্তুত ইউপিএ জমানায় জমি আইন পাশের দিন থেকেই হাহাকার করছিল শিল্পমহল। তাদের বক্তব্য ছিল, এই আইনে অধিগ্রহণ প্রক্রিয়া এতটাই জটিল যে, বেসরকারি শিল্পস্থাপন প্রায় অসম্ভব। তা ছাড়া ক্ষতিপূরণের যে বোঝা চাপানো হয়েছে, তা-ও বাণিজ্যিক অঙ্কের সঙ্গে সঙ্গতিপূর্ণ নয়। আজকের বৈঠকে কেন্দ্রীয় গ্রামোন্নয়ন সচিব বলেন, নতুন আইন পাশের পর দেশে শিল্পের জন্য এক ইঞ্চি জমিও অধিগৃহীত হয়নি। তাই আইনে সংশোধন অনিবার্য হয়ে পড়েছে। এই প্রস্তাবে কংগ্রেস-শাসিত রাজ্যের মন্ত্রীরাও কমবেশি সায় দেন।

রাজ্যগুলির দাবি, বর্তমান আইন অনুযায়ী ৮০ শতাংশ জমির মালিকের সম্মতি নেওয়াটা বাড়াবাড়ি। খুব বেশি হলে ৬০ শতাংশ জমির মালিকের মত নেওয়াটাই যথেষ্ট। রাজস্থান তো দাবি করে, শিল্পের জন্য জমি অধিগ্রহণে সরকারের ১০০ শতাংশ এক্তিয়ার থাকা উচিত। তাৎপর্যপূর্ণ হল, পশ্চিমবঙ্গে জমির মালিকানা ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র অংশে বিভক্ত হওয়ার কারণে, অতীতে বুদ্ধদেব ভট্টাচার্য সরকারও এই শর্তের পক্ষেই সওয়াল করেছিল।

অধিকাংশ রাজ্য আজ এ-ও দাবি করে, সামাজিক প্রভাব সমীক্ষার নিয়ম লঘু করা হোক। বিশেষ করে যে সব প্রকল্পের জন্য একশো একর বা তার কম জমি প্রয়োজন, সেই সব ক্ষেত্রে এ ধরনের কোনও সমীক্ষারই প্রয়োজন নেই। সেই সঙ্গে রেট্রোস্পেকটিভ ধারা বিলোপ করা হোক। আপৎকালীন ভিত্তিতে জমি অধিগ্রহণের জন্য সংসদের অনুমতি নেওয়ার প্রস্তাবও বিলোপ করার দাবি ওঠে। এ দিন বৈঠকের পরে গডকড়ী বলেন, রাজ্যগুলির মনোভাব জানার পর দশ দিনের মধ্যে সংশোধন বিলের খসড়া তৈরি করবে সরকার। আসন্ন বাজেট অধিবেশনে তা পেশ করা হবে।


Friday, June 27, 2014

খালেদা হাসিনা গৃহযুদ্ধে হস্তক্ষেপ না করাই মঙ্গল,খালেদা কিন্তু হাসিনাকে বেদখল করতে বিজেপিকে পাশে পেতে চানই! বাংলাদেশেও নাগরিকত্ব আইন সংশোধন হচ্ছে,বিহারী মুসলমানদের বিতাড়ন শুরু হলে অনুপ্রবেশ সমস্যা হবে ভয়ন্কর!

খালেদা হাসিনা গৃহযুদ্ধে হস্তক্ষেপ না করাই মঙ্গল,খালেদা কিন্তু হাসিনাকে

বেদখল করতে বিজেপিকে পাশে পেতে চানই!


বাংলাদেশেও নাগরিকত্ব আইন সংশোধন হচ্ছে,বিহারী মুসলমানদের বিতাড়ন শুরু হলে অনুপ্রবেশ সমস্যা হবে ভয়ন্কর!



এক্সকেলিবার স্টিভেন্স বিশ্বাস


খালেদা হাসিনা গৃহযুদ্ধে হস্তক্ষেপ না করাই মঙ্গল,খালেদা কিন্তু হাসিনাকে

বেদখল করতে বিজেপিকে পাশে পেতে চানই!


বাংলাদেশেও নাগরিকত্ব আইন সংশোধন হচ্ছে,বিহারী মুসলমানদের বিতাড়ন শুরু হলে অনুপ্রবেশ সমস্যা হবে ভয়ন্কর!


ভারতের পডশি দেশগুলির সঙ্গে কোনো দিনই ভালো সম্পর্ক নেইহিন্দু রাষ্ট্র নেপালের সঙ্গে যে সম্পর্ক ছিল, আজ তা নেই।


ভারতভাগের পর থেকেই পাকিস্তানের সঙ্গে নিয়মিত সংঘাতের শেষ নেইকাশ্মীর বিবাদের সমাধান কবে হবে কেউ বলতে পারে না।


আমরা হামেশা ভারত পাকিস্তান সংঘাতের জন্য পাকিস্তানী সৈন্য কর্তৃত্বের কথা বলি কিন্তু ভারতে কাশ্মীরের ক্ষমতা দখলের লড়াই নজরআন্দাজ করি।

মানবাধিকার হননের বিরুদ্ধে সোচ্চার হতে দ্বিধা করি।


শ্রীলন্কায় তামিল সমস্যার সমাধান করতে সান্তি সেনা পাঠিয়েছিলেন রাজীব গান্ধী।


তামিলনাডুতে আত্মঘাতী বোমায় তাঁকে প্রাণ দিতে হয়।

ভারত শ্রীলন্কা সম্পর্কে জটিলতা যত তামিল আবেগের দরুন ,তার চাইতে বেশি তামিলনাডুতে ক্ষমতার রাজনীতি কারণে।


বাংলাদেশ স্বাধীনতা সংগ্রামে ভারতের অবদানের কথা মনে রাখলে দু দেশের সম্পর্ক মধুর হওয়ার কথা।


কিন্তু ঘটনা হল বাংলাদেশের সবচেয়ে বড় দাতা দেশ জাপান।

শেখ হাসিনা চিনের সঙ্গেও ভারতকে এড়িয়ে গভীর যোগাযোগ রেখে চলেছেন।


পরিস্থিতি এমনি,যে ভারতের নূতন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর শপথ গ্রহণ অনুষ্ঠানে ইসলামাবাদ থেকে জনাব নওয়াজ শরীফ ছুটে এলেও মুজিব কন্যা উড়ে গেলেন জাপানে।


বিজেপি কেন্দ্রে ক্ষমতায় আসার পর থেকে হাসিনাকে বেদখল করতে খালেদা অন্ক কষে এগোচ্ছেন।

ইন্দিরা জমানা থেকে মুজিব পরিবারের সঙ্গে সুসম্পর্কের নিরিখে তিনি বিজেপিকে জমায়েত হিফাজত জোটের সঙ্গে বিজেপির স্বাভাবিক মিত্র ভাবছেন।


মধ্যপূর্বের মত দক্ষিন এশিয়ায় যে ধর্মান্ধ ক্ষমতা রাজনীতির রমরমা,তাতে এমনটা হওয়া মোটেই আশ্চর্যের নয়।


তিস্তা পানী এবং ছিটমহল সমস্যার সঙ্গে সীমান্তে বিএসএফের ভূমিকায় বাংলাদেশ নারাজ।


কমরেড জ্যোতি বসু বাংলাদেশের সঙ্গে জলসন্ধিকে নিযমিত গুরুত্ব দিয়েছেন,কিন্তু তাঁর উত্তরসুরি এ ব্যাপারে বাংলাদেশকে কোনো ছাড় দিতে রাজি নন।


ছিটমহল চুক্তি ও তিস্তা সন্ধি মমতার আপত্তিতে ঝুলে আছে।

ঢাকা রওয়ানা হওয়ার আগে অবশ্য টেলিফোনে সুষমার সঙ্গে মমতার কথা হয়েছে এবং মমতা তাঁকে ঢাকায় ঈলিশ মাছ খাওয়া ভুলতে নিষেধ করেছেন।


সারস্বত সাত্বিক ব্রাহ্মণ সুষমা বাঙ্তি ব্রাঙ্মণদের মত পাত পেড়ে ঈলিশ ভোজে বসবেন কিনা বলা শক্ত।


কিন্তু এখই ইতিহাস,একই ভাষা এবং একই সংস্কৃতির বাহক হয়েও বাংলা যখন বাংলাদেশকে কোনো ছাড় দিতে রাজি নয়,ভারত বাংলাদেশ সম্পর্ক শবগৃহে প্লেট হওয়া ঊলিশের মতই হবে,সে বিষযে সন্দেহের অবকাশ নেই।

মোদী বাংলাদেশি অনুপ্রবেশকারিদের ভারত থেকে বিতাড়নের যুদ্ধ ঘোষণা করেছেন,কিন্তু তিনিও পূর্ববর্তী তামাম সরকারের মত উদ্বাস্তু সমস্যার সমাধানের জন্য বাংলাদেশে সংখ্যালঘু উত্পীড়ন বন্ধে কোনো উদ্যোগ নিতে উত্সাহী নন।


বাংলা দেশে শুধু ধর্মীয় কারণেই নয়,রাজৈতিক ও আর্থিক কারণেও সংখ্যালঘুদের পর নিযমিত হামলা হয়ে থাকে।


যদি হাসিনা সরকার অপসারিত হয় তাহলে বাংলাদেশে আওয়ামী সমর্তক হিন্দু মুসলিম নির্বেশেষ মানুষের টিকে থাকাটাই মুশকিল হবে।


বাংলাদেশি বলে ভারত থেকে যেমন বাঙালি খেদাও অভিযান চলছে,ঠিক তেমনই বাংলা দেশেও নাগরিকত্ব আইন সংশোধন হচ্ছে।


বাংলাদেশে সংখ্যালঘু শুধু হিন্দুরা নন।


লাখো লাখো উর্দু ভাষী মুসলমান যাদের বাংলাদেশে হামেশাই রাজাকার,বিহারি মুসলমান এবং পাকিস্তন সমর্থক বলা হয়,তাঁরাও হিন্দুদর মতই সংখ্যালঘু।


এছাড়া বৌদ্ধও আছেন আবার খ্রীস্টানও।

মুজিব এই বিহারি মুসলমানদের পাকিস্তানে পাঠানোর চেষ্টা করেছিলেন,কিনিতু পাকিস্তান বিহারীদের দায় নিতে অস্বীকার করে।


ঘটনাচক্রে বাংলাদেশে হিন্দী ও বিহারি মুসলমান অস্তিত্বের খাতিরেও একজোট হতে নারাজ।


হিন্দুদের উপর হামলার দায় এই রাজাকার বাহিনীর কাঁধেই বর্তে আসছে ভারত ভাগের পর থেকে।


বিহারী মুসলমানদের তাড়ানোর কোনো অভিযান শুরু হলে পশ্চিম বাংলা,বিহার এবং আসামে তার পরিণাম হবে ভয়ন্কর।


বাংলাদেশের সঙ্গে তিস্তার জলচুক্তি সম্পন্ন করতে জাতীয় ঐকমত্য তৈরির উদ্যোগ নিয়েছে ভারত৷‌ বিদেশমন্ত্রী হিসেবে প্রথম বিদেশ সফরে ঢাকায় এসে বাংলাদেশের প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনাকে আশ্বাস দিলেন সুষমা স্বরাজ৷‌ দিল্লিতে এন ডি এ সরকার ক্ষমতায় আসার পর সুষমার এই সফরকে 'শুভেচ্ছা সফর' বলে বর্ণনা করা হচ্ছিল৷‌ ফলে এই সফরে বড় কোনও চুক্তি হওয়ার কথা না থাকলেও বেশ কিছু গুরুত্বপূর্ণ সিদ্ধাম্ত নিল দুই পক্ষ৷‌ সফরের আগে ভারত জানিয়েছিল, বাংলাদেশি নাগরিকদের ভিসা ছাড়া সফর নিয়ে কোনও আলোচনা হবে না৷‌ তবুও সুষমার এই সফরে প্রতিবেশী দেশের নাগরিকদের জন্য ভিসার বিশেষ ছাড়ের কথা জানানো হল৷‌ ঠিক হয়েছে, ১৩ বছরের নিচে এবং ৬৫ বছরের ওপর বাংলাদেশি নাগরিকেরা এখন ১ বছরের জায়গায় ৫ বছর ধরে একাধিকবার ভারতে প্রবেশ করার ভিসা পাবেন৷‌ ত্রিপুরার পালাটানা গ্যাস-ভিত্তিক বিদ্যুৎকেন্দ্র থেকে বাংলাদেশকে আরও অতিরিক্ত ১০০ মেগাওয়াট বিদ্যুৎ দেওয়ার কথাও ঘোষণা করেছেন সুষমা৷‌ এ ছাড়া বাংলাদেশের বিভিন্ন ছোট ছোট প্রকল্পে ভারত ৬০ কোটি টাকা সাহায্য হিসেবে দিচ্ছে৷‌ দু'দেশের মধ্যে অপরাধী বিনিময় নিয়েও সুষমা আলোচনা করেছেন বাংলাদেশি বিদেশমন্ত্রী আবুল হাসান মাহমুদ আলির সঙ্গে৷‌ দু'দেশের মধ্যে সীমাম্ত চুক্তি বা ছিটমহল বিনিময় নিয়েও আলিকে আশ্বাস দিয়েছেন সুষমা৷‌ বলেছেন, এখন সংসদীয় কমিটির বিবেচনায় রয়েছে চুক্তিটি৷‌ যত শিগগির সম্ভব এ নিয়ে সিদ্ধাম্ত নেওয়া হবে৷‌


পূর্বতন এন ডি এ সরকারের তথ্য এবং সম্প্রচার মন্ত্রী হিসেবে সফরের প্রায় ১৬ বছর পর ফের বাংলাদেশে সরকারি সফরে সুষমা৷‌ সব মিলিয়ে তাঁর এই সফরকে 'গঠনমূলক এবং ফলপ্রসূ' বলে বর্ণনা করেছে ভারত৷‌ উল্লেখ করা যেতে পারে, ২০১১ সালে বাংলাদেশের সঙ্গে তিস্তা জলচুক্তি এবং ছিটমহল বিনিময় চুক্তি আটকে গিয়েছিল তৎকালীন ইউ পি এ সরকারের শরিক, পশ্চিমবঙ্গের মুখ্যমন্ত্রী মমতা ব্যানার্জির বাধায়৷‌ মমতার সঙ্গে তখন গলা মিলিয়েছিল বি জে পি এবং আসাম গণ পরিষদের নেতারা৷‌ এখন অবস্হা পাল্টে গেছে৷‌ বি জে পি এখন কেন্দ্রে ক্ষমতায়৷‌ তাই বাংলাদেশে আসার আগে সুষমা আলাদা করে মমতার সঙ্গে ফোনে কথা বলে নিয়েছেন৷‌ বাংলাদেশের প্রধানমন্ত্রীর সঙ্গে এদিন প্রায় ১ ঘণ্টা ধরে আলোচনা করেন সুষমা৷‌ পশ্চিমবঙ্গের শাম্তিনিকেতনে একটি বাংলাদেশ ভবন গড়ে তোলার প্রস্তাব হাসিনাকে দিয়েছেন তিনি৷‌ ঢাকা-কলকাতা মৈত্রী এক্সপ্রেস আরও ঘন ঘন চালানো এবং ঢাকা-শিলং পরীক্ষামূলক বাস সফর নিয়েও দু'জনের মধ্যে আলোচনা হয়েছে৷‌ প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির আমন্ত্রণপত্র তিনি এদিন হাসিনার হাতে তুলে দেন৷‌ পাশাপাশি উপহার হিসেবে দেন একটি ক্রিম রঙের শাড়ি৷‌ হাসিনাও সুষমার হাতে তুলে দেন বিখ্যাত বাংলাদেশি জামদানি শাড়ি৷‌ সন্ধেয় বাংলাদেশের প্রেসিডেন্ট আবদুল হামিদের সঙ্গে কথা বলেন সুষমা৷‌ বঙ্গভবনে দু'জনের মধ্যে প্রায় ৪০ মিনিট ধরে আলোচনা হয়েছে৷‌ শুক্রবার দিল্লি ফেরার আগে বিরোধী বি এন পি নেত্রী খালেদা জিয়া এবং রৌশন এরশাদের সঙ্গে দেখা করবেন তিনি৷‌

পাকিস্তানের পর বাংলাদেশ৷ শাল-কূটনীতির পর শাড়ি কূটনীতি৷ প্রশাসনে না হোক, প্রতিবেশীদের সঙ্গে মোদী সরকারের মধুচন্দ্রিমা অব্যাহত৷


বিদেশমন্ত্রী হিসেবে প্রথম একক বিদেশ সফরে বাংলাদেশ এসেছেন সুষমা স্বরাজ৷ সঙ্গে করে নিয়ে এসেছেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার জন্য ক্রিম-রঙা শাড়ি৷ সৌজন্যে অবশ্য কম যায় না ওপার বাংলাও৷ সুষমার জন্য হাসিনাও এনে রেখেছিলেন কি না মহার্ঘ জামদানি! তা-ও আবার যেমন তেমন নয়৷ হাসিনার বোন নিজে কিনে এনেছেন সেই শাড়ি৷ ঠিক এক মাস আগে নিজের শপথগ্রহণে সমস্ত সার্ক দেশের প্রধানদের ডেকে সৌহার্দ্যের নজির গড়েছেন নরেন্দ্র মোদী৷ পাকিস্তানের প্রধানমন্ত্রী নওয়াজ শরিফের মায়ের জন্য শাল পাঠিয়েছিলেন, তার প্রত্যুত্তরে এসেছে মোদীর মা হীরাবার জন্য শাড়ি৷ সেই শাড়ি-শালের কূটনীতির ছোঁয়া থাকল পূর্ব প্রান্তের পড়শির ক্ষেত্রেও৷


পাশাপাশি এ দিনই হাসিনাকে একটি চিঠি লিখেছেন প্রধানমন্ত্রী মোদী৷ তাঁর মসনদপ্রাপ্তির পর হাসিনার অভিনন্দনবার্তার জন্য ধন্যবাদ জানিয়েছেন৷ বাংলাদেশ আসার আমন্ত্রণও স্বীকার করেছেন৷ উষ্ণ সেই চিঠিতে দক্ষিণ এশিয়ার সামগ্রিক স্বার্থে হাত মিলিয়ে কাজ করার প্রতিশ্রুতি রেখেছেন মোদী৷


উষ্ণতায় অবশ্য কম যাচ্ছেন না হাসিনাও৷ বৃহস্পতিবার হাসিনার সঙ্গে তাঁর অফিসে দেখা করতে গেলে, প্রোটোকল ভেঙে রিসেপশনেই স্বরাজকে স্বাগত জানান তিনি৷ শুধু তাই, জড়িয়েও ধরেছেন স্বরাজকে৷


দুই পড়শির মধ্যে সৌজন্যের এই ধারা আশাব্যঞ্জক বলেই মনে করছে রাজনৈতিক মহল৷


তিস্তা নিয়ে মমতাকে বোঝান, আর্জি হাসিনার

কুদ্দুস আফ্রাদ

ঢাকা, ২৭ জুন, ২০১৪, ০২:৫৫:৫৭


কাল ঢাকা পৌঁছনোর পরে আজ সকালে বাংলাদেশের বিদেশমন্ত্রী আব্দুল হাসান মাহমুদ আলির সঙ্গে প্রথমে প্রতিনিধি পর্যায়ের ও পরে মুখোমুখি বৈঠকে বসেন সুষমা। বাংলাদেশের বিদেশমন্ত্রী বৈঠকের পরে জানান, দু'দেশের মানুষের মধ্যে সম্পর্ক ও আদানপ্রদান আরও সহজ করার বিষয়ে দুই প্রতিবেশী দেশ সহমত হয়েছে। এ জন্য ভিসানীতি সহজ করার ঘোষণা করেছেন ভারতের বিদেশমন্ত্রী। এ বার থেকে ৬৫ বছরের বেশি ও ১৩ বছরের কমবয়সী বাংলাদেশি নাগরিকদের সহজেই মাল্টিপল এন্ট্রি ভিসা দেবে ভারত। বাংলাদেশও তাদের ভূখণ্ডের ওপর দিয়ে ১০ হাজার টন খাদ্যশস্য ত্রিপুরায় পাঠানোর ছাড়পত্র দিচ্ছে ভারতকে। আলি বলেন, বাংলাদেশে সাত খুনের আসামি কলকাতায় ধরা পড়া নুর হোসেনকে ফেরত দেওয়ার আশ্বাসও দিয়েছেন সুষমা। সীমান্তে পাহারা আরও জোরদার করা ও গুলিবর্ষণের ঘটনা বন্ধেও সহমত হয়েছে দুই দেশ।

তবে ভারত থেকে বাংলাদেশি অনুপ্রবেশকারীদের ফেরানো নিয়ে বৈঠকে কোনও আলোচনা হয়নি।

সুষমা বৈঠকে বলেন, ভারত-বাংলাদেশের সম্পর্ক রক্তের সম্পর্ক। ভবিষ্যতেও তা অটুট থাকবে। ভারতের বিদেশনীতিতে বাংলাদেশের বিশেষ ভূমিকা রয়েছে। এই কারণে দায়িত্ব নেওয়ার পরেই সফরের জন্য তিনি ঢাকাকে বেছে নিয়েছেন। উত্তর-পূর্ব ভারতের জঙ্গিদের উচ্ছেদে সহযোগিতার জন্য ঢাকাকে আন্তরিক কৃতজ্ঞতা জানান সুষমা। ভারতের বিদেশ মন্ত্রকের মুখপাত্র আকবরুদ্দিন বলেন, বাংলাদেশের নাগরিকদের ভিসা দেওয়ার প্রক্রিয়া যেমন সহজ করা হচ্ছে, তেমনই দু'দেশের মানুষের মধ্যে যোগাযোগ বাড়ানোর বেশ কিছু প্রস্তাব নিয়ে দু'দেশের মধ্যে আলোচনা হয়েছে। মৈত্রী এক্সপ্রেসে আরও বাতানুকুল কামরা সংযোজন, যাত্রার সময় কমানো, ঢাকা থেকে শিলং হয়ে গুয়াহাটি পর্যন্ত বাস চলাচল ও সীমান্ত-হাটের সংখ্যা বাড়ানো নিয়েও ইতিবাচক কথা হয়েছে।

কাল বাংলাদেশের রাষ্ট্রপতি আব্দুল হামিদের সঙ্গে সৌজন্য সাক্ষাৎ করবেন সুষমা। তার পরে বিএনপি নেত্রী খালেদা জিয়া ও বিরোধী নেত্রী রওশন এরশাদের সঙ্গে আলোচনা সেরে বিকেলেই দিল্লির বিমানে ওঠার কথা সুষমার।




বাংলাদেশে গণতন্ত্র অনুপস্থিত: সুষমাকে খালেদা

ঢাকা, ২৭ জুন:

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


ঢাকা সফররত ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সাথে সৌজন্য সাক্ষাত করেছেন বিএনপি চেয়ারপারসন খালেদা জিয়া। শুক্রবার সকাল সাড়ে ১০টার দিকে হোটেল সোনারগাঁওয়ে এ সৌজন্য সাক্ষাত শুরু হয়। এসময় সুষমাকে খালেদা জিয়া বলেন, বাংলাদেশে গণতন্ত্র অনুপস্থিত। তথাকথিত সংসদে জনগণের ইচ্ছা প্রতিফলিত হচ্ছে না। মতবিনিময়ে সুষমা স্বরাজ বলেছেন- সরকার বা কোনো দলের সাথে নয়, বাংলাদেশের জনগণের সাথে সাথে সম্পর্ক রাখতে চায় ভারত। এর আগে ঢাকেশ্বরী মন্দির পরিদর্শন শেষে সকাল ১০টার দিকে হোটেল সোনারগাঁওয়ে পৌঁছান সুষমা। এসময় সুষমাকে ফুলেল শুভেচ্ছা জানান বিএনপি নেতারা।

আধাঘন্টাব্যাপী বৈঠকে খালেদা জিয়ার সঙ্গে বিএনপির ভারপ্রাপ্ত মহাসচিব মির্জা ফখরুল ইসরাম আলমগীর, স্থায়ী কমিটির সদস্য তরিকুল ইসলাম, ড. আবদুল মঈন খান, ভাইস চেয়ারম্যান শমসের মবিন চৌধুরী, উপদেষ্টা রিয়াজ রহমান, সাবিহউদ্দিন আহমেদ, চেয়ারপারসনের প্রেসসচিব মারুফ কামাল খান সোহেল প্রমুখ উপস্থিত ছিলেন। এদিকে প্রায় ১০ মিনিট একান্তে বৈঠক করেন সুষমা স্বরাজ ও খালেদা জিয়া। তবে কি কথা হয়েছে তা জানা যায়নি।

মতবিনিময় শেষে সাংবাদিকদের সাথে আলাপকালে বিএনপির স্থায়ী কমিটির সদস্য আব্দুল মঈন খান বলেন, যে বিষয়টি গুরুত্বের সঙ্গে উল্লেখ করা হয়েছে, তা হলো—বাংলাদেশে গণতন্ত্র অনুপস্থিত। তথাকথিত সংসদ জনগণের ইচ্ছা প্রতিফলিত করে না। বিশ্বের সর্ববৃহত্ গণতন্ত্রের দেশ তার প্রতিবেশী দেশে গণতান্ত্রিক পরিবেশ দেখতে চায় কি না, তা আলোচনায় উল্লেখ করা হয়েছে। তিনি বলেন, গণতন্ত্র বাদ দিয়ে উন্নয়ন সম্ভব নয়। বাংলাদেশে গণতন্ত্র পুনরুদ্ধার করতে হবে। এসময় সুষমা স্বরাজ বলেন, এশিয়ার সব দেশে গণতন্ত্র দেখতে চায় ভারত।

সাংবাদিকদের প্রশ্নের জবাবে মঈন খান বলেন, এ অঞ্চলে ভারত বিশ্বের বৃহত্ গণতন্ত্র। প্রতিবেশী দেশে গণতন্ত্রের অনুপস্থিত থাকলে এ অঞ্চলের সার্বিক উন্নয়ন ব্যাহত করবে।

সুষমা স্বরাজকে জামদানি শাড়িসহ বেশ কিছু মূল্যবান উপহার সামগ্রী দিয়েছেন খালেদা জিয়া। এ ব্যাপারে মঈন খান জানান, বৈঠকের আগেই বিএনপি চেয়ারপারসন খালেদা জিয়ার পক্ষ থেকে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রীকে পাঁচটি জামদানি শাড়িসহ বেশ কিছু মূল্যবান উপহার সামগ্রী পৌঁছে দেয়া হয়েছে। ২০১৩ সালে ভারত সফরকালে দেশটির তৎকালীন বিরোধীদলীয় নেতা সুষমা স্বরাজও খালেদা জিয়াকে বেশ কিছু উপহার সামগ্রী দিয়েছিলেন বলে জানান তিনি।

বিএনপি'র ভাইস চেয়ারম্যান শমসের মবিন চৌধুরী জানান, ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ বলেছেন- ভারতের নতুন সরকার কোনো দল বা ব্যক্তির সাথে সম্পর্ক রাখতে চায় না। সরকার দেশের জনগণের সাথে সু-সম্পর্ক বজায় রাখতে চায়।

শমসের মবিন চৌধুরী বলেন, সংবাদ মাধ্যমে আপনারা জানতে পেরেছেন সরকার চায়নি বিএনপি চেয়ারপারসন বেগম খালেদা জিয়ার সঙ্গে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সাক্ষাৎ হোক। তবে ভারতের বর্তমান সরকার বিশেষ কোনো দল নয় বরং বাংলাদেশের জনগণের সঙ্গে সুসম্পর্ক গড়ে তুলতে চায় বলেই ভারতীয় পররাষ্ট্রমন্ত্রীর অগ্রহে এই বৈঠক অনুষ্ঠিত হলো। তিনি সাংবাদিকদের জানান, বেগম খালেদা জিয়া ভারতের নতুন সরকারকে পুনরায় অভিনন্দন জানিয়েছেন। একই সঙ্গে সার্কের মাধ্যমে দক্ষিণ এশিয়ার ঐকমত্য গড়ে তুলতে ভারতের প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি যে উদ্যোগ নিয়েছেন বিএনপি চেয়ারপারসন তাকে স্বাগত জানান।

বৈঠকে দুই দেশের স্বার্থসংশ্লিষ্ট বিষয় নিয়ে আলোচনা হয়েছে বলে জানান শমসের মবিন চৌধুরী। বাংলাদেশে ৫ জানুয়ারি নির্বাচন এবং মধ্যবর্তী নির্বাচন বিষয়ে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে বিএনপি চেয়ারপারসনের সঙ্গে কোনো আলোচনা হয়েছে কিনা সাংবাদিকদের এমন প্রশ্নের জবাবে তিনি বলেন, এ বিষয়ে কোনো আলোচনা হয়নি।

বুধবার রাতে তিন দিনের সফরে ঢাকা আসেন সুষমা স্বরাজ। গত মাসে ভারতের সাধারণ নির্বাচনে বিজেপি ক্ষমতায় যাওয়ার পর নতুন সরকারের পররাষ্ট্র মন্ত্রী হিসেবে দায়িত্ব পাওয়ার পর এটায় তার প্রথম বিদেশ সফর। সুষমা স্বরাজ বৃহস্পতিবার রাষ্ট্রপতি আবদুল হামিদ ও প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার সঙ্গে বৈঠক করেন। ভারত সফরের জন্য দেশটির প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির আমন্ত্রণ পত্র তুলে দেন শেখ হাসিনার হাতে। এছাড়া তিনি পররাষ্ট্র মন্ত্রী আবুল হাসান মাহমুদ আলীর সঙ্গে দ্বিপক্ষীয় বৈঠক করেন। আজ দুপুরে সুষমা স্বরাজ ঢাকা ত্যাগ করবেন।

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116112#sthash.jftKpu8t.dpuf


'বাংলাদেশ-ভারত সম্পর্ক উন্নয়নের চমত্কার সূচনা'

সুষমা স্বরাজের ঢাকা ত্যাগ

ইত্তেফাক রিপোর্ট

পররাষ্ট্র মন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সফরে দুই দেশের মধ্যে সম্পর্কের চমত্কার সূচনা হয়েছে বলে ভারতের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে। একইসঙ্গে দেশটির বর্তমান সরকার বাংলাদেশের নেতৃত্বের সঙ্গে কাজ করে যাবে এবং দুই দেশের সম্পর্ক আরো এগিয়ে নেবে সফর শেষে এমন প্রত্যাশাই ব্যক্ত করেছে তারা। তবে বাংলাদেশের অভ্যন্তরীণ সমস্যার সমাধান এ দেশের জনগণকেই করতে হবে বলে তারা মনে করে। শুক্রবার দুপুরে তিনদিনের বাংলাদেশ সফর শেষে সুষমা স্বরাজের ঢাকা ত্যাগের পূর্বে দেশটির পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র সৈয়দ আকবরউদ্দীন এক সংক্ষিপ্ত প্রেস ব্রিফিংয়ে এ মন্তব্য করেন। বিমানবন্দরে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রীকে বিদায় জানান পররাষ্ট্র সচিব মো. শহীদুল হক।


শুক্রবার সফরের তৃতীয় দিনে ব্যস্ত সময় কাটান সুষমা স্বরাজ। সকালে তিনি রাজধানীর ঢাকেশ্বরী মন্দির পরিদর্শন করেন এবং বাংলাদেশ-ভারত সুসম্পর্ক এগিয়ে নেয়ার উদ্দেশ্যে প্রার্থনা করেন। এরপর হোটেল সোনারগাঁওয়ে ফিরে আসার পর সুষমা স্বরাজের সঙ্গে প্রথম সৌজন্য সাক্ষাত্ করেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার ছোট বোন শেখ রেহানা ও প্রধানমন্ত্রীর মেয়ে সায়েমা ওয়াজেদ পুতুল। এ সময় তাঁদের মধ্যে প্রায় আধা ঘণ্টা আলাপ হয়। এরপর ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে সৌজন্য সাক্ষাত্ করেন প্রধানমন্ত্রীর দুই উপদেষ্টা মসিউর রহমান ও ড. গওহর রিজভী। সবার শেষে হোটেল সোনারগাঁওয়ে সুষমা স্বরাজের সঙ্গে সাক্ষাত্ ও একান্তে বৈঠক করেন বিএনপি চেয়ারপারসন বেগম খালেদা জিয়া। ঢাকা ছাড়ার আগে সুষমা স্বরাজ জাতীয় সংসদে বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদের সঙ্গে তাঁর সংসদ ভবনের কার্যালয়ে দেখা করেন।


তিনদিনের শুভেচ্ছা সফরের বিষয়ে বিমানবন্দরে তার মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র আকবরউদ্দীন বলেন, আমাদের দৃষ্টিতে এই সফর সন্তোষজনক ও ফলপ্রসূ হয়েছে। আমরা আশা করি, মোদী সরকার বাংলাদেশের নেতৃত্বের সঙ্গে কাজ করে যাবে এবং দুই দেশের সম্পর্ক আরো এগিয়ে নেবে।


বিএনপি নেতার সঙ্গে কী আলোচনা হয়েছে সাংবাদিকরা জানতে চাইলে তিনি সরাসরি কোনো উত্তর না দিয়ে বলেন, বাংলাদেশের সরকার ও সমাজের বিভিন্ন অংশের প্রতিনিধিরা ভারতের সঙ্গে আরো বন্ধুত্বপূর্ণ, ব্যাপক সহযোগিতা ও যোগাযোগ বৃদ্ধিতে আগ্রহী রয়েছেন। এই উপলব্ধি নিয়েই আমরা দিল্লি ফিরে যাচ্ছি। প্রধানমন্ত্রীর দুই উপদেষ্টা, বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদ ও খালেদা জিয়ার সঙ্গে বৈঠকের পর এ ধরনের উপলব্ধি আমাদের হয়েছে। এটা একটি চমত্কার সূচনা। দুই দেশের মধ্যেকার উদ্বেগ দূর করে এবং একে অন্যের প্রতি বন্ধুসুলভ মনোভাব নিয়ে বাংলাদেশ-ভারত সম্পর্ককে এগিয়ে নেয়ার ব্যাপারে ব্যাপক আগ্রহ দেখা গেছে।


ভারত সরকার আওয়ামী লীগের নেতৃত্বাধীন সরকারের সঙ্গে ২০১৯ সাল পর্যন্ত কাজ করে যাবে কিনা এমন এক প্রশ্নের জবাবে তিনি বলেন, সরকার কাজ করে থাকে সরকারের সঙ্গে। ভারতের সরকার কাজ করবে বাংলাদেশের সরকারের সঙ্গে। বাংলাদেশের অভ্যন্তরীণ কোনো সমস্যা থাকলে তা এ দেশের জনগণকেই সমাধান করতে হবে।


মশিউর রহমান ও গওহর রিজভীর সঙ্গে সাক্ষাত্


সুষমা স্বরাজের সঙ্গে সাক্ষাত্ শেষে প্রধানমন্ত্রীর অর্থ বিষয়ক উপদেষ্টা মশিউর রহমান বলেন, সাক্ষাতে উন্নয়ন সহযোগিতা প্রসারিত করার বিষয়ে কথা হয়েছে। দুই দেশের সম্পর্ক অটুট থাকবে এবং আরো অগ্রসর হবে বলে আশা করি। ৫ জানুয়ারির নির্বাচনের বিষয়ে কোনো আলাপ হয়েছে কিনা এমন প্রশ্নের জবাবে তিনি সাংবাদিকদের বলেন, বাংলাদেশের অভ্যন্তরীণ ব্যাপারে ভারতের হস্তক্ষেপ করার তেমন কোন ইচ্ছা নেই। ভারতের কংগ্রেস সরকার পরিবর্তনে দুই দেশের সম্পর্কে কোনো প্রভাব পড়বে কিনা এমন এক প্রশ্নের জবাবে তিনি বলেন, দুই দেশের সম্পর্ক ভালো হলে দলের পরিবর্তনে তাতে প্রভাব পড়ে না। প্রধানমন্ত্রীর আন্তর্জাতিক বিষয়ক উপদেষ্টা গওহর রিজভী বলেন, দুই দেশের সম্পর্ক আরো ভালো করার উদ্দেশ্য নিয়ে সাক্ষাত্ করেছি।


উল্লেখ্য, গত বুধবার রাতে তিনদিনের এক 'শুভেচ্ছা' সফরে বাংলাদেশে আসেন ভারতের নতুন সরকারের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ। সফরের দ্বিতীয় দিন বৃহস্পতিবার তিনি রাষ্ট্রপতি আবদুল হামিদ ও প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার সঙ্গে সাক্ষাত্ করেন। এর আগে তিনি পররাষ্ট্র মন্ত্রী এ এইচ মাহমুদ আলীর সঙ্গে দ্বিপক্ষীয় বৈঠক করেন। বৈঠকে তিনি জানান, বাংলাদেশের সঙ্গে বহুদিন ধরে ঝুলে থাকা অভিন্ন তিস্তার পানি চুক্তি নিয়ে অভ্যন্তরীণ সমঝোতা তৈরির চেষ্টা করছে ভারত। পাশাপাশি স্থল সীমান্ত চুক্তির (এলবিএ) প্রটোকলগুলো ভারতীয় রাজ্যসভায় অনুমোদনের অপেক্ষায় রয়েছে বলে জানানো হয়।


এছাড়া ঐদিন সন্ধ্যায় রাজধানীর একটি হোটেলে বাংলাদেশ ইনস্টিটিউট অব ইন্টারন্যাশনাল এন্ড স্ট্রাটেজিক স্টাডিজ (বিস্) আয়োজিত এক অনুষ্ঠানে বক্তৃতা করেন তিনি। বক্তব্যে তিনি দুই দেশের সুসম্পর্কের গুরুত্ব উল্লেখ করতে গিয়ে বলেন, ভারতের নতুন সরকারের পররাষ্ট্র নীতির ভিত্তি হবে জাতীয় স্বার্থকে সমুন্নত রেখে সকল দেশের সঙ্গে শান্তিপূর্ণ ও বন্ধুত্বপূর্ণ সম্পর্কের উন্নয়ন ঘটানো। নিকটতম প্রতিবেশীর সঙ্গে ফলপ্রসূ অংশীদারিত্বের সম্পর্ক স্থাপন ছাড়া ভারত তার উন্নয়নকে পূর্ণাঙ্গ ও টেকসই করতে পারবে না।

খালেদার মদদেই এরশাদ ক্ষমতায় যান

সোহরাওয়ার্দী উদ্যানের জনসভায় প্রধানমন্ত্রী

বিশেষ প্রতিনিধি

প্রধানমন্ত্রী ও আওয়ামী লীগ সভানেত্রী শেখ হাসিনা বিএনপি নেত্রী খালেদা জিয়ার প্রতি ইঙ্গিত করে বলেছেন, তার মদদ ছাড়া এরশাদ ক্ষমতা নেয়ার সাহস পেলেন কিভাবে? জিয়া হত্যার পর উনি (খালেদা) এরশাদের কাছ থেকে দুটো বাড়ি, গাড়ি, অর্থসহ সবচেয়ে বেশি সুবিধা নিয়েছেন। আর এরশাদ সাহেব ভাবি সাহেবের যত্ন করতে একটুও কার্পণ্য করেননি। তাহলে রহস্যটা কী? আওয়ামী লীগের ওপর জিয়া খুনের দায় চাপানোর বিষয়ে বিএনপি নেত্রীর সাম্প্রতিক বক্তব্যের জবাবে প্রধানমন্ত্রী বলেন, এতদিন পর উনি আবিষ্কার করলেন তার স্বামী হত্যার সঙ্গে নাকি আমরা জড়িত। কিন্তু আমরা কেন খুন করতে যাব। খুন তো বিএনপি নেত্রীরই অভ্যাস, খুন করতে তারাই পারদর্শী। তিনি নিজে খুনি, তার স্বামী জিয়াউর রহমান খুনি, ছেলে খুনি, পুরো পরিবারই খুনি।


গতকাল শুক্রবার বিকালে রাজধানীর সোহরাওয়ার্দী উদ্যানে এক বিশাল জনসভায় সভাপতির বক্তব্যে প্রধানমন্ত্রী এসব কথা বলেন। আওয়ামী লীগের ৬৫তম প্রতিষ্ঠাবার্ষিকী উপলক্ষে দলের পক্ষ থেকে তিন দিনব্যাপী কর্মসূচির শেষ দিনে গতকাল এক আলোচনাসভার আয়োজন করা হয়। এ আলোচনাসভা জনসমুদ্রে রূপ নেয়। দুপুরের পর থেকেই সোহরাওয়ার্দী উদ্যানের উদ্দেশ্যে ঢাকা মহানগরের বিভিন্ন ওয়ার্ড, থানা ও ইউনিয়ন থেকে শত শত মিছিল আসতে থাকে। শেখ হাসিনা ৪টা ২২ মিনিটে জনসভাস্থলে পৌঁছেন। এর আগেই পুরো মাঠ কানায় কানায় পূর্ণ হয়। বিদেশিদের কাছে কান্নাকাটি করে দেশের বদনাম করা থেকে বিরত থাকার জন্য খালেদা জিয়ার প্রতি আহ্বান জানিয়ে প্রধানমন্ত্রী বলেন, রাজনীতিতে ভুল সিদ্ধান্ত নিয়ে যারা ৫ জানুয়ারির নির্বাচনে আসেনি, নির্বাচন ঠেকাতে পারেনি তারা দেশের মানুষের সমর্থন না পেয়ে বিদেশি প্রভুদের পা ধরে কান্নাকাটি শুরু করেছে। তবে আওয়ামী লীগ কখনো বিদেশি প্রভুদের পা ধরে না। এদেশের মানুষের উপর ভরসা করে আওয়ামী লীগ। বিএনপির প্রতি ইঙ্গিত করে তিনি বলেন, যারা সরকারের কর্মকাণ্ড নিয়ে আবোল-তাবোল বকে যাচ্ছে তাদের ব্যথা কেথায় তা বুঝি। তবে ভুল করলে তো খেসারত দিতেই হবে।


সুইস ব্যাংকে পাচারকৃত সকল অর্থ ফেরত আনার ঘোষণা দিয়ে শেখ হাসিনা বলেন, সুইস ব্যাংকে কার কার টাকা আছে সে ব্যাপারে খোঁজ-খবর নেয়া হচ্ছে। কার কার টাকা আছে তালিকা আনবো। বিএনপি নেত্রীর এক পুত্রের টাকা যেমন ফেরত এনেছি, তেমনি এ টাকাও ফেরত আনব। তিনি বলেন, শুধু সুইস ব্যাংক কেন, বিশ্বের যেখানেই অর্থ পাচার করা হয়েছে সব তথ্যই আমরা জোগাড় করার চেষ্টা করছি। উনার ছেলের পাচারকৃত অর্থ সুইস ব্যাংকেও আছে কি না জানার চেষ্টা করা হচ্ছে। এখানে উনারও (খালেদা) টাকা রয়েছে, উনিও যে ধরা খাবেন এতে কোন সন্দেহ নেই।


প্রধানমন্ত্রী বলেন, ৫ জানুয়ারির নির্বাচন ঠেকাতে নির্বিচারে গাড়িতে আগুন দিয়ে মানুষকে পুড়িয়ে হত্যা ও রাষ্ট্রের সম্পদ ধ্বংস কার নির্দেশে হয়েছে? খালেদা জিয়ার নির্দেশেই জামায়াতকে সঙ্গে নিয়ে বিএনপি এসব হত্যাকাণ্ড চালিয়েছে। কিন্তু নির্বাচন ঠেকাতে পারেনি। গণতান্ত্রিক অগ্রযাত্রা ও সুরক্ষায় ৫ জানুয়ারির নির্বাচন অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ছিল। সংলাপ প্রসঙ্গে তিনি বলেন, নির্বাচনের আগে আমরা তো অনেক চেষ্টা করেছি। আলাপ-আলোচনা টেলিফোন সবই করেছি। কিন্তু টেলিফোন ধরতেই তার কয়েক ঘণ্টা লাগে। টেলিফোনে তাঁর (খালেদা জিয়া) কথা ও ঝাড়িমারা দেশবাসী শুনেছে। তিনি বলেন, ২০০১ সালে ক্ষমতায় একাত্তরের কায়দায় বিএনপি-জামায়াত যেভাবে মানুষ হত্যা, নির্যাতন, ধর্ষণ করেছে, ঠিক একই কায়দায় ৫ জানুয়ারি নির্বাচন ঠেকাতে আন্দোলনের নামে তারা মানুষ হত্যা, নির্যাতন করেছে। মূলত বিএনপি নেত্রী খালেদা জিয়া দেশের স্বাধীনতায় বিশ্বাস করেন না। এ কারণে একাত্তরের পরাজিতদের দোসর হিসেবে খালেদা জিয়া বাংলাদেশকে ব্যর্থ রাষ্ট্রে পরিণত করতে কাজ করেছেন। একটার পর একটা ঘটনা ঘটিয়ে বাংলাদেশকে ব্যর্থ রাষ্ট্র বানাতে চেয়েছিলেন। আসলে তার মনে এখনো আছে সেই পেয়ারে পাকিস্তান।


ওয়ান ইলেভেনের জন্য খালেদা জিয়াকে দায়ী করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, ক্ষমতায় থাকতে তাঁর দুঃশাসন, দুর্নীতি, সন্ত্রাস, বিদেশে অর্থ পাচার, জঙ্গীবাদ সৃষ্টি, বাংলা ভাই সৃষ্টি, ৫ শ' স্থানে বোমা হামলা, বৃটিশ হাই কমিশনারের ওপর গ্রেনেড হামলা এসব কারণেই দেশে ওয়ান ইলেভেন এসেছিল। আর সেনা সমর্থিত সেই সরকারের দুই বছরে দেশের সকল মানুষকে নির্যাতনের শিকার হতে হয়েছে।


জিয়া হত্যাকাণ্ড প্রসঙ্গে প্রধানমন্ত্রী আরো বলেন, জিয়া হত্যার পর একটি বাক্স আনা হলো। সেই বাক্সে কী ছিল? সেই বাক্সে লাশ আছে কি না সেটাও তার স্ত্রী খালেদা জিয়া দেখলেন না কেন? তার ছেলের বয়স তো তখন ১৪/১৫ হবে। ছেলেও কেন তার মৃত বাবার মুখ দেখতে চায়নি? আসলে এর পেছনে রহস্যটা কী? তিনি বলেন, জিয়া হত্যাকাণ্ডের ৯ বছর পর খালেদা জিয়া '৯০ সালে গুলিস্তানের একটি সমাবেশ থেকে দাবি করলেন তাঁর স্বামীর হত্যাকারী নাকি জেনারেল এরশাদ! এতোদিন পর তার এটি মনে হলো? প্রধানমন্ত্রী বলেন, জেনারেল জিয়া হত্যাকাণ্ডের পর একমাত্র আমিই প্রথম বিবৃতি দিয়ে সাংবিধানিক ক্ষমতা যাতে ব্যাহত না করা হয় সেই আহ্বান করেছিলাম। অন্য কেউ মুখ খোলারও সাহস পায়নি। এরপর দলের ওয়ার্কিং কমিটির বৈঠক করে সবরকম চেষ্টা করেছি যাতে গণতন্ত্র ব্যাহত না হয়, সামরিক শাসন জারি করা না হয়। তিনি বলেন, জিয়ার পদাঙ্ক অনুসরণ করে জেনারেল এরশাদও ক্ষমতা গ্রহণ করেন।


শেখ হাসিনা বলেন, জেনারেল জিয়া বন্দুকের নল ধরে ক্ষমতা দখল করেছিলেন। তার যে নলে আগমন ঘটেছিল সেই নলেই গমন হয়েছে। এই জেনারেল জিয়া নির্বাচিত নন, ঘোষিত রাষ্ট্রপতি ছিলেন। বঙ্গবন্ধুকে হত্যার পর অবৈধভাবে নিজেকে রাষ্ট্রপতি ঘোষণাকারী খুনি মোশতাক সেনাপ্রধান হিসেবে জিয়াকেই বেছে নিয়েছিলেন। বঙ্গবন্ধু হত্যার দোসর কে ছিল এতেই তা পরিষ্কার হয়। বঙ্গবন্ধুই এই জিয়াকে তাঁর পরিবার রক্ষার স্বার্থে উপ-সেনাপ্রধান করে কুমিল্লা থেকে ঢাকায় এনেছিলেন। অথচ মোশতাকের সঙ্গে হাত মিলিয়ে জিয়াও বঙ্গবন্ধুর সঙ্গে গাদ্দারি করেন। আর বঙ্গবন্ধুর আত্মস্বীকৃত খুনি কর্নেল ফারুকও বিবিসিতে সাক্ষাত্কার দিয়ে জিয়া যে জড়িত ছিল তা স্বীকার করেছে। ফারুক বলেছে, ১৫ আগস্ট বঙ্গবন্ধু সপরিবারে হত্যার আগে জেনারেল জিয়ার সঙ্গে তাদের কথা হয়েছে, জিয়া তাদের সফলতা কামনা করেছেন। বঙ্গবন্ধুকে হত্যার পর এই জিয়াই খুনীদের বিভিন্ন দূতাবাসে চাকরি দিয়ে পুরস্কৃত করেন। এর কী অর্থ দাঁড়ায়?


জিয়াউর রহমানের শাসনামলের সমালোচনা করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, জিয়ার বন্দুকের নল দিয়ে ক্ষমতা দখলের পর সামরিক বাহিনীতে ১৮/১৯টি ক্যু হয়। প্রতিটি ক্যু-এর পর জেনারেল জিয়া হাজার হাজার সেনা অফিসার ও সৈনিককে নির্বিচারে হত্যা করেন। স্বাধীন বাংলাদেশে কেউ যাতে স্বাধীনতার সুফল পেতে না পারে সে জন্য জিয়া একে একে সকল প্রতিষ্ঠানকে ও চেতনাকে ধ্বংস করেছিলেন। তিনি বলেন, আওয়ামী লীগের ওপর বার বার আঘাত এসেছে। আওয়ামী লীগকে ধ্বংস করতে ও ভাঙ্গতে জেনারেল জিয়াও অনেক চেষ্টা করেন, কিন্তু পারেননি। আওয়ামী লীগ হীরের টুকরোর মতো। যতই কাটবে ততই উজ্জ্বল আলোকরশ্মি বের হবে। আর এ আলোকরশ্মিতে বাঙালি জাতি উদ্ভাসিত হবে। তিনি বলেন, আওয়ামী লীগ হচ্ছে বাঙালি জাতি দ্বারা গঠিত সংগঠন। সেই সংগঠনকে বার বার আঘাত করেও কেউ দমাতে পারেনি। শত ঘাত-প্রতিঘাত মোকাবেলা করেই আওয়ামী লীগ মাথা উঁচু করে দাঁড়িয়েছে, জনগণের জন্য কাজ করেছে। বাংলাদেশ এখন বিশ্বের উন্নয়নের রোল মডেল।


প্রধানমন্ত্রী বলেন, আমাকে হত্যা করতে বারবার হামলা চালানো হয়েছে। চট্টগ্রামে আমাকে হত্যার উদ্দেশ্যে পরিচালিত হামলায় আওয়ামী লীগের ৩০ নেতাকর্মী নিহত হয়েছে। অথচ খালেদা জিয়া সেই হত্যাকাণ্ডের সঙ্গে জড়িত পুলিশ অফিসার হুদাকে পদোন্নতি দেন। ২১ আগস্ট গ্রেনেড হামলা চালিয়ে ২৪ নেতাকর্মীকে হত্যা করেন খালেদা জিয়া। উনি অর্থমন্ত্রী কিবরিয়া, সংসদ সদস্য আহসান উল্লাহ মাস্টার, মমতাজ উদ্দিনসহ শত শত আওয়ামী লীগের নেতাকর্মীদের হত্যা করেছেন। আর সর্বশেষ নির্বাচন ঠেকাতে খালেদা জিয়া একাত্তরের কায়দায় দেশের মানুষকে নির্যাতন করেছেন, নির্মম-নৃশংসভাবে পুড়িয়ে মানুষ হত্যা করেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, যারা স্বাধীনতার জন্য আত্মত্যাগ করে তারা ক্ষমতায় থাকলে দেশের মানুষ কিছু পায়। আর যারা ক্ষমতা দখলকারী, উড়ে এসে জুড়ে বসে তারা ক্ষমতায় আসলে শুধু নিজেদের ভাগ্য পরিবর্তন করে। জিয়া হত্যার পর রেখে যাওয়া ভাঙ্গা-স্যুটকেস ছেঁড়াগেঞ্জি যাদুর বাক্স হয়ে গিয়েছিল। সেই যাদুর বাক্স থেকে শুধু সম্পদ বের হয়, জিয়া পরিবার অসংখ্য ব্যাংক-প্রতিষ্ঠানের মালিক হয়েছে, বিদেশে বিপুল পরিমাণ অর্থ পাচার করেছে। বিএনপি নেত্রী ২/৩ লাখ টাকার দামি শিফন শাড়ি পরে ঘুরে বেড়ান। এতো অর্থ তিনি কোথায় পেলেন? দুর্নীতি করেই তারা এত সম্পদের মালিক হয়েছেন। তিনি বলেন, আওয়ামী লীগ ক্ষমতায় এসে জনগণকে দেয়, আর বিএনপি ক্ষমতায় এসে জনগণের অর্থ-সম্পদ লুটে নিয়ে যায়। ১৯৯৬ সালে প্রথম জনগণ উপলব্ধি করেন, সরকার মানে জনগণের সেবক।


শেখ হাসিনা বলেন, নিজেদের অর্থেই পদ্মা সেতু করছি। আমরা কারো কাছে মাথানত করবো না ইনশাল্লাহ। কয়েকদিনের মধ্যেই সেতুর নির্মাণ কাজ শুরু হবে। বাংলাদেশ আজ সব দিক থেকে এগিয়ে যাচ্ছে। আমাদের অর্থনীতি আজ খুবই শক্তিশালী। বর্তমানে রিজার্ভ ২১ বিলিয়ন মার্কিন ডলার। ২০২১ সালের মধ্যে আমরা ক্ষুধা-দারিদ্র্যমুক্ত দেশকে মধ্যম আয়ের দেশে পরিণত এবং ২০৪১ সালের মধ্যে আমরা বিশ্বের মধ্যে উন্নত-সমৃদ্ধ, শক্তিশালী অর্থনৈতিক উন্নত দেশ হিসেবে গড়ে তুলবো। বঙ্গবন্ধু বাংলাদেশকে প্রাচ্যের সুইজারল্যান্ড হিসেবে গড়ে তুলতে চেয়েছিলেন। ইনশাল্লাহ আমরা বঙ্গবন্ধুর স্বপ্ন পূরণে বাংলাদেশকে সুইজারল্যান্ড হিসেবে গড়ে তুলবো।


জনসভায় আরও বক্তব্য রাখেন আওয়ামী লীগের প্রবীণ নেতা আমির হোসেন আমু, তোফায়েল আহমেদ, সুরঞ্জিত সেনগুপ্ত, বেগম মতিয়া চৌধুরী, সাহরা খাতুন, সাধারণ সম্পাদক সৈয়দ আশরাফুল ইসলাম, ডা. দীপু মনি, এম এ আজিজ, খাদ্যমন্ত্রী কামরুল ইসলাম প্রমুখ। মঞ্চে দলের কেন্দ্রীয় ও মহানগর নেতৃবৃন্দ উপস্থিত ছিলেন। জনসভা শেষে অনুষ্ঠিত হয় মনোজ্ঞ সাংস্কৃতিক অনুষ্ঠান। এতে দেশের প্রথিতযশা শিল্পীরা সংগীত পরিবেশন করেন।


শিল্পমন্ত্রী আমির হোসেন আমু বলেন, দেশকে এগিয়ে নিতে আওয়ামী লীগের প্রতিটি নেতাকর্মী ঐক্যবদ্ধ থাকতে হবে।


বাণিজ্যমন্ত্রী তোফায়েল আহমেদ বলেন, তত্ত্বাবধায়ক সরকার ব্যবস্থা এখন অতীত ইতিহাস। এটি আর কোন দিন ফিরে আসবে না। তিনি বলেন, নির্বাচনের আগে বিএনপি নেত্রীকে সংলাপে ডাক দিয়েছিলেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনা। কিন্তু তিনি সাড়া না দিয়ে দেশকে ব্যর্থ রাষ্ট্র বানাতে চেয়েছিলেন। এখন সংলাপ চায়, কিন্তু সংলাপ হবে না। নির্বাচন হবে ২০১৯ সালে। আর ওই নির্বাচন হবে শেখ হাসিনার অধীনেই। ওই নির্বাচনে আগে সংলাপ হতে পারে।


সুরঞ্জিত সেনগুপ্ত বিএনপি নেত্রীর সমালোচনা করে বলেন, যখন ভারতের রাষ্ট্রপতি দেশে এসেছিলেন তখন হরতালের দোহাই দিয়ে বিএনপি নেত্রী তার সাথে দেখা করেননি। আর এখন ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী আসার খবর শুনে বিএনপি নেত্রী দেখা করার জন্য আগেভাগেই বসেছিলেন, জামদানি শাড়িও কিনে রাখেন। তিনি বলেন, বিএনপি নেত্রী নির্বাচনে না এসে হেরে গিয়ে এখন বুঝতে পারছেন শেখ হাসিনা কি জিনিস। একেই বলে রাজনীতি, একেই বলে কূটনীতি।


কৃষিমন্ত্রী বেগম মতিয়া চৌধুরী বলেন, আওয়ামী লীগের শিকড় অনেক গভীরে। যতদিন দেশের জনগণ থাকবে ততদিন আওয়ামী লীগ থাকবে।


সৈয়দ আশরাফুল ইসলাম বলেন, সরকার, রাজনৈতিক দল ও গণমাধ্যম এই তিনটি হচ্ছে গণতন্ত্রের জন্য প্রধান স্তম্ভ। সবাই মিলে একত্রিত হয়ে গণতন্ত্রের এই অগ্রযাত্রাকে এগিয়ে নিতে হবে। এখানে কেউ একজন যদি আমরা ভুল করি বাংলাদেশের গণতন্ত্রের জন্য ভয়াবহ রূপ আসতে পারে। তিনি বলেন, অনেকে না বুঝে না জেনে গণতান্ত্রিক যাত্রাকে ব্যাহত করার চেষ্টা করছে। সরকারের যেমন গণমাধ্যমের প্রতি দায়িত্ব রয়েছে, তেমনি গণমাধ্যমেরও সরকারের প্রতি দায়িত্বশীল আচরণ করার প্রয়োজন রয়েছে। নারায়ণগঞ্জের উপ-নির্বাচন ঘিরে সংবাদ পরিবেশনে কয়েকটি দৈনিকের 'পক্ষপাতিত্বের' সমালোচনা করে সৈয়দ আশরাফ বলেন, সংবাদ মাধ্যম কোনো পক্ষ নিলে তাদের আর নিরপেক্ষ দৃষ্টিভঙ্গি থেকে খবর প্রকাশের নীতিতে থাকে না। তিনি বলেন, নারায়ণগঞ্জে উপ-নির্বাচন আসার সঙ্গে সঙ্গে কিছু মহল সারা বাংলাদেশে অতি চিত্কার শুরু করলো, এটা একটা নিছক মামুলি উপ-নির্বাচন। প্রথমে আওয়ামী লীগকে সেখানে জড়ানোর চেষ্টা করা হলো। না পেরে তারা বললো, এই উপ-নির্বাচন একদিকে নারায়ণগঞ্জবাসীর, আরেক দিকে ওসমান পরিবার। ওই নির্বাচনের প্রক্রিয়া শুরু হওয়ার সঙ্গে সঙ্গে দুঃখের বিষয় কয়েকটি জাতীয় পত্রিকা সেই নির্বাচনটাকে ওসমান পরিবার বনাম নারায়ণগঞ্জবাসীর এভাবে উল্লেখ করতে চেয়েছিল। আমার আসলে দুঃখ হয়, তারা ওসমান পরিবার সম্পর্কে কিছু জানে না বা জানলেও অজানার ভাব করে। তিনি বলেন, নারায়ণগঞ্জের ওসমান পরিবার আওয়ামী লীগের। এই ওসমান পরিবারকে, এই খান সাহেব ওসমানকে আমরা আওয়ামী লীগের ইতিহাস থেকে মুছে ফেলতে পারবো না। খান সাহেব ওসমান আওয়ামী লীগের অন্যতম প্রতিষ্ঠাতা। আওয়ামী লীগের জন্মের অন্যতম স্থান এই নারায়ণগঞ্জ। এই ওসমান পরিবারে আজ পর্যন্ত যারা রাজনীতি করেছেন, তারা অনেক ত্যাগ স্বীকার করেছেন।


http://www.allbanglanewspapers.com/ittefaq.html

জিয়ার পুরো পরিবার খুনি: শেখ হাসিনা

প্রতিষ্ঠাবার্ষিকীর আলোচনা সভায় আওয়ামী লীগের সভানেত্রী শেখ হাসিনা। আজ শুক্রবার বিকেলে রাজধানীর সোহরাওয়ার্দী উদ্যানে এ আলোচনা সভা হয়। ছবি: ফোকাস বাংলাপ্রতিষ্ঠাবার্ষিকীর আলোচনা সভায় আওয়ামী লীগের সভানেত্রী শেখ হাসিনা। আজ শুক্রবার বিকেলে রাজধানীর সোহরাওয়ার্দী উদ্যানে এ আলোচনা সভা হয়। ছবি: ফোকাস বাংলাসাবেক প্রেসিডেন্ট জিয়াউর রহমানের পুরো পরিবারকে খুনি বলে মন্তব্য করেছেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনা।

আজ শুক্রবার বিকেলে রাজধানীর সোহরাওয়ার্দী উদ্যানে আওয়ামী লীগের প্রতিষ্ঠাবার্ষিকীর তিন দিনব্যাপী অনুষ্ঠানের শেষ দিনের অনুষ্ঠানে প্রধান অতিথির বক্তব্যে শেখ হাসিনা এ মন্তব্য করেন।

এ ছাড়াও বঙ্গবন্ধু শেখ মুজিবুর রহমানকে হত্যার পর মোশতাকের রাষ্ট্রপ্রধান ও জিয়াউর রহমানের সেনাপ্রধান হওয়া; ৫ জানুয়ারির নির্বাচন ঠেকাতে খালেদা জিয়ার 'জ্বালাও-পোড়াও' কর্মসূচি; সুইস ব্যাংকে টাকা পাচার, আওয়ামী লীগের অতীত ইতিহাসসহ তাঁর শাসনামলের নানা বর্ণনা তুলে ধরে বক্তব্য দেন শেখ হাসিনা।

এর আগে গতকাল বৃহস্পতিবার ও গত পরশু বুধবার একই স্থানে আওয়ামী লীগের প্রতিষ্ঠাবার্ষিকীর অনুষ্ঠান কর্মীশূন্য ছিল। তবে আজ শেষ দিনের অনুষ্ঠানস্থলে লোক সমাগম ছিল ব্যাপক।

শেখ হাসিনা বলেন, 'জিয়াউর রহমানের পুরো পরিবার খুনি। অন্যকে সরিয়ে বন্দুকের নলে ক্ষমতায় গিয়ে সে পথেই ক্ষমতা হারান জিয়াউর রহমান।' তিনি বলেন, ১৯৮১ সালে খুন হন জিয়া, এর ৯ বছর পর বিএনপির চেয়ারপারসন খালেদা জিয়া তাঁর স্বামী জিয়াউর রহমান হত্যার জন্য এরশাদকে দায়ী করেন। কিন্তু জিয়া হত্যার পর এরশাদের কাছ থেকেই তিনি দুটি বাড়ি নিয়েছেন। জিয়ার খুনের সুফল ভোগ করছেন।

প্রধানমন্ত্রী বলেন, খালেদা জিয়া তাঁকেও (শেখ হাসিনাকে) হত্যা করার চেষ্টা করেছেন। খালেদা জিয়ার ছেলে তারেক রহমানও একজন খুনি।

মোশতাক আ.লীগের কুলাঙ্গার

বক্তব্যে খন্দকার মোশতাককে আওয়ামী লীগের 'কুলাঙ্গার' আখ্যায়িত করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, বঙ্গবন্ধু শেখ মুজিবুর রহমানকে সপরিবারে হত্যাকাণ্ডের পর 'কুলাঙ্গার' মোশতাক নিজেকে রাষ্ট্রপতি ঘোষণা করেছিলেন। এরপর তিনি জিয়াউর রহমানকে সেনাপ্রধান করেছিলেন।

আ.লীগ হীরার খণ্ড, কাটলেই দ্যুতি ছড়াবে

১৯৭৫-এর পর থেকেই আওয়ামী লীগ ভাঙার ষড়যন্ত্র হয়েছে উল্লেখ করে শেখ হাসিনা বলেন, আওয়ামী লীগ হীরার খণ্ড, তাকে যতই কাটা হবে, ততই দ্যুতি ছড়াবে। প্রধানমন্ত্রী বলেন, মোশতাক এসে আওয়ামী লীগকে ভেঙে নতুন নামে দল গঠন করতে চেয়েছিলেন।

শেখ হাসিনা বলেন, তিনি সভাপতি হওয়ার আগে আওয়ামী লীগকে ভাঙার ষড়যন্ত্র হয়েছে। ১৯৭৫ সালে সপরিবারে জাতির পিতাকে হত্যার ২১ বছর পর ১৯৯৬ সালে আওয়ামী লীগ ক্ষমতায় আসে।

বঙ্গবন্ধু হত্যায় ফারুকদের সফলতা চেয়েছিল জিয়া

বিবিসি বাংলায় বঙ্গবন্ধুর আত্মস্বীকৃত খুনি ফারুকের এক সাক্ষাত্কারের উদ্ধৃতি দিয়ে শেখ হাসিনা বলেন, 'জিয়াউর রহমানের সঙ্গে তাদের (ফারুকদের) সম্পর্ক ছিল। জিয়াও তাদের এ কাজে সফলতা চেয়েছিল।'

প্রধানমন্ত্রী বলেন, 'আওয়ামী লীগের ইতিহাস বিশাল ইতিহাস, এত কম সময়ে বলে শেষ করা যাবে না। বাঙালির সব অর্জনের পেছনে আছে আওয়ামী লীগের অবদান।'

পাচার করা টাকা এনেছি, সুইস ব্যাংকেরও আনব

প্রধানমন্ত্রী বলেন, 'সম্প্রতি সুইস ব্যাংকে রাখা দেশের টাকা নিয়ে কথা বলা হচ্ছে। আমরা ক্ষমতায় থাকলে সুইস ব্যাংকে কে কত টাকা রেখেছে, তা বের করব। শুধু বেরই করব না, দেশে ফিরিয়ে আনব। অতীতে যেমন বিএনপির চেয়ারপারসন খালেদা জিয়ার ছেলের পাচার করা টাকা বিদেশ থেকে ফেরত এনেছি। সুইস ব্যাংকে রাখা টাকাও আমরা ফেরত আনব।'

অন্যরা ক্ষমতায় আসে খেতে, আমরা কাজ করতে

১৯৭১ সালের পর থেকে এখন পর্যন্ত ক্ষমতায় আসা দলগুলোর নানা নেতিবাচক কর্মকাণ্ডের কথা তুলে ধরে শেখ হাসিনা বলেন, 'অন্য দলগুলো খেতে ক্ষমতায় আসে। আর আওয়ামী লীগ আসে দেশের মানুষের জন্য কাজ করতে। আমরা কাজ করি মনের টানে। ২০৪১ সালের মধ্যে বাংলাদেশকে একটি শক্তিশালী দেশ হিসেবে আমরা গড়ে তুলতে চাই।' তিনি বলেন, 'দেশের ৪ কোটি ৮০ লক্ষ লোক এখন ইন্টারনেট ব্যবহার করছে। আমাদের শাসনে দেশের ৫ কোটি মানুষ নিম্নবিত্ত থেকে মধ্যবিত্তে উঠে এসেছে।'

আ.লীগ বিদেশের প্রভুদের পায়ে ধরে না

প্রধানমন্ত্রী বলেন, 'রেললাইন তুলে ফেলে, জ্বালাও পোড়াও করে, মানুষ খুন করে খালেদা জিয়া ৫ জানুয়ারির নির্বাচন ঠেকাতে পারেননি। নির্বাচন ঠেকাতে না পেরে তিনি বিদেশি প্রভুদের পায়ে কান্না করছেন। কিন্তু আওয়ামী লীগ কখনো বিদেশের প্রভুদের পায়ে ধরে না। আওয়ামী লীগের শক্তি এ দেশের মানুষ।'

বঙ্গবন্ধুর সময়ে ৭ শতাংশ প্রবৃদ্ধি

বঙ্গবন্ধুর শাসনামলে বাংলাদেশে ৭ শতাংশ প্রবৃদ্ধি হয়েছে বলে দাবি করে শেখ হাসিনা বলেন, 'এই প্রবৃদ্ধি যারা চায় নাই, তারা বঙ্গবন্ধুকে হত্যা করেছে। এরপরও ক্ষান্ত হয়নি, জেলে ঢুকে ৩ নভেম্বর জাতীয় চার নেতাকেও তারা হত্যা করেছে।'

http://www.prothom-alo.com/bangladesh/article/252739/%E0%A6%9C%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%B0_%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%8B_%E0%A6%AA%E0%A6%B0%E0%A6%BF%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%B0_%E0%A6%96%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%BF_%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%96_%E0%A6%B9%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A6%BE

ভারতের চোখে সুষমার ঢাকা সফর 'চমত্কার সূচনা'

ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজবাংলাদেশের সঙ্গে সম্পর্ককে এগিয়ে নিতে ভারতের নতুন সরকারের পক্ষ থেকে সুষমা স্বরাজের ঢাকা সফরকে 'চমত্কার সূচনা' হিসেবে দেখছে দিল্লি। বাংলাদেশের সরকারের সঙ্গে সুসম্পর্ক বজায় রাখতে চায় ভারত। তবে বাংলাদেশের জনগণকেই নিজেদের অভ্যন্তরীণ সমস্যার সমাধান করতে হবে।

আজ শুক্রবার দুপুরে সুষমা স্বরাজ ঢাকা ছাড়ার আগে বিমানবন্দরে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র সৈয়দ আকবরউদ্দীন সাংবাদিকদের কাছে এ মন্তব্য করেন।

তিন দিনের সফর শেষে আজ দুপুরে দিল্লি ফিরে গেছেন সুষমা স্বরাজ। বিমানবন্দরে তাঁকে বিদায় জানান পররাষ্ট্রসচিব মো. শহীদুল হক।

আজ সকালে বিএনপির চেয়ারপারসন খালেদা জিয়া হোটেল সোনারগাঁওয়ে সুষমা স্বরাজের সঙ্গে সৌজন্যসাক্ষাত্ করেন। খালেদা জিয়া আলোচনার একপর্যায়ে বাংলাদেশে গণতন্ত্র অনুপস্থিত বলে সুষমা স্বরাজের কাছে উল্লেখ করেন। বিশ্বের বৃহত্তম গণতান্ত্রিক দেশ ভারত প্রতিবেশী দেশ বাংলাদেশে গণতন্ত্র দেখতে চায় কি না, সেটি সুষমা স্বরাজের কাছে জানতে চান খালেদা জিয়া।

বিএনপির নেতার সঙ্গে কী আলোচনা হয়েছে, জানতে চাইলে সৈয়দ আকবরউদ্দীন সরাসরি কোনো মন্তব্য করেননি। তবে তিনি বলেন, 'বাংলাদেশের সরকার ও সমাজের বিভিন্ন অংশের প্রতিনিধিরা ভারতের সঙ্গে আরও বন্ধুত্ব, ব্যাপক সহযোগিতা ও যোগাযোগ রাখতে আগ্রহী। এই উপলব্ধি নিয়ে আমরা ফিরে যাচ্ছি। আজ প্রধানমন্ত্রীর দুই উপদেষ্টা, রওশন এরশাদ ও খালেদা জিয়ার সঙ্গে বৈঠকের পর এ উপলব্ধি হয়েছে।'

সুষমা স্বরাজের ঢাকা সফরকে 'চমত্কার সূচনা' হিসেবে আখ্যায়িত করে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র বলেন, একে অন্যের উদ্বেগ দূর করা এবং একে অন্যের প্রতি সুপ্রতিবেশীসুলভ দৃষ্টিভঙ্গি নিয়ে বাংলাদেশ-ভারত সম্পর্ককে এগিয়ে নেওয়ার ব্যাপারে ব্যাপক আকাঙ্ক্ষা চোখে পড়েছে।

ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ ভারত-বাংলাদেশ সম্পর্ক এগিয়ে নিতে বাংলাদেশের নেতৃত্বের সঙ্গে অব্যাহতভাবে কাজ করার ব্যাপারে আশাবাদী বলে আকবরউদ্দীন সাংবাদিকদের অবহিত করেন।

ভারতের নতুন সরকার পূর্ণ মেয়াদে বাংলাদেশের সঙ্গে সম্পর্ক বজায় রাখতে প্রস্তুত কি না, এমন প্রশ্ন করা হলে তিনি বলেন, 'সরকার কাজ করে সরকারের সঙ্গে। ভারতের সরকার বাংলাদেশের সরকারের সঙ্গে কাজ করবে। বাংলাদেশের অভ্যন্তরীণ বিষয়গুলো এ দেশের জনগণকেই সমাধান করতে হবে।'

ঢাকেশ্বরী মন্দিরে প্রার্থনা: সফরের শেষ দিনের শুরুতে ঢাকেশ্বরী মন্দিরে যান সুষমা। সেখানে বাংলাদেশ-ভারত সুসম্পর্ক এগিয়ে নেওয়ার ব্যাপারে প্রার্থনা করেন তিনি। এ সময় ঢাকেশ্বরী মন্দিরের নাটমন্দিরের সামনে ভক্তদের উদ্দেশে সুষমা স্বরাজ হিন্দিতে বক্তব্য দেন। যার অর্থ 'ভারত-বাংলাদেশের মধ্যে গভীর বন্ধুত্বপূর্ণ সম্পর্ক বিদ্যমান। এ সম্পর্ক আরও জোরালো হবে। দুই দেশের সম্পর্কে যেসব প্রতিবন্ধকতা আছে তা দূর করতে আমরা চেষ্টা চালিয়ে যাব। খোলা মন নিয়ে বাংলাদেশে এসেছি। কোনো ভুল-বোঝাবুঝি থাকবে না।'

প্রধানমন্ত্রীর মেয়ে ও বোনের সাক্ষাত্: ঢাকেশ্বরী মন্দির থেকে পরে সুষমা স্বরাজ হোটেলে ফিরে আসেন। সকালে হোটেল সোনারগাঁওয়ে সুষমা স্বরাজের সঙ্গে প্রথম সৌজন্যসাক্ষাত্ করতে যান প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার ছোট বোন শেখ রেহানা ও প্রধানমন্ত্রীর মেয়ে সায়েমা ওয়াজেদ পুতুল। এ সময় তাঁদের মধ্যে প্রায় আধা ঘণ্টা আলাপ হয়।

এরপর ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে সৌজন্যসাক্ষাত্ করতে যান প্রধানমন্ত্রীর দুই উপদেষ্টা মসিউর রহমান ও গওহর রিজভী। সবার শেষে হোটেল সোনারগাঁওয়ে সুষমা স্বরাজের সঙ্গে দেখা করেন খালেদা জিয়া। ঢাকা ছাড়ার আগে সুষমা স্বরাজ জাতীয় সংসদে বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদের সঙ্গে তাঁর সংসদ ভবনের কার্যালয়ে দেখা করেন।

গত বুধবার রাতে তিন দিনের 'শুভেচ্ছা সফরে' ঢাকায় আসেন সুষমা স্বরাজ।

http://www.prothom-alo.com/bangladesh/article/252703/%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A6%A4%E0%A7%87%E0%A6%B0_%E0%A6%9A%E0%A7%8B%E0%A6%96%E0%A7%87_%E0%A6%B8%E0%A7%81%E0%A6%B7%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%B0_%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE_%E0%A6%B8%E0%A6%AB%E0%A6%B0_%E2%80%98%E0%A6%9A%E0%A6%AE%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A6%B0_%E0%A6%B8%E0%A7%82%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E2%80%99




নেতাদের গণতন্ত্র চর্চার শিক্ষা দিয়ে গেলেন সুষমা

ঢাকা, ২৭ জুন:

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


ভারতের নবনির্বাচিত পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ তার ঢাকা সফরের মধ্যে দিয়ে বাংলাদেশের রাজনৈতিক নেতাদের গণতন্ত্র চর্চা ও দেশকে ভালোবাসার শিক্ষা দিয়ে গেলেন বলে মন্তব্য করেছেন বিএনপির স্থায়ী কমিটির সদস্য ব্যারিস্টার রফিকুল ইসলাম মিয়া। শুক্রবার দুপুরে জাতীয় প্রেসক্লাব ভিআইপি লাউঞ্জে ফ্রি থিংকাস ফোরাম আয়োজিত 'ভারতীয় রাজনীতিতে পরিবর্তন: দক্ষিণ এশিয়ার প্রভাব' শীর্ষক আলোচনা সভায় তিনি এ মন্তব্য করেন।

দৈনিক নয়া দিগন্তের সম্পাদক আলমগীর মহীউদ্দিনের সভাপতিত্বে আলোচনা সভায় আরো বক্তব্য রাখেন বিএনপির চেয়ারপার্সনের উপদেষ্টা ব্যারিস্টার হায়দার আলী, বাংলাদেশ ফেডারেল সাংবাদিক ইউনিয়নের সাবেক সভাপতি রুহুল আমীন গাজী, স্বাধীনতা ফোরামের সভাপতি আবু নাসের মো. রহমাতুল্লাহ প্রমুখ।

রফিকুল ইসলাম মিয়া বলেন, ঢাকা সফরের মধ্যে দিয়ে সুষমা স্বরাজ গণতন্ত্র চর্চা এবং দেশকে ভালোবাসার শিক্ষা দিলেন। আমি মূলত তার কাছ থেকে গণতন্ত্র চর্চা ও দেশকে ভালোবাসার শিক্ষাই নিয়েছি।

অপহরণ, গুম ও হত্যার সাথে জড়িত থাকার অভিযোগে বিএনপির চেয়ারপার্সন বেগম খালেদা জিয়া র‌্যাবকে বিলুপ্তির দাবি জানিয়েছেন- এই কথা উল্লেখ করে রফিকুল ইসলাম মিয়া বলেন, র‌্যাব আজ অর্থের বিনিময়ে মানুষ হত্যা করছে। ফলে র‌্যাবের উপর আজ জনগণের কোন আস্থা নেই। সুতরাং র‌্যাবকে পুনর্গঠন নয়, বিলুপ্তি করতে হবে। দুর্নীতির হাত থেকে দেশকে রক্ষা করতে না পারলে জনগণের মুক্তি আসবে না বলে মন্তব্য করে তিনি বলেন, অর্থনৈতিক মুক্তি ছাড়া দেশের প্রকৃত স্বাধীনতা পাওয়া যাবে না। তিনি দেশের সকল রাজনৈতিক নেতাদের গণতন্ত্র রক্ষার স্বার্থে নিজেদের চিন্তা ও চেতনার পরিবর্তন করার জন্য আহ্বান জানান।

নেতাকর্মীদের উদ্দেশ্য করে বিএনপির এই শীর্ষ নেতা বলেন, গণতন্ত্র রক্ষার স্বার্থে রাজপথে আমাদের আন্দোলন গড়ে তুলতে হবে। আর এই জন্য জেল-জুলুমের ভয় করলে চলবে না।

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116121#sthash.Fz7WZPgy.dpuf


রওশনকে ভারত সফরের আমন্ত্রণ জানালেন সুষমা

ঢাকা, ২৭ জুন:

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


জাতীয় সংসদের বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদের সঙ্গে সৌজন্য সাক্ষাত করছেন ঢাকায় সফররত ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ। শুক্রবার দুপুর পৌনে ১২টায় জাতীয় সংসদ ভবনের বিরোধীদলীয় নেতার কক্ষে এ বৈঠক শুরু হয়। ২০ মিনিট তারা একান্ত বৈঠক করেন বলে রওশন এরশাদের রাজনৈতিক সচিব গোলাম মসীহ এ তথ্য জানিয়েছেন।

বেলা ১১টা ৫০ মিনিটে সুষমা স্বরাজ সংসদ ভবনে পৌঁছালে রওশন এরশাদ ফুল দিয়ে তাকে স্বাগত জানান। এ সময় উপস্থিত ছিলেন, বিরোধী দলীয় নেতার একান্ত সচিব গোলাম মসিহ, বিরোধী দলীয় চিফ হুইপ তাজুল ইসলাম চৌধুরী। এদিকে সুষমা স্বরাজের সাথে ছিলেন, ঢাকায় নিযুক্ত ভারতের হাইকমিশনার পঙ্কজ শরন, ভারতের পররাষ্ট্র সচিব সুজাতা সিং।বৈঠক সূত্রে জানা গেছে, রওশন এরশাদকে ভারত সফরের আমন্ত্রণ জানিয়েছে সুষমা।

বৈঠক শেষে ১২টা ৪০ মিনিটে সুষমা স্বরাজ বেরিয়ে যান। এরপর রওশান এরশাদ সাংবাদিকদের বলেন, শুধুমাত্র সৌজন্য সাক্ষাত হয়েছে। সাংবাদিকদের এক প্রশ্নের জবাবে রওশন এরশাদ জানান, রাজনীতি নিয়ে বৈঠকে কোন আলোচনা হয়নি।

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116119#sthash.RoAgZt9k.dpuf


সুষমার সঙ্গে রেহানা-পুতুলের সাক্ষাত

ঢাকা, ২৭ জুন:

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সঙ্গে সাক্ষাত করেছেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার ছোট বোন শেখ রেহানা ও মেয়ে সায়মা ওয়াজেদ পুতুল। শুক্রবার সকাল ৯টা ২৫ মিনিটে এই দুই জন হোটেল সোনারগাঁওয়ে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সঙ্গে দেখা করতে হোটেলে যান। এর আগে ঢাকেশ্বরী মন্দির পরিদর্শন করেন সুষমা।

বুধবার রাতে তিন দিনের সফরে ঢাকা আসেন সুষমা স্বরাজ। গত মাসে ভারতের সাধারণ নির্বাচনে বিজেপি ক্ষমতায় যাওয়ার পর নতুন সরকারের পররাষ্ট্র মন্ত্রী হিসেবে দায়িত্ব পাওয়ার পর এটায় তার প্রথম বিদেশ সফর। সুষমা স্বরাজ বৃহস্পতিবার রাষ্ট্রপতি আবদুল হামিদ ও প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার সঙ্গে বৈঠক করেন। ভারত সফরের জন্য দেশটির প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির আমন্ত্রণ পত্র তুলে দেন শেখ হাসিনার হাতে। এছাড়া তিনি পররাষ্ট্র মন্ত্রী আবুল হাসান মাহমুদ আলীর সঙ্গে দ্বিপক্ষীয় বৈঠক করেন। তিনি বিএনপির চেয়ারপারসন খালেদা জিয়ার সঙ্গে বৈঠকে করছেন। এর পর বিরোধী দলীয় নেতা রওশন এরশাদের সঙ্গে বৈঠক শেষে দুপুরে সুষমা স্বরাজ বিশেষ বিমানে দিল্লি রওনা হবেন।

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116117#sthash.IPOEEYgP.dpuf



বাংলাদেশের গণতন্ত্র নিয়ে সুষমার কাছে খালেদার নালিশ

স্টাফ রিপোর্টার ॥ দেশে কোন গণতন্ত্র নেই। বর্তমান সরকার বাংলাদেশের জনগণের সত্যিকারের প্রতিনিধিত্ব করে না। বিশ্বের সবচেয়ে বড় গণতান্ত্রিক দেশ ভারত। পার্শ্ববর্তী দেশে গণতন্ত্র অনুপস্থিত থাকলে এ অঞ্চলের উন্নয়ন ব্যাহত হয়। গণতন্ত্র ব্যতিরেকে উন্নয়ন সম্ভব নয়। ঢাকায় সফররত ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ ও বিএনপি চেয়ারপার্সন বেগম খালেদা জিয়ার মধ্যে বৈঠককালে বিএনপির পক্ষ থেকে এ সব অভিযোগ তুলে ধরা হয়েছে। এ ছাড়া বৈঠকে দুই দেশের স্বার্থসংশ্লিষ্ট বিষয়ে আলোচনা হয়েছে। শুক্রবার হোটেল সোনারগাঁওয়ে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ ও বিএনপি নেত্রী বেগম খালেদা জিয়ার সঙ্গে আলোচনাকালে এ প্রসঙ্গে কথা বলেন খালেদা জিয়া। এ সময় সুষমা স্বরাজ উল্লেখ করেন বিশেষ কোন দল বা সরকার নয় ভারত সরকার দুই দেশের জনগণের সম্পর্ককে গুরুত্ব দিয়ে বিবেচনা করবে।

সকাল সাড়ে ১০টায় ঢাকা সফররত ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সঙ্গে বৈঠক করেন বিএনপি চেয়ারপার্সন বেগম খালেদা জিয়া। তাঁদের মধ্যে প্রায় আধাঘণ্টা ধরে বৈঠক হয়েছে বলে জানা গেছে। এ ছাড়া খালেদা জিয়া ও সুষমা স্বরাজ একান্তে প্রায় ১০ মিনিট কথা বলেন। এ সময় তাঁদের মধ্যে কী নিয়ে আলোচনা হয়েছে, তা জানা যায়নি।

বৈঠক শেষে বিএনপির স্থায়ী কমিটির সদস্য ও বিএনপির ভাইস চেয়ারম্যান শমসের মবিন চৌধুরী বৈঠকে দুইজনের আলাপের বিষয়বস্তু নিয়ে সাংবাদিকদের কাছে ব্রিফ করেন। শমসের মবিন বলেন, ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী বিএনপি চেয়ারপার্সনকে জানিয়েছেন, ভারতের নতুন সরকার কোন বিশেষ দল কিংবা বিশেষ সরকার নয়, পিপল-টু-পিপল সম্পর্ককে গুরুত্ব দিতে চায়।

বৈঠকের প্রসঙ্গ উল্লেখ করে শমসের মবিন আরও বলেন, বেগম খালেদা জিয়া বিএনপির পক্ষ থেকে জানিয়েছেন, বাংলাদেশের মানুষ ভারতের সঙ্গে সুসম্পর্ক গড়ে তুলতে চায়। ভারতের নির্বাচনের ফলাফলে বাংলাদেশের মানুষের মধ্যে আশার সঞ্চার হয়েছে। এটি দুই দেশের দ্বিপক্ষীয় সম্পর্কের ভিত্তিতে নতুন অধ্যায়ের সূচনা করবে। দুই দেশের মধ্যকার অমীমাংসিত বিষয়গুলো আলাপ-আলোচনা করে পারস্পরিক লাভের ভিত্তিতে সুরাহা হবে বলে উল্লেখ করেন। তিনি বলেন, বিএনপি চেয়ারপার্সনের সঙ্গে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর ফলপ্রসূ আলোচনা হয়েছে। দক্ষিণ এশীয় দেশগুলোর উন্নয়নের বিষয়ে বিশেষ গুরুত্ব দেয়া হয়েছে। ভারতের নতুন সরকার এ বিষয়টি গুরুত্ব দিচ্ছে।

সার্কের বিষয়ে বেগম খালেদা জিয়া সুষমা স্বরাজকে জানান, তাঁরা দক্ষিণ এশীয় আঞ্চলিক সহযোগিতা সংস্থা সার্ক গঠন করেছিলেন। সার্কের বিষয়ে বিএনপির আগ্রহ বেশি। আমরা চাই সার্ক আরও শক্তিশালী হোক। সুষমা স্বরাজ সার্কের বিষয়ে বলেন, এ বিষয়টি ভারত বেশি গুরুত্ব দিচ্ছে। আঞ্চলিক বিষয়গুলো পারস্পরিক অংশীদারিত্বের ভিত্তিতে সমাধান হবে।

http://www.dailyjanakantha.com/news_view.php?nc=15&dd=2014-06-28&ni=177351


দুই দেশ এক সঙ্গে এগিয়ে যাবে-সুষমার আশাবাদ

স্টাফ রিপোর্টার ॥ বাংলাদেশ ও ভারতের মধ্যে অংশীদারিত্বের সর্ম্পক আরও জোরালো হওয়ার আশাবাদ ব্যক্ত করেছে ভারত। দেশটির পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের ঢাকা সফরের মধ্য দিয়ে ভারতের নতুন সরকারের সঙ্গে বাংলাদেশের সম্পর্কের উত্তম সূচনা হলো বলেও জানিয়েছেন তাঁরা। সুষমার ঢাকা সফরকে অত্যন্ত সফল ও পরিপূর্ণ হিসেবে দেখছে ভারত। এ সফরের মধ্যে দুই দেশের সহযোগিতার ভিত আরও মজবুত হবে বলেও আশা করছে দেশটি। ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের ঢাকা ত্যাগের আগে দেশটির পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র সৈয়দ আকবর উদ্দিন এমনই অভিমত প্রকাশ করেছেন। ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ শুক্রবার দুপুর দেড়টায় বিশেষ বিমানে ঢাকা ত্যাগ করেন। ঢাকা ত্যাগের আগে শুক্রবার সকালে ঢাকেশ্বরী মন্দির পরিদর্শন করেন সুষমা স্বরাজ। একই সঙ্গে সকালে জাতীয় সংসদের বিরোধী দলের নেতা বেগম রওশন এরশাদের সঙ্গে বৈঠক করেন তিনি। এ ছাড়া তিনি বিএনপি চেয়ারপার্সন বেগম খালেদা জিয়ার সঙ্গেও বৈঠকে মিলিত হন। ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে সকালে প্রধানমন্ত্রীর উপদেষ্টা ড. মশিউর রহমান ও ড. গওহর রিজভী সৌজন্য সাক্ষাত করেন। একই সঙ্গে প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার বোন শেখ রেহানা ও মেয়ে সায়মা ওয়াজেদ পুতুল তাঁর সঙ্গে দেখা করেন।

ঢাকা সফরকালে ভারতের পক্ষ থেকে বলা হয়েছে, বাংলাদেশের অভ্যন্তরীণ রাজনীতি নিয়ে তাদের আগ্রহ নেই। বাংলাদেশের রাজনীতি নিয়ে অভ্যন্তরীণ যে সমস্যা রয়েছে তার সমাধান এখানকার জনগণকেই করতে হবে। ভারতের সঙ্গে বাংলাদেশে যে ঐতিহাসিক সম্পর্ক রয়েছে, সে সম্পর্ককে আরও সামনের দিকে এগিয়ে নিয়ে যেতে চায় ভারত। বাংলাদেশের সরকার ও জনগণের সঙ্গে ভারতের নতুন সরকার কাজ করে যাবে বলেও জানিয়েছে তারা। দুই দেশ একসঙ্গে এগিয়ে যাবে। এ ছাড়া দুই দেশের প্রধানমন্ত্রী সঙ্গে খুব শীঘ্রই বৈঠক হবে বলেও আশাবাদ ব্যক্ত করেছে ভারত।

ঢাকা ত্যাগের আগে সংবাদ সম্মেলন ॥ ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের বাংলাদেশ সফরকে অত্যন্ত ইতিবাচক, সফল ও পরিপূর্ণ হিসেবে দেখছে দেশটি। ঢাকা ত্যাগের আগ মুহূর্তে দেশটির পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে, ভারতের নতুন সরকার বাংলাদেশের সঙ্গে অতীতের আন্তরিকতা নিয়েই কাজ করতে আগ্রহী। শুক্রবার দুপুরে তিনদিনের ঢাকা সফর শেষে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজসহ তাঁর সঙ্গীরা হযরত শাহজালাল (র.) আন্তর্জাতিক বিমানবন্দর ত্যাগের আগে ভারতের পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র সৈয়দ আকবর উদ্দিন সংক্ষিপ্ত সংবাদ সম্মেলনে এসব কথা বলেন। তিনি বলেন, এ সফর ইতিবাচক ও পরিপূর্ণ।

সৈয়দ আকবর উদ্দিন বলেন, দুই দেশের সম্পর্ক সামনের দিকে এগিয়ে নিয়ে যেতে চায় ভারত। এখানের বিভিন্ন পক্ষের সঙ্গে যে বৈঠক হয়েছে, সেখানে সবাই ভারতের সঙ্গে বাংলাদেশের গভীর সম্পর্ক চান। এবারের সফরের মধ্য দিয়ে বিদ্যমান মধুর সম্পর্কের আরও চমৎকার অধ্যায় শুরু হলো। বাংলাদেশের আতিথেয়তায় আমরা মুগ্ধ। এ সফরের মাধ্যমে দুই দেশের সম্পর্ক আরও দৃঢ় হবে।

এ সময় সাংবাদিকদের এক প্রশ্নের উত্তরে সৈয়দ আকবর উদ্দিন বলেন, বাংলাদেশের রাজনীতি নিয়ে যে অভ্যন্তরীণ সমস্যা রয়েছে তার সমাধান দেশের জনগণকেই করতে হবে। ব্রিফিংয়ের সময় তাঁর সঙ্গে ছিলেন ভারতের পরারাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের যুগ্ম সচিব (বাংলাদেশ-মিয়ানমার) শ্রী প্রিয়া রঙ্গনাথ ও ঢাকার ভারতীয় দূতাবাসের কাউন্সিলর (রাজনৈতিক ও তথ্য) সুজিত ঘোষ।

ঢাকেশ্বরী মন্দির পরিদর্শন ॥ ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ শুক্রবার সকালে রাজধানীর ঢাকেশ্বরী মন্দির পরির্দশন করেন। এ সময় মন্দিরে পূজা দিয়ে ভারত-বাংলাদেশের মধ্যে বন্ধুত্বপূর্ণ সম্পর্ক অটুট থাকার প্রার্থনা করেন তিনি। ঢাকেশ্বরীতে পূজা দিয়ে নাট মন্দিরের সামনে গিয়ে এ প্রার্থনা করেন তিনি।

মন্দিরে উপস্থিত ভক্তদের উদ্দেশে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ বলেন, ভারত-বাংলাদেশের মধ্যে গভীর বন্ধুত্বপূর্ণ সম্পর্ক বিদ্যমান। এ সম্পর্ক আরও জোরালো হবে। দুই দেশের মধ্যে যেসব বাধা বিপত্তি তা দূর করতে আমরা চেষ্টা চালিয়ে যাব। খোলা মন নিয়ে বাংলাদেশে এসেছি। কোন ভুল বোঝাবুঝি থাকবে না।

গত কয়েক বছর ধরে বাংলাদেশ-ভারত খুবই মজবুত সম্পর্ক রয়েছে জানিয়ে তিনি বলেন, আশা করছি ভবিষ্যতেও তা অটুট থাকবে। আমাদের এ সম্পর্ক রক্তের বন্ধনে আবদ্ধ। মোদি সরকারের মন্ত্রিসভার এ সদস্য বলেন, বাংলাদেশ-ভারতের সম্পর্ক হচ্ছে পিপল টু পিপল। কে সরকারে এলো-গেলো তাতে সম্পর্কে কোন ছেদ পড়বে না।

তিনি আরও বলেন, প্রতিবেশী বাংলাদেশকে আমরা গুরুত্বের সঙ্গে বিবেচনা করি। কেননা, দেশটি আমাদের একেবারেই ঘনিষ্ঠ। তা ছাড়া দেশটির স্বাধীনতায় আমরা রক্ত দিয়েছি। এ সময় ভারতের পররাষ্ট্র সচিব সুজাতা সিং, বাংলাদেশে নিযুক্ত ভারতীয় হাইকমিশনার পঙ্কজ শরন, ডেপুটি হাইকমিশনার সন্দীপ চক্রবর্তী, তথ্য ও রাজনৈতিক কাউন্সিলর সুজিত ঘোষ, তথ্য ও সংস্কৃতিবিষয়ক সেকেন্ড সেক্রেটারি সিদ্ধার্থ চট্টোপাধ্যায় উপস্থিত ছিলেন। এ ছাড়া সেখানে উপস্থিত ছিলেন অধ্যাপক নিম চন্দ্র ভৌমিক, বাংলাদেশ পূজা উদযাপন পরিষদের সভাপতি বাসু দেব ধর, নির্মল চক্রবর্তী, অধ্যাপক পবিত্র কুমার প্রমুখ।

প্রধানমন্ত্রীর বোন ও মেয়ের সঙ্গে বৈঠক ॥ ঢাকা সফরের শেষ দিনে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজের সঙ্গে বৈঠক করেছেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার বোন শেখ রেহেনা ও মেয়ে সায়মা ওয়াজেদ পুতুল। শুক্রবার সকাল সাড়ে ৯টায় রাজধানীর হোটেল সোনারগাঁওয়ে ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে দেখা করতে হোটেলে যান তাঁরা। এ সময় বঙ্গবন্ধুর কন্যা ও নাতির সঙ্গে একান্তে আলাপ করেন সুষমা স্বরাজ। একই সঙ্গে তাদের পরিবারের খোঁজ-খবর নেন ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী।

http://www.dailyjanakantha.com/news_view.php?nc=15&dd=2014-06-28&ni=177339


অমীমাংসিত সব ইস্যু সমাধানে রওশনকে সুষমার আশ্বাস

স্টাফ রিপোর্টার ॥ বাংলাদেশের সঙ্গে ভারতের অমীমাংসিত বিভিন্ন বিষয়ের সমাধান চাইলেন সংসদে বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদ। জবাবে বাংলাদেশকে আগামীতেও সহযোগিতার আশ্বাস দিয়েছেন ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ। রওশনকে ভারত সফরের আমন্ত্রণ জানিয়েছেন দেশটির পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা। শুক্রবার দুপুর ১২টা থেকে প্রায় ২০ মিনিট সংসদ ভবনের বিরোধীদলীয় নেতার কার্যালয়ে সুষমা স্বরাজের সঙ্গে দ্বি-পাক্ষিক বৈঠক করেন রওশন।

বৈঠক শেষে রওশন এরশাদ জানান, দ্বিপাক্ষিক বৈঠকে বিদ্যুত, তিস্তার পানি ইস্যু এবং ছিটমহল নিয়ে আলোচনা হয়েছে। ভারত বাংলাদেশের বন্ধুরাষ্ট্র। বাংলাদেশের বিভিন্ন বিষয়ে তারা সহযোগিতা প্রদান করে আসছে। আগামীতেও এ সহযোগিতা অব্যাহত রাখার আশ্বাস দিয়েছেন সুষমা। তিনি বলেন, দুই দেশের অমীমাংসিত অনেক বিষয় নিয়ে আলোচনা হয়েছে। পর্যায়ক্রমে এগুলোর সমাধান হবে বলে আশ্বাস দিয়েছে সুষমা স্বরাজ। এর আগে বেলা ১১টা ৫০ মিনিটে সংসদ ভবনের গেটে ভারতীয় পররাষ্ট্র মন্ত্রীকে ফুলের তোড়া দিয়ে শুভেচ্ছা জানান রওশন এরশাদ। এ সময় উপস্থিত ছিলেন- বিরোধীদলীয় নেতার একান্ত সচিব গোলাম মসিহ, বিরোধীদলীয় চীফ হুইপ তাজুল ইসলাম চৌধুরী।

সুষমা স্বরাজের সঙ্গে ছিলেন ঢাকায় নিযুক্ত ভারতের হাইকমিশনার পঙ্কজ শরন, ডেপুটি হাইকমিশনার সুজিব চক্রবর্তী, ভারতের পররাষ্ট্র সচিব সুজাতা সিং, সুষমা স্বরাজের রাজনৈতিক সচিব সুজিত ঘোষ প্রমুখ।

বৈঠক শেষে সংবাদ সম্মেশলনে রওশন বলেন, মূলত বিদুত, সীমান্ত এবং তিস্তার পানি বণ্টন বিষয়ে আলোচনা হয়েছে। তিনি (সুষমা) বলেছেন, ভারত বাংলাদেশের 'পাওয়ার সেক্টরে' বিনিয়োগে আগ্রহী।

দুদেশের মধ্যে অমীমাংসিত বিষয়গুলোসহ যা যা সমস্যা আছে তা আলোচনার মাধ্যমে ধীরে ধীরে সমাধান করা হবে বলেও জানিয়েছেন তিনি। সর্বশেষ জাতীয় সংসদ নির্বাচনে সংসদের বিরোধী দল হয় জাতীয় পার্টি। বিরোধী দলের নেত্রী হন রওশন। এই হিসেবে সুষমার সঙ্গে বৈঠক করেছেন রওশন।

বৈঠক সূত্রে জানা গেছে, তিস্তা পানি চুক্তির বিষয়ে রওশন গুরুত্ব দেন। তিনি বলেন, তিস্তা নদীর পানির ওপর নির্ভর করে উত্তরাঞ্চলের ইরি ও বোর মৌসুম। এছাড়া ওই অঞ্চলের নদীতে পানি প্রবাহ, নদী ভিত্তিক জীবন জীবিকাও নির্ভর করে ভারত থেকে পানি ছাড়া না ছাড়ার ওপর। সঙ্গত কারণেই তিস্তা পানি চৃুক্তির বিকল্প নেই। পানি চুক্তি দ্রুত সম্পন্ন করার উদ্যোগ নিতে সুষমা স্বরাজের মাধ্যমে ভারত সরকারের প্রতি অনুরোধ জানান বিরোধী দলের নেতা।

বৈঠকে বাংলাদেশের সাম্প্রতিক নির্বাচন ইস্যুতের আলোচনা হয়েছে। সুষমা নির্বাচনসহ সরকার গঠনের সার্বিক বিষয়, অর্থনীতি, সামাজিক ও রাজনৈতিক বিভিন্ন বিষয়েও জানতে চান। রওশন সার্বিক বিষয় তুলে ধরে বলেন, পাঁচ জানুয়ারির নির্বাচন অনুষ্ঠিত না হলে বাংলাদেশের সামনে ছিল অনিশ্চিত ভবিষ্যত। এই প্রেক্ষাপটেই মুক্তিযুদ্ধের সপক্ষের রাজনৈতিক দল হিসেবে জাতীয় পার্টি নির্বাচনে অংশ নিয়েছে। যথাসময় নির্বাচন হওয়ায় বাংলাদেশের রাজনৈতিক পরিস্থিতি স্বাভাবিক রয়েছে বলেও জানান তিনি।

বুধবার তিনদিনের সফরে ঢাকায় আসেন ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী। বৃহস্পতিবার রাষ্ট্রপতি আবদুল হামিদ ও প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার সঙ্গে সাক্ষাত করেন। আনুষ্ঠানিক বৈঠক হয়েছে পররাষ্ট্রমন্ত্রী এএইচ মাহমুদ আলীর সঙ্গেও। এছাড়া প্রধানমন্ত্রীর বোন শেখ রেহানা ও মেয়ে সায়মা ওয়াজেদ পুতুলও শুক্রবার সকালে তাঁর সঙ্গে দেখা করেন। বিএনপি চেয়ারপার্সন খালেদা জিয়ার সঙ্গেও বৈঠক করেন তিনি। ঝটিকা সফর শেষে শুক্রবারেই ভারতের উদ্দেশে ঢাকা ছাড়েন সুষমা।

http://www.dailyjanakantha.com/news_view.php?nc=27&dd=2014-06-28&ni=177330


এ সরকারকে মানুষ আর চায় না: এরশাদ

অনলাইন ডেস্ক, ২৭ জুন

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


জাতীয় পার্টির (জাপা) চেয়ারম্যান ও প্রধানমন্ত্রীর বিশেষ দূত হুসেইন মুহম্মদ এরশাদ বলেছেন, "এ সরকারকে মানুষ আর দেখতে চায় না। তারা পরিবর্তন চায়। মানুষ আবার আমাদের ক্ষমতায় দেখতে চায়।" একই সঙ্গে তিনি বিএনপিরও সমালোচনা করে বলেন, হাওয়া ভবনের শাসনও আর মানুষ চায় না।

শুক্রবার রাতে রাজধানীর বনানীতে নিজ কার্যালয়ে বরিশাল মহানগর জাপার নেতাদের সঙ্গে মতবিনিময়কালে এসব কথা বলেন তিনি।

একমাত্র জাতীয় পার্টিই পারে সুশাসন দিতে-এমন দাবি করে এরশাদ  বলেন, 'মানুষ দুর্নীতি, ধান্দাবাজি, টাকা পাচার চায় না। আমার সময়ে বাজেট ছিল চার-পাঁচ হাজার কোটি টাকার। এখন এক ব্যাংক থেকেই তা লুট হচ্ছে।'

এরশাদ বলেন, 'বিএনপির মতো কুশাসন আর কখনো আসেনি। মানুষ আর হাওয়া ভবনের শাসন চায় না।' এ সরকারকেও মানুষ চায় না উল্লেখ করে তিনি বলেন, দুই দলের নামগন্ধও মানুষের মনে নেই। তারা মনেপ্রাণে পরিবর্তন চায়।

তিনি আরো বলেন, "আমাদের লক্ষ্য একটাই, আমরা বিএনপির জায়গায় যাব। প্রমাণ করব, আমরাই জাতীয়তাবাদী শক্তির একমাত্র ধারক-বাহক।"

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116138#sthash.Cx7ByqmS.dpuf

সফর ইতিবাচক: অভ্যরীণ বিষয়ে হস্তক্ষেপ করবে না ভারত

ঢাকা, ২৭ জুন:

প্রকাশ : ২৭ জুন, ২০১৪


তিনদিনের সফর শেষে ঢাকা ত্যাগ করেছেন ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ। শুক্রবার দুপুরে সুষমা স্বরাজসহ তার সঙ্গীরা হযরত শাহজালাল (র.) আন্তর্জাতিক বিমান বন্দর ত্যাগ করেন। বিমান বন্দর ত্যাগের আগে ভারতীয় পররাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের মুখপাত্র সৈয়দ আকবর উদ্দিন, ভারতের নতুন সরকার বাংলাদেশের সঙ্গে কাজ করতে আগ্রহী। বাংলাদেশের রাজনীতিসহ অন্য যেসব অভ্যন্তরীণ সমস্যা রয়েছে তার সমাধান দেশের জনগণকেই করতে হবে। তবে এবারে সফর ইতিবাচক।

দুদেশের মধ্যে ঐতিহ্যগত সম্পর্ক রয়েছে ভারত তা আরো সামনের দিকে এগিয়ে নিয়ে যেতে চায় উল্লেখ করে সৈয়দ আকবর বলেন, রাজনীতিবিদরা প্রত্যেকের উদ্বিগ্নতার কথা জানিয়েছেন। সবাই ভারতের সঙ্গে দেশের গভীর সম্পর্ক চান। এবারের সফরের মধ্যদিয়ে সম্পর্কের চমৎকার শুরু হলো। বাংলাদেশের আতিথিয়তায় আমরা মুগ্ধ। এ সফর ইতিবাচক। এর মাধ্যমে দু'দেশের সম্পর্ক আরো দৃঢ় হবে।

ব্রিফিংয়ের সময় তার সঙ্গে ছিলেন ভারতের পরারাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের যুগ্ম সচিব (বাংলাদেশ-মায়ানমার) শ্রী প্রিয়া রঙ্গনাথ।

ঢাকা ছাড়ার আগে দশম জাতীয় সংসদের বিরোধীদলীয় নেতা রওশন এরশাদের সঙ্গে দ্বি-পাক্ষিক বৈঠক করেন বাংলাদেশে সফররত ভারতের পররাষ্ট্রমন্ত্রী সুষমা স্বরাজ। এর আগে সকাল সাড়ে ১০টায় মিনিটে হোটেল সোনারগাঁওয়ে বিএনপি চেয়ারপারসন খালেদা জিয়ার সঙ্গে বৈঠক করেন সুষমা স্বরাজ।

বুধবার রাতে তিনদিনের সফরে ঢাকা আসেন সুষমা স্বরাজ। গত মাসে ভারতের সাধারণ নির্বাচনে বিজেপি ক্ষমতায় যাওয়ার পর নতুন সরকারের পররাষ্ট্র মন্ত্রী হিসেবে দায়িত্ব পাওয়ার পর এটায় তার প্রথম বিদেশ সফর। সুষমা স্বরাজ বৃহস্পতিবার রাষ্ট্রপতি আবদুল হামিদ ও প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনার সঙ্গে বৈঠক করেন। ভারত সফরের জন্য দেশটির প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির আমন্ত্রণ পত্র তুলে দেন শেখ হাসিনার হাতে। এছাড়া তিনি পররাষ্ট্র মন্ত্রী আবুল হাসান মাহমুদ আলীর সঙ্গে দ্বিপক্ষীয় বৈঠক করেন। আজ দুপুরে সুষমা স্বরাজ ঢাকা ত্যাগ করেন।

- See more at: http://www.jugantor.com/current-news/2014/06/27/116120#sthash.YSCffP5w.dpuf



भारते के पड़ोसियों से संबंध मधुर कभी नहीं रहे हैं।हिंदू राष्ट्र नेपाल से जैसे संबंध भारत के रहे हैं,वैसे अब नहीं है।तमिल समस्या की वजह से श्रीलंका के साथ तो कश्मीर विवाद के कारण पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध कब तक सामान्य होंगे ,कोई कह नहीं सकता।लेकिन बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम में भारत की भूमिका के मद्देनजर भारत बांग्लादेश संबंध मधुर ही होने चाहिए थे।ऐसा नहीं है।


बाकी पड़ोसियों की तरह बांग्लादेश पर भी चीनी असर प्रबल है और हाल में जापान और चीन के साथ बांग्लादेश के बड़े आर्थिक समझौते हुए हैं।


गौरतलब है कि भारत के नये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण राजसूय में इस्लामाबाद से भागे भागे चले आये जनाब नवाज शरीफ,लेकिन शेख मुजीबुररहमान की बेटी हसीना वाजेद तोक्यो चली गयीं।


न जातीं तो कैसे,बंगालदेश के लिए सबसे बड़े दाता का नाम जापान है।


दूसरी ओर,भारत की नयी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बांग्लादेश सफर के दौरान वहां के अखबारों में बाकायदा हिसाब छप रहा है कि भारत के साथ पिछले चालीस साल में स्वतंत्र बांग्लादेश की मैत्री के बदले उन्हें क्या मिला।भारतविरोधियों की मानें तो महज 62 करोड़।


इधर सबसे बड़ी समस्या मगर यह है कि क्षत्रपों के असर के कारण पड़ोसियों से राजनयिक संबंध भी सुधर नहीं रहे हैं।


तमिल राजनीति की बाध्यताओं के चलते दिवंगत प्रधानमंत्री राजीवगांधी ने तमिल भावनाओं में बहकर शीलंका के गृहयुद्ध का अवसान करना चाहा और झटपट वहां शांति सेना भेज दी।


श्रीलंका में शांति तो आ गयी लेकिन तमिल शरणार्थियों की समस्या पैदा हो गयी अलग से। इस कवायद में भारत के तमिलनाडु में आत्मघाती बम धमाके से राजीव गांधी की मौत हो गयी।


इसतरह कश्मीर समस्या की वजह से भारत पाक समस्या सुलझ नहीं रही है तो हम लोग पाकिस्तान की राजनीति पर सेना के वर्चस्व का हवाला देने के आदी है।


जम्मू कश्मीर में सत्ता संघर्ष हमारे हिसाब से बाहर है।


बांग्लादेश से हाल में संबंध सुधारने के मामले में सबसे बड़ी बाधा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खड़ी की है।


मातृभाषा साझा,संस्कृति भी साझा,तो ममता बनर्जी की भारत बांग्ला सेतु बतौर सबसे बड़ी भूमिका होनी चाहिए।


कामरेड ज्योति बसु ने पहल करके भारत बांग्ला जल बंटवारे समझौते को अंजाम देते रहे हैं।लेकिन ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद भारत बांग्ला राजनयिक संबंध बांग्लादेश की स्वदिष्ट मुर्दाघर की बर्फ में रखी जानेवाली मछली ईलिश जैसी हो गयी है।


दीदी ने सुषमा स्वराज को सलाह भी दी है कि वे कुछ करें या नकरें ,ढाका में ईलिश का स्वाद जरुर लें।सुषमा जी सात्विक सारस्वत ब्राह्मण हैं,ईलिश खाना उनके धर्म कर्म के मुताबिक है या नहीं हम नहीं जानते।लेकिन तिस्ता के पानी के प्रसंग में या विवादित गलियारों के छिटमहल समस्या सुलझाने में कोई पहल हो पायेगी,इसमें संदेह है।हालांकि इस पहल के लिए ममता दीदी से सहमति फोन पर लेकर गयी हैं सुषमा।


भारत बांग्ला सीमा से घुसपैठ की असली वजह अल्पसंख्यक उत्पीड़न है। अल्पसंख्यकों पर वहां लगातार जो अत्याचार होते रहे हैं,पूर्वी पाकिस्तान जमाने से ,उस पर भारत ने कभी ध्यान हीं नहीं दिया है।


हाल में पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के मामले में भारत खामोश रहा है।जबकि बाकी देशों में वहां असर करने वाले अल्पसंख्यक उत्पीड़न के मामले में तीखी प्रतिक्रिया होती रही है।


बांग्लादेश को ही लें,रोहिंगा मुसलमानों के खिलाफ उत्पीड़न के मामले में बांग्लादेश निरंतर मुखर है।


दूसरी ओर,बांग्लादेश में जब भी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का माहौल होता है तो हमेशा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है और सीमा पर शरणार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा है।भारत विभाजन के बाद लगातार ऐसा होता रहा है।


इस प्रलयंकर समस्या को लेकर ने पाकिस्तान से भारत सरकार ने कोई ऐतराज जताया और न बांग्लादेश से।जबकि बांग्लादेश युद्ध में भारतीय सैन्य हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि में वही शरणार्थी समस्या थी।नब्वे लाख शरणार्थी भारत आ गये थे तब।


इसी तर्क पर तब प्रतिपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने विश्वजनमत को भारत के पक्ष में कर लिया था। लेकिन इस सिलसिले में इंदिरा मुजीब समझौते और भारत में लागरिकता संशोधन कानून पारित करने के अलावा कोई द्विपाक्षिक पहल अभी हुई नहीं है।


अब तो बांग्लादेश में भी नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने को है।जिससे भारी समस्या उठ खड़ी होगी।


यह समझना भूल है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मात्र हिंदू हैं।


वहां के जनसंख्या विन्यास में एक करोड़ से ज्यादा हिंदू हैं तो लगभग इतने ही उर्दू भाषी बिहारी मुसलमान हैं।


चकमा बौद्ध आदिवासियों को चटगांव से निकाल बाहर करने के बाद भी भारी संख्या में बौद्ध भी बांग्लादेश में अब भी हैं।


अल्पसंख्यक उत्पीड़न की वजह से सीमापर हिंदू शरणार्थी आने को मजबूर हैं तो राजनीति शरणार्थी भी बड़े पैमाने पर हैं।


मसलन हसीना सत्ता से बेदखल हो गयीं तो जमायत हिफाजत खालिदा जमावड़ा के सत्तारूढ़ होने पर धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र प्रगतिशील राजनीति के हसीना समर्थकों का देश में रहना मुश्किल हो जायेगा।


बांग्लादेश में भी नागरिकता संशोधन कानून पास होने से भारत में बिहार यूपी और असम पर सबसे ज्यादा असर होने वाला है।


एक करोड़ के करीब जो उर्दू भाषी मुसलमान हैं, उन्हें बांग्लादेश में बिहारी मुसलमान और रजाकार ही नहीं,पाकिस्तान समर्थक कहा जाता है।इस समुदाय के नेताओं के विरुद्ध ही युद्ध अपराध के तमाम मामले हैं।


विडंबना यह है कि अल्पसंख्यक हिंदुओं पर उत्पीड़ने के मामले में भी यह रजाकर वाहिनी है।अब वजूद के लिहाज से भी समान तौर पर देश निकाले के अभ्यर्थी हिंदू अल्पसंख्यकों और बिहारी मुसलामानों का कोई साझा मंच असंभव है और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के परिदृश्य में इन दो समुदायों के गृहयुद्ध की आग में भारत भूमि का झुलसते रहना तय है।


बांग्लादेश की आजादी के बाद मुजीब ने खुद इन्हें पाकिस्तान भेजने की कोशिश की थी,लेकिन पाकिस्तान ने उनकी जिम्मेदारी लेने से साफ इंकार कर दिया था।


अब नये नागरिकता कानून के तहत उर्दूभाषियों पर निशाना साधा गया तो हिंदू शरणार्थियों के मुकाबले पाक समर्थक बिहारी मुसलामानों की बंगाल ,बिहार और असम में घुसपैठ व्यापक होने पर भारत के लिए भारी समस्या होगी।


इसी बीच, मोदी के प्रधानमंत्रित्व  से कट्टरपंथी गठबंधन की नेता बेगम खालिदा जिया और उनकी पार्टी जश्न मना रही है। आवामी लीग और कांग्रेस के मधुर संबंध इंदिरा मुजीब जमाने से हैं। इसके मद्देनजर खालिदा को उम्मीद है कि उन्हें मोदी का समर्थन मिलेगा।यह बेहद खतरनाक समीकरण है।इसमें फंस गये तो सीमा के आर पार तबाही तय है।


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

PalahBiswas On Unique Identity No1.mpg

Tweeter

Blog Archive

Welcome Friends

Election 2008

MoneyControl Watch List

Google Finance Market Summary

Einstein Quote of the Day

Phone Arena

Computor

News Reel

Cricket

CNN

Google News

Al Jazeera

BBC

France 24

Market News

NASA

National Geographic

Wild Life

NBC

Sky TV