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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Saturday, June 25, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/6/25
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


दाखिले में पिछड़ों का कोटा न भरने पर डीयू से जवाब तलब

Posted: 24 Jun 2011 10:38 AM PDT

केंद्र सरकार के दखल के बाद भी दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की समस्या बरकरार है। अब पिछड़े वर्ग के कोटे की सीटें होने के बावजूद छात्रों को दाखिला न मिलने का सवाल उठ खड़ा हुआ है। मामला केंद्र सरकार तक पहंुच गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने न सिर्फ जवाब तलब किया है, बल्कि समस्या का समाधान कर जल्द से जल्द रिपोर्ट भी मांगी है। उच्च शिक्षण संस्थानों के दाखिले में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून होने के बाद भी उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में उसका लाभ नहीं मिल रहा है। इस बाबत एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल से मिलकर शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के मुताबिक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्रालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस बाबत जवाब तलब कर लिया है। बताते हैं कि चूंकि विश्वविद्यालय के कुलपति अवकाश पर हैं, लिहाजा मंत्रालय प्रो-वाइस चांसलर विवेक सुनेजा को चिट्ठी भेजकर शिकायतों को यथाशीघ्र दूर करने के साथ ही उसके लिए जिम्मेदारी तय करने और की गई कार्रवाई से मंत्रालय को जल्द से जल्द अवगत कराने को कहा है(दैनिक जागरण,दिल्ली,24.6.11)।

आईपी में 1 जुलाई से काउंसलिंग

Posted: 24 Jun 2011 10:00 AM PDT

गुरु गोविंद सिंह इंदप्रस्थ (आईपी) यूनिवसिर्टी में 1 जुलाई से पांच कोसेर्ज की काउंसलिंग शुरू हो रही है। यूनिवसिर्टी जिन कोसेर्ज में एडमिशन प्रोसेस शुरू कर रही है, उसमें बीबीए, बीसीए, बीजेएमसी, एलएलबी और बीएड कोर्स शामिल हैं। इन कोसेर्ज का डिटेल एडमिशन शेडयूल जल्द ही यूनिवसिर्टी की वेबसाइट द्बश्चह्व.ड्डष्.द्बठ्ठ पर जारी किया जाएगा। शेडयूल से स्टूडेंट्स को यह पता लग सकेगा कि किस रैंक वाले स्टूडेंट्स को काउंसलिंग के लिए कब बुलाया जा रहा है।

यूनिवसिर्टी के जॉइंट रजिस्ट्रार (ऐकडेमिक) कर्नल प्रदीप उपमन्यु ने बताया कि काउंसलिंग यूनिवसिर्टी के द्वारका कैंपस में होगी। रिजवेर्शन पॉलिसी वही रहेगी, जो पिछले साल लागू की गई थी। ओबीसी के लिए इस बार 15 पर्सेंट सीटें रिजर्व होंगी। ओबीसी रिजर्वेशन यूनिवसिर्टी के सरकारी इंस्टिट्यूट और स्कूलों में लागू होता है।

आईपी यूनिवसिर्टी से जुड़े सेल्फ फाइनैंसिंग इंस्टिट्यूशन की संख्या 103 हैं और इनमें ओबीसी रिजवेर्शन लागू नहीं होता। अभी कोसेर्ज की सीटों के बारे में अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक बीबीए में 5000 सीटें हैं। बीसीए में 1825, बीजेएमसी में 940, एलएलबी में 640 और बीएड में 1800 सीटें हैं।

इन सीटों में इजाफा भी हो सकता है। बीटेक, एमबीए की काउंसलिंग के बारे में यूनिवसिर्टी का कहना है कि एआईसीटीई से सीटों की संख्या की जानकारी मिलने के बाद ही बीटेक की काउंसलिंग का प्रोसेस शुरू किया जाएगा।

पिछले साल बीटेक की काउंसलिंग के दौरान काफी स्टूडेंट्स पकड़े गए थे, जो फजीर् तरीके से एडमिशन लेना चाह रहे थे। इस बार यूनिवसिर्टी ने इस फजीर्वाड़े से निपटने के लिए खास तैयारी की है। सबसे पहले एडमिशन फॉर्म में थंब इंप्रेशन का कॉलम जोड़ा गया है।


एंट्रेंस टेस्ट क्लियर करने वाले स्टूडेंट्स जब काउंसलिंग के लिए आएंगे तो वहां भी उनसे अंगूठे का निशान लिया जाएगा। इससे यह साबित हो सकेगा कि एक ही स्टूडेंट ने फॉर्म भरने से लेकर काउंसलिंग प्रोसेस अटेंड किया है। खास बात यह है कि यूनिवसिर्टी ने हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की सेवाएं लेने का भी फैसला किया है। 

यूनिवसिर्टी का कहना है कि पिछले कुछ सालों से आईपी यूनिवसिर्टी स्टूडेंट्स के बीच काफी पॉपुलर हुई है और अप्लाई करने वाले स्टूडेंट्स का नंबर हर साल बढ़ रहा है। यूनिवसिर्टी की बढ़ती डिमांड को देखते हुए दलाल भी सक्रिय हो गए हैं और स्टूडेंट्स को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन स्टूडेंट्स को सचेत रहना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि एडमिशन के लिए किसी झांसे में न फंसे(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,24.6.11)। 

डीयूःबीकॉम से कम नहीं एमकॉम

Posted: 24 Jun 2011 09:45 AM PDT

डीयू के बीकॉम ऑनर्स व बीकॉम कोर्स में तो एडमिशन के लिए बिग फाइट देखने को मिल ही रही है, इस बार एमकॉम कोर्स में भी ऐप्लीकेशन का नया रेकॉर्ड बना है। एमकॉम कोर्स रेगुलर कॉलेजों के साथ-साथ स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में भी होता है और इस बार रेगुलर व एसओएल के लिए जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट हो रहा है।

1 जुलाई को होने वाले इस टेस्ट में रेगुलर एमकॉम की 359 सीटों के लिए 3,600 ऐप्लीकेशन आई हैं, जबकि पिछली बार यह संख्या 1,700 थी। इसी तरह एसओएल की 770 सीटों के लिए 2,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया है। कॉमर्स डिपार्टमेंट के ऑफिसिएटिंग हेड प्रो. जे. पी. शर्मा का कहना है कि कॉमर्स कोसेर्ज की बढ़ती डिमांड का असर अब पोस्ट ग्रैजुएशन लेवल पर भी दिखाई देने लगा है। एमकॉम कोर्स डीयू के टॉप कोसेर्ज में से एक है और इसे करने के बाद स्टूडेंट्स स्कूल और यूनिवसिर्टी टीचिंग में जा सकते हैं। अप्लाई करने वाले स्टूडेंट्स में लड़कियों की संख्या काफी बढ़ी है।

एसओएल के एम कॉम में सेमेस्टर

एसओएल का एम कॉम कोर्स इस बार सेमेस्टर सिस्टम में चलेगा। पिछले साल तक एसओएल अपना अलग एंट्रेंस टेस्ट कंडक्ट करता था और रेगुलर कॉलेजों में एम कॉम के लिए कॉमर्स डिपार्टमेंट अलग टेस्ट कंडक्ट करता था, लेकिन इस बार रेगुलर और एसओएल के लिए एमकॉम का एक ही जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट होगा।

एसओएल में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एडमिशन) ओ. पी. शर्मा के मुताबिक, जो स्टूडेंट्स केवल एसओएल के एमकॉम कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं, उन्होंने एसओएल का फॉर्म भरा है, जबकि जो स्टूडेंट्स रेगुलर और एसओएल दोनों का ऑप्शन रखना चाहते हैं, उन्हें नॉर्थ कैंपस स्थित कॉमर्स फैकल्टी में रजिस्ट्रेशन करवाया है।


कॉलेज और सीटों की संख्या 

डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स (93), श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (40), हंसराज कॉलेज (31), रामजस कॉलेज (23), हिंदू कॉलेज (15), एसजीटीबी खालसा कॉलेज (10), राजधानी कॉलेज (15), जाकिर हुसैन कॉलेज (15), जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज (15), श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज (15), श्री गुरु गोविंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स (10), शहीद भगत सिंह कॉलेज (23) , मोतीलाल नेहरू कॉलेज (23), पीजीडीएवी कॉलेज (8), एआरएसडी कॉलेज (15), देशबंधु कॉलेज (8)। 

सीटों का रिजर्वेशन 

रेगुलर एमकॉम की 359 सीटों में से 190 सीटें जनरल कैटिगरी के लिए हैं। एससी कैटिगरी की 52, एसटी की 27, ओबीसी की 90, सीडब्ल्यू कोटे की 18 और पीएच कोटे की 11 सीटें हैं। 

200 नंबर का होगा टेस्ट 

एमकॉम के लिए होना वाला एंट्रेंस टेस्ट 200 नंबर का होगा। तीन घंटे के इस टेस्ट में स्टूडेंट्स को 200 ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन का जवाब देना होगा। टेस्ट का स्टैंडर्ड बीकॉम ऑनर्स कोर्स के लेवल का होगा और इसमें पांच यूनिट होंगी। हर यूनिट का वेटेज बराबर होगा। 

इकनॉमिक्स, अकाउंटिंग, बिजनेस स्टेटिक्स एंड मैथमैटिक्स, बिजनेस ऑर्गनाइजेशन, मैनेजमेंट बिजनेस लॉ, कंपनी लॉ, इनकम टैक्स ला और जनरल नॉलेज व करंट अफेयर्स से जुड़े सवाल होंगे। टेस्ट के बारे में स्टूडेंट्स कॉमर्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट www.commercedu.com से जानकारी हासिल कर सकते हैं(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,23.6.11)।

डीयूःअभी भी नॉर्थ कैंपस का पलड़ा भारी

Posted: 24 Jun 2011 09:30 AM PDT

डीयू में एडमिशन की रेस स्पीड पकड़ चुकी है। एडमिशन लेते वक्त स्टूडेंट्स के मन में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन कॉलेज चुनने को लेकर होता है। नॉर्थ कैंपस के कॉलेजों में तो हर कोई एडमिशन लेना चाहता है लेकिन पिछले कुछ सालों में साउथ कैंपस के कॉलेजों का क्रेज भी काफी बढ़ा है। साउथ कैंपस और नॉर्थ कैंपस के बारे में स्टूडेंट्स क्या सोचते हैं पता लगाया श्वेता बंदूनी ने :

मस्ती का अड्डा है नॉर्थ

नॉर्थ कैंपस के कॉलेज अपने नाम से ही जाने जाते हैं। नॉर्थ कैंपस स्टूडेंट एरिया है, जहां पर स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ मस्ती भी करते हैं। साउथ कैंपस में मेट्रो की सुविधा नहीं है जिस वजह से स्टूडेंट्स को कॉलेजों तक पहुंचने में परेशानी होती है। नॉर्थ कैंपस अपनी फैकल्टी और मौज-मस्ती के लिए जाना जाता है। यहां पास में ही कमला नगर पड़ता है, जहां मस्ती के साथ-साथ खरीदारी भी की जा सकती है। - हिमांशी

ड्रीम कैंपस है नॉर्थ

नॉर्थ कैंपस इतने सालों से अपने अच्छे रिजल्ट और प्लेसमेंट के लिए जाना जाता है। यहां के कालेज पूरे इंडिया में पॉपुलर हैं। नॉर्थ कैंपस में हंसराज, एसआरसीसी, रामजस, मिरांडा, किरोड़ीमल, हिंदू और सेंट स्टीफंस जैसे कॉलेज आते हैं जहां एडमिशन लेना हर स्टूडेंट का सपना होता है। नॉर्थ कैंपस के स्टूडेंट्स अपने फैशन सेंस के लिए भी जाने जाते हैं। - अनमोल


कम नहीं है साउथ 

नॉर्थ कैंपस की लोकेशन बहुत अच्छी है। यहां के सारे कॉलेज एक से बढ़कर एक हैं। यहां के कॉलेजों की कट ऑफ तो हमेशा ही हाई जाती है लेकिन इस बार तो रेकॉर्ड टूट गए हैं। हालांकि साउथ कैंपस के कॉलेज भी किसी से कम नहीं है। अगर नॉर्थ कैंपस के कॉलेजों में एडमिशन न मिले तो साउथ कैंपस बेस्ट है। - कनिका 

कोई फर्क नहीं 

नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस में कोई फर्क नहीं है। नार्थ कैंपस के कॉलेजों का ग्लैमर स्टूडेंट्स को खींचता है लेकिन जहां तक पढ़ाई की बात है तो दोनों जगहों के कॉलेज बेस्ट हैं। इसलिए नॉर्थ या साउथ कैंपस फैक्टर को ध्यान में न रखते हुए एडमिशन ले लेना चाहिए। हालांकि नॉर्थ कैंपस में मेट्रो है और साउथ कैंपस के कॉलेजों में ट्रांसपोर्ट की दिक्कत है। - मोहित(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,24.6.11)

दिल्लीःआंबेडकर कॉलेज में 27 जून तक करें अप्लाई

Posted: 24 Jun 2011 09:15 AM PDT

भीम राव आंबेडकर कॉलेज के बीए (ऑनर्स) सोशल वर्क कोर्स में स्टूडेंट्स 27 जून तक अप्लाई कर सकते हैं। इस कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के जरिए होता है और कॉलेज 29 जून को टेस्ट कंडक्ट कर रहा है। टेस्ट सुबह 10 से 12 बजे तक होगा। जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं में किसी भी स्ट्रीम से 50 पर्सेंट मार्क्स हासिल किए हैं, वे इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यह कोर्स डीयू के दो कॉलेजों में है। आंबेडकर कॉलेज के अलावा अदिति महाविद्यालय में यह कोर्स चलता है। दोनों कॉलेजों का एडमिशन प्रोसेस अलग- अलग होता है(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,24.6.11)।

डीयूःटॉप कॉलेजों से बीबीएस में शिफ्टिंग की तैयारी

Posted: 24 Jun 2011 09:00 AM PDT

डीयू के बैचलर ऑफ बिजनेस स्टडीज (बीबीएस) कोर्स के लिए इंटरव्यू प्रोसेस चल रहा है और इंटरव्यू में वे स्टूडेंट्स भी शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने यूनिवसिर्टी के टॉप कॉलेजों में एडमिशन ले लिया है। एसआरसीसी, हिंदू, रामजस, हंसराज कॉलेजों में बीकॉम ऑनर्स या इकनॉमिक्स ऑनर्स कोर्स में एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स बीबीएस का इंटरव्यू भी दे रहे हैं।

यानी इन स्टूडेंट्स का अगर बीबीएस में सिलेक्शन हो जाता है तो फिर से बीकॉम ऑनर्स कोर्स से प्रफेशनल कोर्स में शिफ्ट भी हो सकते हैं। इसके अलावा इस बार इंटरव्यू के दौरान आने वाले स्टूडेंट्स में बीटेक की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स की संख्या भी अधिक है।

शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की प्रिंसिपल डॉ. पूनम वर्मा ने बताया कि यूनिवसिर्टी के पॉपुलर कोसेर्ज में एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स इंटरव्यू में शामिल हो रहे हैं। 95-96 पर्सेंट लाने वाले स्टूडेंट्स भी हैं, हालांकि बीबीएस के एडमिशन शुरू होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कितने स्टूडेंट्स बीकॉम ऑनर्स या इको ऑनर्स से शिफ्ट हुए हैं।

डॉ. वर्मा का कहना है कि वैसे तो हर साल ही बीकॉम ऑनर्स कोर्स में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स बीबीएस में आते हैं। इस बार हिंदू, हंसराज, वेंकेटेश्वर, जीसस एंड मेरी जैसे पॉपुलर कॉलेजों में पहली लिस्ट में एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स इंटरव्यू के लिए आ रहे हैं। बीबीएस के इंटरव्यू 25 जून तक चलेंगे और 30 जून तक मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

उन्होंने बताया कि बीटेक की एक साल की पढ़ाई कर चुके स्टूडेंट्स भी बीबीएस में इस साल एडमिशन लेंगे और इंटरव्यू में ऐसे काफी स्टूडेंट्स आ रहे हैं। डॉ. वर्मा का कहना है कि बीबीएस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट्स की प्लेसमेंट काफी अच्छी होती है और बीबीएस के बाद स्टूडेंट्स एमबीए करके काफी बेहतर करियर बना सकते हैं।


डीडीयू कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एस. के. गर्ग का कहना है कि ऐसे स्टूडेंट्स की कमी नहीं है, जिन्हें इंजीनियरिंग के पॉपुलर इंस्टिट्यूट में एडमिशन नहीं मिलता और वे दूसरी जगह बीटेक में एडमिशन लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में देखने में आया है कि ऐसे स्टूडेंट्स को बीटेक करने के बाद भी अच्छी प्लेसमेंट नहीं मिलती, ऐसे में स्टूडेंट्स बीबीएस कोर्स की ओर शिफ्ट करते हैं। 

अगर उन्हें बीबीएस में एडमिशन मिलता है तो वे बीटेक की एक साल की पढ़ाई भी छोड़ रहे हैं। बीबीएस के बाद अधिकतर स्टूडेंट्स एमबीए के लिए ट्राई करते हैं और एमबीए किस स्ट्रीम में किया जाए, इसका फैसला वे बीबीएस कोर्स में ही कर लेते हैं। 

खास बात यह है कि बीबीएस कोर्स में साइंस के स्टूडेंट्स के एडमिशन अधिक हो रहे हैं। इस कोर्स का क्रेज स्टूडेंट्स के बीच लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इस कोर्स की सीटें अधिक नहीं हैं लेकिन अप्लाई करने वालों की तादाद हजारों में पहुंच चुकी है। इस साल करीब 13,500 स्टूडेंट्स ने एंट्रेंस टेस्ट दिया था। 

यह कोर्स डीयू के शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज, केशव महाविद्यालय और डीडीयू कॉलेज में है। डीयू में कोर्स की कुल सीटें 275 हैं। डीडीयू और केशव महाविद्यालय में 45-45 सीटें हैं और शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज में 185 सीट हैं। बीबीएस का यह कोर्स 22 साल से भी पुराना कोर्स है। शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज में यह कोर्स 22 साल से भी अधिक समय से चल रहा है और डीडीयू कॉलेज और केशव महाविद्यालय इस कोर्स के दो बैच पूरा कर चुके हैं(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,24.6.11)।

डीयू दाखिले में कॉलेज कर रहे हैं मनमानी

Posted: 24 Jun 2011 08:45 AM PDT

(नई दुनिया,दिल्ली,24.6.11)

पंजाबःछठी से 8वीं तक की छात्राएं सीखेंगी कराटे

Posted: 24 Jun 2011 08:30 AM PDT

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को अब आत्मरक्षा के लिए कराटे का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सर्वशिक्षा अभियान के तहत वोकेशनल गतिविधियों में छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण देने की रूप रेखा तैयार की जाएगी। योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले के 50 स्कूलों की छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण दिया जाना है, जबकि गुरदासपुर जिले को इस योजना से बाहर रखा गया है। प्रशिक्षण छठी से आठवीं तक की छात्राओं को दिया जाएगा।

ट्रेनिंग स्कूल समय से पहले सुबह दी जाएगी और इंस्ट्रक्टर की ओर से हर हाल में 30 दिनों में कराटे का प्रशिक्षण देना अनिवार्य किया गया है। इन ट्रेंड इंस्ट्रक्टरों की नियुक्ति जिला शिक्षा अफसरों की ओर से की जाएगी। विभाग छात्राओं को प्रशिक्षण देने के लिए प्रत्येक स्कूल को पांच हजार रुपए फंड जारी करेगा। जिला शिक्षा अफसरों के पास फंड पहुंचने के बाद प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इंस्ट्रक्टर स्कूलों में टर्न वाइज देंगे प्रशिक्षण
जिला वोकेशनल कोआर्डिनेटर गुरदीप सिंह गिल ने बताया कि छात्राओं को कराटे प्रशिक्षण देने के लिए विभाग की तरफ से निर्देश मिल चुके हैं। लड़कियों को कराटे प्रशिक्षण देने के लिए करीब 12 ट्रेंड इंस्ट्रक्टरों का चयन किया गया है। यह प्रशिक्षण प्रत्येक जिले के 50 स्कूलों की छात्राओं को दिया जाना है। इसके तहत इंस्ट्रक्टर स्कूलों में जाकर टर्न वाइज छात्राओं को 30 दिनों तक कराटे प्रशिक्षण देंगे।


डाइट व रिफ्रेशमेंट के लिए दो हजार
स्कूलों को मिलने वाले पांच हजार रुपए में से तीन हजार रुपए छात्राओं को प्रतिदिन दो रुपए मेहनताना के हिसाब से देने पर खर्च होंगे। इसके अलावा दो हजार रुपए डाइट व रिफ्रेशमेंट पर खर्च किए जाएंगे।

ये हुए फैसले
-प्रत्येक जिले के 50 स्कूलों की छात्राओं को दिया जाना है कराटे का प्रशिक्षण
-इंस्ट्रक्टर को प्रति दिन के हिसाब से मिलेगा 100 रुपए मेहनताना
-छात्राओं को प्रशिक्षण के साथ-रिफ्रेशमेंट भी देने का फैसला हुआ 
-प्रशिक्षण हर हाल में अगस्त व सितंबर माह के अंत तक खत्म करना अनिवार्य(अंकित शर्मा,दैनिक भास्कर,जालंधर,24.6.11)

पीपीपी के तहत मूल्यांकन एवं शोध केंद्र स्थापित करेगा सीबीएसई

Posted: 24 Jun 2011 08:15 AM PDT

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने निजी सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) के तहत एक ऐसा निकाय गठित करने का निर्णय किया है जो समीक्षा, मूल्यांकन एवं शोध केंद्र के रूप में काम करेगा। यह केंद्र विभिन्न परीक्षाओं को समन्वित एवं बेहतर ढंग से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा
सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, " इस केंद्र की स्थापना निजी सार्वजनिक भागीदारी के तहत की जाएगी। इस संबंध में सक्षम संस्थान का चयन करने के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। सक्षम संस्थान 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।'
उन्होंने कहा कि प्रारंभ में इस केंद्र में 20 कर्मचारी काम करेंगे जिसका बाद में विस्तार किया जाएगा। आधारभूत संरचना जैसे प्रारंभिक कार्यो का वित्त पोषण सीबीएसई करेगा लेकिन इस केंद्र के संचालन सहित अन्य परिचालनात्मक खर्च का वहन निजी साझेदार को करना होगा।
बोर्ड कई तरह की नियमित एवं प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा का आयोजन करता है। इस वर्ष 12वीं कक्षा में करीब साढ़े सात लाख छात्र और 10वीं कक्षा में 10 लाख छात्र बैठे। इसी प्रकार से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 2.57 लाख उम्मीदवार और एआईईईई प्रवेश परीक्षा में करीब 11 लाख छात्र शामिल हुए। जून 2011 में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में 8 लाख छात्र शामिल होंगे।
अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक व्यवस्था एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने शैक्षणिक संसाधन सृजित करने की जरूरत महसूस की है जिसके माध्यम से अगले कुछ वर्षो में स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक उपलब्ध हो सकें।
प्रस्तावित केंद्र उन छात्रों की परेशानियों और जरूरतों को पूरा करेगा जिनके माता पिता ऐसी नौकरी कर रहे जिसमें समय समय पर तबादला होता है। केंद्र परीक्षा संबंधी निर्देश देने के साथ संबद्ध स्कूलों में सफल छात्रों को प्रमाणपत्र भी मुहैया कराएगा।

बोर्ड ने सक्षम निजी साझेदार का चयन करने के लिए दो स्तरीय निविदा प्रक्रिया अपनाई है जिसमें पहला तकनीकी मापदंड और दूसरा वित्तीय मापदंड से जुड़ा हुआ है।
प्रस्तावित केंद्र कार्यकारी परिषद के माध्यम से काम करेगा और बोर्ड के अध्यक्ष इस केंद्र के अध्यक्ष होंगे। इसमें पेशेवर विकास, मूल्यांकन, शोध एवं नवोन्मेष के तीन विशेषज्ञों को बोर्ड और दो सदस्यों को साझेदार निजी संस्थान नामित करेगी। इस केंद्र के प्रमुख का चयन 'खोज सह चयन प्रक्रिया' के जरिए होगा। प्रारंभ में इस केंद्र में कोई विभाग नहीं होगा लेकिन बाद में इसे ढांचागत स्वरूप प्रदान किया जाएगा(दैनिक ट्रिब्यून,दिल्ली,24.6.11)।

डीयूःनॉन-कॉलेजिएट की कट-ऑफ पर एक नज़र

Posted: 24 Jun 2011 08:00 AM PDT

डीयू के नॉन कॉलेजिएट विमेन एजुकेशन बोर्ड ने गुरुवार को बीए और बीकॉम कोर्स की फर्स्ट कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी है। जिस तरह से यूनिवसिर्टी के कॉलेजों की पहली कट ऑफ हाई रही है, उसी तरह से नॉन कॉलेजिएट की लिस्ट में भी इस बार इजाफा देखने को मिला है। एडमिशन लिस्ट में 1 से 3 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है। 


बीकॉम कोर्स में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स के बेस्ट ऑफ फोर सब्जेक्ट में एक लैंग्वेज, बिजनेस स्टडीज, अकाउंट्स और एक कोई अन्य सब्जेक्ट शामिल किया जाता है। एक वोकेशनल सब्जेक्ट भी शामिल किया जा सकता है। बीए में एक लैंग्वेज व तीन सब्जेक्ट के मार्क्स जोड़े जाते हैं, जिनमें एक वोकेशनल सब्जेक्ट भी होता है। 

हंसराज कॉलेज सेंटर के लिए कट ऑफ सबसे हाई है और यहां की लिस्ट में सबसे अधिक 3 पर्सेंट की बढ़ोतरी की गई है वहीं बाकी सेंटरों पर पिछले साल के मुकाबले कट ऑफ 1 पसेर्ंट तक हाई रही है। जनरल कैटिगरी के साथ- साथ एससी-एसटी व ओबीसी कैटिगरी की कट ऑफ भी पिछले साल के मुकाबले अधिक रही है। 

बीकॉम कोर्स की बात करें तो हंसराज कॉलेज सेंटर के लिए जनरल कैटिगरी की कट ऑफ 75 पर्सेंट है, जो पिछले साल के मुकाबले तीन पर्सेंट ज्यादा है। इसके बाद लक्ष्मीबाई कॉलेज, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज और भारती कॉलेज सेंटर की लिस्ट 72 पर्सेंट है। 71 पर्सेंट की कैटिगरी में कालिंदी कॉलेज, एसपीएम कॉलेज, जीसस एंड मेरी कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, अर्वाचीन भारती भवन, माता सुंदरी कॉलेज सेंटर हैं। महाराजा अग्रसेन कॉलेज और पीजीडीएवी कॉलेज सेंटर की लिस्ट 70 पर्सेंट हैं। 

बीए कोर्स में भी जनरल कैटिगरी के लिए सबसे अधिक कट ऑफ हंसराज कॉलेज सेंटर की है, यहां पर बीए कोर्स में 73 पर्सेंट पर स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल सकेगा जबकि पिछले साल फर्स्ट लिस्ट 70 पर्सेंट थी। लक्ष्मीबाई कॉलेज की कट ऑफ डेढ़ पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ इस बार 70 पर्सेंट तय की गई है। 

कालिंदी कॉलेज, एसपीएम कॉलेज, अर्वाचीन भारती भवन, पीजीडीएवी कॉलेज की कट ऑफ में भी डेढ़ पर्सेंट की बढ़ोतरी की गई है। जिन स्टूडेंट्स का नाम कट ऑफ लिस्ट में आया है, उन्हें 27 जून से अपनी फीस जमा करानी होगी। हर सेंटर पर फीस जमा करवाने के लिए अलग- अलग डेट तय की गई है। बोर्ड की डायरेक्टर डॉ. आरती सक्सेना का कहना है कि बीए और बीकॉम की कुल 5,000 सीटें हैं और 21,000 से अधिक ऐप्लीकेशन फॉर्म बिके थे। 

वैसे तो स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग और नॉन कॉलेजिएट दोनों ही नॉन- फॉरमल स्ट्रीम में आते हैं लेकिन इन दोनों के एजुकेशन सिस्टम में काफी अंतर है। जहां नॉन कॉलेजिएट में हाजिरी का नियम लागू है वहीं एसओएल में नहीं है। साथ ही नॉन कॉलेजिएट बोर्ड 50 टीचिंग डेज में स्टूडेंट्स का कोर्स पूरा कराता है। नॉन कॉलेजिएट में 66 पर्सेंट हाजिरी का नियम लागू है लेकिन स्टूडेंट्स को कुछ रियायतें भी मिलती हैं। जैसे मेडिकल ग्राउंड पर भी स्टूडेंट्स को हाजिरी में छूट मिलती है। 

यहां से ग्रैजुएशन करने वाले स्टूडेंट्स के एग्जाम रेग्युलर स्टूडेंट्स के साथ होते हैं और रिजल्ट भी उनके साथ ही आता है। यहां स्टूडेंट्स की सालाना फीस भी अधिक नहीं है। बीए और बीकॉम में स्टूडेंट्स की सालाना फीस दो हजार रुपये तक ही होती है। जीसस एंड मेरी और एसपीएम कॉलेजों के सेंटर पर शनिवार को क्लासेज होती हैं जबकि बाकी सेंटरों पर रविवार को क्लासेज होती हैं। शनिवार व रविवार के अलावा नॉन कॉलेजिएट स्टूडेंट्स की क्लासेज वेकेशन के दौरान होती हैं। दूसरी कट ऑफ 8 जुलाई और तीसरी कट 22 जुलाई को जारी की जाएगी(भूपेंद्र,नभाटा,दिल्ली,24.6.11)

कट-ऑफ की लिंकः

नोटःआलेख की कतरन नई दुनिया,दिल्ली से साभार।

डीयू को लैंग्वेज कोर्सो में नहीं मिल पा रहे हैं छात्र

Posted: 24 Jun 2011 07:45 AM PDT

दिल्ली विश्वविद्यालय की दूसरी कटऑफ के आधार पर दाखिले के दो दिन बीत चुके हैं पर संस्कृत, अरबी, उर्दू, पर्सयिन, बंगाली और पंजाबी जैसी भाषाओं में उर्दू को छात्र नहीं मिल रहे हैं। जाकिर हुसैन कॉलेज जो कि अरबी, उर्दू, पर्सयिन और बंगाली में बीए ऑनर्स कराता है को कुछ लैंग्वेज कोर्स में अभी तक छात्र नहीं मिले हैं। कॉलेज में पर्सयिन और बंगाली भाषा में एक भी दाखिला नहीं हुआ है।

जाकिर हुसैन कॉलेज के प्राचार्य डा. अस्लम परवेज कहते हैं कि सामान्यत: इन कोर्सों में छात्रों का रुझान तीसरी कटऑफ के बाद देखने को मिलता है क्योंकि तब तक छात्रों के पास अन्य विकल्प खत्म हो चुके होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तुलना में इस बार अरबी भाषा में रिस्पांस बेहतर आया है इसमें 23 सीटों के लिए 14 दाखिले हो चुके हैं पर अन्य भाषाओं में रिस्पांस उतना बेहतर नहीं आया है।

प्रमुख बात यह है कि अरबी में दाखिले के लिए आई छह लड़कियों के अस्सी प्रतिशत अंक है। सत्यवती कॉलेज के प्राचार्य शमसुल इस्लाम कहते हैं कि भाषा के कोर्सो में शुरुआत में छात्र नॉर्थ कैंपस की तरफ ही रूख करते हैं। आउट ऑफ कैंपस के कॉलेजों में छात्र तीसरी और चौथी कटऑफ में आते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक उर्दू में तीन दाखिले हुए हैं और ये दाखिले दूसरी कटऑफ के दूसरे दिन हुए हैं।


विवेकानंद कॉलेज की प्राचार्य डा. रेनू साहनी का कहना है कि संस्कृत में अभी बहुत ज्यादा दाखिले नहीं हुए है। इसमें करीब पांच एडमिशन हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक सबसे कम रिस्पांस संस्कृत में ही मिला है। सबसे अधिक रूझान कॉमर्स का रहा है। वहीं हंसराज कॉलेज के प्राचार्य वी.के.क्वात्रा का कहना है कि पिछले साल की तुलना में रिस्पांस थोड़ा बेहतर हुआ है पर अभी काफी कटऑफ आनी बाकी है। मिरांडा हाउस में आठ बंगाली सीटों के लिए छह से अधिक में दाखिले हो चुके हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,24.3.11)।

महाराष्ट्र में 12.05 लाख छात्र बीमार

Posted: 24 Jun 2011 07:30 AM PDT

वर्ष 2010-11 में कक्षा पहली से दसवीं तक शिक्षा लेनेवाले राज्य के 12.05 लाख विद्यार्थियों के बीमार होने की जानकारी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान के तहत सामने आयी है।

एक ओर जहां विद्यार्थियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है, वहीं बीमार विद्यार्थियों की संख्या देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में कक्षा पहली से चौथी एवं ग्रामीण क्षेत्र में कक्षा पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों की प्रतिवर्ष नि:शुल्क जांच कर आवश्यक शल्यक्रियाएं की जाती हैं।

दिन-ब-दिन बढ़ रहे प्रदूषण, विविध रोगों के संक्रमण से शिशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होते हैं। शालाओं में जानेवाले छात्रों में आमतौर पर दंतरोग, रक्तक्षय, कृमि संक्रमण, रतौंधी, कर्णरोग, त्वचा के रोग, नेत्ररोग, हृदयरोग जैसी गंभीर बीमारियों का असर दिखाई देता है।


इसी के मद्देनजर सरकार द्वारा शालेय स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार किया जा रहा है। इस अभियान अंतर्गत सामने आए आकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008-09 में राज्य के कुल 79 हजार 547 शालाओं के 142.47 लाख विद्यार्थियों में से 108.02 लाख विद्यार्थियों की जांच की गई। 

जबकि 25.51 विद्यार्थियों पर उपचार, 2.64 विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करायी गई और 2.293 छात्रों पर बड़ी शल्यक्रियाएं की गई हैं। जबकि वर्ष 2008-10 में 1 लाख 13 हजार 082 शालाओं का समावेश किया गया। 

जिसमें 243.21 लाख प्रवेशित विद्यार्थियों में 157.21 लाख छात्रों की जांच हुई। जिनमें से 37.09 लाख विद्यार्थियों पर उपचार, 1.77 लाख को स्वास्थ्य सेवा और 3 हजार 482 विद्यार्थियों पर शल्यक्रियाएं हुईं।

537 बच्चे हृदय रोगी 

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान द्वारा चलाए जानेवाले शालेय स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत वर्ष 2010-11 में राज्य के कुल 537 विद्यार्थियों की हृदय शल्यक्रिया की गई। जबकि वर्ष 2008-09 में 1 हजार 112 विद्यार्थियों की तथा वर्ष 2009-10 में 1 हजार 218 विद्यार्थियों की हृदय शल्यक्रिया की गई। 

पल्स पोलियो पर 28.41 करोड़ खर्च

वर्ष 1995-96 से राज्य में क्रियान्वित किए जा रहे पल्स पोलियो कार्यक्रम के माध्यम से 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं को पोलियो का डोज पिलाया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2010-11 में 28.41 करोड़ रुपए खर्च किए। जबकि वर्ष 2009-10 में 34.74 करोड़ रुपए खर्च हुए। 

वर्ष 2007 और 08 में पोलियो के दो केस सामने आए। जबकि वर्ष 2009 में एक भी शिशु पोलियोग्रस्त नहीं पाया गया। वर्ष 2010 में लगभग 118 लाख शिशुओं को पल्स पोलियो का टीका दिया गया। अक्तूबर 2010 तक 5 शिशु पोलियोग्रस्त मिले(पंकज शर्मा,दैनिक भास्कर,चंद्रपुर,24.6.11)।

हिमाचल में निजी स्कूलों का छात्रों से खेल

Posted: 24 Jun 2011 07:15 AM PDT

एलिमेंटरी शिक्षा का सर्टिफिकेट देने के लिए जिले का एक भी निजी स्कूल वैध नहीं है। जिला एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के पास किसी भी निजी स्कूल प्रबंधन ने पंजीकरण नहीं कराया है। इसके कारण उन छात्रों के सामने भयंकर समस्या खड़ी हो गई है जो इस समय शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बिना पंजीकरण के यदि कोई स्कूल सर्टिफिकेट जारी करता है तो विभाग नियमों के तहत उसे बंद करवा सकता है। नए नियमों के तहत एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के पास पंजीकरण कराना जरूरी है। विभाग के एनओसी मिलने पर ही स्कूल प्रबंधन आठवीं पास करने वाले स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं।

एक कमरे वाले होंगे बंद
सबसे ज्यादा हड़कंप की स्थिति उन स्कूलों में हैं जो एक-एक कमरे में बिना शर्तें पूरी किए चल रहे हैं लेकिन परीक्षाएं प्राइवेट स्टूडेंट्स के आधार पर कराते हैं। नए नियम से ऐसे स्कूलों पर अंकुश लगेगा। जो निजी स्कूल पंजीकरण के लिए आवेदन करेगा विभाग की ओर से गठित कमेटी उन स्कूलों का दौरा करेगी। कमेटी छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी। उसके बाद ही पंजीकरण होगा। तीन वर्ष तक इसकी वैधता रहेगी। 5 जून तक आवेदन किए जा सकते थे।


इस शिक्षा सत्र से शुरू हुई योजना के तहत इस बारे में विभाग ने मार्च माह में नोटिफिकेशन जारी की थी। निजी स्कूलों को तीन माह के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी किया था। लेकिन 4 माह पूरे होने को हैं अभी तक कोई भी जिले में स्कूल पंजीकरण के लिए आगे नहीं आया है(अश्वनी वालिया,दैनिक भास्कर,हमीरपुर,24.6.11)।

डीयूःआर्ट्स के कुछ विषयों में तीसरी कट-ऑफ मुश्किल

Posted: 24 Jun 2011 07:00 AM PDT

दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में आर्ट्स संकाय में तीसरी कटऑफ आनी मुश्किल है। दाखिले के पहले चरण में जहां ज्यादातर कॉलेजों में कॉमर्स संकाय फुल हुआ था, वहीं दूसरे में आर्ट्स में कहीं फुल तो कहीं सीटों से ज्यादा दाखिले हो चुके हैं। जानकारों की मानें तो तीसरी कटऑफ में करीब-करीब हर कॉलेज में आर्ट्स बंद हो जाएगा।

दूसरी कटऑफ ने छात्रों को दाखिले के नए और बेहतर विकल्प दिए हैं। बहुत से कॉलेजों में पहली की तुलना में दूसरी कटऑफ में छात्रों को राहत मिली है। साउथ दिल्ली के दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स के प्राचार्य डा. एम.एस.रावत ने बताया कि दाखिले के दूसरे चरण में सबसे ज्यादा दाखिले आर्ट्स विषयों में हुए हैं।
इनमें पॉलिटिकल सांइस ऑनर्स, हिस्ट्री ऑनर्स और इकोनॉमिक्स ऑनर्स मुख्य हैं। इन तीनों कोर्सो में मौजूद सीटें भर चुकी हैं। लेकिन अब भी दाखिले के दो दिन बाकी है जिनमें छात्रों की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में हमारे कॉलेज में आर्ट्स के विषयों में तीसरी कटऑफ नहीं आएगी।

साउथ के ही कमला नेहरू कॉलेज में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां की शिक्षिका गीतेश निबार्ण ने बताया कि दाखिले का पहला चरण जहां थोड़ा धीमा था, वहीं दूसरे में अब तक ज्यादातर आर्ट्स विषय भर चुके हैं। पहले ही दिन आर्ट्स में हिस्ट्री ऑनर्स, हिन्दी ऑनर्स, इकोनॉमिक्स ऑनर्स और पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में सीटों से ज्यादा दाखिले हुए हैं। हालांकि अभी दो दिन बाकी हैं जिनमें और दाखिले आने की संभावना है। इसलिए इन विषयों की तीसरी कटऑफ नहीं आएगी।


नार्थ कैंपस में भी कई कॉलेजों में दाखिले भरते नजर आ रहे हैं। यहां के दौलतराम कॉलेज में आर्ट्स के लगभग सभी विषयों में सीटों से ज्यादा दाखिले हुए हैं। कॉलेज की प्राचार्या डा. सुषमा टंडन ने बताया कि हमारे कॉलेज में आर्ट्स के सभी विषय भर गए हैं। इनमें तीसरी कटऑफ नहीं आएगी। वहीं आउट ऑफ कैंपस भी बहुत से कॉलेजों में दाखिले का यही ट्रेंड चल रहा है। महाराजा अग्रसेन, दयाल सिंह और देशबंधु सांध्य कॉलेज में भी आर्ट्स के ज्यादातर विषयों की सीटें भर चुकी हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,24.6.11)।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्टः
डीयू में सेकंड कट ऑफ लिस्ट के एडमिशन फुल स्पीड में हो रहे हैं। इसके साथ ही स्टूडेंट्स की शिफ्टिंग भी चल रही है। ऐसे में किन-किन कोसेर्ज की थर्ड लिस्ट आ सकती है, इसके बारे में कॉलेज प्रिंसिपल अब भी कन्फ्यूज हैं। कुछ कोसेर्ज में सीटों से अधिक एडमिशन हो चुके हैं लेकिन नाम वापस लेने वाले स्टूडेंट्स भी हैं।

दयाल सिंह कॉलेज की ही बात करें तो यहां र्फस्ट लिस्ट में बंपर एडमिशन हुए और अब तक 150 से अधिक स्टूडेंट्स ने एडमिशन विड्रॉ करा लिया है। सेकंड लिस्ट के आधार पर पहले दो दिन हुए एडमिशन को देखते हुए कहा जा सकता है कि कॉमर्स कोसेर्ज में काफी कॉलेजों में एडमिशन क्लोज हो जाएंगे। हालांकि किरोड़ीमल कॉलेज और वेंकटेश्वर जैसे पॉपुलर कॉलेजों में स्टूडेंट्स को बीकॉम ऑनर्स और बीकॉम में थर्ड लिस्ट भी देखने को मिलेगी।

कॉलेज प्रिंसिपलों का कहना है कि कुछ कोसेर्ज में सीटों और एडमिशन का गैप ज्यादा नहीं है, ऐसे में यह समझ नहीं आ रहा कि इन कोसेर्ज की थर्ड लिस्ट जारी करें या नहीं। अगर लिस्ट जारी नहीं करते और तीसरी लिस्ट आने के बाद ज्यादा स्टूडेंट्स अपना एडमिशन विड्रॉ करा लेते हैं तो चौथी लिस्ट में फिर से एडमिशन ओपन करने पडेंगे।

किरोड़ीमल कॉलेज में गुरुवार को 189 एडमिशन हुए हैं। हालांकि यहां पर बीकॉम ऑनर्स में जनरल कैटिगरी में अब तक 4 और बीकॉम में 25 एडमिशन हुए हैं। एडमिशन प्रोसेस से जुड़े कॉलेज के सीनियर असिस्टेंट अजय अग्रवाल का कहना है कि साइंस के ऑनर्स कोर्सेज में काफी एडमिशन हो चुके हैं और इनकी थर्ड लिस्ट आनी मुश्किल है। कॉलेज में एडमिशन को देखें तो हिंदी, बॉटनी ऑनर्स, बीएससी लाइफ साइंसेज और ज्योग्रफी की भी थर्ड लिस्ट आ सकती है।

वेंकटेश्वर कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस, बॉटनी ऑनर्स, मैथ्स ऑनर्स जैसे कोसेर्ज की थर्ड लिस्ट आनी मुश्किल है जबकि बीकॉम ऑनर्स, बीकॉम, बीए और इकनॉमिक्स के एडमिशन जारी रहने की उम्मीद है।

दौलतराम कॉलेज में कॉमर्स कोसेर्ज में एडमिशन तो फुल हो गए हैं लेकिन बीए, इंग्लिश ऑनर्स, हिंदी, संस्कृत, बीएससी लाइफ साइंसेज में थर्ड लिस्ट आ सकती है।

दयाल सिंह कॉलेज में ज्योग्रफी ऑनर्स, हिंदी और हिस्ट्री के एडमिशन अगली लिस्ट में भी जारी रहने की संभावना है।

दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज में फिजिक्स ऑनर्स, केमिस्ट्री ऑनर्स, बीकॉम ऑनर्स, मैथ्स ऑनर्स, कंप्यूटर साइंस ऑनर्स, इंग्लिश ऑनर्स में एडमिशन फुल हो गए हैं जबकि बीएससी फिजिकल साइंसेज, बीएससी लाइफ साइंसेज में थर्ड लिस्ट आएगी। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एस. के. गर्ग का कहना है कि बीए में भी थर्ड लिस्ट आ सकती है। उनका कहना है कि सेकंड लिस्ट में सबसे ज्यादा एडमिशन हो रहे हैं। गार्गी कॉलेज में सभी कोसेर्ज में एडमिशन ज्यादा हो चुके हैं।

लेडी श्री राम कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स, इकनॉमिक्स ऑनर्स, बीए, हिंदी के एडमिशन फुल हो गए हैं और स्टूडेंट्स को तीसरी लिस्ट में हिस्ट्री, मैथ्स और इंग्लिश जैसे सब्जेक्ट से जरूर उम्मीद रखनी चाहिए।

खालसा कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स में तो सीटों से ज्यादा एडमिशन हो गए हैं लेकिन बीकॉम और बीए की थर्ड लिस्ट आती है या नहीं, इस बारे में अभी कॉलेज कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीए व संस्कृत ऑनर्स की थर्ड लिस्ट आ सकती है।

झारखंडःइंटर में यह कैसा खेल! थ्योरी में पास, प्रैक्टिकल में फेल

Posted: 24 Jun 2011 06:45 AM PDT

इंटर परिणाम के विरोध में राज्य भर के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई झारखंड एकेडमिक काउंसिल को कोस रहा है, तो कोई मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को। पर जो छात्र-छात्राएं प्रैक्टिकल में फेल है। इसके लिए कौन दोषी है, इस का फैसला कौन करेगा।

जानकारों के अनुसार, कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के वजह से ही दर्जनों छात्राओं को प्रैक्टिकल में फेल होना पड़ा है। थ्योरी में पास व प्रैक्टिकल में फेल हुई दर्जनों छात्राएं गुरुवार को एसएसएलएनटी महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ विद्यावति कुशवाहा से मिली। छात्राएं संबंधित विषय की शिक्षिका पर जानबूझ कर फेल करने का आरोप लगा रही थीं। छात्राओं की माने तो उनका प्रैक्टिकल परीक्षा काफी अच्छा गया था। इसके बाद भी उन्हें फेल कर दिया गया।

ट्यूशन नहीं पढ़ने पर किया गया फेल

छात्राओं का आरोप है कि संबंधित विषय की शिक्षिका से ट्यूशन नहीं पढ़ने के कारण फेल किया गया। ऑटर्स में छह सौ से अधिक छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इसमें लगभग दर्जनों छात्राओं को प्रैक्टिकल में फेल कर दिया गया है। जबकि जो छात्राएं उक्त शिक्षिका के यहां ट्यूशन पढ़ती थीं उन्हें प्रैक्टिकल में अच्छे अंक दिए गए। छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन को पत्र लिख कर प्रैक्टिकल में फेल होने का आधार पूछा है। पत्र में कहा है कि उन्हें प्रैक्टिकल की कॉपी दिखाई जाए। साथ ही प्रोजेक्ट वर्क व वायवा में कितना अंक मिला, इसकी भी जानकारी दी जाए(अखिलेश कुमार,दैनिक भास्कर,धनबाद,24.6.11)।

पंजाबःपांच हजार विद्यार्थियों ने भरे कंपार्टमेंट फार्म

Posted: 24 Jun 2011 06:30 AM PDT

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के जिला बुक डिपुओ में बारहवीं



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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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