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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Friday, February 24, 2012

सहारा की अनसुलझी पहेली​

सहारा की अनसुलझी पहेली​

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास



इस बारे में कोई दो राय नहीं कि सहारा समूह ने आर्थिक सुधारों के जमाने में भारतीय अर्थ व्यवस्था में तेजी से अपनी साख बनायी है। पर हाल में सेबी के साथ हुए विवाद से उनकी साख को धक्का लगा है। विवाद तो उनका भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से आईपीएल में पुणे वाररियर्स के साथ हुए कथित भेदभाव को लेकर भी हुआ, पर यह मामला सुलझ गया। अब सारा समूह की नजर बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने पर है, लेकिन सेबी के रवैये से इसमें उसे मुश्किलों का समना करनवा पड़ रहा है। पर सहारा श्री सुब्रत राय करिश्माई  करतब के लिए भी मशहूर है और वे रास्ता बनाने में लगे हुए हैं।सहारा इंडिया की पैरा बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईएफसीएल)  बैंकिंग लाइसेंस की दावेदार है और इस दावे को खारिज करने की मुहिम पर सहाराश्री परेशान है। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस में कई शर्तें ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना सहारा समूह के लिए मुश्किल होगा।हालांकि कंपनी ने भले ही समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर निवेशकों के 73,000 करोड़ रुपये चुकाने की घोषणा कर दी है। खास बात यह है कि सहारा समूह की परियोजनाएं आर्थिक मंदी के बावजूद चालू है। पर उसकी आय के स्रोतों पर अब सवाल खड़े किये जा रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का मुकदमा लंबा खिंचता जा रहा है।सेबी ने निवेशकों को सहारा ग्रुप के ओएफसीडी इश्यू में निवेश करते वक्त सावधानी बरतने को कहा है। सहारा इंडिया रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट की ओएफसीडी के जरिएबाजार से पूंजी जुटाने की योजना है।
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सहारा समूह और सहाराश्री सुब्रत राय का उत्थान रिलायंस संस्थापक किंवदंती धीरूभाई अंबानी की दास्तां से कम हैरतअंगेज नहीं है। ​इकोनामिक टाइम्स के  मुताबिक  कॉरपोरेट वर्ल्ड में सहारा एक पहेली की तरह है। जब इंडिया इंक के कई दिग्गज खर्च घटाने और पूंजी जुटाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, तब सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय विदेश में अधिग्रहण की बात कर रहे हैं। उनका दावा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट जमाकर्ताओं को हजारों करोड़ रुपटे लौटाने का आदेश देता है तो भी ग्रुप को कोई समस्या नहीं होगी। हालांकि, ग्रुप के सामने इन दिनों एक अलग तरह की समस्या है। रॉय ने कहा, 'मैं इंग्लैंड से 25 करोड़ पाउंड भारत लाना चाहता हूं, लेकिन मुझे इसकी इजाजत नहीं मिल रही।' रॉय ने बताया कि यह पैसा लंदन में ग्रॉसवेनॉर हाउस होटेल को गिरवी रखकर जुटाया गया है। सहारा ने 2010 में इस होटेल को खरीदा था। उन्होंने कहा कि इस रकम के बारे में कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। सहारा ग्रुप की कंपनियों के कैश फ्लो के बारे में लोगों को बहुत ही कम जानकारी है। रॉय कहते हैं कि कोई इस बारे में नहीं जानना चाहता। उन्होंने कहा, 'हमने सभी आंकड़े का एलान न्यूजपेपर्स विज्ञापनों में किया है।'

मालूम हो कि सहारा समूह और बीसीसीआई के बीच सुलह हो गई है। बीसीसीआई ने सहारा समूह के साथ सभी विवाद सुलझा लिए हैं। सुलह के बाद अब सहारा समूह भारतीय क्रिकेट टीम का स्पॉन्सर बना रहेगा। सहारा समूह के साथ सारे मसले सुलझाने पर खुशी जताते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआई] ने यह भी कहा कि उसने कोई नियम नहीं तोड़ा और नियमों के दायरे में ही मामला सुलझाया गया है।भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ स्पांसरशिप विवाद के बीच सहारा समूह ने अन्य खेलों में पैसा लगाने की योजना बनाई है। ताजा कड़ी में सहारा पोलो जैसे शाही खेल में भी प्रायोजन करेगा।सहारा ग्रुप के मालिक सुब्रत राय ने विजय माल्या की फॉर्मूला वन टीम में पार्टनरशिप की है। फॉर्मूला वन रेस में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम फोर्स इंडिया में सहारा ग्रुप ने साढ़े बयालीस फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है

गौरतलब है कि हाल में  उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह की उन संपत्तियों की सूची का विवरण मीडिया में लीक करने के लिए सेबी की खिंचाई की है। सहारा ने इस सूची में अपनी वे सम्पत्तियां गिनाईं थीं, जिन्हें उसकी विवादास्पद निवेश योजनाओं में पैसा लगाने वालों के निवेश की सुरक्षा की गारंटी के तौर पर लिया जा सकता था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सहारा के वकील द्वारा सेबी के अधिवक्ता को भेजा गया प्रस्ताव एक टीवी चैनल में लीक होने से 'व्यथित' है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती इस प्रकार की घटना से न केवल कारोबारी धारणा पर असर पड़ता है बल्कि न्याय के प्रशासन में भी हस्तक्षेप होता है।

सहारा ग्रुप ने सेबी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉर्प के आईपीओ पर रोक लगा दी । जिसके खिलाफ सहारा ने अखबारों में विज्ञापन निकालकर अपनी सफाई छापी । हुआ यह कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने एक आदेश जारी कर सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय और उनके तीन सहयोगियों वंदना भार्गव, रविशंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी पर बंदिश लगा दी कि वे अगले आदेश तक किसी भी प्रपत्र (सिक्यूरिटी) के जरिए पब्लिक से धन जुटाने के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई विज्ञापन, प्रॉस्पेक्टस या अन्य दस्तावेज जारी नहीं कर सकते। यह आदेश सेबी के पूर्णकालिक निदेशक के एम अब्राहम ने सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) द्वारा कानूनी नुक्तों की आड़ में गलत तरीके से 40,000 करोड़ रुपए जुटाने की पेशकश की सघन जांच के बाद जारी किया । यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू गया ।  सहारा समूह को इस पर अपनी आपत्तियां 30 दिन के भीतर सेबी के पास भेजने की मोहलत दी गई।अखबारों में इसका पूरा विवरण छपा। जिसपर सहाराश्री ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सहारा के मुताबिक सेबी के अधिकारी सहारा की छवि बिगाड़ने में लगे हैं। सहारा के मुताबिक पहले भी सेबी ने कंपनी को निशाना बनाया था। सहारा ने विज्ञापन में साफ लिखा है कि सेबी ने बेबुनियादी शिकायतों के बहकावे में आकर उसकी दो कंपनियों के आईपीओ पर रोक लगाई हैसहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉर्प दोनो ही कंपनियों ने ओएफसीडी डिबेंचर के जरिए 40-40 हजार करोड़ रुपये जुटाने के लिए सेबी के पास अर्जी दी थी। सेबी के मुताबिक सहारा के प्रोमोटर्स ने आरएचपी में पैसे किससे जुटाएंगे इसका उल्लेख नहीं किया था। सेबी के मुताबिक सहारा की कंपनियों ने पर्याप्त डिस्क्लोजर भी नहीं दिए। सेबी ने अपने ऑर्डर में यह भी कहा कि सहारा इंडिया की कंपनियां किसी बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से रेटिंग भी नहीं करा पाई। सेबी ने सहारा के प्रमुख सुब्रत राय सहारा को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है और उनके भी पूंजी जुटाने पर रोक लगा दी सहारा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि है सेबी का अधिकार क्षेत्र सिर्फ उन्हीं कंपनियों तक सीमित है जो लिस्टेड हों या फिर किसी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने की तैयारी में हो। लेकिन जब फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम जुटाई जा रही थी उस वक्त सहारा ना तो लिस्टेड कंपनी थी और ना ही लिस्ट होने की तैयारी में थी।

पूरा प्रकरण कुछ इस प्रकार है कि अपने 34 पन्नों के आदेश में सेबी ने सहारा समूह की तरफ से तथ्यों को छिपाने का पूरा ब्यौरा दिया । उसमें समूह की तरफ से दिए गए हर कानूनी नुक्ते की काट पेश की गई । इस आदेश को पढ़ने से एक बात और साफ होती है कि सहारा समूह ने कॉरपोरेट कार्यमंत्री सलमान खुर्शीद की आड़ लेकर सेबी को धता बताने की कोशिश की गई । सेबी द्वारा मांगी गई जानकारी न देकर समूह की तरफ से कहा गया कि सेबी खुद कॉरपोरेट कार्यमंत्री से संपर्क करें जिनको सारे मामले की जानकारी दे दी गई है। इससे लगता है कि सहारा समूह ने खुद को बचाने के लिए सलमान खुर्शीद से भी अच्छी-खासी लॉबीइंग की होगी।

मामला उक्त दो कंपनियों की तरफ से साल 2008 में 20-20 हजार करोड़ रुपए जुटाने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल प्रॉस्पेक्टस का है। यह रकम ओएफसीडी (ऑप्शनली फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) के जरिए जुटाई जानी थी। प्रत्येक ओएफसीडी/बांड 5000 रुपए से 24,000 रुपए का था। सहारा समूह का कहना है कि यह रकम उसके कर्मचारियों और सगे-संबंधियों या परिचितों से प्राइवेट प्लेटमेंट के जरिए जुटाई जा रही है। इसलिए न तो यह पब्लिक इश्यू है और न ही इसके लिए सेबी से किसी तरह की इजाजत लिए जाने की जरूरत है।

सेबी की नजर में यह मामला सहारा प्राइम सिटी की तरफ से आईपीओ लाने के लिए 30 सितंबर 2009 को दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) की जांच के दौरान आया। असल में उसके पास रोशन लाल नाम के निवेशक और प्रोफेशनल ग्रुप फॉर इनवेस्टर प्रोटेक्शन की तरफ से शिकायतें दर्ज कराई गई कि कैसे समूह की दो कंपनियां लोगों से हजारों करोड़ जुटा रही है, जिसकी कोई सूचना सहारा प्राइम सिटी ने अपने डीआरएचपी में नहीं दी है। इसके बाद सेबी ने प्रस्तावित आईपीओ के लीड मैनेजर एनम सिक्यूरिटीज को लिखित पत्र भेजकर जवाब मांगा। लेकिन उसने गोलमोल जवाब देकर टरका दिया।

सेबी ने इसी क्रम में कई बार सहारा समूह को पत्र भेजकर कहा कि वह अपनी दो कंपनियों के ओएफसीडी इश्यू में धन लगानेवाले निवेशकों का ब्योरा उसे दे दे। लेकिन समूह ने ऐसा कुछ नहीं किया और कहता रहा कि वह पूरी तरह कंपनी कानून के तहत काम कर रहा है और इश्यू के निवेशकों की संख्या 50 से कम है। इसलिए वह किसी भी तरीके से सेबी के तहत नहीं आता और उसे सेबी के सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं है।

लेकिन सेबी ने पूरी तहकीकात के दौरान सहारा समूह के धन के स्रोतों पर ही सवाल उठा दिया। उसका कहना है कि जमा किए सालाना खातों के अनुसार सहारा इंडिया रीयल एस्टेट ने 20,000 करोड़ की तय रकम में से 4843.37 करोड़ रुपए जुटा लिए हैं, जबकि सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा जुटाई गई रकम की जानकारी कंपनी रजिस्ट्रार को नहीं दी गई है। अगर मान लिया जाए कि इश्यू में निवेश करनेवालों की संख्या 50 से कम, मान लीजिए 49 है तो जुटाए गए 4843.37 करोड़ को ही गिनें तो प्रति निवेशक लगाई गई रकम कम से कम 98.84 करोड़ बैठती है। इतनी रकम तो किसी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुल) श्रेणी के निवेशक के लिए भी लगाना संभव नहीं है। सेबी का कहना है कि इससे जाहिर होता है कि सहारा समूह धन के वास्तविक स्रोत को छिपा रहा है और इतनी रकम किसी भी सूरत में 50 से कम निवेशकों से नहीं जुटाई जा सकती।

सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि 40,000 करोड़ रुपए की रकम काफी ज्यादा है। उसने याद दिलाया है कि पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में 39 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए कुल 24,696 करोड़ रुपए ही जुटाई थे, जबकि 2008-09 में तो 21 कंपनियां कुल 2083 करोड़ रुपए ही जुटा सकी थीं। ऐसे में सहारा समूह की दो कंपनियां अगर निवेशकों से 40,000 करोड़ जुटा रही हैं तो सेबी का फर्ज बनता है कि वह निवेशकों के हितों की हिफाजत करे। इसके मद्देनजर सेबी ने इन दो कंपनियों के ओएफसीडी इश्यू पर पाबंदी लगा दी है। उसका कहना है कि इसमें 50 के ज्यादा निवेशकों से रकम जुटाई जा रही है, इसलिए कानूनन वे पब्लिक इश्यू हैं। इनके लिए सेबी की पूर्व इजाजत जरूरी है और निवेशकों को इन डिबेंचरों को कैश कराने के लिए इनका किसी न किसी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होना भी अनिवार्य है।

अब इकोनामिक टाइम्स को मुताबिक सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय ताल ठोक कर दावा करते हैं कि चाहे जो हो जाए सहारा के सामने कोई मुश्किल नहीं है। यहां तक कि अगर सुप्रीम कोर्ट अचानक इस समूह को हजारों करोड़ रुपये चुकाने को कहता है, तो भी उनके सामने कोई समस्या नहीं आएगी। रॉय और रेग्युलेटर करीब-करीब हर पांचवें साल एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाते हैं। इन सब समस्याओं के बावजूद रॉय ने महत्वाकांक्षी वेंचर की घोषणाएं कीं और फिल्म जगत की जानी-मानी हस्तियों को बुलाया। यहां तक कि उन्होंने देश के सबसे बड़े सुपरस्टार को कभी संकट से उबारा था, लेकिन इन दिनों वह एक अलग समस्या को सुलझाने में लगे हुए हैं।

मुंबई के उपनगर में अपने सहारा स्टार होटेल में शीशे की दीवारों से घिरे केबिन में चमड़े की गद्देदार कुर्सी पर बैठे रॉय ने कहा, 'यह हैरान करने वाला है। यह बहुत बुरा है...पिछले 30 दिनों से मैं ब्रिटेन से अपने 25 करोड़ पाउंड वापस लाने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे इसकी इजाजत नहीं मिल रही है। वहां हमारा पैसा है लेकिन हम उसे वापस नहीं ला सकते हैं।'

यह वही पैसा है जो उन्होंने ग्रॉसवेनॉर हाउस गिरवी रखकर जुटाया है। यह लंदन के मेफेयर जिले का एक होटेल है, जिसे सहारा ने 2010 में खरीदा था। सहारा अब इस पैसे को एम्बी वैली में निवेश करना चाहती है। लेकिन क्या यह ईसीबी या विदेशी लोन नहीं है? इस सवाल के जवाब में सिगरेट जलाते हुए बड़ी बेताबी से उन्होंने कहा, 'कैसे? यह हमारा पैसा है जो विदेशी प्रॉपर्टी बेचकर हासिल की गई है। इसमें किसी का कोई लेनादेना नहीं है। यह सब कुछ ईडी के कुछ पुराने नोट की वजह से हुआ है... बहुत कमजोर आधार पर सवाल उठाया जा रहा है।'
 

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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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