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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Saturday, June 23, 2012

अबकी होंगे दमदार या करते रहेंगे शर्मसार

अबकी होंगे दमदार या करते रहेंगे शर्मसार



ओलम्पिक खेलों में भारत के पदकों का हिसाब लगाया जाये तो उसने हर ओलम्पिक में औसत एक मेडल भी अपने नाम नहीं किया है. भारत ने अब तक केवल 20 पदक जीते हैं. वर्ष1900 के अलावा केवल दो ओलम्पिक आयोजन ऐसे आए जब हमारा देश एक से अधिक पदक जीतने में सफल रहा...

 प्रेमा नेगी 

 लन्दन में 27 जुलाई से ओलम्पिक खेलों का आयोजन होना है. हमारे देश भारत को भी इस ओलम्पिक से काफी उम्मीदें हैं. इस उम्मीद के पीछे कारण पिछले कुछ सालों में खिलाडियों का अच्छा रिकॉर्ड भी है. भारत ने वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदकों के साथ कुल तीन पदक जीते थे. उसके बाद वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदकों के साथ कुल 101 पदक अपने नाम किए.

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वर्ष 2010 में ही ग्वांगजो एशियाई खेलों में भारत ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सबसे ज़्यादा 64 पदक जीते जिनमें 14 स्वर्ण पदक शामिल थे. इस सबके बावजूद  एक बड़ा सच यह भी है कि खेल का महाकुंभ कहे जाने वाले ओलम्पिक में अभी तक कई मौके ऐसे भी आए हैं, जब भारतीय खिलाड़ी बिना किसी पदक के खाली हाथ लौट आये.

गौरतलब है कि भारत ने ओलम्पिक खेलों में वर्ष 1920 से आधिकारिक तौर पर हिस्सा लेना शुरू किया था. हालाँकि वर्ष 1900 में नार्मन प्रिचार्ड ने दो रजत अपने नाम किये थे जो भारत के नाम पर दर्ज हैं. इसीलिये अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति की सूची में भारत को ओलम्पिक खेलों में वर्ष 1900 से शामिल माना जाता है. वर्ष 1990 से लेकर अब तक भारत 22 ओलम्पिक खेलों में हिस्सेदारी कर चुका है.

ओलम्पिक खेलों में भारत के पदकों का हिसाब लगाया जाये तो उसने हर ओलम्पिक में औसत एक मेडल भी अपने नाम नहीं किया है. भारत ने अब तक केवल 20 पदक जीते हैं, जिनमें 1990 में जीते गये प्रिचार्ड के दो पदक भी शामिल हैं। भारत ने 20 मेडल 16 ओलम्पिक खेलों में जीते। अब तक 1900 के अलावा केवल दो ओलम्पिक आयोजन 1952 और 2008 में ऐसे आए, जब हमारा देश एक से अधिक पदक जीतने में सफल रहा। 

भारत वर्ष 1920 में एंटवर्प में और इसके चार साल बाद पेरिस में हुए ओलम्पिक में एक भी मेडल पर जीत दर्ज नहीं कर पाया था. हालाँकि हॉकी में बादशाहत कायम रहने के चलते इसके बाद हमेशा भारत ओलम्पिक में कोई न कोई जीत दर्ज करता रहा.  हॉकी की बदौलत उसका नाम ओलम्पिक पदक विजेताओं की सूची में दर्ज रहा, लेकिन सत्तर के दशक से हॉकी में भी भारत की हालत खस्ता होती चली गयी. 

सत्तर के दशक के बाद ही 1976 के मांट्रियल ओलम्पिक में भारतीय खिलाडियों का दल बैरंग स्वदेश लौटा था। मास्को ओलम्पिक में कई देशों के हिस्सा नहीं लेने के कारण हॉकी टीम ने स्वर्ण जीता, लेकिन इसके बाद अगले तीन ओलम्पिक खेलों वर्ष 1984 में लॉस एंजिल्स, 1988 में सोल और 1992 में बार्सिलोना में भारत एक भी पदक नहीं जीत पाया था।

दूसरे विश्वयुद्ध के कारण 1940 और 1944 में ओलम्पिक खेल आयोजित नहीं हो पाए। इसके बाद 1948 में लंदन में भारतीय हॉकी टीम ने मेजबान ब्रिटेन को 4-0 से हराकर अपना दबदबा कायम रखा। हेलंसिकी में 1952 में पहली बार भारत दो पदक हासिल करने में सफल रहा था। हॉलैंड को भारी अंतर से हराकर हॉकी टीम ने जहाँ स्वर्ण पदक जीता, वहीं कसाबा जाधव ने कुश्ती में कांस्य पर जीत दर्ज की. हॉकी टीम की बदौलत ही भारत वर्ष 1956 के मेलबर्न ओलम्पिक में पाकिस्तान को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम करवाने में सफल रहा. हालाँकि इसके चार साल बाद रोम में पाकिस्तान से फाइनल में ठीक इतने ही अंतर से भारत हार गया। 

ओलम्पिक के तब तक के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उसके बाद वर्ष 1964 में टोक्यो ओलम्पिक में पाकिस्तान को 1-0 से हराकर भारत ने फिर से स्वर्ण अपने नाम किया, लेकिन इसके बाद अगले दो ओलम्पिक खेलों में वह कांस्य पदक ही जीत पाया। 

वर्ष 1976 मांट्रियल ओलिम्पिक में तो भारत हॉकी में भी कोई मेडल नहीं जीत पाया था. इसके बाद 1980 में हॉकी टीम ने फिर से गोल्ड जीता, लेकिन इसके बाद ओलम्पिक में वह कभी कोई मेडल नहीं जीत पाई. भारत इसके बाद हुए अगले तीन ओलम्पिक खेलों में बिना किसी पदक के वापस लौटा था. 

सिडनी ओलम्पिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन में भारत को कांस्य जिताया. एथेंस 2004 में निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने रजत पदक जीतकर नया इतिहास रचा। उसके बाद बीजिंग ओलम्पिक 2008 में भारत तीन पदक जीतने में सफल रहा, जिसमें निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का स्वर्ण पदक भी शामिल है। गोल्ड जीतने के साथ बिंद्रा ओलम्पिक खेलों में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसी ओलम्पिक में कुश्ती में सुशील कुमार और मुक्केबाजी में विजेंदर सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किये. व्यक्तिगत तौर पर ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी केडी जाधव थे. वर्ष 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में जाधव ने फ़्री स्टाइल कुश्ती में काँस्य पदक हासिल किया था.

prema.negi@janjwar.com

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