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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Sunday, February 5, 2012

अंतरिक्ष भी घोटाले की जद में। सत्तावर्ग के पवित्र गायों का पर्दाफाश​​! माधवन समेत ISRO के 4 वैज्ञानिकों दोषी: जांच कमेटी ​पलाश विश्वास


अंतरिक्ष भी घोटाले की जद में। सत्तावर्ग के पवित्र गायों का पर्दाफाश​​!

माधवन समेत ISRO के 4 वैज्ञानिकों दोषी: जांच कमेटी


​पलाश विश्वास

हम बार बार कहते लिखते रहे हैं कि सत्तावर्ग का तथाकथित अंतरिक्ष अनुसंधान पेंटागन और नासा के अंतरिक्ष युद्ध कार्यक्रम का हिस्सा है ​​और इस पर अंधाधुंध खर्च कारपोरेट साम्राज्यवाद के हित में है। यह सीधे तौर पर कारपोरेय बिजनेस है। रक्षा और विग्यान तकनीक विकास के नाम पर गोपनीयता और पवित्रता का मुलम्मा इस कदर चढ़ा हुआ है कि इस पर कोई चर्चा नहीं होती, जबकि इस क्षेत्र में गुपचुप घोटाला​ ​ सबसे ज्यादा हैं। यही क्षेत्र काला धन का उत्पत्ति स्थल है।

एंट्रिक्स-देवास डील में माधवन नायर सहित इसरो के चार वैज्ञानिक जांच में दोषी पाए गए हैं। जांच के लिए बनी सिन्हा कमेटी ने इन वैज्ञानिकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।गौरतलब है कि  एंट्रिक्स-देवास सौदे की वजह से कोई भी सरकारी जिम्मेदारी सम्भालने से प्रतिबंधित किए गए एक पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक ए. भास्करनारायण ने इससे पहले दावा किया था  कि दो सदस्यीय जांच समिति ने उनके इस रुख को सही ठहराया है कि दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधनों को औनेपौने दामों में नहीं बेचा गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वैज्ञानिक सचिव रहे भास्करनारायण ने से कहा, 'हम यह कहते आ रहे हैं कि दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधन किसी निजी कम्पनी को औनेपौने दाम पर नहीं बेचा गया। बी.के. चतुर्वेदी और रोदम नरसिम्हा की सदस्यता वाली समिति ने भी यही बात कही है।'  एंट्रिक्स-देवास करार मामले में सरकारी कार्रवाई का सामना कर रहे इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है। नायर ने मांग की है कि सरकारी पदों से उन्हें रोकने वाला आदेश निरस्त किया जाए और मामले की जांच कराई जाए।

एस बैंड के लिए एंट्रिक्स और देवास के बीच हुई डील की जांच के लिए बनाई गई समिति ने इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर और तीन अन्य वैज्ञानिकों को गड़बड़ी के लिए दोषी ठहराया है। प्रत्यूष सिन्हा समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि एंट्रिक्स-देवास सौदे में पारदर्शिता नहीं थी।माधवन नायर ने रविवार को एंट्रिक्स-देवास सौदे पर आई दो जांच रपटों की कटु आलोचना करते हुए कहा कि दोनों रपटें एकपक्षीय हैं और उनमें सभी तथ्य नहीं हैं।

माधवन नायर को ब्लैक लिस्ट करने के सरकार के फैसले पर उठ रहीं आपत्तियों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे बड़ा विवाद बनने से रोकने की कोशिश शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय में पहले इसरो आदि से संबंधित काम देख रहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के साथ मनमोहन सिंह ने इसी मकसद से विचार-विमर्श किया है।सूत्रों के अनुसार एस बैंड आवंटन प्रक्रिया की तकनीक से परिचित चव्हाण से सलाह मशविरा कर पीएम ने उन्हें नायर और उनके तीन सहयोगियों को ब्लैक लिस्ट करने के सरकार के फैसले पर अंगुली उठा रहे सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर के लोगों को इस निर्णय के आधार से संतुष्ट करने का भी जिम्मा दिया है। अपने ही साइंस पैनल के वरिष्ठ सदस्यों की तरफ से ब्लैक लिस्ट करने वाले फैसले की आलोचना से मनमोहन सिंह परेशान हैं और इसे बड़ा विवाद बनने से पहले ही खत्म करना चाहते हैं।

प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय टीम ने न न सिर्फ इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर और तीन अन्य अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दोषी ठहराया है बल्कि शुरुआत से ही देवास के कामकाज और परिचालन की जांच किए जाने की सिफारिश की है। पांच सदस्यीय टीम के निष्कर्षों और सुझावों के अनुसार देवास की स्थापना फोर्ज एडवाइजर्स यूएसए द्वारा दिसंबर 2004 में एक लाख रुपए की शेयर पूंजी और दो शेयरधारकों के साथ की गई थी।पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त सिन्हा की इस रिपोर्ट में माधवन नायर, ए भास्कर नारायण, केआर श्रीधर मूर्ति और केएन शंकर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। समिति की सिफारिश पर प्रतिक्रिया देते हुए नायर ने कहा है कि समिति को पूरी रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।

नायर ने कहा, ''यद्यपि अभी मैंने दोनों रपटों का विस्तृत अध्ययन नहीं किया है, फिर भी मैं स्पष्टतौर पर कह सकता हूं कि रपटें एकपक्षीय हैं और उनमें सभी तथ्य नहीं हैं। पहले रपटें मेरे पास आ जाएं और मैं उनका अध्ययन कर लूं, तभी मैं अपना रुख साफ कर पाऊंगा।''

इसरो और अंतरिक्ष विभाग की वेबसाइट पर गलत समय (शनिवार रात) पर जांच रपटों को जारी किए जाने पर आश्चर्य जाहिर करते हुए नायर ने कहा कि प्रमुख बिंदुओं और निष्कर्षों पर नजर दौड़ाने से यह जाहिर होता है कि जांच तथ्यगत जानकारी पर आधारित नहीं है और कई संदर्भ से बाहर के बिंदुओं पर विचार किया गया है।

नायर ने कहा, ''उदाहरण के तौर पर उपग्रहों को लांच करने, ट्रांस्पोंडरों को पट्टे पर देने और स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से सम्बंधित मुद्दों को नियमों व कानूनों के अनुसार नहीं देखा गया है।''

जांच रपटों में नायर और तीन अन्य अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को 2005 में हुए 30 करोड़ डॉलर के करार में गंभीर अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

जिम्मेदार ठहराए गए अन्य तीन वैज्ञानिकों में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव ए. भास्करनारायण, एंट्रिक्स के पूर्व कार्यकारी निदेशक केआर श्रीधरमूर्ति और इसरो उपग्रह केंद्र के पूर्व निदेशक केएन शंकरा शामिल हैं।

1,000 करोड़ रुपये पूंजी वाला एंट्रिक्स निगम, इसरो की व्यावसायिक शाखा है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरू में है और देश भर में उसके केंद्र हैं।

यद्यपि पूर्व कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य रोदम नरसिम्हा की दो सदस्यीय समिति की पूरी रपट जारी कर दी गई है, लेकिन इस रपट का अध्ययन करने के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति की रपट के सिर्फ निष्कर्ष ही फिलहाल जारी किए गए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फरवरी 2011 में चतुर्वेदी समिति गठित की थी और इस समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने व नियमों के कथित उल्लंघन की जिम्मेदारी तय करने के लिए मई 2011 में केंद्रीय सतर्कता आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी।

एंट्रिक्स निगम और देवास मल्टीमीडिया के बीच विवादास्पद सौदे की जांच करने वाली पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रपट में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष जी. माधवन नायर और तीन अन्य वैज्ञानिकों को गम्भीर अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस सौदे के कारण सरकारी खजाने को दो लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है, जबकि एक अन्य दो सदस्यीय समिति ने सीएजी के नुकसान के अनुमान से असहमति जताई है।


पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा है कि विभिन्न अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसले में गम्भीर खामियां रही हैं, और कुछ मामलों में की गई कार्रवाइयां सार्वजनिक विश्वासघात की कगार तक हैं।


जबकि दो सदस्यीय उच्च अधिकार प्राप्त समीक्षा समिति ने सीएजी द्वारा अनुमानित नुकसान से असहमति जताई है और देवास को सस्ते में स्पेक्ट्रम बेचने की बात को भी खारिज कर दी है। इस समिति में पूर्व कैबिनेट सचिव बी.के. चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य रोदम नरसिम्हा शामिल रहे हैं।


अन्य तीन वैज्ञानिकों में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव ए. भास्करनारायण, एंट्रिक्स के पूर्व कार्यकारी निदेशक के.आर. श्रीधरमूर्ति और इसरो उपग्रह केंद्र के पूर्व निदेशक के.एन. शंकरा शामिल हैं।


करार के अनुसार, इसरो की व्यावसायिक शाखा, एंट्रिक्स द्वारा देवास को 70 मेगाहर्ट्ज एस-बैंड स्पेक्ट्रम मुहैया कराने थे। देवास, मल्टीमीडिया सेवा में है। एंट्रिक्स को, मुख्यरूप से देवास के लिए निर्मित दो उपग्रहों के ट्रांस्पोडर्स पट्टे पर देकर स्पेक्ट्रम मुहैया कराने थे।


सीएजी का अनुमान है कि इस सौदे से सरकारी खजाने को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बाद में केंद्र सरकार ने इस विवादास्पद सौदे को रद्द कर दिया।


इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने हाल ही में घोषणा की थी कि विवादास्पद सौदे की जांच करने वाली दोनों समितियों की रपटें सार्वजनिक की जाएंगी। इसरो ने दोनों समिति के निष्कर्षो तथा सिफारिशों को शनिवार देर शाम अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया।


सिन्हा समिति ने अंतरिक्ष विभाग और एंट्रिक्स को इस सौदे तक ले जाने के लिए नायर, भास्करनारायण, श्रीधरमूर्ति और शंकरा को मुख्यरूप से जिम्मेदार ठहराया। समिति ने सिफारिश की कि सरकार को इनके खिलाफ पेंशन नियम की उचित धाराओं या कानून के किसी अन्य प्रावधान के तहत कार्रवाई करे।


समिति ने सेवानिवृत्त अधिकारियों एस.एस. मीनाक्षीसुंदरम और वीणा राव के खिलाफ भी पेंशन नियम के तहत, तथा जी. बालचंद्रन व आर.जी. नादादुर के खिलाफ उचित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।


समिति ने देवास के स्वामित्व के तरीके में बदलाव करने, व्यक्तियों व अधिकारियों द्वारा हासिल किए गए अवैध वित्तीय लाभ की किसी उचित एजेंसी से जांच कराने, तथा देवास के शेयरों की मूल्य वृद्धि की उस मात्रा की जांच कराने की सिफारिश की है, जिससे लोगों ने लाभ कमाया था।


समिति ने देवास में शेयर लेने के तरीके की और देवास में हिस्सेदारी रखने वाली मॉरिशस की दो कम्पनियों की भी जांच कराने की सिफारिश की थी।


समिति के अनुसार, उस प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर केंद्रीय दूरसंचार विभाग सहित केंद्र सरकार के किसी भी अन्य विभाग से कोई परामर्श नहीं किया गया, जो उपग्रह और जमीनी प्रणालियों के जरिए मोबाइल रिसीवरों को मल्टीमीडिया व सूचना सेवा की आपूर्ति कराने वाली थी। इसके अलावा इस सौदे के लिए दो उपग्रहों का निर्माण करने से पहले प्रस्तावित सेवाओं की विनियामक जरूरतों पर भी कोई परामर्श नहीं किया गया था।


सिन्हा समिति ने कहा है कि इनसैट प्रणाली के सम्पूर्ण प्रबंधन और गैरसरकारी उपयोगकर्ताओं द्वारा उपग्रह के उपयोग के लिए सिफारिश करने वाली संस्था, इनसैट समन्यव समिति (आईसीसी) की बैठक 2004 में नहीं हुई थी। ऐसे में आईसीसी से परामर्श लिए बगैर एंट्रिक्स-देवास सौदे के लिए दो उपग्रहों का प्रावधान सरकारी नीति का स्पष्ट उल्लंघन है।


देवास के साथ जिस तिथि (28 जनवरी) को करार पर हस्ताक्षर किए गए थे, उस तिथि को न तो अंतरिक्ष आयोग को बताया गया न कैबिनेट की उस टिप्पणी में ही उसका खुलासा किया गया, जिसके जरिए दो उपग्रहों में से एक जीसैट-6 के निर्माण की अनुमति मांगी गई थी।


लेकिन उच्च अधिकार प्राप्त दो सदस्यीय समीक्षा समिति ने कहा है कि इस करार के कारण सरकार को सम्भवत: इतना बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, और उसने एंट्रिक्स बोर्ड के अध्यक्ष, अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग की वित्त समिति के सदस्य, और इसरो में उपग्रह केंद्र के निदेशक को सौदे में वित्तीय और रणनीतिक खामियों के लिए प्राथमिकतौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है।


समिति ने कहा है कि एंट्रिक्स-देवास सौदे के कई बिंदुओं को अंतिम निर्णय लेने वाले इसरो और एंट्रिक्स बोर्ड के अध्यक्ष को कुछ खामियों की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए।


केंद्र सरकार ने 13 जनवरी को नायर, भास्करनारायण, शंकरा और श्रीधरमूर्ति को कोई भी सरकारी जिम्मेदारी सम्भालने या किसी सरकारी समिति की सदस्यता लेने से प्रतिबंधित कर दिया था।


लेकिन नायर का कहना है कि सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से पहले उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका नहीं दिया गया। नायर को 1998 में पद्मभूषण और 2009 में पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।


माधवन नायर और तीन अन्य अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को काली सूची में डालने के सरकार के फैसले को इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. आरके खोला ने सही ठहराया है। इस मामले में नायर के पत्र के विरोध में डॉ. खोला ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है और सभी प्रतिबंधित वैज्ञानिकों के खिलाफ और भी ज्यादा सख्त कदम उठाने की मांग की है।


डॉ. खोला का कहना है कि विवादित एंट्रिक्स-देवास करार में नायर और तीन अन्य वैज्ञानिकों की भूमिका साफ तौर पर उजागर हो चुकी है। सरकार ने इन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही चारों को वर्तमान एवं भविष्य में किसी भी सरकारी पद पर नहीं रखने का जो फैसला लिया है वह बिल्कुल सही है। इस मामले में नायर की ओर से पीएम को पत्र लिखा जाना हास्यास्पद ही है।


डॉ. खोला कहते है इन चारों वैज्ञानिकों की इस विवादित करार में अहम भूमिका रही है। इसी कारण देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। डॉ. खोला के मुताबिक इसरो में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ वे 1980 के दशक से ही तत्कालीन प्रधानमंत्रियों को कई बार पत्र लिख चुके है। उन्होंने मोरारजी देसाई से लेकर इंदिरा गांधी, चरण सिंह, राजीव गांधी और चंद्रशेखर और नरसिंहाराव को भी पत्र लिखे।


दो दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने इसरो के पूर्व चेयरमैन माधवन नायर व तीन अन्य वैज्ञानिकों के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाने की मांग की है। प्रतिबंध हटाने के बारे में तो सरकार को सोचना भी नहीं चाहिए।


--
Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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