THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST
We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas.
http://youtu.be/7IzWUpRECJM
ताज महल वास्तव में शिव मन्दिर था और उसका मूल नाम तेजो महालय है । " यह रहस्योद्घाटन करने वाले कृपया अपने बच्चों को यही मूल इतिहास पढ़ायें और फिर देखते हैं कि वे एक चपरासी की प्रतियोगिता परीक्षा भी पास कर पाते हैं या नहीं । मासूम और धर्म भीरु युवकों को स्व निर्मित इतिहास की यह ज़हरीली घुट्टी पिलाने वालों का कौन हवाल ? क्या यह धंधा नकली ज़हरीली शराब के कारोबार से कम घातक है ?
ताज महल वास्तव में शिव मन्दिर था और उसका मूल नाम तेजो महालय है । " यह रहस्योद्घाटन करने वाले कृपया अपने बच्चों को यही मूल इतिहास पढ़ायें और फिर देखते हैं कि वे एक चपरासी की प्रतियोगिता परीक्षा भी पास कर पाते हैं या नहीं । मासूम और धर्म भीरु युवकों को स्व निर्मित इतिहास की यह ज़हरीली घुट्टी पिलाने वालों का कौन हवाल ? क्या यह धंधा नकली ज़हरीली शराब के कारोबार से कम घातक है ?
Manoj Tiwariताज महल वास्तव में शिव मन्दिर था और उसका मूल नाम तेजो महालय है । " यह रहस्योद्घाटन करने वाले कृपया अपने बच्चों को यही मूल इतिहास पढ़ायें और फिर देखते हैं कि वे एक चपरासी की प्रतियोगिता परीक्षा भी पास कर पाते हैं या नहीं । ...........सत्य कहा आपने दुनिया को मत ग्ल्ब्लाओ अपने बच्चो से शुरुआत करो
Arun Pratap SinghYou have fantastic imagination Rajiv Bahuguna ji. While nobody will write history about Taj Mahal in the way you have imagined, it remains a fact that our history is already written from the British and leftist perspectives and is not completely truthful. Besides this, it also is an undeniable fact that Muslim invaders in India destroyed innumerable temples and other Hindu buildings and other items.
Sudhir Panwarये तो संविधान है जो लिखा है मानना पडेगा. नही तो जिस गांधी ने भगत सिह को आतंगवादी कहकर फांसी दिलवाने कोइ कसर नही छोडी, वो राष्टपिता कहलाये, नोटो पे फोटो भी, मेरा personal experience है गांधी के बारे में 99% लोग सही नही सोचते, क्यों कि सब political है. लेकिन exam में लिख नही सकते फेल हो जायेंगे
Namrata SemwalGood morning bhai sahaab have a beautiful Sunday
What has been written in this post of yours.......... Makes me go round n round.....it just not fit in my wildest of the dream....... From where people get all these ideas is what, surprises me...... I am stunned by this post....... God bless us to do what is right n make us so pure that we think only positive n good......for us.... The mankind, r environment n for all living beings
Anusooya Prasad Ghayalदादा कुछ कहने को नही बन रहा है ।बस इतना कहूंगा - "नफरतों की जंग में न जाने क्या - क्या हो गया । सब्जियाँ हिन्दू हुई बकरा मुसलमां हो गया "
Narayan Swarup KukretyTajmahal ka he Sidhant itihaskaar p.n.oak sahib ki den hai .....1970 me unki iss visay mein bhashan -Mala arya samaj Dehradun me suni thi ,Jo U.S. samaj 19 varsh ki ayu main bhi santust nahi Kat saki thi
Ratan Singh Aswalदेश दुनिया के बारे मे तो नहीं कह सकता पर हाँ पहाड़ी का बच्चा जरूर फेल हो जायेगा क्योकि उसका सामान्य ज्ञान कम होता है , धन्य है म्रेरे उत्तराखंड के कर्ता धर्ता ये जानते हुये भी कि पहाड़ी लोगो का सामान्य ज्ञान संसाधनो की कमी के चलते कम होता है बाबजूद उत्तराखंड मे सरकारी नोकरी के लिए सामान्य ज्ञान की भी परीक्षा होती है । अब इससे किसे लाभ है ? बल भैजी ??????????
Sudhir Panwarकुल मिला के, हो सकता है, ये सत्य हो. हम लिखे को आधार मान रहे है़ं. वो दौर भी शाहजहां का था. लिखा भी उसी ने, सबसे पुरानी तो हिन्दू संस्क्रिति है,
Praveen Semwalसेकुलर लोगो की में दिल से कदर करता हूँ लेकिन माफ़ी भी मांगता हूँ की मुझे सेकुलर न समझे हाँ जहँ तक तेजो महालय की बात है वो केवल मेने परीक्षा के लिए याद कर रखा था अब वो भी भूल गया हूँ खेर भाड़ में जाये जिस ने भी बनया हो लेकिन है तो तोजो महालय ही
Anil Kumarपर मुमताज पहले किसी और की बीबी थी बल। ये बी त नि पढाई बल इतिहास म। फिर ताज महल के हाके छो । ये बि हुवे सककदु। अब पढ़े पर बिश्वास करें या सुने पर?
Deepak Chandअभी और इतिहास के पन्ने बाकि है जैसे गिजा मै स्फिंकेश्वर का मंदिर , चीन कि दिवार असल मै दिवार नही है एक विशाल मंदिर है Alexandre Gustave Eiffel (आइफल टावर वाला ) हिंदु धर्म वाला था ........
Praveen Semwal#ABP_news वालो ने आज एक पोस्ट किया है। पढ़ने के बाद मैरे तो आंसू निकल आये। प्रियंका "गांधी" के बेटे रेहान ने अमेठी में मच्छर दानी में रात बिताई। अब ये महान मिडिया को कौन समझाऐ कि भैया प्रियंका अब #गांधी नही रही विवाह पश्चात। और जिस देश में लाखो गरीबो को सोने की जगह ही नही है और इस इटैलियन माता की औलाद की औलाद का प्रचार करने के लिए उसे भी गांधी की औलाद बना दिया। अगर प्रियंका के नाम के पीछे मिडिया गांधी लगाती है तो सोनिया के पीछे भी उसकी शादी से पहले की जाति लगनी चाहिए वो क्यों नहीं लगाती है क्यों भोली भाली जनता को गुमराह करते हो यार। इस देश को पहले ही नकली गांधी की औलादो ने खूब लूट लिया है अब और क्या कटोरे मे भर भर कर खून ही बचा है वो भी पियोगे ? सेकुलर लोग दस कदम दूर रहे गांधी परिवार का नाम आया है आग लगनी लाजमी है।
Satish Saklaniआपको मेरा सादर प्रणाम आदर्णीय बहुगुणा जी ।बहुगुणा जी पढने पढाने का काम तो सदा यूँ ही बदस्तुर चलता रहेगा । पढाया तो यह भी जाता है कि गाँधी जी महात्मा थे राष्ट्रपिता थे . लेकिन माननीय मनमोहन जी की सरकार ने सितम्बर 2012 मे इलाहबाद की 13 साल की सातवीँ क्...See More
K.c. Dhyaniवाकयी सतय तो यही है रूसी चीनी बिचारधारा के उधारी कमयुनिसट बीडी के ठुडडे पीते जूठी दारू के ढककन सूंघते और चाटते कांगरेस के पापी कुकरमी कययास पीएम की नालायकी बिदेशी सोच सिदधांतों के दलाल समरथकों ने भारत की संसकरिति सभयता समाज इतिहास को मलिन ही नहीं कलंकित किया। इनहोने ही भारत का बंटवारा जेके को भारत के अंदर ही एक राजय नहीं धारा ३७०/३७१देकर पाकिसतान जैसा ही एक और मुलक बना डाला। नेहरू और उसके रूसी दलाल कमयनिसटों ने देश की हर अचछी परंपरा चलन हरकुछ को नशट कर डाला तो १९६२की शरम नाक चीन से मिली हार हजारों बरग किमी जमीन चीन ने कबजाई तिबबत नेहरूसने पहले ही छदम धरमनिरपेक्षशता की तरह छदम दोसती मे पलेट मे सजाकर चीन को परोश डाला ।जो भी उलटे तमाम काम हुए कमयुनिसट कांगरेस के .ही दवारा किए गये संयोग देखिए परजातंतर का काला अधयाय इमरजेंसी भी कांगरेस कमयनिसटों की ही साझी सरकार ने ही लागू की। कांगरेस और नेहरू परिवार के उस जहरीली सियासत लूट की आज वारिस बिदेशी फिरंगन
VP Bhattबहुगुणा जी अब लगता है आप भी कांग्रेस में आने के लिए गंभीर हैं। आप तो जनता के स्तम्भ हैं। पत्रकारिता के वरिष्ठ व्यक्तियों में शुमार हैं, परन्तु कुछ ज्वलंत और सामाजिक मुद्दे ऐसे हैं, जिनपर पत्रकारिता से जुड़े बुद्धिजीवियों द्वारा कटाक्ष किया जाना निश्चित ही पीड़ादायक है। इतिहास तो बाबर से पहले भी लिखा गया था, और अंग्रेजों के बाद भी।
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