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THE HIMALAYAN DISASTER: TRANSNATIONAL DISASTER MANAGEMENT MECHANISM A MUST

We talked with Palash Biswas, an editor for Indian Express in Kolkata today also. He urged that there must a transnational disaster management mechanism to avert such scale disaster in the Himalayas. http://youtu.be/7IzWUpRECJM

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

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Monday, June 10, 2013

कानून विरोधी ताकतों का सरकार पर है कब्जा- अखिलेन्द्र,यूपी में खराब कानून व्यवस्था के खिलाफ का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह दस दिन के उपवास पर

कानून विरोधी ताकतों का सरकार पर है कब्जा- अखिलेन्द्र


अखिलेन्द्र बैठे विधानसभा के सामने दस दिवसीय उपवास पर

वाम-जनवादी ताकतों ने दिया समर्थन

ऑल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ), IPF,

फाइल फोटो

लखनऊ 10 जून 2013,जन अधिकार अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में कानून के राज (Rule of Law) की स्थापना के लिये ऑल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह आज एक बजे से विधान सभा के सामने धरना स्थल पर 10 दिवसीय उपवास पर बैठ गये। इस उपवास का समर्थन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी)राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिलसोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टीसमेत तमाम वाम-जनवादी ताकतों ने किया। इस उपवास में आईपीएफ नेता ने 18 सूत्री जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को उठाया।

उपवास की शुरूवात करते हुये आईपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश की सरकार पर कानून विरोधी ताकतों का कब्जा है, इस सरकार को माफिया-गुण्डा-अपराधी, अवैध खननकर्ता और बिल्डरों, कॉरपोरेट घरानों की ताकतें चला रही हैं। प्रदेश में कहीं भी कानून का राज नहीं दिखता। उन्होंने इलाहाबाद और सोनभद्र का उदाहरण देते हुये बताया कि जो कुछ नौकरशाह कानून सम्मत काम करने की कोशिश भी करते हैं, उन्हें पदों से हटा दिया जाता है। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाही करने के कारण एक ही दिन में इलाहाबाद के कमिशनर को हटा दिया गया और सोनभद्र में इसकी मुखालफत करने वाले डीएम व वनविभाग अधिकारियों का एक ही दिन तबादला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि "प्रदेश में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर सरकार द्वारा कराये जा रहे इस अवैध खनन के खिलाफ हमने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है और हमें उम्मीद है कि अखिलेश सरकार का हाल भी कर्नाटक की येदुरप्पा सरकार की तरह ही होगा।" उन्होंने कहा कि प्रदेश में कितनी शर्मनाक हालत है कि किसानों की बात करने वाले मुलायम सिंह की पार्टी की सरकार में किसानों की फसल खरीदने के लिये सरकार के पास बोरा तक नहीं है। उन्होंने कहा कि नेशनल हाईवे की मौजूदगी मेंहावड़ा-दिल्ली कारिडोर व लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी योजनाओं की कतई जरूरत नही है, इन सड़क योजनाओं का मकसद यातायात के सवाल को हल करना नहीं बल्कि किसानों की उपजाऊ भूमि को छीनकर बिल्डरों, पूँजी घरानों के हवाले करना है जिससे कि वे वहाँ टाउनशिप और फार्म हाउस बनाकर बेहिसाब मुनाफा कमायें।

आईपीएफ नेता ने कहा कि प्रदेश में बिजली का संकट हो ही नहीं सकता यदि मात्र अनपरा-ओबरा की सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं को पूरी क्षमता से चलाया जाये और वहाँ व्याप्त भ्रष्टाचार और ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर दिया जाये। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में यदि कानून का राज होता और अखिलेश सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करते हुये निमेष कमीशन की रिपोर्ट को समय से विधानसभा के पटल पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट के साथ रखती तो खालिद की मौत नहीं होती। अभी भी सरकार ने इस मौत और गिरफ्तारी की सीबीआई से विवेचना नहीं शुरू करायी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून का राज ही विकास और लोकतन्त्र की गारन्टी कर सकता है।

सीपीएम के राज्य सचिव का0 एस0पी0 कश्यप ने उपवास का समर्थन करते हुये कहा कि का0 अखिलेन्द्र का अनशन जिन सवालों को लेकर है वह प्रदेश की जनता की ज़िन्दगी और जनपक्षधर वैकल्पिक नीतियों के सवाल है इसलिये हमारी पार्टी पूरी ताकत से इस अभियान में शामिल रहेगी।

राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब आमिर रशादी मदनी ने कहा कि प्रदेश में कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट, दलित आन्दोलन और मुस्लिम समाज की जनपक्षधर ताकतों द्वारा शुरू हुआ यह अभियान नये जन विकल्प को पैदा करेगा। मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने कहा कि प्रदेश में दलित, महिलाओं, अल्पसंख्यकों समेत आम नागरिकों का जीवन सुरक्षित नहीं है।

उपवास पर हुयी सभा को पूर्व सासंद इलियास आजमी, नेलोपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद खान, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्व मन्त्री का0 कौशल किशोर, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संदीप पाण्डेय, महामंत्री ओकांर सिंह, आईपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, भागीदारी आनदोलन के भुवननाथ पासवान, पीसी कुरील, पूर्व अध्यक्ष इलाहाबाद विश्वविद्यालय लाल बहादुर सिंह, प्रदेश संयोजक मोहम्मद शोएब, संगठन प्रभारी दिनकर कपूर ने सम्बोधित किया। सभा का संचालन आईपीएफ प्रदेश सहसंयोजक गुलाब चंद गोड़ व अजीत सिंह यादव ने किया।


यूपी में खराब कानून व्यवस्था के खिलाफ का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह दस दिन के उपवास पर

 जनता के अधिकारों को हासिल करने के लिये आन्दोलन की ताकतों को एक साथ लाने के लिये हमारी पार्टी पूरी ताकत से इस आन्दोलन में शिरकत करेगी। राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्व मन्त्री का0 कौशल किशोर ने कहा कि कॉरपोरेट के मुनाफे और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश में बिजली का संकट है, सरकार जनता पर बोझ बढ़ाकर बिजली की कीमतें  बढ़ा रही है।सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय महामन्त्री ओकांर सिंह ने कहा कि लोहिया की विचारधारा पर प्रदेश की सरकार नहीं चल रही है। अति पिछड़ों को अलग आरक्षण कोटा देने की माँग भी उन्होनें उठायी। आईपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी व प्रदेश संयोजक मोहम्मद शोएब, लाल बहादुर सिंह ने कहा कि बिना कानून के और इंसाफ के राज के प्रदेश में विकास हो पाना सम्भव नहीं है।

18 सूत्री एजेण्डे में मुख्यतः खालिद मुजाहिद की मौत व गिरफ्तारी की सीबीआई से विवेचना करानेआतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार मुस्लिम नौजवानों के मुकदमों के निस्तारण के लिये विशेष अदालतों का गठन करने और जितनी जल्दी हो सके जो निर्दोष हो उनकी रिहाई और पुनर्वास की गारन्टी करनेअखिलेश सरकार में हुये 27 दंगों की न्यायिक जाँच करानेबिजली दरों को बढ़ाने का फैसला वापस लेने14 अरब से भी ज्यादा के स्मारक घोटाले की सीबीआई से जाँच करानेप्रदेश में जारी अवैध खनन पर रोक लगाने और इसकी सीबीआई से जाँच करानेवनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों व वनाश्रित लोगों को जमीन पर मालिकाना हक देनेकिसान आयोग का गठन करनेलखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे और गंगा एक्सप्रेस वे को रद्द करनेमाओवादी होने के नाम पर चल रहे गैगस्टर व गुण्डा एक्ट समाप्त करने और जेल में बन्द सभी लोगों की जमानत कराने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करानेअन्य पिछड़ा वर्ग में अति पिछड़ों और पिछड़े मुसलमानों का कोटा अलग करनेधारा 341 को खत्म कर दलित मुसलमानों व इसाईयों को अनुसूचित जाति में षामिल करनेकोल जैसी आदिवासी जातियों को जनजाति का दर्जा देनेगोड़खरवार जैसी आदिवासी का दर्जा पायी जातियों के लिये चुनाव में सीटें आरक्षित करनेरोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनानेठेका मजदूरों का विनियमितीकरण करनेकांट्रैक्ट फार्मिंग पर रोक लगाने – कोआपरेटिव खेती को प्रोत्साहित करनेलागत मूल्य का पचास प्रतिशत जोड़ कर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करनेगन्नागेहूँ और धान की खरीद का तत्काल भुगतान करने सम्बंधी मुद्दे हैं।

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