Total Pageviews

THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Sunday, December 1, 2013

दागी मंत्री, सांसद,विधायकों के बाद दागी डीएम के बचाव में एसपी की छुट्टी,तीसरा विकल्प बनने लगी भाजपा, बंगाल भी नमोमय बनने की राह पर জামিন পেলেন মালদহের জেলাশাসক আর্থিক দুর্নীতিতে ডিএম-কে গ্রেপ্তার করায় বদলি সিপি সারদাকাণ্ডে ঠিক তদন্ত চালানোর দাবি জানাতে গিয়ে গ্রেফতার বিশিষ্টরা, প্রতিবাদে ভাষ্যরচনা তৃনমূল সাংসদ কবীর সুমনের ফেসবুকে কেন্দ্রীয় সরকারের প্রস্তাবিত সাম্প্রদায়িক হিংসা প্রতিরোধ বিলের সমালোচনায় মুখ্যমন্ত্রী

दागी मंत्री, सांसद,विधायकों के बाद दागी डीएम के बचाव में एसपी की छुट्टी,तीसरा विकल्प बनने लगी भाजपा, बंगाल भी नमोमय बनने की राह पर

জামিন পেলেন মালদহের জেলাশাসক

আর্থিক দুর্নীতিতে ডিএম-কে গ্রেপ্তার করায় বদলি সিপি


সারদাকাণ্ডে ঠিক তদন্ত চালানোর দাবি জানাতে গিয়ে গ্রেফতার বিশিষ্টরা, প্রতিবাদে ভাষ্যরচনা তৃনমূল সাংসদ কবীর সুমনের

ফেসবুকে কেন্দ্রীয় সরকারের প্রস্তাবিত সাম্প্রদায়িক হিংসা প্রতিরোধ বিলের সমালোচনায় মুখ্যমন্ত্রী


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

Mamata Banerjee

Yesterday

Just a few months before the Model Code of Conduct for General Elections comes into being, the Central Government has again brought a Bill called "Prevention of Communal Violence (Access to Justice and Reparations) Bill, 2013", which impinges upon the domain of maintenance of law and order by the State Government. It looks like a political vendetta.


Continuous and unnecessary interference in the activities of the State Governments is totally anti-federal and unconstitutional.


We love all our minority groups. We also respect every caste, creed, religion, language, etc. It is our responsibility and commitment to protect them as members of our family.


In the name of prevention of communal violence, the Central Government should not usurp the constitutional powers of the State Governments.


I strongly oppose this idea.


সারদাকাণ্ডের তদন্তে সহযোগিতা করতে পারেন বলে খোদ মুখ্যমন্ত্রী থেকে শুরু করে অনেকের নামই প্রকাশ্যে এনেছেন গ্রেফতার হওয়া সাংসদ কুণাল ঘোষ। সঠিক পথে তদন্ত চালানোর দাবিতে বিধাননগর কমিশারেটে স্মারকলিপি জমা দিতে গিয়েছিলেন বিশিষ্টরা। পুলিস তাঁদের ওপর লাঠিচার্জ করে, গ্রেফতারও করা হয়। আর তার প্রতিবাদেই ভাষ্য রচনা ও পাঠ করেছেন শাসক দলেরই আরেক সাংসদ কবীর সুমন।

একসময় তিনি ছিলেন পরিবর্তনের প্রথম সারির মানুষ। নন্দীগ্রাম থেকে লালগড়, কলকাতার রাজপথ থেকে সিঙ্গুর, মিছিল, মিটিং-এ তিনি ছিলেন পরিচিত মুখ।


যেখানেই মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় গিয়েছেন, যা করেছেন, সঙ্গী সেই বুদ্ধিজীবীরা। মঞ্চ আলো করে রয়েছেন। ঘোষণা করেছেন তাঁদের আশার কথা।


পরিবর্তন এসেছে রাজ্যে। প্রকাশ্যে এসেছে সারদার হাজার হাজার কোটি টাকার দূর্নীতি। তার প্রতিবাদ করতে গিয়ে চরম হেনস্থা হতে হয়েছে অশতিপর শিক্ষক সুনন্দ সান্যালকে। গ্রেফতারও হতে হয়েছে ।


আর এই ঘটনাতেই ভাষ্য রচনা ও পাঠ করেছেন তৃণমূলেরই আরেক সাংসদ।

दागी मंत्री, सांसद,विधायकों के बाद दागी डीएम के बचाव में एसपी की छुट्टी कर दी है ममता बनर्जी ने।जबकि इस भ्रष्टाचार विवाद में बंगाल में तेजी से तीसरा विकल्प बतौर उबरने लगी है भाजपा। पक्ष विपक्ष का हाल जो है,देर सवेर बंगाल भी नमोमय बनने की राह पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का ठीक ही मानना है कि पश्चिमबंगाल में भले ही पार्टी का एक भी विधायक न हो लेकिन भाजपा में जीरो से हीरो बनने का माद्दा है। कोलकाता में हुई भाजपी की विशाल रैली में  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने ऐलान किया है कि कि 13 दिसंबर को शारदा घोटाले की सीबीआइ की जांच की मांग पर राज्य भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सभा में उनसे सवाल पूछकर सुर्खियों में आने वाले किसान शिलादित्य चौधरी को भी मंच पर लाया गया।  सिन्हा ने कहा कि शिलादित्य को मुआवजा दिलाने की मांग पर वह हाइकोर्ट में मामला करेंगे। राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने का यह संकेत जरुर है।


शारदा फर्जीवाड़े में मां माटी मानुष की सरकार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लगातार अपने दागी मंत्रियों,सांसदों,विधायकों और पार्टी नेताओं का आक्रामक बचाव करती रही हैं। बेहद मजबूत जनाधार, अपार  लोकप्रियता और पैंतीस साल के वाम दुस्शासन के कारण वे लगभग तानाशाह तौर तरीके से शारदा घोटाले को रफा दफा करने में लगी हैं।एकदा अति घनिष्ठ और दीदी के संभावित प्रधानमंत्रित्व के मुख्य वास्तुकार शारदा मीडिया समूह के सीईओ के सनसनीखेज खुलासे के बाद कम से कम एक दागी सांसद की गिरफ्तारी हो गयी और इसी की आड़ में चुनावों में लगातार साफ होने लगा विपक्ष सड़कों पर उतरने की हिम्मत करने लगा है। संघियों की बंगाल में आजादी से बहले बहुत चलती रही है लेकिन आजादी के बाद दीदी के समर्थन से दो लोकसभा सीटें जीतने के अलावा उनकी उल्लेखनीय कोई उपलब्धि नहीं है।शारदा फर्जीवाड़े मामले की वजह से अभीतक नमो नक्श के बाहर बंगाल में भाजपा को शक्तिप्रदर्शन का अबूतपूर्व मौका मिला है।कोलकाता में विशालतम रैली करके भाजपा ने बता दिया है कि वाम अवसान के बाद परिवर्तन से हो रहे मोहभंग के बाद तीसरा विकल्प बतौर भाजपा ही उभर कर आ रही है।


बेपरवाह मुख्यमंत्री को लेकिन प्रतिपक्ष की कोई फिक्र नहीं है।कुणाल के बाद बाकी बचे दागियों के सर पर उनका वरद हस्त है और दसप्रहरणधारिणी अग्निकन्या विपक्ष पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं।इसी आक्रामक तेवर के तहत अंधाधुंध भ्रष्टाचार में नख से सिर तक डूबे मालदह के जिलाधिकारी गोदाला किरण कुमार की गिरप्तारी के बाद उन्हें गिरफ्तार करने वाले आईपीएस अफसर सिलिगुड़ी के पुलिस कमिश्नर के जयरमण को उन्होंने तुरंत छुट्टी पर भेज दिया है।बंगाल में बागी आईपीएस अफसरों पचनंदा,नजरुल इस्लाम ,दमयंती सेन की पांत में आज से शामिल हो गये बहिस्कृत आईपीएस अफसरके जयरमण भी शामिल हो गये हैं।


मुख्य सचिव संजय मित्र ने शनिवार को जयरमण को अनिवार्य वेटिंग में भेजने की सजा सुनाते हुए कहा कि जिलाधिकारी की गिरफ्तारी सरकार को जानकारी दिये बिना की गयी है।मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तर बंगाल के डीआईजी जावेद शमीम सिलीगुड़ी के नए पुलिस आयुक्त होंगे। फिलहाल आईजी उत्तर बंगाल शशिकांत पुजारी को सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कुमार की गिरफ्तारी के बाद मालदह के एडिशनल कलक्टर को कलक्टर का प्रभार सौंपा गया है।


तृणमूल कांग्रेस के शासन में दमयंती सेन और रंजीत कुमार पचनंदा के बाद सूबे के एक और आईपीएस अधिकारी सरकारी कार्रवाई का शिकार हुए। इस बार सरकार के निशाने पर आए हैं सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त के.जयरमण। शनिवार को उन्हें अचानक पद से हटाते हुए नवान्न तलब किया गया। उन पर यह कार्रवाई सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वर्तमान में मालदह के कलक्टर जी. किरण कुमार को गिरफ्तार करने के बाद की गई।


जयरमण को हटाने की घोषणा करते हुए सूबे के मुख्य सचिव ने कहा कि मालदह के कलक्टर को गिरफ्तार करने से पहले जयरमण ने सरकार से सलाह नहीं ली। उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह कार्रवाई की है।


रविवार को सिलीगुड़ी पुलिस लाइन में सहकर्मियों के विदाई समारोह में जयरमम ने अपनी कार्रवाई को सही बताते हुए संवाददाताओं से बात करके संकेत दे दिया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं।किसी मामले में कार्रवाई करने के कारण सरकार के कोपभाजन का शिकार बनने वाले के.जयरमण सूबे के पहले पुलिस अधिकारी नहीं हैं। इससे पहले कोलकाता के चर्चित पार्क स्ट्रीट कांड में आरोपियों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने और आरोपियों को गिरफ्तार करने में सक्रियता दिखाने पर कोलकाता पुलिस की तत्कालीन डीसी(डीडी) दमयंती सेन का तबादला राज्य पुलिस में कर दिया गया था।


ध्यान देने लायक तथ्य यह है कि बंगाल में अलग अलग वक्त पर आईपीएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई  के वक्त आईपीएस अफसरान में यह ेकता कभी नहीं दिखायी पड़ी जो आईएएस अफसरों में है।


गौरतलब है कि सिलिगुड़ी जलपाई उन्नयन परिषद के सीईओ गोदाला को बिना काम के सैकड़ों करोड़ रुपये के बंदरबांट करने के आरोप में शनिवार शाम को जयरमम ने गिर्फ्तार कर लिया।इसके बाद ही मजबूत आईपीएस लाबी गोदाला के बचाव में सक्रिय हो गयी है।अभी दमयंती के तबादले पर उठे विवाद की आंच मद्धिम भी नहीं हुई थी कि गार्डनरीच गोली काण्ड के बाद आईपीएस रंजीत कुमार पचनंदा भी सरकार के निशाने पर आ गए। उस काण्ड के बाद पचनंदा को कोलकाता पुलिस आयुक्त पद से हटा दिया गया था। तीनों ही मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ इसलिए हुई, क्योंकि इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन किया।


मालदह के कलक्टर जी. किरण कुमार को शनिवार को सिलीगुड़ी पुलिस ने लगभग 70 करोड़ रूपए के घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के घोटाले की जांच कर रही सिलीगुड़ी पुलिस ने शुक्रवार रात से लगभग 12 घंटे की लम्बी पूछताछ के बाद कुमार को गिरफ्तार किया। उन पर भारतीय दंड विधान (भा.द.वि.) की 120 बी/409/467/477 की धाराएं लगाई गई हैं।


गिरफ्तारी के बाद कुमार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें चार दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। यह घोटाला वर्ष 2012 में सामने आया था। उस समय कुमार प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) थे। मामले में यह 11 वीं गिरफ्तारी है। कुमार से पहले इस मामले में प्राधिकरण के कुछ अधिकारी समेत 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त के. जयरमण ने कुमार की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि उनसे पूछताछ की जा रही है।


तृणमूल नेता भी हैं आरोपी :मामले में सिलीगुड़ी के विधायक व तृणमूल नेता रूद्रनाथ भट्टाचार्य भी आरोपी हैं। घोटाले के समय रूद्रनाथ प्राधिकरण के चेयरमैन थे। कुमार की गिरफ्तारी के बाद रूद्रनाथ की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। हालांकि अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी ने मुंह नहीं खोला है। इस बारे में पूछने पर सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।


क्या है मामला

पिछले साल सिलीगुड़ी में तीन विद्युत शवदाह केन्द्र और दो सिवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट बनाने समेत कुछ परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया था। इन परियोजनाओं में लगभग 70 करोड़ रूपए का घपला सामने आने के बाद कुमार को प्राधिकरण के सीईओ पद से हटा दिया गया था। 16 मई को वर्तमान सीईओ शरद द्विवेदी ने घटना के संबंध में सिलीगुड़ी के प्रधाननगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के यूपी प्रभारी अमित शाह ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी यदि केंद्र में सत्ता में आती है तो बंगाल को कोई पैकेज नहीं बल्कि उसका अधिकार दिया जायेगा.


रानी रासमणि एवेन्यू पर भाजपा की रैली में शाह ने कहा कि हर प्रांत का अधिकार होता है. पश्चिम बंगाल को केंद्र से पैकेज के लिए गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं है. भाजपा यदि सरकार बनाती है तो बंगाल को उसका अधिकार दिया जायेगा. केंद्र की यूपीए सरकार पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक यूपीए जितनी भ्रष्ट सरकार नहीं आई है. 10 वर्षो के शासनकाल में यूपीए ने जितना भ्रष्टाचार किया है, उससे बंगाल की सारी आर्थिक समस्या मिटायी जा सकती थी. तृणमूल कांग्रेस को भी निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि तृणमूल, कांग्रेस की मौसेरी बहन है. दोनों एक ही हैं. तृणमूल कांग्रेस ने कम्युनिस्टों का चोला पहन लिया है. लिहाजा परिवर्तन जरूरी है. लोकसभा चुनाव के संबंध में उनका कहना था कि न तो माकपा और न ही तृणमूल कांग्रेस केंद्र में सरकार बना सकती है.


इसलिए इन दोनों में से किसी को वोट देने से कोई फायदा नहीं होगा। भाजपा को वोट देने की अपील करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस दिशा में व्यापक प्रचार करने का आह्वान किया। भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य सरकार मुसलिम तुष्टीकरण की नीति अपनाकर वोट बैंक की राजनीति कर रही है। शारदा चिटफंड घोटाले ने राज्य सरकार के असली चेहरे को सामने ला दिया है।                

बाद में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान सिद्धार्थ नाथ सिंह ने गुजरात के जासूसी कांड के संबंध में कहा कि यह सब कांग्रेस की देन है। कोबरा पोस्ट उसी का है. यह भाजपा के खिलाफ साजिश है। सभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री तपन सिकदर, तथागत राय, नवनिर्वाचित पार्षद गीता राय, अनीता सिंह, पार्षद मीना देवी पुरोहित, सुनीता झंवर, विजय ओझा व अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।


ফেসবুকে কেন্দ্রীয় সরকারের প্রস্তাবিত সাম্প্রদায়িক হিংসা প্রতিরোধ বিলের সমালোচনায় মুখ্যমন্ত্রীকেন্দ্রীয় সরকারের প্রস্তাবিত সাম্প্রদায়িক হিংসা প্রতিরোধ বিলের বিরোধিতা করলেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। ফেসবুকে নিজের প্রোফাইলে আজ মুখ্যমন্ত্রী বিল নিয়ে নিজের আপত্তির কথা জানিয়ে দিয়েছেন মুখ্যমন্ত্রী।


মুখ্যমন্ত্রী লিখেছেন, সাধারণ নির্বাচনের আদর্শ আচরণবিধি কার্যকর হবে কয়েকমাসের মধ্যেই। তার ঠিক আগে কেন্দ্রের এই বিল নিয়ে আসা, রাজনৈতিক উদ্দেশ্যপ্রণোদিত। এর ফলে রাজ্যের আইনশৃঙ্খলা সংক্রান্ত স্বাধীনতায় হস্তক্ষেপ করা হবে বলেও অভিযোগ মুখ্যমন্ত্রীর। কেন্দ্রীয় সরকারের ভূমিকাকে সম্পূর্ণ অসাংবিধানিক এবং যুক্তরাষ্ট্রীয় কাঠামোর পরিপন্থী বলে বর্ণনা করেছেন মমতা।


জামিন পেলেন মালদহের জেলাশাসক

এই সময় ডিজিটাল ডেস্ক: জামিন পেলেন মালদহের জেলাশাসক গোদালা কিরণ কুমার। রবিবার শিলিগুড়ি আদালতে জামিনের আবেদন জানান তিনি। শুনানির পর পাঁচ হাজার টাকার ব্যক্তিগত বন্ডে শর্তসাপেক্ষে জামিন পেলেন কিরণ কুমার। তবে তিনি বিদেশে যেতে পারবেন না। তদন্তে সহযোগিতাও করতে হবে তাঁকে। এদিন এই শর্তেই তাঁর জামিনের আবেদন মঞ্জুর করেছেন বিচারক।


শিলিগুড়ি পুলিশ শনিবার গ্রেপ্তার করেছে মালদহের জেলাশাসক গোদালা কিরণকুমারকে৷ তিনি শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন কর্তৃপক্ষের (এসজেডিএ) মুখ্য কার্যনির্বাহী আধিকারিক থাকাকালীন প্রায় ১০০ কোটি টাকার দুর্নীতি হয়েছিল অভিযোগ৷ সেই ঘটনায় এসজেডিএ-র তত্‍কালীন চেয়ারম্যান তৃণমূল বিধায়ক রুদ্রনাথ ভট্টাচার্যকে সরিয়ে দিয়েছিল রাজ্য সরকার৷ গোদালা কিরণকুমারকেও বদলি করা হয়েছিল মালদহের জেলাশাসক পদে৷


শুক্রবার থেকে দফায় দফায় তাঁকে জেরা করার পর শনিবার বিকেলে তাঁকে গ্রেপ্তার করার কথা ঘোষণা করেন শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কারলিয়াপ্পন জয়রামন৷ উল্লেখ্য, উত্তরবঙ্গ উন্নয়নমন্ত্রী গৌতম দেবের নির্দেশে শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন কর্তৃপক্ষের ওই দুর্নীতির অভিযোগটি দায়ের হয়েছিল শিলিগুড়ি থানায়৷


আর্থিক দুর্নীতিতে ডিএম-কে গ্রেপ্তার করায় বদলি সিপি

এই সময়, কলকাতা, শিলিগুড়ি: কর্মরত অবস্থায় দুর্নীতির অভিযোগে গ্রেপ্তার হলেন মালদহের জেলাশাসক৷ আর তাঁকে গ্রেপ্তার করে শাস্তি পেলেন শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কে জয়রামন৷ তাঁকে 'কম্পালসারি ওয়েটিং'-এ পাঠানো হয়েছে৷ জয়রামনের জায়গায় আপাতত দায়িত্ব নিয়েছেন জলপাইগুড়ির ডিআইজি জাভেদ শামিম৷ দু'টি ঘটনার পিছনেই রাজ্য সরকারের হাত রয়েছে৷ উত্তরবঙ্গ উন্নয়নমন্ত্রী গৌতম দেবের নির্দেশে শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন কর্তৃপক্ষের ওই দুর্নীতির অভিযোগটি দায়ের হয়েছিল শিলিগুড়ি থানায়৷ সেই অভিযোগের তদন্তে নেমে ইতিপূর্বে পুলিশ ১০ জনকে গ্রেপ্তারও করেছিল৷ তাঁদের মধ্যে এগজিকিউটিভ ইঞ্জিনিয়ার পদমর্যাদার অফিসার থাকলেও তখন কোনও প্রশ্ন ওঠেনি৷ কিন্ত্ত একজন আইএএস অফিসার গ্রেপ্তার হতেই হইচই পড়ে যায় রাজ্য প্রশাসনে৷ জেলাশাসককে গ্রেপ্তার করা ঠিক কাজ হয়নি বলে নবান্নে সাংবাদিক সম্মেলনে জয়রামনের বিরুদ্ধে তোপ দেগেছেন মুখ্যসচিব সঞ্জয় মিত্র৷ তাঁর এই অবস্থানের পিছনে রাজ্যের আইএএস মহলের চাপ রয়েছে বলে মনে করা হচ্ছে৷ নজিরবিহীন এই ঘটনায় তীব্র টানাপোড়েন শুরু হয়েছে আইএএস ও আইপিএস লবির মধ্যে৷


শিলিগুড়ি পুলিশ শনিবার গ্রেপ্তার করেছে মালদহের জেলাশাসক গোদালা কিরণকুমারকে৷ তিনি শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন কর্তৃপক্ষের (এসজেডিএ) মুখ্য কার্যনির্বাহী আধিকারিক থাকাকালীন প্রায় ১০০ কোটি টাকার দুর্নীতি হয়েছিল অভিযোগ৷ সেই ঘটনায় এসজেডিএ-র তত্‍কালীন চেয়ারম্যান তৃণমূল বিধায়ক রুদ্রনাথ ভট্টাচার্যকে সরিয়ে দিয়েছিল রাজ্য সরকার৷ গোদালা কিরণকুমারকেও বদলি করা হয়েছিল মালদহের জেলাশাসক পদে৷


শুক্রবার থেকে দফায় দফায় তাঁকে জেরা করার পর শনিবার বিকেলে তাঁকে গ্রেপ্তার করার কথা ঘোষণা করেন শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কারলিয়াপ্পন জয়রামন৷ এ দিনই কিরণকুমারকে শিলিগুড়ির অতিরিক্ত মুখ্য বিচারবিভাগীয় আদালতে তোলা হলে বিচারক কেয়া মণ্ডল তাঁকে চার দিনের জন্য পুলিশ হেফাজতে রাখার নির্দেশ দিয়েছেন৷ তাঁকে আদালতে তোলার সঙ্গে সঙ্গে মামলাটিতে কেস ডায়েরিও পেশ করে পুলিশ৷ তাতে ভারতীয় দণ্ডবিধির ১২০(খ), ৪০৯, ৪৬৭, ৪৬৮, ৪৭১, ৪৭৭(ক) এবং ৪২০ ধারায় তাঁর বিরুদ্ধে অভিযোগ রুজু করা হয়েছে৷ বিচারক কিরণকুমারকে পুলিশ হেফাজতে রাখার নির্দেশ দিলেও তাঁর গ্রেপ্তারিকে সঠিক মনে করছেন না রাজ্য প্রশাসনের শীর্ষ কর্তারা৷ জেলাশাসককে গ্রেপ্তার করার খবর কলকাতায় পৌঁছতেই স্বরাষ্ট্রসচিব বাসুদেব বন্দোপাধ্যায় ও রাজ্য পুলিশের ডিজি জি এম পি রেড্ডিকে নিয়ে নবান্নে জরুরি বৈঠকে বসেন মুখ্যসচিব৷ সেখানেই শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনারের পদ থেকে জয়রামনকে সরানোর সিদ্ধান্ত হয়৷ পরে সাংবাদিকদের মুখ্যসচিব বলেন, 'শিলিগুড়ি পুলিশ কমিশনারের কাজ ঠিক হয়নি৷ গ্রেপ্তার করার জন্য রাজ্য সরকারের কাছ থেকে আগাম অনুমতি পর্যন্ত নেওয়া হয়নি৷ ফলে প্রশাসন চরম বিব্রত বোধ করছে৷ জেলাশাসককে গ্রেপ্তার করার কোনও প্রয়োজন ছিল না৷ জেলাশাসক পালিয়ে যেতে বা লুকিয়ে থাকতে পারেন, এমন কোনও আশঙ্কা ছিল না৷ মামলাটি প্রভাবিত করার সুযোগও তাঁর ছিল না৷' এখানেই প্রশ্ন উঠেছে, রাজ্য প্রশাসনের দ্বিচারিতা নিয়ে৷ সারদা-কাণ্ডে ধৃত তৃণমূল সাংসদ কুণাল ঘোষ ১১বার রাজ্য এবং কেন্দ্রীয় সরকারের বিভিন্ন তদন্তকারী সংস্থার জেরার মুখে পড়েছেন৷ তাঁর পালিয়ে যাওয়ারও কোনও সম্ভাবনা ছিল না৷ তবু তাঁকে গ্রেপ্তার করা হয়েছে৷ তা নিয়ে কুণালবাবুর আইনজীবীরা প্রশ্ন তুলেছেন৷


সরকারের পদক্ষেপে অস্বস্তিতে পড়লেও পরিচ্ছন্ন ভাবমূর্তির ওই অফিসার বিতর্কে জড়াতে চাননি৷ শিলিগুড়িতে তিনি শুধু বলেন, 'গোদালা কিরণকুমারকে আজ গ্রেপ্তার করে আদালতে পাঠানো হয়েছে৷ এখনই এর চেয়ে বেশি কোনও মন্তব্য করব না৷' অন্য দিকে, ধৃতের আইনজীবী অত্রি শর্মা দাবি করেন, 'অন্যায় ভাবে মালদহের জেলাশাসককে এই মামলায় জড়ানো হয়েছে৷' উত্তরবঙ্গ উন্নয়নমন্ত্রী গৌতম দেব বলেন, 'গ্রেপ্তার নিয়ে আমি কী বলব৷ এটা পুরোপুরি পুলিশ ও প্রশাসনের ব্যাপার৷ আমার কিছু বলার নেই৷' গোদালা কিরণকুমার এসজেডিএ-র মুখ্য কার্যনির্বাহী আধিকারিক পদে থাকাকালীন তার চেয়ারম্যান ছিলেন শিলিগুড়ির তৃণমূল বিধায়ক রুদ্রনাথ ভট্টাচার্য৷ তাঁর সংক্ষিপ্ত মন্তব্য, 'আইন আইনের পথে চলবে৷'


এসজেডিএ-তে মোট ৯টি দুর্নীতির অভিযোগ দায়ের হলেও প্রাক্তন মুখ্য কার্যনির্বাহী আধিকারিকের বিরুদ্ধে অবশ্য মাত্র একটি অভিযোগে মামলা রুজু করা হয়েছে৷ শিলিগুড়ি শহরে নজরদারির জন্য সিসিটিভি কেনা নিয়ে প্রায় ৫ কোটি টাকার অসঙ্গতির অভিযোগেই গ্রেপ্তার করা হয়েছে জেলাশাসককে৷ পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, ৬৬টি সিসিটিভি কেনার কথা থাকলেও কেনা হয় ৪১টি৷ তা ছাড়া ওই সিসিটিভি কেনায় 'স্পেসিফিকেশন' মানা হয়নি বলে অভিযোগ৷ প্রথম দফায় পিটিজেড মডেলের ১১টি ক্যামেরা লাগানো হলেও পরে বদলে সবগুলি বক্স ক্যামেরা লাগানো হয় বলে পুলিশ তদন্তে জানতে পারে৷ পরে ৩১টি ক্যামেরাও ছিল সেই মডেলের৷


বাম আমলে এসজেডিএ-র চেয়ারম্যান তথা প্রাক্তন পুরমন্ত্রী অশোক ভট্টাচার্য বলেন, 'আইন আইনের পথে কোথায় চলছে? গোদালা কিরণকুমারকে গ্রেপ্তার করায় পুলিশ কমিশনারকে তো পুরস্কৃত করা উচিত ছিল৷'


এর আগে এই রাজ্যে জেলাশাসককে গ্রেপ্তারের রেকর্ড আছে বীরভূমে৷ ছয়ের দশকের শেষ দিকে পারিবারিক বিবাদের জেরে গ্রেপ্তার হয়েছিলেন জেলাশাসক মৃণাল করগুপ্ত৷ সরকারি বাসভবনেই তাঁর স্ত্রী আত্মহত্যা করায় তাঁকে এক রাত পুলিশ হেফাজতে থাকতে হয়েছিল৷ এ ছাড়া বাম জমানায় দুর্নীতির অভিযোগে কারাবাস করতে হয়েছিল অত্যাবশ্যকীয় পণ্য নিগমের দায়িত্বপ্রাপ্ত আইএএস অফিসার দেবাদিত্য চক্রবর্তীকে৷ তখন কিন্ত্ত রাজ্য প্রশাসন ওই গ্রেপ্তারের বিরোধিতা করেনি৷

মালদা ডিএম গ্রেফতার, অপসারিত সিপি


সুমন ঘরাই ও সনত্ ঝা, এবিপি আনন্দ

Saturday, 30 November 2013 16:42

সরকারকে না জানিয়ে শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন পর্ষদে দুর্নীতির অভিযোগে মালদার জেলাশাসক গোদালা কিরণ কুমারকে গ্রেফতার করায় সরিয়ে দেওয়া হল শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কে জয়রামণকে৷ শনিবার একথা জানিয়ে মুখ্যসচিব সঞ্জয় মিত্র বলেন, বাড়াবাড়ি করেছেন সিপি৷ তাই তাঁকে কলকাতায় তলব করা হয়েছে৷ আপাতত তাঁর জায়গায় দায়িত্ব সামলাবেন জাভেদ শামিম৷

দুর্নীতির অভিযোগে শনিবার বিকেলে শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন পর্ষদের প্রাক্তন সিইও তথা মালদার জেলাশাসক গোদালা কিরণ কুমারকে গ্রেফতার করেন শিলিগুড়ি পুলিশ কমিশনারেটের পুলিশ কমিশনার কে জয়রামণ৷  এই

গ্রেফতারির এক ঘণ্টার মধ্যেই তড়িঘড়ি সাংবাদিক বৈঠক করেন মুখ্যসচিব৷ বলেন, যেহেতু পর্ষদের সিইও পদে তিনি নেই, তাই ডিএমকে গ্রেফতার করা সমীচীন হয়নি৷ বাড়াবাড়ি করেছেন শিলিগুড়ি কমিশনারেটের পুলিশ কমিশনার৷ সরকারকে না জানিয়ে জেলাশাসককে গ্রেফতার করায় সরিয়ে দেওয়া হচ্ছে জয়রামণকে৷

কেন সরকারকে অন্ধকারে রেখে ডিএমকে গ্রেফতার করা হল, তা জানতে কলকাতায় তলব করা হয়েছে জয়রামণকে৷ তাঁর সঙ্গে কথা বললেন রাজ্য পুলিশের ডিজি৷ যদিও ঘটনা প্রসঙ্গে কিছু বলতে চাননি সিপি জয়রামন৷  


শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন পর্ষদের সিইও থাকাকালীন গোদালা কিরণ কুমারের বিরুদ্ধে আর্থিক দুর্নীতির অভিযোগ ওঠে৷ তাঁকে ওই পদ থেকে সরিয়েও দেয় রাজ্য সরকার৷ বর্তমানে তিনি মালদার জেলাশাসক৷ শুক্রবারই তাঁকে শিলিগুড়ি থানায় ডেকে পাঠিয়ে দীর্ঘক্ষণ জেরা করে শিলিগুড়ি পুলিশ কমিশনারেট৷ শনিবার সকাল থেকে ম্যারাথন জিজ্ঞাসাবাদের পরেই তাঁকে গ্রেফতার করেন শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার৷  

এদিকে ধৃত আইএএস অফিসারকে ৪ দিনের পুলিশ হেফাজতের নির্দেশ দিয়েছে আদালত৷



জেলাশাসক পাকড়াও, শাস্তির মুখে পুলিশকর্তা

নিজস্ব প্রতিবেদন

দুর্নীতির অভিযোগে মালদহের জেলাশাসক গোদালা কিরণকুমারকে শনিবার গ্রেফতার করল শিলিগুড়ি পুলিশ। এ দিনই আদালতে পেশ করা হলে তাঁকে চার দিন পুলিশ হেফাজতে রাখার নির্দেশ দেন বিচারক। কর্তব্যরত কোনও জেলাশাসককেগ্রেফতার করারঘটনা এ রাজ্যে এই প্রথম। যা নিয়ে তীব্র আলোড়ন তৈরি হয়েছে প্রশাসনের অন্দরে। শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কে জয়রামন তাঁর এক্তিয়ারের সীমা ছাড়িয়েছেন বলে মন্তব্য করে এ দিন বিকেলেই মুখ্যসচিব সঞ্জয় মিত্র জানিয়ে দেন, ওই পুলিশকর্তাকে তাঁর পদ থেকে সরিয়ে দেওয়া হয়েছে।

নবান্ন সূত্রে বলা হচ্ছে, কিরণকুমারকে গ্রেফতার করা হয়েছে, এই খবর চাউর হতেই আইএএস মহলে তৎপরতা শুরু হয়ে যায়। তাঁরা একে অপরকে ফোন করে সবিস্তার ঘটনা জানার চেষ্টা করেন। সচিবদের একাংশ বলেন, দুর্নীতির মামলায় মালদহের জেলাশাসকের বিরুদ্ধে যে তদন্ত চলছে, তা নিয়ে তাঁদের বলার কিছু নেই। সে ক্ষেত্রে আইন আইনের পথে চলবে। কিন্তু যে ভাবে তাঁকে গ্রেফতার করা হয়েছে, তা কোনও ভাবেই কাম্য নয়। মুখ্যসচিবও তাঁর সাংবাদিক বৈঠক বলেন, "আমরা মনে করি, যখন অভিযুক্তের পালিয়ে যাওয়ার, সাক্ষীদের প্রভাবিত করার বা সাক্ষ্যপ্রমাণ লোপাটের আশঙ্কা থাকে, তখনই তাঁকে গ্রেফতার করা হয়। কিন্তু গোদালা কিরণকুমারের ক্ষেত্রে এর কোনওটাই প্রযোজ্য নয়।

*

শিলিগুড়ির আদালতে শিলিগুড়ির জেলাশাসক গোদালা কিরণকুমার। ছবি: বিশ্বরূপ বসাক।

সাধারণ ভাবে কোনও পদস্থ আধিকারিকের বিরুদ্ধে কোনও ব্যবস্থা নেওয়ার আগে রাজ্য সরকারের অনুমতি নেওয়া বা তাকে জানানো প্রয়োজন। এ ক্ষেত্রে কোনওটাই করা হয়নি।"

এ দিন বেলা ৩টে নাগাদ মুখ্যমন্ত্রীর ঘরে ঢোকেন মুখ্যসচিব-সহ ছ'জন সচিব। সরকারি সূত্রে বলা হচ্ছে, উন্নয়ন সংক্রান্ত বৈঠকে যোগ দিতেই মুখ্যমন্ত্রীর ঘরে গিয়েছিলেন সচিবেরা। খাতায়-কলমে কিরণকুমার তখনও গ্রেফতার না-হলেও তাঁকে ঘিরে তৎপরতার খবর যে তত ক্ষণে নবান্নে এসে গিয়েছে, সে কথা জানাচ্ছেন সচিবদেরই একাংশ। বিকেল চারটে নাগাদ গ্রেফতার হন মালদহের ডিএম। সওয়া ৪টে নাগাদ ডিজি জি এম পি রেড্ডির ডাক পড়ে মুখ্যমন্ত্রীর ঘরে। দ্রুত পায়ে ঘরে ঢুকে যান ডিজি। মিনিট পনেরো পরেই বেরিয়ে আসেন তিনি। তার এক ঘণ্টার মধ্যেই সাংবাদিক বৈঠক ডাকেন মুখ্যসচিব। জানিয়ে দেন জয়রামনের অপসারণের খবর।

"পুলিশ কমিশনারের যা করার কথা ছিল, তার থেকে তিনি বেশি কিছু করেছেন," মুখ্যসচিব এ কথা বললেও রাজ্যের একাধিক পুলিশ-কর্তার দাবি, কেন্দ্রীয় সরকারের যুগ্মসচিব কিংবা তার চেয়ে উঁচু পদের অফিসারকে গ্রেফতারের ক্ষেত্রে সরকারের অনুমতি নেওয়া বাধ্যতামূলক। সেই নিয়ম রাজ্যের ক্ষেত্রে খাটে না। 'কোড অব ক্রিমিনাল প্রসিডিওর'-এর সংশোধিত ৪১ নম্বর ধারা উল্লেখ করে (যে ধারায় গ্রেফতার করা হয়) তাঁদের বক্তব্য, তদন্তকারী সংস্থা যদি মনে করে অভিযুক্ত কোনও ভাবে তদন্তকে প্রভাবিত করছেন এবং সে ব্যাপারে যথেষ্ট প্রমাণ পুলিশের হাতে আছে, তা হলে তাঁকে গ্রেফতার করার আগে সরকারের অনুমতি নেওয়ার প্রয়োজন নেই। অনুমতি নিতে হয় চার্জশিট পেশের আগে।

ওই পুলিশ-কর্তারা আরও বলছেন, লোকসভা বা বিধানসভার সদস্যদের গ্রেফতার করার আগেও স্পিকারের অনুমতি নেওয়ার প্রয়োজন হয় না। গ্রেফতার করার ২৪ ঘণ্টার মধ্যে তাঁকে জানাতে হয় মাত্র। অতএব কিরণকুমারকে গ্রেফতার করে জয়রামন আইনগত দিক থেকে কোনও অন্যায় করেননি বলেই তাঁদের দাবি।

নবান্ন সূত্রের খবর, কিরণকুমার যখন শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি উন্নয়ন কর্তৃপক্ষের (এসজেডিএ) সিইও ছিলেন, তখন বিভিন্ন কাজে ৬০ কোটি টাকা দুর্নীতির অভিযোগ ওঠে। সেই মামলায় কিরণকুমারকে গ্রেফতারের অনুমতি চেয়ে গত জুলাইয়ে রাজ্যকে প্রথম চিঠি লিখেছিলেন জয়রামন। দিন পনেরো আগে ফের একই আর্জি জানান তিনি। তখনই জয়রামনকে বলা হয়, তিনি যেন যত তাড়াতাড়ি সম্ভব তদন্ত শেষ করে আদালতে চার্জশিট পেশ করেন। তার পরেই সরকার পদক্ষেপ করবে।



তখন নবান্নে

৩টে: মুখ্যমন্ত্রীর ঘরে উন্নয়ন নিয়ে মুখ্যসচিব-সহ ৬ সচিবের বৈঠক

সাড়ে ৩টে: বৈঠকে যোগ দিলেন স্বরাষ্ট্রসচিবও

৪টে ৫: গোদালা গ্রেফতারের খবর এক অফিসারের মোবাইলে

৪টে ১২: তলব পেয়ে এলেন পুলিশের ডিজি জি এম পি রেড্ডি

সাড়ে ৪টে: মুখ্যমন্ত্রীর ঘরের বৈঠক শেষ

৪টে ৪০: ছয় সচিব এলেন ১৩ তলায় মুখ্যসচিবের ঘরে

সওয়া ৫টা: প্রেস কর্নারে মুখ্যসচিবের সাংবাদিক সম্মেলন

দুর্নীতির ইতিবৃত্ত

মার্চ, ২০১৩: এসজেডিএ-র সিইও গোদালা কিরণকুমার মালদহের জেলাশাসক হলেন।

১৪ মার্চ: মুখ্যমন্ত্রীর নির্দেশে এসজেডিএ-র চেয়ারম্যান পদ থেকে রুদ্রনাথ ভট্টাচার্যকে সরিয়ে দায়িত্ব উত্তরবঙ্গ উন্নয়নমন্ত্রী গৌতম দেবকে। বিভাগীয় তদন্ত শুরু।

১৭ মে: এসজেডিএ দফতরে পুলিশি হানা।

৬ জুলাই: মালদহে গিয়ে পুলিশের জেরা গোদালাকে।

৩ অগস্ট: শিলিগুড়ি কমিশনারেটে ডেকে পাঠিয়ে দিনভর জেরা গোদালাকে।

৫- ৮ অগস্ট: রুদ্রনাথ ভট্টাচার্য, এসজেডিএ-র তিন সদস্য তৃণমূল কাউন্সিলর রঞ্জন শীলশর্মা, জলপাইগুড়ি জেলা তৃণমূল সভাপতি চন্দন ভৌমিক এবং কংগ্রেস বিধায়ক শঙ্কর মালাকারকে জেরা। গোদালাকে গ্রেফতার করার অনুমতি চেয়ে ডিজির কাছে আবেদন জয়রামনের।

২৩ অক্টোবর: ডিজি এবং মুখ্যসচিব গোদালার বিরুদ্ধে অভিযোগ সংক্রান্ত রিপোর্ট চান।

২৭ অক্টোবর: জেরায় ডাকলে অসুস্থ বলে গেলেন না ডিএম। ডিজি-কে রিপোর্ট কমিশনারের।

২৯ নভেম্বর: শিলিগুড়ি থানায় ডিএম-কে টানা ৭ ঘণ্টা জেরা।

৩০ নভেম্বর, ২০১৩: গোদালা কিরণকুমার গ্রেফতার।

এসজেডিএ-তে দুর্নীতি

তিনটি শ্মশানে কাজ না করে প্রায় ৫০ কোটি টাকা খরচ।

মহানন্দা অ্যাকশন প্ল্যানে কাজ না করে প্রায় ১৭ কোটি খরচ।

টেন্ডার ছাড়া জোড়াপানি নদী সংস্কারে প্রায় ৯ কোটি ব্যয়।

শিলিগুড়ি শহরে সিসিটিভি বসানোয় প্রায় ৮ কোটির অনিয়ম।

যে ধারায় মামলা (ভারতীয় দণ্ডবিধি)

অপরাধমূলক ষড়যন্ত্র (১২০ বি) সরকারি কর্মী হিসেবে বিশ্বাসভঙ্গ (৪০৯) প্রতারণা (৪২০) ভুয়ো নথি তৈরি (৪৬৭) প্রতারণার জন্য ভুয়ো নথি তৈরি (৪৬৮) জাল নথি বা বৈদ্যুতিন তথ্য আসল বলে চালানো (৪৭১) হিসেবে কারচুপি (৪৭৭ এ) ইত্যাদি।


নবান্নের এক শীর্ষ কর্তা বলেন, প্রাথমিক পরিকল্পনা ছিল, চার্জশিট পেশের পরে গোদালাকে জেলাশাসকের দায়িত্ব থেকে সরিয়ে অপেক্ষাকৃত গুরুত্বহীন কোনও পদে বদলি করা হবে। একই সঙ্গে তাঁর বিরুদ্ধে বিভাগীয় তদন্তও শুরু হবে। এক জন কর্তব্যরত জেলাশাসককে দুর্নীতির মামলায় গ্রেফতার করলে অফিসার মহলে ভুল বার্তা যাবে, সেই কারণেই ওই পথ বাছা হয়েছিল বলে নবান্ন সূত্রের খবর। সে কথা জানিয়েও দেওয়া হয়েছিল জয়রামনকে।

এ দিন গোদালাকে গ্রেফতার করা হল কেন? সরকারের পরামর্শ মেনে তদন্তের জাল গুটিয়ে আনেননি জয়রামন। সেই সূত্রেই শুক্রবার গোদালাকে কমিশনারেটে সাত ঘণ্টা জেরা করা হয়। গ্রেফতার হওয়ার আগে তিন ঘণ্টা অফিসারদের ঘরে ছিলেন কিরণকুমার। তদন্তকারীদের প্রশ্নের জবাব দেওয়ার বদলে কেন তাঁকে বারবার জেরা করা হচ্ছে, সে ব্যাপারে কৈফিয়ত চাইতে থাকেন গোদালা। এমনকী, ক্ষমতা থাকলে পুলিশ তাঁকে গ্রেফতার করে দেখাক, পুলিশ কমিশনারকে এমন কথাও শুনতে হয় বলে অভিযোগ। পুলিশ-কর্তাদের একাংশ বলছেন, সে কথা সহ্য করতে না পেরেই এক রকম রাগের মাথায় কিরণকুমারকে গ্রেফতারের নির্দেশ দেন জয়রামন।

মুখ্যসচিব অবশ্য এ দিন দাবি করেছেন, পুলিশ যে জেলাশাসককে শুক্রবার থেকে জিজ্ঞাসাবাদ করছে, সরকার তা জানত না। কিরণকুমারকে গ্রেফতার করার আগে ডিজি-কেও কিছু জানানো হয়নি বলে তাঁর দাবি।

মুখ্যসচিবকে প্রশ্ন করা হয়, জেলাশাসককে গ্রেফতার করার আগে পুলিশ যদি সরকারকে জানাত, তা হলে কি প্রশাসনের তরফে পদ্ধতিগত কোনও ব্যবস্থা নেওয়ার সুযোগ ছিল? সঞ্জয়বাবু বলেন, "জানতে পারলে কী কারণে পুলিশ গ্রেফতার করতে চাইছে, তা দেখা যেত। এ রকম দুমদাম কিছু না-ও হতে পারত।"

জয়রামনের কাজ যে সরকার কোনও মতেই বরদাস্ত করছে না, তা বুঝিয়ে দিয়ে মুখ্যসচিব জানান, শিলিগুড়ির সিপি-কে দায়িত্ব ছেড়ে কলকাতায় আসতে বলা হয়েছে। তাঁর বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নেওয়া হবে। সঞ্জয়বাবুর কথায়, "দিস ইজ হাইলি এমব্যারাসিং (ঘটনাটা খুবই অস্বস্তিকর)। এটা করার দরকার ছিল না।" এ দিনই উত্তরবঙ্গের আইজি শশীকান্ত পূজারীকে শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনারের অতিরিক্ত দায়িত্ব নিতে বলা হয়েছে। মুখ্যসচিব জানান, পরে সম্ভবত জাভেদ শামিমকে (বর্তমানে তিনি জলপাইগুড়ি রেঞ্জের স্পেশাল আইজি) ওই পদে পাঠানো হবে।

মালদহের জেলাশাসক কে হবেন, তা জানাতে পারেননি মুখ্যসচিব। বলেন, "মালদহে ভোট প্রক্রিয়ার (ভোটার তালিকা সংশোধন) কাজ চলছে। তাই কমিশনের অনুমতি ছাড়া কাউকে বসানো যাবে না।

নামের তালিকা পাঠাব। কমিশনই জেলাশাসক বাছবেন।" ওই প্রক্রিয়া শেষ না হওয়া পর্যন্ত মালদহেরই এক জন অতিরিক্ত জেলাশাসককে ওই দায়িত্ব সামলাবেন বলে জানিয়েছেন মুখ্যসচিব।

http://www.anandabazar.com/1uttar1.html


টানা সাত ঘণ্টা জেরা মালদহের ডিএম-কে

নিজস্ব সংবাদদাতা • শিলিগুড়ি

সজেডিএ (শিলিগুড়ি-জলপাইগুড়ি ডেভেলপমেন্ট অথরিটি)-তে বহু কোটির আর্থিক দুর্নীতির একাধিক মামলায় মালদহের জেলাশাসক গোদালা কিরণ কুমারকে শুক্রবার টানা সাত ঘণ্টা জেরা করল শিলিগুড়ি পুলিশ। কিরণ কুমার এসজেডিএ-র প্রাক্তন চিফ এগজিকিউটিভ অফিসার থাকাকালীন (২০১১-র সেপ্টেম্বর থেকে ২০১৩-র মার্চ) ওই দুর্নীতি হয়েছিল বলে অভিযোগ। শিলিগুড়ি থানার গোয়েন্দা বিভাগে ওই জেরা চলছে বলে খবর পেয়ে এ দিন দুপুরে থানায় পৌঁছে ওই প্রশাসনিক কর্তাকে গ্রেফতারের দাবিতে বিক্ষোভ দেখান ডিওয়াইএফের নেতা-কর্মীরা। তবে শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার কে জয়রামন জানান, ওই জেলাশাসককে গ্রেফতার করা হয়নি। পুলিশ সূত্রের খবর, আজ, শনিবারেও তাঁকে জেরা করা হবে।

পুলিশ কমিশনার বলেন, "মালদহের জেলাশাসক তথা এসজেডিএ-র প্রাক্তন সিইও-কে জিজ্ঞাসাবাদের প্রক্রিয়া চলছে। তদন্তের স্বার্থে এর বেশি কিছু বলা সম্ভব নয়।" এ দিন রাতে শিলিগুড়িতে থেকে যান মালদহের জেলাশাসক। তবে রাত পৌনে ৮টায় এ দিনের মতো জেরা-পর্ব মেটার পরে বিধ্বস্ত দেখাচ্ছিল তাঁকে। কোনও মন্তব্য না করে তিনি গাড়িতে থানা ছেড়ে বেরিয়ে যান।

এসজেডিএ সূত্রের খবর, সংস্থার বিভিন্ন প্রকল্পে আর্থিক দুর্নীতি নিয়ে এখনও পর্যন্ত আটটি মামলা হয়েছে। সব মিলিয়ে অন্তত ৭০ কোটি টাকার দুর্নীতি হয়েছে বলে মনে করা হচ্ছে। যে প্রকল্পগুলির বিষয়ে দুর্নীতির অভিযোগ উঠেছে তার অন্যতম হলবাগডোগরা, মালবাজার, ময়নাগুড়ি শ্মশানে বৈদ্যুতিক চুল্লি বসানোর কাজ, মহানন্দা অ্যাকশন প্ল্যানে নিকাশি পরিকাঠামো তৈরি, জোড়াপানি নদী সংস্কারে মাটি কাটা এবং বাঁধ মেরামতির কাজ, শিলিগুড়ি শহরে নিরাপত্তার স্বার্থে প্রায় ৯ কোটি টাকা খরচে বসানো ক্লোজড সার্কিট ক্যামেরার মান এবং বরাত পাওয়ার পদ্ধতি নিয়ে অভিযোগ। তা ছাড়া, ই-টেন্ডার প্রক্রিয়ায় জাল নথি তৈরির অভিযোগও রয়েছে। মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের নির্দেশে গত ১৬ মে এসজেডিএ-র বর্তমান সিইও শরদ দ্বিবেদী প্রধাননগর থানায় অভিযোগ জানান। ইতিমধ্যে দুর্নীতির অভিযোগে পুলিশ এসজেডিএ-র তিন বাস্তুকার এবং একটি ঠিকাদার সংস্থার কর্ণধার ও কর্মী-সহ মোট ১০ ধরেছে।

পুলিশ সূত্রের খবর, এ দিন ওই সমস্ত প্রকল্পগুলির বিষয়েই প্রাক্তন সিইও-কে জেরা করা হয়। দুই তদন্তকারী অফিসার ছাড়াও জেরার সময় উপস্থিত ছিলেন গোয়েন্দা বিভাগের এসিপি অভিষেক গুপ্ত। জেরার সময় না থাকলেও দফায় দফায় খোঁজ নিয়েছেন শিলিগুড়ির পুলিশ কমিশনার। কমিশনারেট সূত্রে জানা গিয়েছে, ই-টেন্ডার প্রক্রিয়ায় যে 'পাসওয়ার্ড' ব্যবহার করা হয়, তা কেবল এসজেডিএ-র সিইও-র জানার কথা। এ দিন জেরায় পুলিশ অফিসারদের কাছে এসজেডিএ-র প্রাক্তন সিইও দাবি করেন, এসজেডিএ-র কয়েক জন বাস্তুকারকে বিশ্বাস করে তিনি সেই 'পাসওয়ার্ড' ব্যবহার করতে দিয়েছিলেন। এক পুলিশ-কর্তা বলেন, "ওই দাবি ঠিক না ভুল, দেখা হবে।"

ইতিমধ্যেই এই আর্থিক দুর্নীতির মামলায় জেরা করা হয়েছে এসজেডিএ-র প্রাক্তন চেয়ারম্যান তথা শিলিগুড়ির তৃণমূল বিধায়ক রুদ্রনাথ ভট্টাচার্য, এসজেডিএ-র বোর্ড সদস্য কংগ্রেস বিধায়ক শঙ্কর মালাকার, শিলিগুড়ির প্রাক্তন ডেপুটি মেয়র তথা তৃণমূল নেতা রঞ্জন শীলশর্মা এবং জলপাইগুড়ি জেলা তৃণমূল কংগ্রেসের সভাপতি চন্দন ভৌমিককে।

http://www.anandabazar.com/archive/1131130/30uttar1.html

সব জমানাতেই স্রোতের বিরুদ্ধে গা ভাসানো এক আইপিএস

নিজস্ব সংবাদদাতা • কলকাতা

০০৩-এর মে মাস। পঞ্চায়েত নির্বাচনের দিন। ঘটনাস্থল উত্তর ২৪ পরগনার ব্যারাকপুরের কাছে একটি গ্রাম। ব্যারাকপুরের এক সিপিএম নেতার সঙ্গে তর্কে জড়িয়ে পড়েছেন এক আইপিএস অফিসার। মোটা গোঁফ। অনেকটা ফৌজিদের মতো। ওই অফিসারকে ডেকে রীতিমতো ধমকাচ্ছেন সিপিএমের নেতাটি, "এটা উত্তরপ্রদেশ কিংবা বিহার হলে তো আপনি আমাকে সেলাম ঠুকতেন। আর এটা পশ্চিমবঙ্গ বলে উল্টে আমার কথার উপর কথা বলছেন!" ভোটের লাইন সামলাতে গিয়ে কাউকে বুথের কাছে ঘেঁষতে দিচ্ছিলেন না জেলার অতিরিক্ত পুলিশ সুপার ওই অফিসার। সিপিএম নেতার রাগটা সেখানেই।

২০১১ সালের মার্চে বিধানসভার নির্বাচনের সময়ে ওই পুলিশ অফিসারকেই দেখা গেল বিতর্কে জড়িয়ে পড়েছেন তমলুকের এক সিপিএম নেতার সঙ্গে। নির্বাচনের আগে তিনি দায়িত্ব পেয়েছেন পূর্ব মেদিনীপুর জেলার পুলিশ সুপারের।

তিনি কে জয়রামন, যাঁর সম্পর্কে সমসাময়িক পুলিশ কর্তাদের মন্তব্য, "ও অনেকটা ফৌজিদের মতো। স্রোতে গা ভাসাতে পারে না। যেটা মনে করবে, আইনে যা হবে সেটাই করবে।"

*

শিলিগুড়ি পুলিশ কমিশনারেট ছেড়ে বেরিয়ে

আসছেন কে জয়রামন। বিশ্বরূপ বসাকের তোলা ছবি।

তাই তাঁর পদক্ষেপ কখনও শাসকদলকে, কখনও প্রশাসনের সর্বোচ্চ মহলকে, আবার কখনও তাঁর নিজের বিভাগের উচ্চপদস্থ কর্তাদের বিপাকে ফেলে দিয়েছে। সম্প্রতি শিলিগুড়ি পুরসভার দু'টি ওয়ার্ডের উপ-নির্বাচনে বর্তমান শাসকদলের স্থানীয় নেতৃত্বের একাংশও জয়রামনের বিরুদ্ধে অসহযোগিতার অভিযোগ তুলেছিলেন।

জয়রামন সিআইডি-র ডিআইজি (অপারেশনস) থাকাকালীন, ২০১২-র ফেব্রুয়ারি মাসে ১২৫ কোটি টাকার লৌহ আকরিক কেলেঙ্কারির মামলায় গ্রেফতার করা হয় অত্যাবশ্যকীয় পণ্য সরবরাহ দফতরের প্রাক্তন ম্যানেজিং ডিরেক্টর আইএএস অফিসার দেবাদিত্য চক্রবর্তীকে। কর্মরত হলেও দেবাদিত্যবাবু তখন কম্পালসারি ওয়েটিং-এ ছিলেন। কিন্তু তাঁকে গ্রেফতার করায় আইএএস অফিসারদের একাংশ সেই সময় থেকেই জয়রামনের উপর ক্ষুব্ধ ছিলেন বলে তাঁর সহকর্মীদের অনেকেই মনে করছেন। তাঁরা বলছেন, ২০০৭ সালে কলকাতা পুলিশের গোয়েন্দা বিভাগ এ ব্যাপারে তদন্ত করে দু'জনকে গ্রেফতার করলেও আইএএস অফিসারকে গ্রেফতারের সাহস দেখায়নি।

জয়রামন সিআইডি-তে ডিআইজি (অপারেশনস) হয়ে আসেন রাজ্যে রাজনৈতিক পট পরিবর্তনের অব্যবহিত পরেই। সেই সময়ে সিআইডি-কে হাতে নিতে হয় অত্যন্ত স্পর্শকাতর দু'টি মামলা বেনাচাপড়ার কঙ্কাল কাণ্ড ও নন্দীগ্রামের নিখোঁজ কাণ্ড। দু'টি মামলার ক্ষেত্রেই তদন্তের সামগ্রিক তত্ত্বাবধানের দায়িত্বে ছিলেন তিনি। বেনাচাপড়ার কঙ্কাল কাণ্ডে গ্রেফতার করা হয়েছিল রাজ্যের প্রাক্তন মন্ত্রী ও বর্তমানে সিপিএমের বিধায়ক সুশান্ত ঘোষকে। আবার নন্দীগ্রামের নিখোঁজ কাণ্ডে গ্রেফতার করা হয় সিপিএমের প্রাক্তন সাংসদ লক্ষ্মণ শেঠকে।

সিআইডি সূত্রের খবর, কঙ্কাল কাণ্ডে রাজ্যের এক প্রাক্তন মন্ত্রীকে অভিযুক্তদের তালিকায় রাখতে উপর মহল থেকে নির্দেশ এসেছিল। কিন্তু জয়রামন জানিয়ে দেন, ওই নেতার বিরুদ্ধে অপরাধের কোনও প্রমাণ নেই। সিআইডি হেফাজতে সুশান্ত ঘোষ ও লক্ষ্মণ শেঠকে কোনও রকম অসম্মান বা হেনস্থা করারও বিরোধী ছিলেন তিনি। সে জন্য তাঁকে উপর মহলের কাছে জবাবদিহিও করতে হয়েছিল বলে তাঁর সিআইডি-র সহকর্মীরা জানিয়েছেন।

২০১১ সালে পূর্ব মেদিনীপুরের এসপি হিসেবে অল্প কিছু দিন কাজ করার বছর ছয়েক আগে জয়রামন বাঁকুড়া জেলার এসপি ছিলেন। সেই সময়ে, ২০০৫ সালে বারিকুল থানার ওসি প্রবাল সেনগুপ্ত মাওবাদী নাশকতার শিকার হন। ব্যাগের চেন খুলতে গিয়ে বিস্ফোরণে প্রাণ হারান। বাঁকুড়ায় কাজ করার পর জয়রামন চলে যান সিবিআই-তে। চেন্নাইয়ে সিবিআইয়ের আর্থিক অপরাধ দমন শাখার এসপি হিসেবে তিনি বছর চারেক কাজ করেন। সিবিআই-তে ডেপুটেশনে যাওয়ার আগে অল্প কিছু দিনের জন্য জয়রামন হাওড়ার রেল পুলিশ সুপার পদেও ছিলেন।

তামিলনাড়ুর বাসিন্দা, ফৌজি অফিসার সুলভ গোঁফ রাখা ১৯৯৭ ব্যাচের এই আইপিএস অফিসার নিজের কর্মজীবন শুরু করেছিলেন ভারতীয় বায়ুসেনার ইঞ্জিন টেকনিশিয়ান হিসেবে। আইপিএস হিসেবে তাঁর প্রথম পোস্টিং উত্তর দিনাজপুরের ইসলামপুরের এসডিপিও পদে। অতিরিক্ত পুলিশ সুপার হিসেবে তিনি ব্যারাকপুর ছাড়াও শিলিগুড়ি, কোচবিহার, সল্টলেক ও তমলুকে কাজ করেছেন। ইএফআর-এর কম্যান্ড্যান্ট-ও ছিলেন অল্প কিছু দিন। শিলিগুড়ি কমিশনারেট গঠিত হওয়ার পর সেখানকার দ্বিতীয় কমিশনার হন জয়রামন। তার আগে তিনি ছিলেন দুর্নীতি দমন শাখার ডিআইজি। সেখানেও তাঁর সম্পর্কে ভয় ছিল, হুট করে তিনি কোনও সরকারি অফিসারের বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নিয়ে সরকারকে বিড়ম্বনায় ফেলে দিতে পারেন।

এক আইপিএস অফিসারের কথায়, "কালিয়াপ্পন জয়রামনের সততা নিয়ে প্রশ্ন তোলার অবকাশ নেই। কিন্তু আমাদের সকলকে একটা ব্যবস্থার মধ্যে থেকে সেই ব্যবস্থাকে কমবেশি মেনে নিয়ে কাজ করতে হয়। জয়রামন সেই ব্যবস্থার তোয়াক্কা করেন না। এটা তাঁর গুণ বললে গুণ, দোষ বললে দোষ।" তাই, নবান্নের নির্দেশ অমান্য করে মালদহের জেলাশাসককে গ্রেফতার করে তিনি যে ভুল করেছেন, সেটাও কিন্তু স্বীকার করে নিচ্ছেন জয়রামনের সঙ্গে কাজ করা আইপিএস অফিসারেরা।

http://www.anandabazar.com/1uttar5.html


No comments:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

PalahBiswas On Unique Identity No1.mpg

Tweeter

Blog Archive

Welcome Friends

Election 2008

MoneyControl Watch List

Google Finance Market Summary

Einstein Quote of the Day

Phone Arena

Computor

News Reel

Cricket

CNN

Google News

Al Jazeera

BBC

France 24

Market News

NASA

National Geographic

Wild Life

NBC

Sky TV