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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Friday, August 15, 2014

भूल जाओ मेड इन इंडिया अब जनता के खिलाफ खुल्ळा एकाधिकारवादी कारपोरेट युद्ध मेक इन इंडिया,लालकिले की प्राचीर से एफडीआई राजका आवाहन,पीपीपी सुनामी,योजना आयोग खारिज और सत्ता का केंद्रीयकरण पलाश विश्वास

भूल जाओ मेड इन इंडिया अब जनता के खिलाफ खुल्ळा एकाधिकारवादी कारपोरेट युद्ध

मेक इन इंडिया,लालकिले की प्राचीर से एफडीआई राजका आवाहन,पीपीपी सुनामी,योजना आयोग खारिज और सत्ता का केंद्रीयकरण

पलाश विश्वास

कम मेक इन इंडिया

मोदी ने विश्व के बाकी देशों को भारत में आकर काम करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, 'देश के नौजवानों को विश्व के हर कोने में मेड इन इंडिया का सपना दिखाया। हम मिलकर काम करेंगे और विश्व के बेहतर निर्माण की तरफ आगे बढ़ेंगे। चाहे कोई सेक्टर हो, आप भारत में आएं। निर्माण करें और अपने प्रोडक्ट को कहीं और भी बेच सकते हैं। जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट के साथ मैन्यूफैक्चरिंग करनी है। इसलिए कम मेक इन इंडिया।'


कृषि नहीं,उत्पादन नहीं,औद्योगीकरण नहीं,भारत सेवा मुक्तबाजार का डिजिटल देश है और मुख्य सेवक ने ने 68वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में लाल किले की प्राचीर से कहा कि सूचना प्रद्यौगिकी में दक्ष युवाओं ने 20 साल में भारत की 'संपेरों और काला जादू वाले देश' की छवि को कंप्यूटर पर अपनी उंगलियां नचाकर बदल दिया है।


आलिशा चिनाय अब कहीं दिखती नहीं हैं।उनका वह मेड इन इंडिया गाना भी अब कहीं बजाने का मौका शायद ही मिले।


लालकिले की प्रचीर से बिना बुलेटप्रूफ के पहली बार अलिखित भाषण पढ़ने वाले केसरिया प्रधानमंत्री के भाषण की जो भूरि भूरि प्रशंसा हो रही है मीडिया में और सोशल मीडिया में लोग जो धन्य धन्य हैं,उससे तो लगता है कि आलिशा चिनाय को कहीं इस गाने के लिए सजा न हो जाये।बचके रहियो आलिशा।


चक दे इंडिया। देश के 68वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योजना आयोग को समाप्त करने का ऐलान किया और विपक्ष को साथ लेकर चलने के आह्वान के साथ ही जातिगत एवं सांप्रदायिक हिंसा पर रोक की हिमायत की।हिंसा पर रोक के उनकी इस अपील को गुजरात में उनके किये धरे और यूपी को गाजापट्टी बना देने में अमित शाह की कामयाबी के सिलसिले में देखें तो मलतब मतलब दोनों समझ में आ जायेंगे।


मेक इन इंडिया पर हस्तक्षेप और जनपथ में श्रम कानून संशोधन के नजरिये से जो प्रकाश डाला गया है,उसे पढ़ लें।श्रम कानूनों की चर्चा चूंकि हो चुकी है,इसलिए उसे इस प्रसंग में रखकर हम बाकी मुद्दों की चर्चा करेंगे।


योजना आयोग के खात्मे पर भी स्टोरी लग चुकी है।कृपया उसे भी देख लें।


हस्तक्षेप को तुरंत एक बेहतर सर्वर चाहिए।तकनीकी मदद चाहिए।सर्वर के बिना वक्त बेवक्त अपडेट मुश्किल है और अपडेट के बावजूद ब्लैक आउट हो जाना पड़ता है।कल रात से अभीतक हस्तक्षेप खोल नहीं सका।लिंकड इन पर अमलेंदु के पोस्ट से मालूम पड़ रहा है कि क्या पोस्ट हो चुका है।


तमाम दुकानदारों की दुकानें चलाने के लिए लोग अनाप शनाप खर्च करते हैं।इकलौता जो सोशल साइट आपका है,उसे बेहतर तरीके से जारी रखने के लिए हमारे जनपक्षधर समर्थ लोग अगर मदद नहीं कर सकते तो इस एफडीआई राज के मेक इन इंडिया के ही हम लायक हैं।


श्रमकानून तो क्या इस देश की वित्तीय व्यवस्था के निजीकरण के लिए बैंकिंग कानून तक संशोधित है।आरबीआई कानून बदलने की तैयारी है।


मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए अबाध विदेशी पूंजी है।

प्रतिरक्षा तक में एफडीआई।


नालेज इकोनामी से वंचितों से शिक्षा का अधिकार छिना।

चिकित्सा का निजीकरण है।

डिजिटल देश बनाने का आवाहन है।

केंद्रीयकरण बेहद तेज है और विकास के लिए फिर वहीं गुजराती माडल पीपीपी।


देश के सवा सौ करोड़ लोगों के दिन बदलने के इरादे के साथ मोदी ने जनधन योजना का ऐलान किया, जिसमें प्रत्येक गरीब को बैंक खाते की सुविधा देने के साथ ही जीवन बीमा का संरक्षण प्रदान करने का भी वचन दिया गया। सांसदों को अधिक जिम्मेदार बनाने के इरादे से प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना का ऐलान किया, जिसमें प्रत्येक संसद सदस्य हर वर्ष एक गांव का जिम्मा लेकर उसका विकास करेंगे।


अर्थात


आदर्श ग्राम बनेंगे पीपीपी के जरिये।

शौचालय भी बनेंगे पीपीपी के जरिये।


मोदी ने 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' का ऐलान करते हुए सभी सांसदों से कहा कि वे अगले स्वतंत्रता दिवस तक कम से कम एक गांव को 'आदर्श गांव' बनाए और अपने पूरे कार्यकाल में पांच आदर्श गांव बनाएं। ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने पहले संबोधन में मोदी ने कहा कि इस साल 11 अक्तूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर वह इस योजना का पूरा खाका पेश करेंगे।

उन्होंने कहा, 'मैं आज एक नया विचार लेकर आपके सामने आया हूं। प्रधानमंत्री के नाम पर कई योजनाएं चल रही हैं, कई नेताओं के नाम पर योजनाएं चल रही हैं, लेकिन आज मैं सांसदों के नाम पर एक योजना का ऐलान कर रहा हूं। 'सांसद आदर्श ग्राम योजना'।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में काम की कमी नहीं है बल्कि कमी है तो उपयुक्त हुनर और प्रशिक्षण की। उन्होंने भारत की युवा आबादी को कौशल संपन्न बनाने के अपनी सरकार के संकल्प की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ऐसी हुनरमंद युवाशक्ति तैयार करना चाहती है जो देश ही नहीं दुनिया में अपनी मांग पैदा कर सके।



दुनिया में सबसे बड़े हमारी लाइफलाइन रेलवे नेटवर्क भी एफडीआई  पीपीपी हवाले।

खुदरा कारोबार में विदेशी कंपनियों की बहार।अंधाधुंध निजीकरण।इसी वजह से अपने 65 मिनट के हिंदी में दिए भावपूर्ण धाराप्रवाह संबोधन में मोदी ने बलात्कार से लेकर नक्सली हिंसा, गरीबी से लेकर भ्रष्टाचार और आर्थिक निर्माण से लेकर निवेश तक के तमाम सामाजिक आर्थिक मुददों को छुआ और इस दौरान खुद को देश के प्रधान सेवक के रूप में पेश किया।


पहली कक्षा से गीतापाठ के एजंडे के साथ मनुस्मृति अनुशासन लागू करने वाले संघ परिवार की जुबानी  स्त्री विमर्स के उद्गार से शूद्र दासी स्तरियों के अवस्थान में फरक पड़े तो स्वागत है।क्योंकि उन्होंने बलात्कार और भ्रूण हत्या की बढ़ती घटनाओं को शर्मनाक बताया और परिवार से लेकर समाज और अन्तरराष्ट्रीय खेल स्पर्धा में लड़कियों की महत्ती भूमिका को रेखांकित किया।


शर्म है कि इसपर भी तालियां। पूरा देश केसरिया तो हुआ ही है कांवड़िया भी होता जा रहा है।महादेव के मत्थे पर जल चढ़ाने की मारामारी है।


डिजिटल बायोमेट्रिक नागरिकों की इस तमाशबीन भीड़ के मध्य हमारी आवाज लोगों तक पहुंचे,इसका इंतजाम करने की औकात हमारी नहीं है,तो सूचना मनोरंजन तो परोसने के लिए रिलायंस मीडिया है ही।


आलिशा की तरह मेड इन इंडिया के तमाम फैन,समर्थक और दीवाने या तो मार गिराये जायेंगे मुठभेड़ में या फिर उनको देश निकाला।बजरंगी दल और दुर्गा वाहिनी में कौन है ,कौन नहीं किसे मालूम।


योजना आयोग के मंटेक जमाने को याद करके उसे खत्म करने पर कोई शोक गाथा लिखने की हालांकि गुंजाइश नहीं है,लेकिन यह कदम,यानि केंद्र और राज्यं के इस साझा चूल्हे के खत्म हो जाने से लोककल्याणकारी राज्य की मृत्यु रस्म भी निभा दी गयी है।आर्थिक मोर्चे पर मोदी ने कहा कि योजना आयोग 64 वर्ष पुरानी संस्था है, जिसके स्थान पर एक नए संस्थान की स्थापना की जाएगी, जिसमें देश और विदेश के बदले हुए आर्थिक हालात को ध्यान में रखा जाएगा।मोदी ने प्रधानमंत्री जनधन योजना नाम से वित्तीय भागीदारी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि गरीब परिवारों का बैंक खाता खोला जाएगा, उन्हें एक डेबिट कार्ड दिया जाएगा और एक लाख रुपए का जीवन बीमा संरक्षण प्रदान किया जाएगा।



मिनिमम गवर्नमेंट,मैक्सीमम गवर्नेंस का मतलब अब भी समझ में नहीं आ रहा है,तो नई चिकित्साविधि की दरकार होगी।


सत्ता में आने के तीन माह से भी कम समय के भीतर मोदी ने विकास और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नये विचारों की इबारत लिखते हुए कहा कि भारत को वैश्विक निर्माण का आधार बनना चाहिए।


वैश्विक निर्माण का खुलासा रियल्टी बूम बूम है तो हिरोशिमा नागासाकी भोपाल गैसत्रासदी जैसे विनिवेश,एफडीआई पीपीपी स्मार्टसिटी हीरक चतुर्भुज,सेज महासेज,औदगिक गलियारा के तहत प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट,बेदखली के खिलाफ आवाज उठा रही जनता का निरंकुश दमन,पर्यवरण का सत्यानाश और इंफ्रास्ट्रक्चर का पीपीपी जलवा है।


वैश्विक निर्माण का मतलब वैश्विक इशारों पर चलने वाली वेदशी निवेशकों की अटल आस्था की सांढ़ संस्कृति है जो कहीं भी किसीकी को भो,किसी की भी मारने के लिए आजाद है और आजादी भी उन्हींको गिरवी तो राष्ट्रीय संप्रभुता भी उनके हवाले क्योंकि एफडीआई भी वैश्विक हैं और कंपनियां बी वैश्विक।


लोकल तो जनता है जो इस वैश्विक मुक्तबाजारी अर्थव्यवस्था में कीड़े मकोड़े के अलावा कुच्छ भी नहीं हैं।


जिस तरह से बाकायदा संविधान संशोधन मार्फते भारतीय न्याय प्रणाली की स्वायत्ता खत्म कर दी गयी सर्वदलीय सहमति से,उससे साफ जाहिर है कि हमारे रहमुमा और हमारे नुमाइंदे देश का क्या बना बिगाड़ रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट को बाजू में रखकर भूमिअधिग्रहण,श्रम,बैंकिंग,माइनिंग,पर्यावरण कानून में मनचाहा फेरबदल असंवैधानिक तरीके से संवैधानिक प्रावधानों के प्रतिकूल करने वाली केसरिया कारपोरेट प्रधानमंत्री लालकिले की प्राचीर से श्रम और संसाधनों के अधिकतम दोहन के पक्ष में खुल्लाम खुल्ला देश की जनता के खिलाफ एकाधिकारवादी कारपोरेट युद्ध का ऐलान कर दिया है और मुक्त बाजार के नागरिक हम फिदा हैं ऐसे कि किसी की मय्यत में आंसू बहाने की नौबत न आये।


बाबुलंद होशियार कि मोदी ने कहा कि माओवाद और आतंकवाद को काबू करने में सरकार अपना काम करेगी, लेकिन साथ ही मां-बाप का भी यह कर्तव्य है कि वे देखें कि उनके बच्चे किस रास्ते पर जा रहे हैं। ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने पहले संबोधन में मोदी ने कहा, 'कानून कठोरता से काम करेगा, लेकिन मां-बाप के नाते लोगों का भी कुछ कर्तव्य है।'

उन्होंने कहा, 'माओवादी और आतंकवादी किसी न किसी के तो बेटे होंगे ही। मैं मां-बाप से पूछना चाहता हूं कि अपने बच्चों के इस रास्ते पर जाने से पहले कभी उन्होंने पूछा कि वे क्या कर रहे हैं।'

प्रधानमंत्री ने भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों का नया आयाम पेश करते हुए दक्षेस राष्ट्रों का आह्वान किया कि वे 'मरने-मारने की दुनिया को पीछे छोड़ते हुए' इस क्षेत्र से गरीबी को मिटाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत और अधिक मजबूत देश के रूप में उभरे ताकि यह विश्व कल्याण में महत्वपूर्ण ढंग से योगदान दे सके।

उन्होंने कहा, 'विदेश नीति के कई आयाम हो सकते हैं। मैं एक महत्वपूर्ण आयाम की बात करना चाहता हूं.. जब हम बिना शस्त्र के इतनी बड़ी सलतनत (अंग्रेजी हुकूमत) को हरा सकते हैं तो क्या हम गरीबी को नहीं हरा सकते? मेरे देशवासियों हम गरीबी को परास्त करने का संकल्प करें।'



अब इसका मतलब बूझ लीजिये।


प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि वह देश को संसद में बहुमत के आधार पर नहीं बल्कि सहमति के आधार पर चलाना चाहते हैं। मोदी ने किसी तरह की बुलेट प्रूफ ढाल के बिना पूरे विश्वास के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के रूप में नहीं बल्कि प्रधान सेवक के रूप में संबोधित कर रहे हैं।


उन्होंने इस दौरान देश के विकास में पूर्व सरकारों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और पूर्व राज्य सरकारों का अभिवादन किया।


सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की मांग करते हुए और उनकी मदद का संकल्प लेते हुए मोदी ने कल ही समाप्त हुए संसद सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कल संसद के सत्र का समापन हुआ। यह सत्र हमारी सोच की पहचान, हमारे इरादों की अभिव्यक्ति था कि हम बहुमति के बल पर आगे नहीं बढ़ना चाहते, हम सहमति के मजबूत धरातल पर आगे बढ़ना चाहते हैं।



मोदी के खिलाफ जिहाद का नमूना ममता दीदी और नीतीश कुमार की राजनीति और पीपीपीगामी आर्थिक नीतियों के सिलसिले में कई दफा लिख ही चुका हूं।


ताजा स्टेटस यह है कि स्मार्ट सिटी के लिए पूंजी की खोज में सिंगापुर दीदी और सुषमा स्वराज की बेमिसाल युगलबंदी है।बंगाल की नवदुर्गा ने सेजआयुध से वामासुर वध किया और स्मार्ट सिटी वास्ते वे 17 को सिंगापुर जा रही हैं।सिंगापुर जाने से पहले उनने विमाननगरी अंडाल को इंडस्ट्रीयल सिटी डिक्लेअर कर दिया।इससे पहले नई सहरीकरण नीति से सेबी और भारत सरकार के रियल्टी बूम बमाका से पहले बंगाल में रियल्टी धमाका भी दीदी ने कर दिखाया है।


प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं एमपीलैड स्कीम का उपयोग कर रहे सभी सांसदों से अनुरोध करता हूं कि वे इस धन का इस्तेमाल स्कूलों में शौचालयों के निर्माण में करें। मैं देश के कारपोरेट सेक्टर का भी आह्वान करना चाहता हूं कि कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत आप जो भी खर्च कर रहे हैं उसमें स्कूलों में शौचालयों के निर्माण को प्राथमिकता दें।

बचपन में स्टेशन पर चाय बेच चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब कभी चायवाले की बात होती है तो उन्हें अपनापन महसूस होता है। ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में मोदी ने पर्यटन को बढ़ावा देने और इससे रोजगार की अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा, 'हम पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं। पर्यटन से गरीब से गरीब आदमी को रोजगार मिलता है। इससे पकौड़े बेचने वाला कमाता है, चना बेचने वाला कमाता है, चाय बेचने वाला कमाता है।'

चाय वाले का जिक्र करते हुए उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, 'जब कभी चाय बेचने वाली बात होती है तो मुझे जरा अपनापन महसूस होता है।'



आदरणीय हिमांशु कुमार जी ने फेसबुक पर जो लिखा है,उस पर गौर करें

आपने कहा कि कम मेक इन इंडिया

विदेशी कंपनियों आओ अपना माल भारत में बनाओ

यह काम तो अमीर देशों की कंपनियां दसियों सालों से कर रही हैं

यह मुनाफाखोर कंपनियां उन्ही देशों में अपने कारखाने खोलती हैं जहां उन्हें सस्ते मजदूर मिल सकें ,और पर्यावरण बिगाड़ने पर सरकारें उन्हें रोक न सकें

सब इस खेल को जानते हैं

जब यह विदेशी कंपनियां मजदूरों से बारह घंटे काम कराती हैं

तब कोई भी सरकार इन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करती

बताइये आज तक भारत में आपने किसी विदेशी कम्पनी पर इसलिए कार्यवाही करी है कि उसने मजदूरों को कम मजदूरी दी है

नहीं आपने आज तक कोई कार्यवाही नहीं करी

आपमें दम ही नहीं है इन विदेशी कंपनियों की बदमाशियों को रोकने का और अपने देश के गरीब नागरिकों और मजदूरों की हिफाज़त का

आप पूछते हैं उदारहण दूं

उदाहरण लाखों हैं

लीजिए एक उदहारण

छत्तीसगढ़ में स्विस सीमेंट कंपनी हालिसिम सीमेंट कम्पनी के द्वारा मजदूरों को कम मजदूरी दी गयी

जबकि वहाँ का विदेशी डिरेक्टर दस करोड़ तनख्वाह लेता है

श्रम अदालत ने मजदूरों के हक में फैसला दे दिया

कम्पनी ने अदालत का फैसला मानने से मना कर दिया

मजदूर धरने पर बैठे

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने छह मजदूर नेताओं पर डकैती का मामला बना दिया

वो भारतीय मजदूर आज भी छतीसगढ़ की जेलों में पड़े हुए हैं

ये आपकी भाजपा सरकार ने किया है प्रधानमंत्री जी

कम मेक इन इण्डिया का नारा देने से पहले अमित जेठवा को याद कर लीजिए

जिसे पर्यावरण को बचाने के लिए आवाज़ उठाने के कारण आपके ही शासन में आपकी ही पार्टी के सांसद के इशारे पर गुजरात में गोली से उड़ा दिया गया

जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट की बातें लाल किले से ही अच्छी लगती हैं

लेकिन जब भी सोनी सोरी उस जंगल की हिफाज़त के लिए आवाज़ उठाती है तो

आपकी ही सरकार उसे थाने में ले जाकर

सोनी सोरी को बिजली के झटके देती है और उसके जिस्म में पत्थर भर देती है

बातें बहुत सुनी हैं हमने

जाइए इस देश की एक भी सोनी सोरी के हक़ में एक कदम उठा कर दिखाइए

आपमें दम ही नहीं है मोदी जी

जिस दिन आप किसी सोनी सोरी के पक्ष में आवाज़ उठाएंगे मोदी जी

उसी दिन आपके मालिक ये पूंजीपति आपको रद्दी की टोकरी में फेंक देंगे

असल में तो आपका मुखौटा लगा कर लाल किले से आप नहीं ये पूंजीपति दहाड़ रहे हैं

आप कहते हैं आप प्लानिंग कमीशन को समाप्त कर देंगे

सही है अब जब सारे भारत को लूटने की सारी प्लानिंग अम्बानी के घर में ही होनी है

तो देश को प्लानिंग कमीशन की ज़रूरत भी क्या है

आप सफाई की बातें करते हैं ?

इस देश में सफाई मजदूरों की हालात क्या हैं कभी जानने की जहमत करी है आपने ?

पूछियेगा कि गंदगी फैलाने वाले ही संघ के नेता क्यों बने और सफाई करने वाला कभी संघ का नेता क्यों नहीं बन सका ?

आपके नागपुर के संघ के ब्राह्मण नेताओं से ये भी पूछियेगा

कि भंवर मेघवंशी के घर का खाना वो क्यों नहीं खा सके और उस खाने को उन्होंने सड़क पर क्यों फेंक दिया था ?

आप सोचते हैं कि आपकी कथनी से हम बहल जायेंगे ?

नहीं इस देश की लाखों सोनी सोरियों ,आरती मांझी , भंवरी बाई के हक के लिए कदम उठाने के लिए हम लड़ते रहेंगे , जेल जाते रहेंगे ,गोली खाते रहेंगे

आप हमें आतंकवादी ,नक्सलवादी ,देशद्रोही जो मन में आये कहिये

लेकिन इतिहास बताएगा

कि असल में देशभक्त कौन था और आतंकवादी कौन ?


अब आगे पढ़ें मोदी के उद्गार।


उन्होंने कहा कि आप सब लोगों ने देखा होगा कि विपक्ष सहित सभी दलों को साथ लेकर चलने से हमने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। इसका यश प्रधानमंत्री अथवा सरकार को ही नहीं जाता बल्कि विपक्ष को, इसके नेताओं को और इसके प्रत्येक सांसद को जाता है। मैं सभी सांसदों और राजनीतिक दलों का भी अभिनन्दन करता हूं, जिनकी मदद से हमने सफलता के साथ इस पहले सत्र का समापन किया।


देश के कुछ भागों में हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता और जातिवाद देश की प्रगति में बाधा है। मोदी ने कहा कि हम सदियों से सांप्रदायिक तनाव से गुजर रहे हैं। इसकी वजह से देश विभाजन तक पहुंच गया़, जातिवाद, सांप्रदायवाद का जहर कब तक चलेगा किसका भला होगा बहुत लोगों को मार दिया, काट दिया, कुछ नहीं पाया, भारत मां के दामन पर दाग लगाने के अलावा कुछ नहीं पाया।


उन्होंने कहा कि मैं देश की प्रगति के लिए अपील करता हूं कि हिंसा पर 10 साल के लिए अंकुश लगाया जाए, कम से कम एक बार, ताकि हम इन बुराइयों से मुक्त समाज की ओर बढ़ें। शांति, एकता, सदभावना और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने में कितनी ताकत है। मेरे शब्दों पर भरोसा कीजिए। हम अब तक किए पापों को छोड़ दें और देश को आगे ले जाने का संकल्प करें। हम ऐसा कर सकते हैं।


मोदी ने अपनी हाल की नेपाल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पड़ोसी हिमालय देश हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान के रास्ते पर आ गया है, वहां के नौजवान जो एक समय हिंसा के भटकाव में आ गए थे, अब वही संविधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि जब हमारा पड़ोसी देश नेपाल शस्त्र को छोड़कर शास्त्र :संविधान: और युद्ध से बुद्ध का का संदेश विश्व को दे सकता है तो भारत क्यों नहीं।


उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि भारत के नौजवान हिंसा का रास्ता छोड़ें और भाईचारे के रास्ते पर चलें। क्या भारत की भूमि हिंसा का रास्ता छोड़ने का संदेश नहीं दे सकती।


बलात्कार की घटनाओं पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा माथा शर्म से झुक जाता है, जब हम इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनते हैं। उन्होंने उन राजनेताओं पर प्रहार किया जो इस तरह के अपराध का विश्लेषण करने के लिए मनोवैज्ञानिक बन जाते हैं।


मोदी ने कहा कि मैं माताओं और पिताओं से पूछना चाहता हूं कि आपके घर में जब बेटी 10 साल की होती है तो आप उससे पूछते हैं कि कहां जा रही हो, कब तक लौटोगी पहुंचने पर फोन कर देना क्या बेटे से पूछने की हिम्मत है कि कहां जा रहे हो बलात्कार करने वाला भी तो किसी का बेटा है। मां बाप होने के नाते क्या कभी बेटे से पूछा कि कहां जा रहे हो। बेटियों पर जितने बंधन डाले हैं, बेटों पर डालो।


उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन समाज का भी दायित्व है। मां बाप की भी जिम्मेदारी है। आतंकी और नक्सली गतिविधियों में संलिप्त नौजवानों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कंधे पर बंदूक लेकर खून बहाने वाले किसी के तो बेटे हैं जो निर्दोषों का खून बहा रहे हैं।


उन्होंने हिंसा की राह पर चलने वाले नौजवानों का आह्वान किया कि हिंसा के रास्ते पर गए नौजवानों से कहना चाहता हूं कि आप आज जो भी कुछ हैं, कुछ न कुछ तो भारत माता और आपके मां बाप ने दिया है। धरती को लाल तो कर सकते हो, पर कंधे पर हल होगा तो धरती पर हरियाली होगी वह कितनी प्यारी होगी। कब तक जान लेते रहोगे, हिंसा के रास्ते ने कुछ नहीं दिया।


गिरते लिंगानुपात पर चिंता प्रकट करते हुए मोदी ने कन्या भ्रूण हत्या की निंदा की और कहा कि समाज में ऐसी सोच है कि बेटा होगा तो बुढ़ापे का सहारा बनेगा, लेकिन देखने में आता है कि पांच-पांच बेटे होने और बंगले होने के बावजूद मां बाप ओल्ड ऐज होम या वद्धाश्रम में रहते हैं।


उन्होंने कहा कि बेटियों की बलि मत चढ़ाइए जिनकी अकेली बेटी संतान के रूप में है तो वह अपने सपनों की बलि चढ़ा देती है, शादी नहीं करती और अपने मां बाप की सेवा करती है।


मोदी ने कहा कि मां के गर्भ में बेटी की हत्या, ये कितना बड़ा अपराध है। 21वीं सदी के मानव का मन कितना कलंकित और पाप भरा है, इसे प्रदर्शित करता है। इससे हमें मुक्ति पानी होगी।


लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का भाषण पहले से तय वक्त पर शुरू हुआ. पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा, 'देशवासियों और दुनिया में हर किसी को बधाई. प्रधानसेवक की ओर से अनेक शुभकामनाएं. मैं आपके बीच पीएम के रूप में नहीं, प्रधानसेवक के रूप में उपस्थित हूं. देश में आजादी की जंग काफी सालों तक लड़ी गई. अनेक सपूतों ने जेल में अपनी जिंदगी गुजरा दी. देश की आजादी के लिए मर-मिटने वाले सभी आजादी के सिपाहियों को शत-शत नमन.'

मोदी ने आजादी के पावन पर्व पर भारत के कोटि-कोटि जनों को नमन किया. उन्होंने कहा कि शहीदों का याद करते हुए मां भारती के कल्याण के लिए हमारे देश के गरीब-पीड़ित, दलित, पि‍छड़े लोगों के कल्याण के लिए कुछ कर गुजरने का पर्व है.

कुछ ऐसा भी हुआ स्वतंत्रता दिवस समारोह में!

मोदी ने कहा, 'राष्ट्रीय पर्व राष्ट्रीय चरित्र को निखारने का अवसर होता है. राष्ट्रीय पर्व से प्रेरणा लेनी चाहिए. आजादी का पर्व भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का पर्व बन सकता है.'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'देश राजनेताओं, शासकों ने नहीं बनाया, सरकारों ने भी नहीं बनाया. देश को किसानों, मजदूरों ने बनाया है. भारत की मां-बहनों, शिक्षकों, समाजसेवकों ने देश बनाया, तब जाकर देश यहां पहुंचा. देश के लिए जीवनभर साधना करने वाले सभी लोग अभिनंदन के लायक हैं.'

प्रधानमंत्री मोदी ने भावुक अंदाज में कहा, 'यह भारत का सामर्थ्य है कि छोटे शहर के गरीब परिवार के एक बालक को आज लालकिले की प्राचीर से भारत के तिरंगे झंडे के सामने सर झुकाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. यह भारत के संविधान के निर्माताओं की मेहनत है.'

मोदी ने कहा, 'देश उस नींव पर खड़ा है, जहां वेदकाल में एक ही मंत्र सुनाया जाता है, हम साथ चलें, मिलकर चलें, मिलकर संकल्प करें और मिलकर देश को आगे बढ़ाएं. इसी सोच के साथ 125 करोड़ देशवासियों ने देश को आगे बढ़ाया.'

पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की 10 खास बातें

पीएम मोदी ने कहा, 'पिछले दो महीने में मैंने लोगों का जिस तरह का व्यवहार देखा, उसे देखकर मैं चौंक गया. मैंने यहां आने के बाद देखा कि एक सरकार के अंदर भी कई सरकारें चल रही हैं. मुझे यहां बिखराव नजर आया. एक विभाग दूसरे विभाग से टकरा रहा है.' मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा, 'सरकार बनते ही सभी कार्यालयों में काम समय पर शुरू होने लगा. देश को सपने दिखाते हुए कहा, आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर देशवासियों के सपने को सच करना होगा. देश में अच्छे शासन के लिए हम प्रयास कर रहे हैं. मैं उस शक्ति को जगाना जाता हूं. मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारा देश आगे बढ़ेगा.'

पीएम ने महापुरुषों को किया याद

महापुरुषों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, महापुरुषों ने हमें आजादी दिलाई अब वक्त आ गया है कि हम आजादी के बारे में गंभीरता से सोचें. हम जो भी कर रहे हैं, क्या हमने कभी सोचा कि हमारे द्वारा किए किसी काम से देश के किसी भी नागरिक का भला हुआ हो. देश में ऐसा माहौल बना हुआ है कि आज हर कोई अपना ही फायदा सोचता है. हमें 'मेरा क्या और मुझे क्या' इस दायरे से बाहर आना होगा. मोदी ने कहा, हर चीज अपने लिए नहीं होती. कुछ देश के लिए भी कुछ होता है अपने अपने हित से उठकर देश हित के बारे में सोचना चाहिए.

बेटों से भी पूछें कि कहां जाते हैं

मोदी ने देश में लगातार हो रही रेप की घटनाओं के बारे में कहा, 'देश के किसी भी हिस्से में जब रेप की घटनाएं होती हैं तो हमारा माथा कलंकित हो जाता है. समाज में बेटियों को लेकर दोहरे व्यवहार पर सवाल उठाते हुए मोदी ने कहा, मैं उन मां-बाप से पूछना चाहता हूं जो बेटी के घर से बाहर जाने पर तो सवाल करते हैं लेकिन बेटों से कभी सवाल नहीं करते हैं कि आप कहां जा रहे हैं कहां नहीं. कानून अपना काम करेगा लेकिन समाज के नाते हमें भी कुछ करना होगा. हम, देश के नागरिक और मां-बाप समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं.'

सांप्रदायिकता और जातिवाद से किसी का भला नहीं

सांप्रदायिकता और जातिवाद हिंसा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'हिंसा के रास्ते पर भटक गए नौजवानों से कहना चाहता हूं कि आज आप जो भी हैं. वो भारत मां और अपने मां-बाप की बदौलत हैं. उन्होंने आपकी जिंदगी में कुछ तो योगदान दिया है. आपके कंधे पर अगर हल होगा तो ज्यादा बेहतर होगा. हिंसा से कोई फायदा नहीं...सम्राट अशोक ने भी हिंसा का रास्ता छोड़कर बुद्ध का रास्ता अपनाया था. बुद्ध की भूमि जब हमें यह संदेश दे सकती है तो क्या हमें पूरी दुनिया को यह संदेश नहीं देना चाहिए. सांप्रदायिकता, हिंसा के बाद देश बंटवारे के बाद पहुंच गया है. लोगों ने एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाया. पर पीछे पलट कर देखिए कि हमने क्या पाया. यह संकल्प कीजिए कि 10 साल हम इन चीजों से दूर रहेंगे. मेरे शब्दों पर भरोसा रखिएगा. सद्भावना, शांति का रास्ता अपनाएं.'

सरकारी नौकरी नहीं, सेवा है

 देश को आगे बढ़ाना है. तो सुशासन एक ही रास्ता है. जब कोई प्राइवेट में नौकरी करता है तो कहता है कि मैं प्राइवेट नौकरी करता हूं. लेकिन अगर कोई सरकार के लिए काम करता है तो कहता है कि मैं सर्विस करता हूं. सरकारी नौकरी में लगे लोग नौकरी नहीं, सेवा कर रहे हैं. हमें राष्ट्र चरित्र के रूप में इसे आगे ले जाना है. देश के नागरिकों को ही देश के विकास के लिए आगे काम करना होगा. हमें जनभागी तय करनी है. देश को जोड़ने के लिए हमें काम करना होगा.

प्रधानमंत्री जन-धन योजना का ऐलान

नरेंद्र मोदी ने कहा, 'देश का किसान कर्ज लेता है. कर्ज नहीं लौटा पाता, अंत में जाकर खुदकुशी कर लेता है. आजादी के पर्व पर जन-धन योजना के माध्यम से गरीब से गरीब लोगों को बैंक अकाउंट से जोड़ना चाहते हैं. देश के संसाधन देश के लोगों के काम आए. यही बेहतर है. अकाउंट खोलने वाले को 1 लाख रुपये का बीमा सुनिश्चित किया जाएगा. डेबिट कार्ड दिया जाएगा. ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी रहे.'

स्किल डेवलपमेंट पर दिया जाएगा ध्यान

उन्होंने कहा, 'भारत विश्व का सबसे ज्यादा नौजवानों वाला देश है. पर हमने कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया. स्किल डेवलपमेंट के जरिए देश के नौजवानों को स्किल सिखाने की कोशिश की जाएगी. स्किल ऐसे सिखाए जाएंगे जो देश के नौजवानों को आगे बढ़ाया. जो जॉब क्रिएट करने के सामर्थ्य नहीं हैं हम उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काबिल बनाने के लिए काम करेंगे.'

कम मेक इन इंडिया

मोदी ने विश्व के बाकी देशों को भारत में आकर काम करने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा, 'देश के नौजवानों को विश्व के हर कोने में मेड इन इंडिया का सपना दिखाया. हम मिलकर काम करेंगे और विश्व के बेहतर निर्माण की तरफ आगे बढ़ेंगे. चाहे कोई सेक्टर हो, आप भारत में आएं. निर्माण करें और अपने प्रोडक्ट को कहीं और भी बेच सकते हैं. जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट के साथ मैन्यूफैक्चरिंग करनी है. इसलिए कम मेक इन इंडिया.'

किसानों को किया याद

उन्होंने कहा, 'देश की सेवा के लिए भगत सिंह की तरह फांसी पर लटकना अनिवार्य नहीं है. अन्न के भंडार भरकर किसान भी देश की उतनी ही सेवा करता है जितना देश का जवान शहीद होकर देश की सेवा करता है. दुनिया के देशों से हमें आयात करने की क्या जरूरत हैं. आयात की बजाय निर्यात पर जोर देनी की जरूरत है.'

युवाओं ने बदली देश की छवि

देश के नौजवानों ने भारत की पहचान बदल दी है. 25-30 साल पहले भारत को सपेरों को देश कहा जाता था. काला जादू का देश कहा जाता था. हमारी असली पहचान लोगों तक पहुंची है. कम्पयूटर पर ऊंगली फिराते हुए देश के आईटी प्रोफेशन्लस ने विश्व में भारत का नाम रोशन किया. हिंदुस्तान के नागरिकों के पास मोबाइल तो है.. मोबाइल गवर्नेंस के जरिए हमें तकनीकी का इस्तेमाल करना होगा.

 स्वच्छ भारत होगा लक्ष्य

उन्होंने कहा, 'सफाई करना मेरे लिए बहुत बड़ा काम है. क्या हमारा देश स्वच्छ नहीं हो सकता? अगर 125 करोड़ लोग यह तय कर लगें कि मैं गंदगी नहीं करूंगा तो गंदगी खत्म हो जाएगी. 2019 में गांधी जी की 150वीं जयंती आ रही है. महात्मा गांधी को सबसे ज्यादा सफाई प्यारी थी. हम यह संकल्प लेते हैं कि 2019 में गंदगी मुक्त भारत होगा. यह काम सरकार नहीं जनभागिता से होगा. बेचारी गांव की मां-बहनें शौचालय का इंतजाम नहीं कर सकते. छोटी बातों का, घोषणाओं का महत्व होता है. आज मैं लालकिले से टॉयलेट की बात कर रहा हूं... लोग क्या कहेंगे. मैं नहीं जानता पर मैं मन से बोल रहा हूं. स्वच्छ भारत का अभियान 2 अक्टूबर से शुरू करेंगे. एक अभियान आज से ही शुरू करेंगे. स्कूल में छात्राओं के लिए शौचालय बनाने पर ध्यान दिया जाएगा . कॉरपोरेट कंपनियों को भी सीएसआर के तहत प्राथमिकता शौचालय बनाने को देना चाहिए.'

सांसद आदर्श ग्राम योजना का ऐलान

प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की. सांसदों से आग्रह किया कि 3000 से 5000 की जनसंख्या का कोई भी गांव तय कर लें और ये संकल्प लें कि 2016 तक इस गांव को आदर्श गांव बनाएंगे. 2019 चुनाव में जाने से पहले एक और आदर्श गांव बनाएं. एक मॉडल गांव बनाकर देखें.

लालकिले पर झंडा फहराने से पहले प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कामना की कि हमारे तिरंगे की शान सदा कायम रहे.



और भी... http://aajtak.intoday.in/story/pm-narendra-modi-to-deliver-his-maiden-independence-day-speech-today-1-776060.html


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