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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Monday, April 23, 2012

मल्‍टीनेशनल कंपनी के लिए इस भारतीय के जान की कीमत कुछ भी नहीं!

http://news.bhadas4media.com/index.php/yeduniya/1213-2012-04-23-13-03-31

[LARGE][LINK=/index.php/yeduniya/1213-2012-04-23-13-03-31]मल्‍टीनेशनल कंपनी के लिए इस भारतीय के जान की कीमत कुछ भी नहीं! [/LINK] [/LARGE]
Written by सौरभ दीक्षित Category: [LINK=/index.php/yeduniya]सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार[/LINK] Published on 23 April 2012 [LINK=/index.php/component/mailto/?tmpl=component&template=youmagazine&link=05b245041b4455d3c7eea59de261483719d93913][IMG]/templates/youmagazine/images/system/emailButton.png[/IMG][/LINK] [LINK=/index.php/yeduniya/1213-2012-04-23-13-03-31?tmpl=component&print=1&layout=default&page=][IMG]/templates/youmagazine/images/system/printButton.png[/IMG][/LINK]
भारत में जिंदगी की कीमत कितनी सस्ती है, इसकी बानगी पिछले दिनों देश में काम कर रही एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने अपने ही एक कर्मचारी की जान लेकर पेश कर दी। कंपनी द्वारा नाइजीरिया भेजा गया यह युवक लौटा तो वहां घोषित ऐसी महामारी को साथ लेकर आया कि यहां डाक्टर उसे बचा भी नहीं सके। कंपनी ने अपने इस इंजीनियर को नाइजीरिया में फैली महामारी के बारे में कुछ न बताकर धोखे में रखा था। इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने न सिर्फ देश का एक होनहार युवक छीन लिया, बल्कि मां-बाप से उसके लाल को हमेशा के लिए जुदा कर दिया। कंपनी की धृष्टता तो देखिए कि उसके अधिकारियों ने न तो अपने कर्मचारी की मौत पर अफसोस जताया और न मां-बाप से गलती के लिए माफी मांगी।

शाहजहांपुर के लाल की बलि लेने वाली यह कंपनी है एरिक्सन। एरिक्सन स्वीडन की एक टेलीकाम कंपनी है जो एरिक्सन इंडिया ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नोएडा (भारत) में काम कर रही है। शाहजहांपुर सिटी के मोहल्ला बाड़ूजई द्वितीय निवासी दवा व्यवसाई उमेश चंद्र मिश्रा के पुत्र सुमित मिश्रा ने जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2010 में एरिक्सन को ज्वाइन किया था। यहां उसकी नियुक्ति सीनियर टेलीकाम इंजीनियर के पद पर हुई थी। नियुक्ति के कुछ ही दिन बाद कंपनी ने सुमित को नाइजीरिया भेज दिया। कुछ दिन बाद वह वापस चला आया। तीसरी बार उसे कंपनी ने 13 दिसंबर 2011 को फिर नाइजीरिया भेजा। हालांकि वहां जीवन यापन में आने वाली परेशानियों के कारण सुमित नाइजीरिया जाने को तैयार नहीं था। लेकिन कंपनी ने उसे प्रमोशन का लालच देकर मना लिया था।

अंतिम बार उसे तीन माह के लिए नाइजीरिया भेजा गया था। उस समय नाइजीरिया अशांत था। दंगे व कर्फ्यू के कारण वह वहां फंस गया। मौका पाते ही 23 जनवरी 2012 को स्वदेश चला आया। इसी दौरान परिजनों ने उसकी शादी तय कर दी। इसी सिलसिले में वह 26 जनवरी को शाहजहांपुर अपने घर आया। यहां आते ही वह बीमार पड़ गया। बुखार ऐसा आया कि ठीक होने का नाम ही नहीं लिया। नतीजन 29 जनवरी को सुमित वापस दिल्ली चला गया और कंपनी को बीमारी के बारे में बताकर इलाज कराने लगा। डाक्टरों को बीमारी समझ में नहीं आई तो डाक्टरों ने उसे किसी बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी। जिस पर परिजनों ने उसे दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया। जहां जांच के दौरान डाक्टरों ने बताया कि सुमित जानलेवा फाल्सीपैरम मलेरिया की चपेट में है। यह बीमारी नाइजीरिया में महामारी घोषित है। डाक्टरों के अनुसार इसका जीवाणु शरीर में एक साल तक सुप्तावस्था में पड़ा रहता है और मौका पाते ही सक्रिय हो जाता है। फिलहाल डाक्टर उसे बचा नहीं पाए। 19 फरवरी को सुमित की मौत हो गई।

कंपनी ने सुमित की मौत की अपने कर्मचारियों में घोषणा चार दिन बाद की। हालांकि तब तक कर्मचारियों को अन्य माध्यमों से सुमित की नाइजीरिया से लगी बीमारी और मौत की सूचना मिल चुकी थी। बताते हैं कि इससे पहले भी नाइजीरिया गए कर्मचारी इसकी चपेट में आए थे और कुछ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। कंपनी ने अपने व्यापारिक नजरिया अपनाते हुए नाइजीरिया जाने वाले किसी भी कर्मचारी को जानलेवा बीमारी के बारे में न तो जानकारी दी और न बचाव के सुझाव दिए। जबकि अन्य देशों के कर्मचारियों को विदेश जाते समय वहां के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष खतरों जिनमें बीमारियां भी शामिल होती हैं, बताना कानूनन अनिवार्य है। जबकि भारत से कर्मचारी को नाइजीरिया भेजते समय कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी। शायद कंपनी यहां के लचर कानून और सस्ते मानव जीवन का फायदा उठा रही है। सुमित की मौत के दो माह बीत जाने के बाद भी कंपनी ने आज तक न तो परिजनों से सुमित की मौत का अफसोस जताया है और न अपनी धृष्टता के लिए क्षमा मांगी है। बेटे को खो देने और कंपनी के रवैये से सुमित के माता-पिता गहरे सदमे में है। सुमित के परिजन कंपनी को कोर्ट में घसीटना चाहते हैं ताकि कोई विदेशी कंपनी देश के किसी अन्य होनहार युवक की इस तरह बलि न ले सके। बता दें कि नाइजीरिया की आवादी करीब 15 करोड़ (विश्व की आवादी की दो प्रतिशत) है और विश्व में मलेरिया से जितनी मौतें होती हैं उसकी एक तिहाई से अधिक मौतें अकेले इस छोटे से देश में होती हैं।

[B]लेखक सौरभ दीक्षित इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के पत्रकार हैं. [/B]

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