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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Thursday, May 3, 2012

मोबाइल फोन की कॉल दरों में सौ फीसदी की वृद्धि की धमकी

मोबाइल फोन की कॉल दरों में सौ फीसदी की वृद्धि  की धमकी

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

दूरसंचार सेवा प्रदाता कम्पनियों ने गुरुवार को धमकी  दी कि यदि सरकार दूरसंचार नियामक के प्रस्ताव को मान लेती है तो मोबाइल फोन की कॉल दरों में सौ फीसदी की वृद्धि हो सकती है।टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि ट्राई की स्पेक्ट्रम प्राइसिंग पर सिफारिशें मंजूर होने पर कॉल रेट दोगुनी करनी पड़ेंगी।अपनी मनवाने के लिए कंपनियां हर दबाव का इस्तेमाल कर रही है और इस संकट से पार पान की कोई राह सरकार को सूझ नहीं रही है। कुल मिलाकर आम उपभोक्ताओं के कंधे से बंदूक चलाये जाने की आशंका है।सरकार ने कंपनियों को भरोसा दिलाया है कि सेक्टर की मुश्किलें सुनने के बाद ही ट्राई की सिफारिशों पर फैसला किया जाएगा। जबकि दूरसंचार विभाग की शीर्ष नीति निर्माता संस्था दूरसंचार आयोग ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से पूछा है कि क्या 2जी स्पेक्ट्रम के लिए आधार शुल्क तय करने का अन्य विकल्प भी है। उच्चतम न्यायालय ने विभाग को इस साल 31 अगस्त तक 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी करने का आदेश दिया है।  दूरसंचार विभाग [डॉट] ने ट्राई से पूछा है कि 2जी स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए उसने किस आधार पर रिजर्व प्राइस [आरक्षित मूल्य] के स्तर को कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इस बारे में गुरुवार को डॉट की तरफ से एक पत्र प्राधिकरण को भेजकर कई सिफारिशों पर सवाल उठाए गए हैं। गुरुवार को डॉट की तरफ से एक पत्र प्राधिकरण को भेजकर कई सिफारिशों पर सवाल उठाए गए हैं। डॉट ने ये सवाल दूरसंचार आयोग की पिछले दिनों हुई बैठक के आधार पर उठाए हैं।बहरहाल 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए नियामक ट्राई द्वारा की गई सिफारिशों से बौखलाई टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए बुधवार का दिन लॉबिंग के नाम रहा। देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनियों के प्रमुख बुधवार को इस बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराने कई मंत्रियों के पास पहुंच गए। सुबह से ही यह सिलसिला शुरू हो गया था। कंपनियों के प्रमुखों ने वाणिज्य सचिव और टेलीकॉम सचिव से मिलने के बाद गृह मंत्री पी.चिदंबरम और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। फिर अंत में उन्होंने टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल के समक्ष अपनी बातें इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के रूप में रखीं। इसके अलावा योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया से भी उन्होंने मुलाकात की।

इस बीच खबर है कि टैक्स मामले में सरकार वोडाफोन की पेनल्टी माफ नहीं करने वाली है। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वोडाफोन को टैक्स में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।वोडाफोन पर कुल 20,000 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी है, जिसमें से 12100 करोड़ रुपये का जुर्माना और ब्याज है। सरकार वोडाफोन और हच के बीच हुए सौदे पर टैक्स वसूलना चाहती है।2007 में वोडाफोन ने हचिसन-एस्सार में हच का 67 फीसदी हिस्सा 11 अरब डॉलर में खरीदा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका ठुकराई जाने के बाद सरकार टैक्स वसूलने के लिए पुरानी तारीख से आयकर कानून में बदलाव करने वाली है।

स्पेक्ट्रम पर ट्राई की सिफारिशों के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियां एकजुट हो गई हैं। कंपनियां स्पेक्ट्रम की कीमत ज्यादा रखे जाने के प्रस्ताव से नाराज हैं। सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि ट्राई के प्रस्तावित कीमतों पर स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाना मुश्किल है। बढ़ती लागत को वसूलने के लिए कंपनियों को दरें बढ़ानी पड़ेंगी।मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां ट्राई की सिफारिशों को विनाशकारी बता रही हैं। ट्राई की सिफारिशें आने के बाद प्रमुख टेलीकॉम ऑपेरेटरों ने रिजर्व प्राइस को बहुत ज्यादा बताते हुए इसमें कमी करने की मांग की है। कंपनियों के अनुसार मौजूदा सिफारिशों के लागू होने से टेलीकॉम सेक्टर को कारोबार के लिहाज से प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। ट्राई ने इसी तरह 800 मेगाहट्र्ज (सीडीएमए सेवाएं) और 900 मेगाहट्र्ज (जीएसएम सेवाएं) के लिए 1800 मेगाहट्र्ज बैंड की तुलना में दोगुनी रिजर्व प्राइस तय करने की सिफारिश की है।मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के संगठन सीओएआइ भी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण [ट्राई] के पीछे हाथ धोकर पड़ गया है। उसने कहा है कि अगर ट्राई की सिफारिशों को लागू किया गया तो देश में मोबाइल काल दरों में 25 से 30 फीसदी तक की वृद्धि संभव है।दूरसंचार विभाग (डॉट) के पूर्व अधिकारी जे. एस. दीपक को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार की जाने वाली स्पेक्ट्रम की नीलामी के प्रबंधन का काम सौंपा गया है। दीपक ने 3जी और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम की नीलामी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'दीपक को उस समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है, जो नई नीलामी के डिजाइन और प्रक्रिया का काम देखेगी।'  सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तय समयसीमा के भीतर स्पेक्ट्रम की नीलामी हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर संदेह बढ़ता जा रहा है। इस मामले पर विचार करने के लिए मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह [ईजीओएम] की बैठक में लंबी बहस हुई। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर यह पहली बैठक थी।उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद खाली हुए 2जी स्पेक्ट्रम (1800 मेगाहट्र्ज बैंड) की जल्द नीलामी के लिए गठित अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह (ईजीओएम) को सरकार ने व्यापक अधिकार प्रदान किए हैं। अदालती आदेश के मुताबिक खाली हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी प्रक्रिया 31 अगस्त तक पूरी करनी है। इससे पहले सरकार ने अदालत से नीलामी प्रक्र्रिया पूरी करने के लिए 400 दिनों की मोहलत मांगी थी लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 31 अगस्त तक का वक्त सरकार को दिया है।


भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, वोडाफोन के चीफ एक्जीक्यूटिव विटोरियो कोलाओ, आइडिया सेल्युलर के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला और टेलीनॉर के सीईओ जॉन फ्रेडरिक बक्सास दिन भर इंडस्ट्री की तरफ से मंत्रियों के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों से मिलते रहे। टेलीकॉम इंडस्ट्री के इन प्रमुखों की तरफ से की गई लॉबिंग का असर भी शाम तक दिखने लगा था। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने टेलीकॉम मंत्रालय से कहा है कि वह ट्राई के जरिए संशोधित गाइडलाइंस जारी करे।

टेलीकॉम इंडस्ट्री का मानना है कि ट्राई द्वारा की गई सिफारिशें इंडस्ट्री के काफी प्रतिकूल हैं।  सीओएआइ के अध्यक्ष व भारती एयरटेल के सीइओ संजय कपूर ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पिछले दो वर्षो के दौरान ने तीन बार सिफारिशें दी है और हर बार अलग अलग रिजर्व प्राइस तय किया गया है। प्राधिकरण ने इन सिफारिशों के संदर्भ में समाजिक-तकनीकी-आर्थिक पहलुओं का अध्ययन ही नहीं किया है। सभी मोबाइल कंपनियों को नए सिरे से स्पेक्ट्रम आवंटित करने के मुद्दे पर भी सीओएआइ ने कहा है कि इससे काफी अस्थिरता फैलेगी। कंपनियों के संचालन में काफी बदलाव करना पड़ेगा जिसका असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा।

नॉर्वे के टेलीनॉर समूह ने सोमवार को कहा कि यदि स्पेक्ट्रम नीलामी के संबंध में दूरसंचार नियामक ट्राई की ओर से हाल में जारी सिफारिशों को सरकार लागू करती है तो वह भारत में अपना कारोबार बंद कर देश से निकलने को मजबूर हो जाएगी। टेलीनॉर के सीईओ जॉन फ्रेडरिक ने कहा, 'यह सरकार ही है जिस पर राजनीतिक उत्तरदायित्व है। ऐसे में उसका नीतिगत फैसला ही अंतिम होगा।इस साल 2 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के आवंटित 122 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस को रद्द कर दिया था और इसमें यूनिनॉर के भारत के लाइसेंस भी शामिल हैं। न्यायालय ने अपने फैसले में ट्राई को नए सिरे से नीलामी के लिए अनुशंसा किए जाने का निर्देश जारी किया था और न्यायालय ने इसके लिए ट्राई को 2 महीने का समय भी दिया था। अपने फैसले में न्यायालय ने कहा था, ' 22 सेवा क्षेत्रों के लिए दो महीने के भीतर ट्राई लाइसेंस देने और 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित अनुशंसा जारी करेगी जो कि नीलामी पर आधारित होगा। जैसा कि 3जी बैंड के स्पेक्ट्रम में किया गया था। सरकार ट्राई की अनुशंसाओं पर विचार करेगी और अगले एक महीने के भीतर इस पर उचित निर्णय लेगी और नए सिरे से नीलामी के जरिये लाइसेंस का आवंटन किया जाएगा।'

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक स्पेक्ट्रम नीलामी को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के खिलाफ यूनिनॉर ने आज सर्वोच्च न्यायालय में अंतरिम याचिका दायर की। अपनी याचिका में यूनिनॉर ने आरोप लगाया है कि स्पेक्ट्रम नीलामी से संबंधित ट्राई की अनुशंसा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप नहीं है। यूनिनॉर भारतीय रियल्टी कंपनी यूनिटेक और नॉर्वे की दूरसंचार कंपनी टेलीनॉर का संयुक्त उपक्रम है। न्यायालय में यूनिनॉर के याचिका दायर किए जाने के ठीक एक दिन पहले ही टेलीनॉर ने कहा था कि अगर ट्राई की सिफारिशें सरकार स्वीकार कर लेती है तो वह भारत से अपना कारोबार समेटने को विवश हो जाएगी और इससे विदेशी निवेशकों को भी धक्का लगेगा। देश के भीतर 13 सर्किलों में दूरसंचार सेवाओं की पेशकश किए जाने को लेकर टेलीनॉर अब तक 14,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। इसके अलावा कल कंपनी भारत में स्थित 3.9 अरब क्रोन की परिसंपत्ति को भी बट्टे खाते में डालने की घोषणा कर चुकी है। बयान में यूनिनॉर ने कहा, 'हमने दूरसंचार विभाग को इस विचार से अवगत करा दिया है कि ट्राई की नीलामी संबंधित अनुशंसा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप नहीं है। आज हमने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में उसका ध्यान खींचने के लिए अंतरिम याचिका दायर किए जाने की अनुमति मांगी है।' इसमें बताया गया है कि न्यायालय ने उन्हें याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है और वह उसका पक्ष सुनने को तैयार है।

हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वह सही राजनीतिक पहल करे। यही समय है जब टेलीकॉम इंडस्ट्री के वास्ते लाइसेंस नीलामी के लिए उपयुक्त, प्रतिस्पर्धी और निवेश अनुकूल नीति बनाई जाए।'  ट्राई ने 23 अप्रैल को अपनी सिफारिशें पेश की थीं। इसमें 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस के लिए पूरे देश में बेस प्राइस 3,622 करोड़ रुपये रखी गई है, जो 2008 में तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री ए.राजा के समय सरकार द्वारा तय की गई कीमत से 10 गुना ज्यादा है।

टेलिकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम की सिफारिशों के खिलाफ लामबंद हो गई हैं। इस मसले पर एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और यूनिनॉर ने टेलिकॉम मंत्री कपिल सिब्बल को चिट्ठी लिखी है।

टेलिकॉम कंपनियों की मांग है कि हर तरह के स्पेक्ट्रम की सिर्फ नीलामी की जाए और इसके लिए रिजर्व प्राइस 80 फीसदी कम रखी जाए। यही नहीं कंपनियां चाहती हैं कि सरकार स्पेक्ट्रम की फार्मिंग नहीं करे। इससे उन्हें उपकरणों के अपग्रेडेशन पर भारी खर्च करना पडेगा। यही नहीं कंपनियों की दलील है कि नई स्पेक्ट्रम पॉलिसी से मोबाइल दरें महंगी होंगी।

टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि अगर ट्राई की सिफारिशें मानी गईं तो मोबाइल पर फोन करना 30 फीसदी महंगा हो जाएगा। टेलिकॉम कंपनियां का कहना है कि नई पॉलिसी से 80 फीसदी स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए डालने से इसकी जबरन किल्लत पैदा की जा रही है।

ट्राई ने कुछ दिनों पहले ही अपनी सिफारिश में 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 3जी से भी 4 गुने तक की कीमत वसूलने का प्रस्ताव भेजा है।

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