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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Friday, February 3, 2012

सरकारी क्षेत्र के एअर इंडिया का बंटाधार करने वाले भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्‍ल पटेल पर करोड़ों की रिश्‍वत लेने का गंभीर आरोप

सरकारी क्षेत्र के एअर इंडिया का बंटाधार करने वाले भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्‍ल पटेल पर करोड़ों की रिश्‍वत लेने का गंभीर आरोप

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

ए राजा और पी चिदंबरम का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ कि भ्रष्टाचार के दलदल में एक और मंत्री का नाम फंसता दिख रहा है। सरकार में भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्‍ल पटेल पर करोड़ों की रिश्‍वत लेने का गंभीर आरोप लगा है।

मुंबई में एअर इंडिया की बदहाली के पीछे पटेल की भूमिका को जिम्मेवार मानने वालों को इस समाचार पर कोई अरचज नहीं हुआ।एअर इंडिया भारत की ध्वज-वाहक विमान सेवा है। ... एअर इंडिया का कार्यवाहक केन्द्र मुम्बई का छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यहां से एअर इंडिया की उड़ानें विश्व में ३९ गन्तव्य स्थान तथा भारत में १२ गन्तव्य स्थानों तक जाती हैं।पर पाटिल को क्लीन चिट देते हुए उनके अधूरे काम को अंजाम दे रहे  मौजूदा नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि ऐसे आरोप आधारहीन हैं। इसका कोई सूबूत नहीं है। इसलिए इस मामले की जांच का सवाल ही नहीं उठता। एविएशन सेक्टर में विदेशी एयरलाइंस के लिए 49 फीसदी निवेश का रास्ता जल्द खुल सकता है। विमानन मंत्री अजित सिंह का कहना है कि घरेलू एयरलाइंस में 49 फीसदी एफडीआई पर कैबिनेट नोट जल्द भेज दिया जाएगा।एविएशन सेक्टर की हालत सुधारने के लिए वित्त मंत्री और विमानन मंत्री के बीच अहम बैठक हुई है। इस बैठक में घरेलू एयरलाइंस में विदेशी एयरलाइंस के लिए 49 फीसदी निवेश का रास्त खोलने पर सहमति बन गई है। एविएशन सेक्टर की लगभग सभी कंपनियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

भारत में एविएशन सेक्टर की हालत ठीक नहीं है। इसको सुधारने के लिए एविएशन मिनिस्ट्री नई पॉलिसी बना रही है।इस नई पॉलिसी में इंफ़्रास्ट्रक्चर, जेट फ़्यूल की क़ीमत, किराया, सुरक्षा और वित्तीय हालत पर ग़ौर किया जाएगा।



एविएशन सेक्टर घोर अनियमितता की शिकार है। सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि यहां टिकटों का मूल्य एक सा नहीं होता । एअर इंडिया के हड़ताल के बाद निजी एअरलाइंस ने किराये को लेकर मनमानी की है, इस पर नियंत्रण की कोई व्यवस्था सरकार के पास नहीं है। वस्तुत: एविएशन सेक्टर में आमूल-चूल सुधार की जरूरत है। वेतन सम्बंधी विसंगति ही नहीं, काम का दबाव जैसी समस्या भी आम है। फिर फर्जी पायलटों का गम्भीर मसला भी सामने आया है।डीजीसीए सारा दोष फ्लाइंग स्कूलों और पायलटों के मत्थे मढ़ रहा है लेकिन उसका निगरानी तंत्र कितना लुंज-पुंज है; इस पर ध्यान नहीं है। कई फ्लाइंग स्कूल केवल 70-80 घंटे की फ्लाइट करा रहे हैं। सुरक्षित तौर पर यह पैमाना 200 घंटे माना गया है। ये स्कूल रीयल हवाई जहाज की तुलना में ट्रेनिंग सिम्यूलेटर जैसी मशीनों पर अधिक कराते हैं, जो घातक होता है।



जहां भारतीय संसद पहले ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पंगु बनी हुई है वहीं रही-सही कसर पूरी करते हुए रॉयल कैनेडियन माऊंटेड पुलिस ने केन्द्रीय उधोग मंत्री प्रफुल्ल पटेल को कथित रिश्वतखोरी तथा हेराफेरी के मामले में आरोपी बनाया है। कैनेडियन पुलिस ने एक कैनेडियन टैक्रीकल कार्यकारी अधिकारी के साथ प्रफुल्ल पटेल को रिश्वतखोरी के अतिरिक्त ठगी की एक ऐसी योजना के संबंध में आरोपी बनाया है जिसमें भारत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं। कनाडाई संघीय न्यायिक विभाग भारतीय मूल के कनाडाई कारोबारी नजीर कारीगर पर विदेशी सार्वजनिक अधिकारी अधिनियम के अन्तर्गत मुकद्दमा चलाने की योजना बना रहा है। कनाडाई अधिकारियों का आरोप है कि कारीगर ने कनाडा के विभिन्न सरकारी अधिकारियों को 2,50,000 डालर की रिश्वत दी। उनका यह भी आरोप है कि मुम्बई के पूर्व पुलिस कमिश्रर हसन गफूर ने एयर इंडिया के लिए 10 करोड़ डालर से अधिक के सुरक्षा उपकरणों का आर्डर दिलाने के लिए नजीर से मिलकर साजिश रची थी। वहीं प्रफुल्ल पटेल और हसन गफूर ने एक साक्षात्कार द्वारा इन आरोपों का खंडन किया है।


इस बीच  प्रफुल्ल पटेल ने प्रधानमंत्री से पत्र लिखकर अपनी बेगुनाही के बारे में अवगत कराया है। उन्होंने लिखा है कि, नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में मेरे पिछले कार्यकाल के बारे में कनाडा के अखबार में जो कुछ छपा है वह निराधार और झूठ है।

पटेल ने पीएम से अनुरोध किया है कि, एयर इंडिया से इस मुद्दे के सभी रिकार्ड मंगवाकर जांच करवाई जाए। इन आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए उन्होंने लिखा कि  नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस टेंडर को प्रारंभिक चरण में ही रद्द कर दिया था।


बहरहाल  केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल पर घूसखोरी के आरोप ने यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्ष ने प्रधानमंत्री से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है लेकिन सरकार ने फौरी तौर पर किसी जांच से इंकार कर दिया है। प्रफुल्ल की पार्टी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी है। कनाडा के एक अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक भारतीय मूल के एक व्यापारी ने प्रफुल्ल पर ढाई करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।

कनाडा के अखबार ग्लोब एंड द मेल के मुताबिक मामला उन दिनों का है जब पटेल यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री थे। कनाडा में भारतीय मूल के एक व्यापारी नजीर कारीगर ने आरोप लगाया है कि उसने पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को, सुरक्षा उपकरणों से जुड़े एक टेंडर की सौदेबाजी में ढाई करोड़ की रिश्वत दी थी। मुंबई के पूर्व कमिश्नर हसन गफूर के दोस्त बताए जा रहे कारीगर के मुताबिक उसने प्रफुल्ल पटेल के करीबी लक्ष्मण ढोबले के जरिए रिश्वत पहुंचाई।

मनमोहन सरकार के एक और मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के इस आरोप के बाद विपक्ष एक बार फिर जोश में है और प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहा है। उधर, खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता चुके प्रफुल्ल ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर सफाई दी है। पटेल ने पीएम से एयर इंडिया के रिकार्ड मंगवाकर जांच की गुज़ारिश की है। पटेल को राहत देते हुए मौजूदा नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने भी जांच से इंकार कर दिया है। उनके मुताबिक अख़बार में कुछ भी लिख देने से जांच नहीं होती है। पटेल की पार्टी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी है। उनका कहना है कि आरोप के बारे में कोई सबूत नहीं है।

एअर इंडिया प्रबंधन हड़ताल को अवैध घोषित कर इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन के कई नेताओं और पायलटों को बर्खास्त कर चुकी है यहां तक कि हड़ताली पायलटों को दिल्ली हाईकोर्ट की झिड़की मिल चुकी है लेकिन बात बनती नहीं दिख रहीदरअसल, वेतन का मसला काफी पुराना है। सारे हड़ताली पायलट पूर्ववर्ती इंडियन एअरलाइंस के हैं जिनका एयर इंडिया में 2007 में विलय कर दिया गया था।  हड़ताली पायलटों के संगठन का कहना है कि एअर इंडिया के मूल पायलटों को ज्यादा वेतन मिलता है, जबकि एअरलाइंस के पायलटों को उनकी तुलना में कम वेतन मिलता है। इस आरोप में दम है।एक ही परिस्थिति में एक ही काम करने वालों के लिए वेतन के पैमाने दो तरह के नहीं होने चाहिए।

एविएशन सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ाने की योजना खटाई पर पड़ सकती है। सेबी ने एविएशन सेक्टर के लिए टेकओवर कोड़ में फेर-बदल करने से इनकार किया है।

फिलहाल, एविएशन सेक्टर में 49 फीसदी एफडीआई की छूट है। लेकिन, कोई भी विदेशी एयरलाइन घरेलू एयरलाइंस में 26 फीसदी हिस्सा नहीं खरीद सकती है।

सरकार विदेशी एयरलाइंस को घरेलू एयरलाइंस में 26 फीसदी हिस्सा खरीदने की छूट देने के विचार में है। टेकओवर नियमों के तहत लिस्टेड कंपनी का 26 फीसदी हिस्सा खरीदने पर अतिरिक्त 25 फीसदी हिस्सेदारी के लिए ओपन ऑफर लाना जरूरी है।

सरकार चाहती है कि एविएशन सेक्टर को इस नियम में छूट मिले। हालांकि, डीआईपीपी ने सेबी को औपचारिक तौर पर प्रस्ताव नहीं भेजा है। मामले पर वित्त मंत्रालय और विमानन मंत्रालय के जबाव के बाद कैबिनेट के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा।

एसपीतुलस्यान डॉट कॉम के एस पी तुलस्यान का कहना है कि सेबी किसी सेक्टर के लिए अलग नियम नहीं बना सकता है और न ही कोई छूट दे सकता है। टेकओवर नियमों की वजह से एविएशन सेक्टर में विदेशी निवेश के लिए अड़चन नहीं है।

एस पी तुलस्यान के मुताबिक विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के साथ मैनेजमेंट करार कर सकती हैं, जिसके तहत ओपन ऑफर पूरा न भरने पर कंपनी अतिरिक्त शेयर जारी करेगी।

सरकार प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों को एयर ट्रैफिक फ्यूल (एटीएफ) यानी हवाई ईंधन की सीधे इंपोर्ट करने की अनुमति देने जा रही है।

वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय ने सहमति दे दी है। जल्द ही इस संबंध एक नोट कैबिनेट को भेजा जायेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसको लागू कर दिया जायेगा। सूत्रों का कहना है कि यह कोशिश की जायेगी कि एफडीआई और हवाई ईंधन दोनों की सहमति कैबिनेट से एक साथ ले ली जाये। सरकार के इस फैसले से तेल कंपनियां परेशान हैं। उनका लग रहा है कि इससे एटीएफ कारोबार को धक्का लग सकता है। निश्चित तौर पर वे विदेशी कंपनियां की तरह एटीएफ के मूल्य में कटौती नहीं कर सकती। वहां टैक्स स्ट्रैक्चर दूसरा है। बेशक तेल कंपनियों ने इस फैसले का विरोध किया था, मगर उनको मना लिया गया। एक तेल कंपनी के उच्चाधिकारी के कहा, इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के साथ बातचीत हुई थी। हमने इस पर सहमति जता दी है।

मौजूदा नियम और विरोध
मौजूदा समय में सभी एयरलाइंस को सरकारी कंपनियों के जरिये हवाई ईंधन खरीदना पड़ता है। प्राइवेट एयरलाइंस को इस पर करीब 13 पर्सेंट की इंपोर्ट ड्यूटी देनी पड़ती है। इसके अलावा राज्यों को 4 से 30 पर्सेंट का सेल टैक्स भी देना पड़ता है। प्राइवेट एयरलाइंस का कहना है कि उन्हें सीधे तौर पर एटीएफ इंपोर्ट की इजाजत दी जाये। इससे एक तो इंपोर्ट ड्यूटी कम देना होगा और साथ में राज्यों के सेल टैक्स से भी वे बच जायेंगी। बेशक इंपोर्ट करने पर सप्लाई का खर्चा उनको ही वहन करना होगा। मगर इसके बावजूद उनको बाहर से एटीएफ मंगाना सस्ता पड़ेगा, क्योंकि विदेशों में एटीएफ की कीमत भारत की तुलना में काफी कम है।

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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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