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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Wednesday, April 25, 2012

रेटिंग कटौती के पीछे बाहरी दबाव का खतरनाक खेल, पर बाजार का तो बाजा बजने लगा!

रेटिंग कटौती के पीछे  बाहरी दबाव का खतरनाक खेल, पर बाजार का तो बाजा बजने लगा!

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

वाशिंगटन से प्रणव मुखर्जी और कौशिक बसु की शास्त्रीय युगलबंदी से आर्थिक सुधारों के लिए जो बाहरी दबाव बना , वह रेटिंग में कटोती ​​से और ज्यादा मारक बनने लगा है। रेटिंग कटौती को प्रणव मुखर्जी ज्यादा तुल नहीं दे रहे हैं, तो भाजपा ने अपनी राजनीति को फंदे से निकालने के लिए रेटिंग में कटौती की जिम्मेवारी सरकार पर डाल दी औक कह दिया कि यह कुप्रबंधन का नतीजा है।गौर करें कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एसऐंडपी की रेटिंग को समय पर दी गई चेतावनी बताया है और कहा है कि देश में आर्थिक सुधार लागू किए जाएंगे। उन्होंने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत पर लाने का भी वादा किया।उधर औद्योगिक संगठनों ने सरकार से कहा है कि राजनीतिक मतभेद भुला कर आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सीआईआई ने सरकार से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, जीएसटी और प्रत्यक्ष कर संहिता के क्षेत्र में सुधार की मांग की। अब देखना है कि संसद में इस बाहरी दबाव का क्या असर होता है और  आर्थिक  सुधारों और लंबित वित्तीय विधेयकों का क्या होता है।सरकार ने 2012-13 की बजटीय प्रक्रिया 8 मई तक पूरा करने के उद्देश्य से तृणमूल कांग्रेस के अलावा विपक्षी दलों को साथ लेकर चलने की योजना बनाई है। हालांकि भाजपा सहित विपक्षी दल भ्रष्टाचार, वामपंथी उग्रवादियों के बढ़े हमलों, जम्मू-कश्मीर के हालात और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। पर बाजार का तो बाजा बजने लगा है!रेटिंग कम होने से भारतीय कंपनियों के लिये विदेशों से वाणिज्यिक ऋण जुटाना अधिक खर्चीला हो जायेगा। वैश्विक साख निर्धारण एजेंसी स्टैण्डर्ड एण्ड पूअर्स :एस एण्ड पी: ने आज भारत की रेटिंग घटाकर नकारात्मक कर दी और अगले दो साल में राजकोषीय स्थिति तथा राजनीतिक परिदृश्य में सुधार नहीं हुआ तो इसे और कम करने की चेतावनी दी है।

रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) द्वारा भारत की वित्तीय साख की रेटिंग घटाकर नकारात्मक किए जाने के बाद शेयर बाजार में बिकवाली दबाव बढ़ गई, जिससे बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 56 अंक टूट गया।अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से मजबूती के संकेत मिलने के बावजूद घरेलू बाजारों ने सुस्ती के साथ शुरुआत की। दोपहर तक बाजार सीमित दायरे में घूमते नजर आए। भारतीय शेयर बाज़ार में बुधवार कारोबारी गिरावट का दिन रहा| सुबह 18 अंकों की बढ़त के साथ खुले सेंसेक्स में दिनभर गिरावट का दौर देखने को मिला| सेंसेक्स तेजी के साथ खुला, लेकिन रेटिंग एजेंसी द्वारा सरकार की वित्तीय साख घटाए जाने के बाद संवेदी सूचकांक घटकर 17019.24 अंक पर आ गया। हालांकि बाद में कुछ सुधार के बाद यह 56 अंक नीचे 17151.29 अंक पर बंद हुआ।वहीँ निफ्टी 21 अंकों के नकारात्मक आंकडे के साथ 5202 अंक पर बंद हुआ|वैश्विक क्रेडिट एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएडंपी) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका देते हुए भारत के आउटलुक को नेगेटिव कर दिया है। साथ ही बीबीबी की भी रेटिंग की एक बार फिर से पुष्टि की गई है। ऐसे में भारत में आर्थिक सुधारों में आने वाले समय में और सुस्ती आने की आशंका है। वहीं देश में निवेश और विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ने की भी बात कही जा रही है। एसएंडपी का कहना भारत में निवेश और विकास की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। सरकार को आर्थिक सुधारों पर फैसला लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एसएंडपी के मुताबिक व्यापार घाटा बढ़ने, विकास की रफ्तार सुस्त पड़ने या आर्थिक सुधारों की ओर कदम न उठाए जाने पर भारत को डाउनग्रेड किया जा सकता है।इसका अर्थ क्या है? परिदृश्य का मतलब है कि लघु से मध्यम अवधि विशेष रूप से छह महीने से दो वर्षो में रेटिंग किस दिशा में बढ़ सकती है।परिदृश्य स्थिर रहने का अर्थ है कि रेटिंग में बदलाव नहीं होने वाला है। नकारात्मक परिदृश्य का मतलब है कि रेटिंग को घटाया जा सकता है, जबकि सकारात्मक परिदृश्य का मतलब है कि रेटिंग को बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) द्वारा भारत के भविष्य की रेटिंग घटाने के प्रति सरकार चिंतित है लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है।अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एसएंडपी द्वारा भारत की साख रेटिंग के भविष्य में संशोधन पर टिप्पणी करते हुए मुखर्जी ने कहा , ' मैं चिंतित हूं , लेकिन मैं घबराहट महसूस नहीं कर रहा हूं क्योंकि मुझे विश्वास है कि हमारी आर्थिक विकास दर लगभग 7 फीसदी रहेगी भले ही इससे अधिक न हो। हम राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 5.1 प्रतिशत के दायरे में रखने में कामयाब होंगे। ' दूसरी ओर,अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) द्वारा भारत के आर्थिक परिदृश्य की रेटिंग को स्थिर से घटाकर नकारात्मक किए जाने पर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार देश की खराब आर्थिक स्थिति के लिए सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार बताया। भाजपा के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत की आर्थिक पहचान को गहरा धक्का लगा है, ऐसी उम्मीद नहीं थी। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने कहा कि एसऐंडपी महज एक अवधारणा है। यह सिर्फ नजरिया घटाया गया है और अगर हम दुनिया को यह दिखा दें कि भारत 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है तो वे इसको बढ़ा भी सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि हालात में सुधार होगा।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार एस एंड पी के इस फैसले पर गौर करेगी। एस एंड पी ने भारत का साख परिदृश्य बीबीबी नकारात्मक कर दिया। निवेशकों के लिए सबसे निचले पायदान वाली रेटिंग होती है। प्रणब ने कहा कि हम उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए काम करेंगे।लेकिन, एसएंडपी द्वारा भारत का आउटलुक घटाने की खबर से बाजार घबरा गए। दिन के ऊपरी स्तरों से सेंसेक्स करीब 200 अंक और निफ्टी 60 अंक गिरे। निफ्टी 5150 के स्तर के बेहद करीब चला गया।यूरोपीय बाजारों के मजबूती पर खुलने से घरेलू बाजार निचले स्तरों से उबरते नजर आए। साथ ही, जल्द भारत की रेटिंग घटने की संभावना कम होने की वजह से घरेलू निवेशकों में भी भरोसा लौटता दिखा।कारोबार के आखिरी घंटे में बाजार में रिकवरी नजर आई। दिन के निचले स्तरों से सेंसेक्स 150 अंक और निफ्टी 40 अंक से ज्यादा संभले।हालांकि, मूडीज ने भारत का आउटलुक स्टेबल रखा है और रेटिंग बीएए3 बरकरार रखी है। मूडीज का कहना है कि बचत और निवेश में बढ़ोतरी जारी रहने से भारत के आर्थिक विकास को सहारा मिलेगा।वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी 7 फीसदी रहने का अनुमान है। मूडीज का मानना है कि 7 फीसदी से ज्यादा की जीडीपी दर के लिए भारत में निवेश बढ़ना जरूरी है।

आर्थिक सुधारों के एजंडे पर सर्वोच्च पराथमिकता विनिवेश और विदेशी पूंजी के अबाध प्रबाह को है। इस सिलसिले में वित्तमंत्री की बाध्यताओं का रोना कम होने के आसार नहीं दीख रहे हैं। भ्रष्टाचार के एक के बाद एक प्रकरण खुलते जारहे हैं । रजाना किसी घोटाले या महाघोटाले का पर्दाफाश। सरकार और पार्टी में ऊपर से नीचे तक फेरबदल करने के बावजूद मुंह पर पुता कालिख नहीं मिटने वाला। अन्ना ब्रिगेड की हवा निकालने में राजनीतिक तबके ने मीडिया को साथ लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी। पर बाबा रामदेव को साथ लेकर फिर अन्ना हजारे ने मोर्चा खोलकर भ्रष्टाचार को फोकस पर ला दिया है।दूसरी ओर बीबीसी संवादादाता विधांशु कुमार ने बोफोर्स मामले के नए खुलासों पर पत्रकार चित्रा सुब्रमण्यम से बात की और पूछा क्या नई बातें सामने आई हैं। ढाई दशकों तक अपनी पहचान छिपाकर रखने वाले स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि बोफोर्स घोटाले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ घूस लेने के कोई सबूत नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी के खिलाफ़ पुख्ता सबूत थे।लिंडस्ट्रोम ने बोफोर्स कांड में राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन को तो क्लीन चिट दी है लेकिन 'हिंदू' अखबार पर सवाल उठाए. लिंडस्ट्रोम का आरोप है कि 'हिंदू' ने इस मामले से जुड़ी जानकारी को अपनी सुविधा के हिसाब से प्रकाशित किया और अपने सूत्र की सुरक्षा और निजता का ख्याल नहीं रखा गया। बहरहाल बोफोर्स की दलाली में क्लीनचिट मिलने के बाद अमिताभ बच्चन मीडिया के सामने आए और कहा कि 25 साल बाद धुला है दाग. बोफोर्स घोटाले के वक्त ही अमिताभ ने सियासत छोड़ी थी और राजनीति में वापस ना आने की कसम खाई थी। बिग बी ने कहा- मां-बाबूजी होते तो अच्छा होता, क्योंकि बाबूजी को इस को लेकर क्लेश था, उन्होंने पूछा था- कुछ गलत तो नहीं किया?भारत सरकार ने 1986 में स्वीडिश कंपनी बोफोर्स से 1437 करोड़ में 400 तोप खरीदने का फैसला किया था। 16 अप्रैल 1987 को स्वीडिश रेडियो ने दावा किया कि बोफोर्स ने भारत के कई नेताओं और अफसरों को दलाली दी। तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दावा किया था कि किसी बिचौलिए को पैसा नहीं दिया गया। लेकिन एक निश्चित प्रतिशत रकम बोफोर्स कंपनी द्वारा रहस्यमय ढंग से स्विट्‌जरलैंड के पब्लिक बैंक अकाउंट्‌स में जमा कराई गई और भारत सरकार के पब्लिक सर्वेंट्‌स को और उनके नामांकित लोगों को दी गई। इस घोटाले ने भारत की राजनीति का रुख बदल दिया।जब स्विस अधिकारियों ने भारत सरकार के लेटर रोगेटरी पर काम शुरू किया और स्वीडन में नेशनल ऑडिट ब्यूरो ने अलग जांच शुरू की, तब बोफोर्स कंपनी से प्राप्त धन को नियंत्रित करने वाले सात खाताधारकों को लगा कि कहीं उनका नाम न खुल जाए। उन्होंने स्विस अदालतों में अपील दायर की कि यह जांच रोक दी जाए। विभिन्न अदालतों से होती हुई अपील स्विस सुप्रीम कोर्ट में पहुंची। मज़े की बात है कि सीबीआई को इस समय तक पता नहीं चल पाया था कि ये सात खाताधारक कौन हैं. जब स्विस सुप्रीम कोर्ट ने इन सातों की अपील खारिज कर दी, तब (23.7.1993  को) पहली बार सीबीआई को जांच अधिकारी ने सूचित किया कि सात अपीलकर्ताओं में ओट्टावियो क्वात्रोची का नाम शामिल है। लेकिन इसके बाद भी सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के काग़ज़ात नहीं मिले। यह भी आश्चर्य है कि काग़ज़ात क्यों नहीं मिले. उन दिनों प्रधानमंत्री नरसिंह राव थे। देवगौड़ा की सरकार बनी, तब सीबीआई को स्विस सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के काग़ज़ात मिल पाए।

तो दूसरी ओर बोफोर्स जिन्न के पुनर्जीवित होने के बीच देश की नामचीन हस्तियों की आवाजाही के लिए अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी से किए गए हेलीकॉप्टर सौदे में 350 करोड़ रुपये की दलाली के आरोप लगे हैं। भारत सरकार ने अगस्टा से साल 2010 में 12 हेलीकॉप्टर खरीदे। 2013 में ये हेलीकॉप्टर भारत को सौंपे जाने हैं। इस सौदे के लिए अगस्टा वेस्टलैंड ने 3546 करोड़ की बोली लगाई।सप्लाई से पहले ही इटली के एक अखबार ने 350 करोड़ की दलाली का दावा कर सनसनी फैला दी। रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने खुलासे के फौरन बाद पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के संकेत दे दिए हैं।अभी आर्मी चीफ के रक्षा सौदों में घोटालों और देस की रक्षा तैयारियों में खामियों के ारोप से सरकार उबरी नहीं है। अब इन नये खुलासे से देस में हथियारों के बाजार में तो फर्क पड़ना ही है।रक्षा प्रवक्ता शितांशु कार ने बताया कि इटली की अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी से खरीदे गए इन हेलीकॉप्टरों के सौदे में साख समझौता हुआ था और यदि कोई अनियमितता पाई गई तो समझौते के प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाएगा।इस सौदे के बारे में 22 फरवरी को भी अनियमितताओं की रिपोर्ट आने के बाद रक्षा मंत्रालय ने रोम दूतावास से रिपोर्ट मांगी थी और वहां से प्राप्त रिपोर्ट में कहा गया था कि इटली में जो जांच चल रही है उसका इस सौदे से कोई सीधा सरोकार नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया था कि यह स्पष्ट नहीं है कि शुरुआती जांच का दायरा इस सौदे तक पहुंचेगा या नहीं। प्रवक्ता ने कहा कि अगर आरोप सही पाए गए तो समझौते के प्रावधानों और मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसी बीच वित्त मंत्रालय की संसदीय समिति ने एक बार फिर वित्त मंत्रालय की नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नीलामी प्रक्रिया के जरिए सरकारी उपक्रमों [पीएसयू] के विनिवेश की नीति संसदीय समिति को बिल्कुल भी हजम नहीं हुई है। समिति ने इस नीति को अनुचित ठहराते हुए कहा है कि सरकारी उपक्रमों को 'दुधारू गाय' नहीं समझा जाना चाहिए।समिति की इस रिपोर्ट के बाद सरकार के लिए आने वाले दिनों में नीलामी प्रक्रिया के जरिए विनिवेश को जारी रखना मुश्किल हो जाएगा। पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान जब सरकार पेंशन सुधार का विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में थी, तब स्थाई समिति ने एक रिपोर्ट देकर इसे खारिज कर दिया था। सरकार को मजबूरन पेंशन सुधार विधेयक को रोकना पड़ा था।इसी तरह से इस समिति की रिपोर्ट बीमा संशोधन विधेयक को भी लटका चुकी है। इस वर्ष सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये विनिवेश के जरिए जुटाने का लक्ष्य रखा है।


एसएंडपी का मानना है कि वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी दर 5.3 फीसदी रह सकती है। सरकार के लिए वित्त वर्ष 2014 के 4.8 फीसदी के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पाना मुश्किल है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि एसएंडपी ने आउटलुक घटाया नहीं है, बल्कि संशोधन किया है। जबकि ज्यादातर देशों की रेटिंग घटाई जा चुकी है।

एस एंड पी रेटिंग को भारत के लिए समय पर दी गई चेतावनी बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि हम उच्च जीडीपी वृद्धि हासिल करने के लिए काम करेंगे, हम इस पर गौर करेंगे, यह समय पर दी गई चेतावनी है।

मुखर्जी ने कहा एस एंड पी ने दो बातों पर भारत के रेटिंग परिदृश्य को कम किया है, वर्ष 2012-13 में सात प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल नहीं कर पाने और सकल घरेलू उत्पाद के समक्ष राजकोषीय घाटे को 5.1 प्रतिशत के दायरे में सीमित नहीं रख पाने की संभावना के मद्देनजर ऐसा किया गया।

इन दो बातों के अलावा शायद कुछ और भी बातें हो सकती है जिनकी वजह से भारत की रेटिंग घटाई गई। वित्तीय क्षेत्र के सुधारों तथा कुछ अन्य विधेयकों के पारित होने में लग रही देरी इसकी वजह हो सकती हे। हालांकि, एस एंड पी ने भारत की सकारी ऋण रेटिंग कम नहीं की है, हालांकि उसने संकेत दिया है कि इसकी भी संभावना है।

एस एण्ड पी ने भारत का वित्तीय परिदृश्य बीबीबी प्लस ::स्थिर:: से घटाकर बीबीबी नकारात्मक (स्थिर नहीं) कर दिया। रेटिंग कम होने से भारतीय कंपनियों के लिये विदेशों से वाणिज्यिक रिण जुटाना अधिक खर्चीला हो जायेगा। पूंजी बाजार पर भी इसका असर होगा।

रेटिंग घटाए जाने का मतलब यह है कि सरकार अपनी देनदारी पूरी करने में कम सक्षम है। इससे कर्ज पर ब्याज बढ़ सकता है।

प्रमुख रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी, फिच रेटिंग और मूडीज ने भारत को निवेश श्रेणी की सबसे निचली रेटिंग दी है।

एसएंडपी ने बुधवार को भारत के लिए लम्बी अवधि की साख रेटिंग बीबीबी- पर बरकरार रखी, जो निवेश श्रेणी की सबसे निचली रेटिंग है।

रेटिंग में और कटौती होने से देश के सरकारी बांड को जंक (कूड़ा) का दर्जा मिल जाएगा। इससे सरकार के लिए वित्त जुटाना कठिन हो जाएगा।

एजेंसी किसी भी देश की रेटिंग राजनीतिक जोखिम, विकास की सम्भावनाएं, अंतर्राष्ट्रीय निवेश की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज का बोझ और मौद्रिक प्रणाली में लचीलेपन के आधार पर तय करती है।

एस एण्ड पी के क्रेडिट विश्लेषक ताकाहीरा आगावा ने एक वक्तव्य में कहा ''आर्थिक परिदृश्य में बदलाव के पीछे तीन में से एक की संभावना की हमारी सोच ने काम किया है। इसमें यदि बाह्य मोर्चे पर स्थिति लगातार बिगड़ती है, आर्थिक वृद्धि की संभावनायें समाप्त होतीं हैं अथवा कमजोर राजनीतिक समन्वय में वित्तीय सुधारों के मोर्चे पर स्थिति ढीली बनी रहती है।''

एस एण्ड पी की बीबीबी नकारात्मक निवेश के मामले में सबसे निचली रेटिंग है।  एसएमसी ग्लोबल सिक्युरिटीज के अनुसंधान रणनीतिक प्रमुख एम. जगन्नाथम थुनुंगुटला ने इस पर टिप्पणी करते हुये कहा ''भारत की यह नई साख रेटिंग जंक बॉंड रेटिंग के दर्जे से मात्र एक कदम दूर है ... हमें लगता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की कहानी अब समाप्ति के नजदीक है।''

रेटिंग एजेंसी ने आगे कहा है भारत की नकारात्मक रेटिंग परिदृश्य अगले 24 महीने के दौरान और कम हो सकता है। एजेंसी ने कहा है ''यदि भारत के आर्थिक परिदृश्य में सुधार नहीं होता है, विदेशी मोर्चे पर स्थिति और बिगड़ती है और यदि यहां राजनीतिक परिवेश बिगड़ता है तथा राजकोषीय सुधारों की गति धीमी पड़ती है, तो रेटिंग और कम हो सकती है।''

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल में एस एण्ड पी के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भारत की रेटिंग बढ़ाने पर जोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद एजेंसी ने रेटिंग परिदृश्य घटा दिया।

हालांकि, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एस एण्ड पी की रेटिंग कम करने के फैसले पर तुरंत दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा ''इसमें घबराने की कोई बात नहीं, हमें पूरा विश्वास है कि इन समस्याओं से पार पा लेंगे।'' उन्होंने कहा कि बजट में अनुमानित आर्थिक वृद्धि को हासिल कर लिया जायेगा।

एस एण्ड पी ने कहा है कि हालांकि, भारत की वास्तविक प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: वृद्धि वर्ष 2012..13 में 5.3 प्रतिशत पर कुछ नरमी के साथ मजबूत बनी रहेगी, क्योंकि पिछले पांच सालों में इसमें औसतन 6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

एजेंसी ने कहा है कि भारत की अनुकूल दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि संभावनायें और उच्चस्तर का विदेशी मुद्रा भंडार इसकी रेटिंग को समर्थन देता है। इसके विपरीत भारत का उच्च्ंचा राजकोषीय घाटा और भारी कर्ज इसकी साख रेटिंग के समक्ष सबसे बड़ी रुकावट है। एजेंसी का कहना है कि मई 2014 में होने वाले आम चुनाव और मौजूदा राजनीतिक पेचीदगियों को देखते हुये उसे वित्तीय और सार्वजनिक क्षेत्र में मामूली सुधारों की उम्मीद है।

एजेंसी ने जिन सुधारों की बात की है उनमें पेट्रोलियम पदार्थों और उर्वरक पर सब्सिडी कम करने, वस्तु और सेवा कर :जीएसटी: पर अमल करना और बैंकिंग, बीमा और खुदरा क्षेत्र में विदेशी मालिकाना हक दिये जाने पर प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है।

एसएण्डपी ने दूसरी तरफ यह भी कहा है कि यदि सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और निवेश परिवेश में सुधार के उपाय करती है तो रेटिंग परिदृश्य में स्थिरता आ सकती है।

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की मंगलवार को लोक सभा में पेश रिपोर्ट में हाल ही में ओएनजीसी के शेयरों की बिक्री नीलामी प्रक्रिया के तहत करने की पहल पर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रक्रिया सिर्फ आंकड़ेबाजी है। सरकार ने एक जेब से पैसे निकाल कर दूसरी में रख दिए। सिर्फ विनिवेश लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी की खरीद-बिक्री नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट में विनिवेश की सरकार की मंशा को भी गलत बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा लगता है कि विनिवेश सिर्फ राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। जबकि सरकार को एक प्रभावशाली विनिवेश नीति बनानी चाहिए। समिति ने हाल ही में संपन्न ओएनजीसी की विनिवेश प्रक्रिया में सरकारी क्षेत्र के भारतीय जीवन बीमा निगम [एलआइसी] की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।

ओएनजीसी के शेयर नीलामी प्रक्रिया के तहत बेचे गए थे। इसे सफल बनाने के लिए सरकारी क्षेत्र की एलआइसी की मदद ली गई। बिक्री के लिए प्रस्तावित शेयरों में से 83 फीसद शेयर की खरीद एलआइसी ने की थी। इसे काफी गंभीर मानते हुए संसदीय समिति ने बीमा नियामक इरडा को आदेश दिया है कि वह इस पूरी प्रक्रिया की छानबीन करे और पता लगाए कि कहीं एलआइसी ने अपनी निवेश योजना का उल्लंघन तो नहीं किया है।

संसद के बजट सत्र के मंगलवार से शुरू हो रहे दूसरे चरण की पूर्व संध्या पर सरकार के प्रबंधकों का कहना है कि वित्त विधेयक पर 7 और 8 मई को चर्चा के बाद मतदान की योजना तैयार है। वे विश्वास व्यक्त कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए मुद्दों का इसमें समाधान कर दिया जाएगा।

केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सवालों के जवाब में कहा कि वे (ममता) सहयोगी हैं और महत्वपूर्ण सहयोगी बनी रहेंगी। सभी मुद्दों पर निश्चित तौर पर चर्चा कर समाधान किया जाएगा। गठबंधन की राजनीति में इस तरह की बातें होती हैं। भाजपा के संसदीय दल की कार्यकारिणी और राजग की सोमवार को हुई बैठकों में तय किया गया कि मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु के बयान को लेकर सरकार की घेराबंदी की जाएगी कि 2014 के सदीय चुनावों से पहले भारत में किसी बड़े आर्थिक सुधार की संभावना नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेताओं ने छत्तीसगढ़ में सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण के परिप्रेक्ष्य में नक्सलवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठाने का फैसला किया है।

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि संप्रग के सहयोगी दलों की बैठक संसद सत्र के दौरान नियमित तौर पर होती है ताकि सदन में बेहतर ढंग से कामकाज हो सके। उन्होंने कहा कि सभी सहयोगी दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ मंत्री इन बैठकों में उपस्थित होंगे और सभी मुददों का समाधान किया जाएगा।

ममता ने पश्चिम बंगाल को कर्ज राहत देने के लिए केन्द्र को शनिवार तक का समय दिया है। हाल के महीनों में कांग्रेस के लिए तृणमूल सबसे परेशान करने वाला सहयोगी दल बनकर उभरा है। एनसीटीसी, रिटेल में एफडीआई, बांग्लादेश के साथ तीस्ता जल समझौते पर दस्तखत जैसे मुददों पर तृणमूल ने केन्द्र पर हमले बोलने में विपक्ष का साथ दिया।

लोकसभा में केन्द्र-राज्य संबंधों और बेरोजगारी को लेकर चर्चा पहले ही लंबित है। सूत्रों ने कहा कि एनसीटीसी का मुद्दा उठने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि राज्यों के मुख्यमंत्रियों की इस मसले पर 5 मई को बैठक होने जा रही है।

उधर वामपंथी दल भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और माओवादियों की गतिविधियों में तेजी जैसे मुद्दे उठाएंगे। वाम सूत्रों ने बताया कि भाकपा और माकपा दोनों ही दल संसद के दोनों सदनों में ये मुददे उठाने के लिए अन्य विपक्षी दलों से समन्वय करेंगे।

माकपा नेताओं की सोमवार को बैठक हुई, जिसमें भावी रणनीति पर चर्चा की गई, जबकि भाकपा के केन्द्रीय सचिवालय की इस सिलसिले में मंगलवार को बैठक होगी।

छत्तीसगढ़ में एक कलेक्टर सहित माओवादियों द्वारा हाल ही में किये गये अपहरणों और वामपंथी उग्रवादियों की बढी हुई गतिविधियों जैसे संवेदनशील मुद्दे भी वाम दल संसद में उठाएंगे।

भाकपा नेता डी. राजा और माकपा सूत्रों ने कहा कि वह वित्त विधेयक पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और गरीब और कमजोर तबके के लोगों के खिलाफ जाने वाले प्रावधानों का विरोध करेंगे।

सरकार द्वारा राज्यसभा में इसी सत्र में लोकपाल विधेयक पेश करने के बारे में राजा ने कहा कि हमें देखना होगा कि क्या विधेयक में कोई बदलाव किया गया है और ये बदलाव क्या हैं।

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